Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Amar Ujala Ltd v. MorpheusDevelopers Pvt Ltd
Complaint No. NCR144/11/102373/2022
- Decision date
- 2026-03-19
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:- Slo दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या | यूनिट न0 | जमा धनराशि wo | आवंटन की | अनुबंधानुसार वांछित सं०0 तिथि कब्जा दिये अनुतोष जाने की तिथि l. |ए८२44/]/02327/2022 | अमर उजाला 2004 रु0 44,76,000/ | 09.09.20:6 | 36 माह तथा | यूनिट का लिमिटेड 06 माह कब्जा व अनुग्रह अवधि | विलम्बित के साथ अवधि का अर्थात मार्च | ब्याज दिलाये 2020 जाने का अनुरोध किया गया है। 2. सटार44/ / 02373/2022 | अमर sore | 4404 रु0 48,48,000/ | 09.09.20i6 | 36 माह तथा | यूनिट का लिमिटेड 06 माह कब्जा व अनुग्रह अवधि | विलम्बित के साथ अवधि का अर्थात मार्च | ब्याज दिलाये 2020 जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम मॉर्फियस डेवलपर्स प्रा.लि. शिकायतकर्ता अमर उजाला द्वारा 04 अन्य शिकायत के साथ विपक्षी के विरुद्ध शिकायत योजित की गयी है। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। उक्त शिकायतें परियोजना Morpheus Pratiksha से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- NCR44/L4/I02327/2022 अमर उजाला की पत्रावली अग्रणी शिकायत रहेगी।
संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उसके द्वारा विपक्षी की परियोजना Morpheus Pratiksha में यूनिट संख्या 2004 बुक करायी गयी थी जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि Bo 4,76,000/— का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता ने शिकायत पृष्ठ पर यह उल्लेख किया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना वर्ष 2074 में यूनिट बुक करायी गयी थी और अनुबंध पत्र वर्ष 2046 में निष्पादित हुआ। विपक्षी द्वारा अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा 36 माह में दिया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है परियोजना से सम्बन्धित मानचित्र की स्वीकृत दिनांक 34.2.20I9 को समाप्त हो चुकी है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। इसी प्रकार क्रम संख्या 2 कें शिकायतकर्ता द्वारा भी यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्तागण द्वारा शिकायत के समर्थन में आवंटन पत्र, प्रतिउत्तर व रसीदों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् हैः- क्रम विवरण T दिनांक भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु0) विपक्षी द्वारा जारी रसीद संख्या 3002 30.42.2044 रु0 44,39,548 / रसीद संख्या 3003 44.03.2045 BO 24,34,987 / रसीद संख्या 4056 07.0.2046 BO 3,04,465 / कुल योग : 0 44,76,000 / 2. विपक्षी द्वारा जारी | रसीद संख्या 2998 26.03.206 रु0 47,47,448/ रसीद संख्या 4067 07.0.206 रु0 ,00,582 / (orgie में अंकित: कुल योग : 0 48,48,0007 48,48,000 /
विपक्षी की ओर से दाखिल लिखित जवाब में यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा गलत तथ्यों के आधार पर शिकायत संस्थित की गयी है जिस कारण वाद निरस्त किये जाने योग्य है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना मॉर्फियस प्रतिक्षा में यूनिट संख्या बी 2-2004 बुक करायी गयी थी। विपक्षी की परियोजना यूपीरेरा में पंजीकृत है। फाइनेंशियल क्रेडिटर द्वारा एनसीएलटी में वाद योजित किया गया है जिसमें एनसीएलटी द्वारा दिनांक 44.06. 20i8 को आदेश पारित करते हुए आई.बी.सी की धारा t4 के अन्तर्गत मोरोटोरियम लागू किया गया था। इसके उपरांत फाइनेंशियल क्रेडिटर द्वारा पुनः एनसीएलटी में वाद योजित किया गया है जिसमें एनसीएलटी द्वारा दिनांक 72.02.209 को आदेश पारित करते हुए आई.बी.सी की धारा 4 अन्तर्गत मोरोटोरियम लागू किया गया था। माननीय एनसीएलएटी द्वारा दिनांक 04.0620:9 को आदेश पारित करते हुए गया है कि उनकी परियोजना एनसीएलटी, एनजीटी के आदेश व कोविड-49
FAN के कारण विलम्बित हुई है। इसके अतिरिक्त ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 40.04.2023 को विपक्षी की लीज-डीड निरस्त किये जाने के कारण परियोजना में निर्माण कार्य विलम्बित हुआ है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी ने न्यू को-डेवलपर मैसर्स vases बिल्डवेल प्रा.लि. निराला ग्रुप की कम्पनी के सहयोग से परियोजना में शेष निर्माण कार्य पूरा किया जा रहा है। विपक्षी कम्पनी को परियोजना पूर्ण किये जाने के लिए दिनांक 04.03. 2024 को स्वामहि फण्ड संस्था से wo 320 करोड तथा अतिरिक्त धनराशि wo 79.5 करोड मैसर्स एस.आर.के. बिल्डवेल प्रा.लि. के पक्ष में जारी होना प्रस्तावित है। अतः विपक्षी ने प्रकरण को निरस्त किये जाने तथा उचित आदेश पारित किये जाने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रतिउत्तर दाखिल करते हए विपक्षी द्वारा दाखिल लिखित जवाब के प्रत्येक प्रस्तर का खण्डन करते हुए यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्षों के तर्कों को सुना गया। उभयपक्षों के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किया जाता है। 4. क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं ? तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 2. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 3. क्या शिकायतकर्तागण यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण प्रश्न संख्या-4 :- प्रश्न Se इस तथ्य पर विरचित है कि क्या रेरा
आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते है तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745-6749 /202 “मैसर्स न्यूटेक प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स प्रा० लि0 बनाम So 3 उ0प्र0 राज्य व अन्य” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :- "54, From the scheme of the Act 206, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on-going projects and future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 206."
sited विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आर्ब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा cere परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका पंजीकरण संख्या- UPRERAPRI788i है। अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईंग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तद्नुसार प्रश्न Pea निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने के कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है
“ प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर white में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना जाएगा |” माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 /4985, “M.C. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04-44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place. ” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029 ,//985 में पारित आदेश दिनांक o9—42-20:9 में निम्नलिखित निर्देश दिये हैः- “in the affidavit dated 05.2.2029, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
"42. That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQ| category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Contro! Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed. ” माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक 04-44-20i9 से दिनांक 44-02—2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक 09-42-209 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय wale
न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04-4:-209 से दिनांक 09-42—20' 9) एवं 33 दिन(66+2) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02—2020 तक साय 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना reife नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 feat 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित पहन के निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी ह। पाने का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त Hfas—t9 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक. 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) H प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी aifrs—t9 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 3-: प्रश्न संख्या-3 इस आशय का विरचित किया गया है
कि क्या शिकायतकर्तागण यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? शिकायतकर्तागण द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। पत्रावली के परिशीलन से यह भी विदित है कि विपक्षी द्वारा उक्त लिखित 2, sag i एक्सीएलटी-व- स्वामाहि फण्ड से सम्बन्धित तर्क प्रस्तुत किया गया है oe . | परन्तु विपक्षी द्वारा वर्तमान प्रकरण में स्वामहि फण्ड से डिस्बसर्डमेंट प्राप्त होने का 6 ——— कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है | इसके अतिरिक्त माननीय एनसीएलएटी द्वारा दिनांक 04.06.2049 को पारित आदेश के अनुसार विपक्षी की परियोजना में कोई मोराटोरियम लागू नहीं है। दिनांक 26.4.2025 को सुनवाई के दौरान विपक्षी द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि उनकी परियोजना स्टाल्ड है जिस कारण वह शिकायतकर्तागण को 06 किश्तों में धनराशि वापस करने को तैयार है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से विदित है कि शिकायतकर्तागण व विपक्षी के मध्य क्रमशः दिनांक 09.09.20i6 व 09.09.20I6 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को क्रमशः 36 माह तथा 06 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात मार्च 2020 व मार्च 2020 में यूनिट का
कब्जा दिया जाना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्तागण को यूनिट का कब्जा नहीं प्राप्त हुआ है। विपक्षी की ओर से ओ.सी/सी.सी या वांछित safer प्रमाण पत्र की प्रति उपलब्ध कराई गई है। इससे स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना अभी पूर्ण नहीं है और न ही विपक्षी को ओसी»सीससी प्राप्त हुआ है। फिर भी शिकायतकर्तागण द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। ऐसी स्थिति में परियोजना विलम्बित होने के बावजूद भी यदि आवंटी परियोजना में बना रहना चाहता है तो उक्त के सम्बन्ध में रेरा अधिनियम की धारा is (dt में यह प्रावधान दिया गया है कि परियोजना विलम्बित होने के बावजूद भी यदि आवंटी परियोजना में बना रहना चाहता है तो वह कब्जा प्राप्त होने तक विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। जहाँ तक किस अंवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील Wo ee4o—-50 /20:8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 20I6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have = J further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. "
उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्राललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apriment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is | iable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it, The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the . + . का apartment is handed over to him is not unreasonable. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह we है कि wou रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.20.20:8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय /पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें wer o2(i) ¥ प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "rhe Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the en along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home toan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the OS यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+IMfeRA की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी McLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। अतः उक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्तागण यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने के अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-3 निस्तारित किया जाता है।
उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है आदेश i. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्तागण से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ail. सी /सी.सी सहित प्लॉट का कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय KT शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। 2... विपक्षी शिकायतकर्तागण को क्रमशः दिनांक 04.04.2020 व दिनांक 04.04.2020 से ओ.सी MM अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्तागण द्वारा जमा धनराशि क्रमशः Go 44,76,000/ व रु0 48,48,000/ पर /८ाए+। प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार प्रत्येक शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 2 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 73029/i985 के अनुसार ) 68 दिन ७ आओ दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए मा 9 4. का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20i6 की धारा Aza अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान
पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता tr प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का fara करा सकेगें। आदेश की एक प्रति उक्त सम्बन्धित पत्रावली पर रखी जाए। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। SS सलम्नन््न न कल (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर ee 0