Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Naveen Kumar v. ATS Township Private Limited
Complaint No. NCR144/11/102179/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-07-04
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar Status-Disposed
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू--सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थितः- slo दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या ~~ यूनिट पत्रावली पर बुकिंग तिथि छित | . न उपलब्ध अनुतोष Ho रसीद /साक्ष्य के अनुसार जमा धनराशि रु0 I, जिलरावका ॥702792022 mM कुमार |2002 | रु० 54,00,000/7 | 09.03.2020 | यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया | गया है। बनाम एटीएस टाउनशिप्स प्रा.लि. शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह शिकायत संस्थित की गयी है। कार्यालय आख्या 03.07.2024 के अनुसार वर्तमान प्रकरण में किसी पक्षकार द्वारा धारा-8 अथवा स्वामहि फण्ड से डिस्बर्समेंट अथवा एनसीएलटी से सम्बन्धित कोई प्रपत्र पत्रावली पर उपलब्ध नहीं कराया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS RHAPSHODY में vat तालिका में अंकित यूनिट संख्या 2002 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष विपक्षी को तालिका में अंकित धनराशि wo 54 ,00,000 / - का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में बुकिंग फार्म, लिखित बहस व स्पष्टीकरण के साथ स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- SS है क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु0) 4 शिकायतकर्ता के बैंक द्वारा | जारी : स्टेटमेंट ऑफ |07.08.2020 से 45.08.2024 |रु० 54,00,000/ एकाउंट
विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए यह तथ्य अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाया है कि विपक्षी ने अनुबंधात्मक दायित्व (Contractual Obligation) का उल्लंघन किया है जिस कारण वर्तमान शिकायत में कार्यवाही किये जाने का क्षेत्राधिकार सिविल कोर्ट का है। इस प्रकार शिकायत निरस्त किये जाने योग्य है। शिकायतकर्ता द्वारा लगाये गये आरोप का निस्तारण करने का क्षेत्राधिकार प्राधिकरण को नहीं है, जिसके समर्थन में हरियाणा अपीलीय न्यायालय चण्ड़ीगण द्वारा अपील संख्या 6/20i8 समीर महावर बनाम एमजी हाउसिंग प्राएलि0 में पारित निर्णय का संदर्भ अंकित किया है| वर्तमान प्रकरण शिकायतकर्ता ने गलत तथ्यों पर विपक्षी को परेशान किये जाने हेतु दायर किया है। शिकायतकर्ता द्वारा समय से धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता ने प्राधिकरण की भिन्न-भिन्न det में वाद दायर किये जो निरस्त किये जा चुके है। यह कहना गलत है कि विपक्षी की ओर से विलम्ब किया गया है बल्कि शिकायतकर्ता की ओर से समय से धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता को धनराशि भुगतान किये जाने के लिए दिनांक 46.40.2020, 42.4. 2020, 30.2.2020, 24.06.2024, 04.07.2024, 06.09.2024, 27.40.2024 व 04.42. 202 को अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये परन्तु शिकायतकर्ता ने धनराशि का भुगतान नहीं किया तब विपक्षी द्वारा दिनांक 24.04.2022 को शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट निरस्त कर दी गयी। इसके उपरांत शिकायतकर्ता ने विपक्षी से दिनांक 46.03.2022, 25.03.2022, 04.04.2022 व 08.04.2022 को ईमेल के माध्यम से सम्पर्क किया कि वह अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने को तैयार है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा बकाया धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है | अतः विपक्षी ने वर्तमान शिकायत को निरस्त किये जाने का अनुरोध किया है।
—a 2 विपक्षी द्वारा लिखित आपत्ति के समर्थन में अनुस्मारक पत्र दिनांक 46.20. 2020, 72.4.2020, 30.42.2020, 24.06.2024, 0.0.202, 06.09.2024, 27.0.2024, 04.42.202, ईमेल दिनांक 6.03.2022, 25.03.2022, 04.04.2022 व 08.04.2022 की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता की ओर से लिखित बहस प्रस्तुत की गयी है जिसमें यह उल्लिखित है कि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष 30 प्रतिशत धनराशि का भुगतान किये जाने के पश्चात भी विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में बिल्डर बायर Wie निष्पादित नहीं किया गया है जो कि रेरा अधिनियम की धारा 43 का उल्लंघन है। शिकायतकर्ता द्वारा कई बार विपक्षी से बिल्डर बायर एग्रीमेंट निष्पादित किये जाने हेतु सम्पर्क किया गया परन्तु विपक्षी द्वारा बिल्डर बायर एग्रीमेंट निष्पादित नहीं कराया गया। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी की परियोजना पूर्ण .नहीं है जिसके सम्बन्ध में उनके द्वारा परियोजना की छाया प्रति लिखित बहस के साथ एनेक्चर-4 के रूप में दाखिल की गयी है। अतः शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है। उभयपक्ष के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :-- 4. क्या विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है? 2. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की gar दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या oer संख्या se आशय का विरचित किया गया है कि क्या विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का निरस्त किया जाना वैधानिक है। इसे साबित करने का भार विपक्षी पर है।
विपक्षी की ओर से यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि शिकायतकर्ता को यूनिट के सापेक्ष अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु दिनांक 46.40. 2020, 2.44.2020, 30.42.2020, 24.06.2024, 04.07.2024, 06.09.2024, 27.40.202 व 04.42.2024 को अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये परन्तु शिकायतकर्ता ने धनराशि का भुगतान नहीं किया तब विपक्षी द्वारा दिनांक 24.04.2022 को आवंटित यूनिट — 3 निरस्त कर दी गयी है। इस प्रकार विपक्षी ने शिकायत को निरस्त किये जाने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता की ओर से लिखित बहस में यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा आवंटित यूनिट की कुल कीमत wo 4,77,00,000 /के सापेक्ष करीब 30 प्रतिशत से अधिक रु0 54,00,000,/ का भुगतन किया गया है। विपक्षी ने to प्रतिशत से अधिक धनराशि प्राप्त करने के पश्चात् भी बिल्डर बायर एग्रीमेंट निष्पादित नहीं किया है जो कि यूपी रेरा अधिनियम की ar_i3 का उल्लंघन है। विपक्षी को सक्षम प्राधिकरण से ओ.सी»सी.सी प्राप्त नहीं है। शिकायतकर्ता यूनिट के सापेक्ष बकाया धनराशि का भुगतान करने को तैयार है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। उक्त के सम्बन्ध में भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 208 की धारा 9.2 एवं धारा 9.3 में यह प्राविधानित है कि
धारा 9.2 In case of Default by Promoter under the conditions listed above a non defaulting Allottee is entitled to the following: i. Stop making further payments to Promoter as demanded by the Promoter. If the Allottee stops making payments, the Promoter shall correct the situation by completing the construction milestones and only thereafter the Allottee be required to make the next payment without any interest; or ii. The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to _ MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: 4 Provided that where an Allottee does not intend to withdraw from the Project or terminate the Agreement, he shall be paid, by the Promoter, interest at the rate prescribed in the Rules, for every month of delay till the handing over of the possession of the {[Apartment/Plot], which shall be paid by the Promoter to the Allottee within forty-five days of it becoming due. धारा 9.3 The Allottee shall be considered under a condition of Default, on the occurrence of the following events: i. In case the Allottee fails to make payments for 2 (two) - consecutive demands made by the Promoter as per the Payment
Plan annexed hereto, despite having been issued notice in that regard the Allottee shall be liable to pay interest to the promoter on the unpaid amount at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +2% unless provided otherwise under the Rules. The Promoter must not be in default to take this benefit; ii. In case of Default by Allottee under the condition listed above continues for a period beyond 3 (three) consecutive months after notice from the Promoter in this regard, the Promoter may cancel the allotment of the [Apartment/Plot] in favour of the Allottee and refund the money paid to him by the Allottee by deducting the booking amount and the interest liabilities and this Agreement shall thereupon stand terminated. The Promoter must not be in default to take this benefit; Provided that the Promoter shall intimate the Allottee about such termination at least thirty days prior to such termination. पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में आवेदन फार्म के माध्यम से दिनाक 09.03.2020 को यूनिट बुक करायी गयी थी। उभयपक्षों के मध्य आवंटन पत्र निष्पादित नहीं हुआ है। इस तथ्य की पुष्टि शिकायतकर्ता ने प्रस्तुत लिखित बहस में की है। आवेदन फार्म के साथ ee संलग्न टर्म एण्ड GST का अवलोकन किया जिसमें यूनिट का कब्जा दिये जाने की तिथि अंकित नहीं है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण होने के सम्बन्ध में ओसी/सी.सी या वांछित अनापत्ति प्रमाण पत्रों की प्रतियां उपलब्ध नहीं करायी गयी है।
सामान्यतः यदि शिकायतकर्ता द्वारा समय से देय धनराशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो विपक्षी की जिम्मेदारी बनती है कि वह उपरोक्त वर्णित te अधिनियम के प्राविधानों के अनुसार शिकायतकर्ता को बकाया जमा धनराशि का भुगतान न किये जाने पर मांग पत्र प्रेषित करें और यदि शिकायतकर्ता द्वारा मांग पत्र प्राप्त होने के उपरांत धनराशि का भुगतान नहीं किग्रा जाता है तो विपक्षी शिकायतकर्ता को प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित कर सूचित करते हुए मांग पत्र के क्रम में भुगतान किये जाने के लिए 30 दिन का समय उपलब्ध कराने के पश्चात् अंतिम यूनिट निरस्तीकरण पत्र जारी कर शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त कर यूनिट के सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि वापस किये जाने का प्राविधान है। वर्तमान प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष 30 प्रतिशत धनराशि का भुगतान किया गया है परन्तु विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में कोई अनुबंध पत्र/आवंटन पत्र निष्पादित नहीं किया गया है जो कि रेरा अधिनियम की धारा 43 का उल्लंघन है। रेरा अधिनियम की धारा i3 Fae प्रावधानित है कि : 43. (3) A promoter shall not accept a sum more than ten per cent of the cost of the apartment, plot, or building as the case may be, as an advance payment or an application fee, from a person without first entering into a written agreement for sale with such person and register the said agreement for sale, under any law for the time being in force.
(2) The agreement for sale referred to in sub-section (2) shall be in such form as may be prescribed and shall specify the particulars of development of the project including the construction of building and apartments, along with specifications and internal development works and external development works, the dates and the manner by which payments towards the cost of the apartment, plot or building, as the case may be, are to be made by the allottees and the date on which the possession of the apartment, plot or building is to be handed over, the rates of —_—Ss 6 interest payable by the promoter to the allottee and the allottee to the promoter in case of default, and such other particulars, as may be prescribed, रेरा अधिनियम की धारा i3 के अवलोकन से स्पष्ट है कि विपक्षी का यह दायित्व है कि वह आवंटित यूनिट के सापेक्ष io प्रतिशत धनराशि प्राप्त करने के उपरांत अनुबंध,/आवंटन पत्र निष्पादित करें जिसमें परियोजना से सम्बन्धित परियोजना निर्माण का विवरण, शिकायतकर्ता को यूनिट के सापेक्ष धनराशि का भुगतान किये जाने की समयावधि, कब्जा उपलब्ध कराये जाने की समय सीमा, आदि का उल्लेख किया जाना अनिवार्य है। ऐसी स्थिति मे यह स्पष्ट है कि विपक्षी ENT उक्त प्रावधान का अनुपालन नहीं किया गया है जिस कारण अनुबंध पत्र के अभाव में यह स्पष्ट नहीं है कि शिकायतकर्ता को यूनिट के सापेक्ष भुगतान किये जाने व कब्जा दिये जाने की समय अवधि विपक्षी द्वारा क्या दी गयी थी।
इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को बकाया धनराशि का भुगतान किये जाने के लिए कई मांग पत्र प्रेषित किये गये जिसमें से विपक्षी द्वारा दिनांक 04.2.2024 को यूनिट निरस्तीकरण के सम्बन्ध में अंतिम नोटिस प्रेषित किया गया परन्तु विपक्षी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है कि उनके द्वारा यूनिट Prefer के सम्बन्ध में अंतिम नोटिस प्रेषित किये जाने के उपरांत शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त कर शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष भुगतान की गयी धनराशि शिकायतकर्ता को वापस कर दी गयी हो और न ही विपक्षी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य दाखिल किया गया है कि प्रश्नगत यूनिट निरस्तीकरण के उपरांत यूनिट किसी अन्य क्रेता को आवंटित की जा चुकी हो। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य तथा ओ.सी/सीसी की प्रति भी दाखिल नहीं की गयी है जिससे स्पष्ट हो कि विपक्षी की परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण है और यूनिट का कब्जा दिये जाने की स्थिति में हो। ऐसी स्थिति में जब विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में कोई अनुबंध पत्र निष्पदित नहीं किया गया है और ऐसा कोई साक्ष्य दाखिल नहीं किया गया है जिससे यह स्पष्ट हो कि विपक्षी की परियोजना पूर्ण है और न ही विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त किये जाने के लिए प्री-कैंसिलेशन पत्र व अंतिम रूप से यूनिट निरस्त किये जाने का कोई साक्ष्य दाखिल किया गया है। उपरोक्त वर्णित परिस्थितियों से यह स्पष्ट होता है कि 7 कौ
विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त किये जाने की प्रक्रिया वैधानिक नहीं है। तद्नुसार प्रश्न संख्या । निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में आवेदन फार्म के माध्यम से दिनांक 09.03.2020 को यूनिट बुक करायी गयी थी। उभयपक्षों के मध्य अनुबंध आवंटन पत्र निष्पादित नहीं हुआ है। इस तथ्य की पुष्टि शिकायतकर्ता ने प्रस्तुत लिखित बहस में की है। आवेदन फार्म के साथ संलग्न टर्म एण्ड कंडीशन्स का अवलोकन किया जिसमें यूनिट का कब्जा दिये जाने का तिथि अंकित नहीं है। ऐसी स्थिति में माननीय उच्चतम न्यायालय के सिविल अपील संख्या 3533--3534 / 2047 M/s. Fortune Infrastructure (now known as M/s. Hicon Infrastructure) & ANR. Vs. Trevor D'lima & Ors % स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है fe:
Moreover, a person cannot be made to wait indefinitely for the possession of the flats allotted to them and they are entitled to seek the refund of the amount paid by them, along with compensation. Although we are aware of the fact that when there was no delivery period stipulated in the agreement, a reasonable time has to be taken into consideration. In the facts and circumstances of this case, a time period of 3 years would have been reasonable for completion of the contract ie., the possession was required to be given by last quarter of 204. Further there is no dispute as to the fact that until now there is no redevelopment of the property. Hence, in view of the above discussion, which draw us to an irresistible conclusion that there is deficiency of service on the part of the appellants and accordingly the issue is answered. उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार फ्लैट के कब्जे हेतु किसी व्यक्ति को अनिश्चित समय तक प्रतीक्षा नहीं करायी जा सकती है, जहाँ अनुबन्ध में कब्जे की 8
तिथि नहीं दी गयी है वहाँ एक रीज़नेबल समयावधि 3 वर्ष कब्जे हेतु अवधारित की जानी होगी। प्रस्तुत शिकायत में उभयपक्ष के मध्य आवंटन / अनुबंध पत्र निष्पादित नहीं हुआ है परन्तु आवदेन फार्म जारी किया गया है आवेदन फार्म में कब्जा दिये जाने की तिथि अंकित नहीं है। ऐसी स्थिति में उपरोक्त माननीय उच्चतम न्यायालय की न्याय नजीरों के अनुसार कब्जा देने की अवधि 3 वर्ष मानी गयी है इस प्रकार आवेदन की तिथि मार्च 2020 से 3 वर्ष अर्थात मार्च 2023 में विपक्षी द्वारा आवंटित यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था परन्तु अभी तक विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। अतः शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है। रेरा अधिनियम की धारा-8(4) में प्राविधान है कि :- "Section 8 () “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building, (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or
(b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, iti case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the =
handing over of the possession, at such rate as may be prescribed". उपरोक्त वर्णित प्राविधान में यह स्पष्ट है कि शिकातकर्ता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापस मांग सकते है अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। उपरोक्त विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता को उपरोक्तनुसार यूनिट का कब्जा मार्च 2023 में प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण होने के सम्बन्ध में ओ.सी /सी.सी की प्रति अथवा वांछित अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रति दाखिल नहीं की गयी है जिससे यह स्पष्ट होता है कि विपक्षी की परियोजना अभी पूर्ण नहीं है। इस प्रकार विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 4 वर्ष का विलम्ब किया गया है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील to 6649-50 /20i8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है fe
"the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent - Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The 40 Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी.,/सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की. तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the
possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable, 2
अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि vow ws प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 206 के अधीन दिनांक 47.4020i89 को भू-सम्पदा (विनियमन और: विकास) (विकय,पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर o.2(i) ¥ प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ४८,२+प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2७)(0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है ।
i2 अतः उक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश l. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता की यूनिट को पुर्नस्थापित करते हुए, शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी / सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। 2. विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.04.2023 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि BO 54,00,000,/ पर MCLR+I प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा।
3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20I6 की धारा 2(2०)0)के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा | अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी McLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी —_— १3 से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का fara करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये | en o3. 67,2824 (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर