Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Vishal Rai v. Gaursons Promoters Private Limited
Complaint No. NCR144/11/101233/2022
- Decision date
- 2026-05-23
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 1 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
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Judgment text
E-Court उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, एच-469, गामा-2, ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर-204308. सुनवाई पीठ-0॥ (पूर्व में पीठ--04-ए) निर्णय एवं आदेश अन्तर्गत धारा-34 सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारी: श्री संजय आर. भूसरेड्डी, मा. अध्यक्ष शिकायत संख्या: NCRI44/I/0I233/2022 विशाल राय बनाम गौड़संस प्रोमोटर्स प्रा. लि. | शिकायतकर्ता का परिवाद अन्तिम बहस हेतु वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दिनांक i2-74-2025 को प्रस्तुत किया गया। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से | विद्वान अधिवक्ता श्री अतुल कुमार Rig उपस्थित हुए तथा विपक्षी की ओर से विद्वान | अधिवक्ता श्री ध्रुव गुप्ता उपस्थित हुए। इस पर पीठ द्वारा उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के det को विस्तार से सुनने के उपरान्त, पत्रावली आदेश हेतु दिनांक 42-44-2025 को ही सुरक्षित की गयी। प्रस्तुत मूल प्रार्थना-पत्र में शिकायतकर्ता द्वारा yer यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने के अनुतोष की प्रार्थना के साथ विपक्षी के विरुद्ध भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2076 की धारा-34 के अन्तर्गत शिकायत योजित की गई है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा दिनांक 02-72-2029 को विपक्षी की परियोजना "i4" Avenue (Group Housing)-Gaur City" (पंजीयन संख्या: एएरापरए२०6742), गौतमबुद्धनगर में यूनिट संख्या: i60i99 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत W.9,99600/— है और शिकायतकर्ता द्वारा G.t9,99,690 /- की धनराशि का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा Page | of 6 E-Court
2 यूनिट का कब्जा, दिनांक 3+—:0-2020 तक दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक ओ.सी./सी.सी. प्राप्त नहीं किया गया है और अभी तक ओ.सी. »सी.सी. लम्बित है। यह कभी स्पष्ट नहीं किया गया था कि are का उपयोग कॉमर्शियल मकसद हेतु किया जायेगा और वहाँ कई ac लगाये जायेगें। विपक्षी द्वारा ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त किये बिना कब्जा ऑफर किया गया है तथा क्या विपक्षी / प्रमोटर, इस बात की पुष्टि कर सकता है कि आवंटी ओ.सी. /सी.सी. के बिना भी अपार्टमेन्ट में रह सकता है। विपक्षी / प्रमोटर, रजिस्ट्रेशन ऑफ सेल Sts की तिथि निर्धारित पुष्टि करें और जब तक ओ.सी. / AM. प्राप्त न हो, तब तक विपक्षी /प्रमोटर, कब्जा देने में हुए विलम्ब के आधार पर विलम्बित अवधि के ब्याज का भुगतान करें। विपक्षी / प्रमोटर, ओ.सी. सी.सी. प्राप्त होने की तिथि से मेंटेनेन्स चार्ज प्रारम्भ करें। विपक्षी / प्रमोटर, dade ef के ac लगाने हेतु बेसमेन्ट का उपयोग कर रहा है, जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए, क्योंकि बुकिंग के समय sar के सम्बन्ध में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करायी गयी थी। विपक्षी / प्रमोटर, कारों एवं बाइकों की पार्किंग हेतु dared) वसूल कर रहा है, परन्तु विपक्षी / प्रमोटर द्वारा पार्किंग की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करायी गयी है। इन आधारों पर शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नतत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता की ओर से विपक्षी द्वारा प्रस्तुत आपत्ति-पत्र पर अपना प्र॒त्युत्तर, दिनांक o4—t-2025 दाखिल करते हुए, मूल शिकायत में किये गये तथ्यों एवं अभिकथनों की पुनरावृत्ति की गयी है और कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट 40:30:30 पेमेन्ट प्लान के अन्तर्गत बुक करायी गयी थी। प्रश्नगत यूनिट के सम्बन्ध में उभय पक्षों के मध्य निष्पादित एवं हस्ताक्षरित एग्रीमेन्ट फॉर सेल, दिनांक 3-2-2049 के प्रस्तर-07 के अनुसार विपक्षी द्वारा yeaa यूनिट का कब्जा, दिनांक 3:—-0-2020 तक दिया जाना था, परन्तु अभी तक न तो विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया गया है और न ही प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण से ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किया गया है। इसलिए यह स्पष्ट है कि परियोजना में विकास कार्य समय पर पूर्ण नहीं हुआ है। स्थलीय निरीक्षण आख्या, दिनांक 42-70-202: एवं जुलाई, 2022 के अनुसार प्रश्नगत परियोजना में सड़क का कार्य, फुटपाथ कार्य, जल निकासी कार्य, सामुदायिक भवन कार्य, जल संरक्षण प्रणाली कार्य, आपातकालीन निकासी सेवा एवं स्वीमिंग पूल का आदि कार्य लम्बित है। उक्त निरीक्षण आख्या की तिथि से verre शिकायत दर्ज करने की तिथि तक भी परियोजना के कार्य अपूर्ण हैं। शिकायतकर्ता द्वारा स्थलीय निरीक्षण में अंकित तथ्यों का विस्तृत उल्लेख किया गया है। विपक्षी / प्रमोटर को ओ.सी. “सीसी. प्राप्त किये बिना प्रश्नगत यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराये जाने का कोई अधिकार नहीं है। शिकायतकर्ता द्वारा विभिन्न विधिव्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा उ.प्र. अपार्टमेन्ट अधिनियम, 20:0 की धारा-4(5)) सपठित रेरा अधिनियम, 2046 की Page 2 of 6 E-Court
i का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि किसी अपार्टमैन्ट का हस्तांतरण प्रमोटर | द्वारा किसी व्यक्ति (आवंटी) को भवन उपनियमों के अनुसार ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त करने के बाद ही किया जा सकता है। विपक्षी /प्रमोटर को ओ.सी./सी.सी. प्राप्त करना अनिवार्य है, जिसके उपरान्त ही शिकायतकर्ता/आवंटी के पक्ष में प्रश्नगत यूनिट का हस्तांतरण विलेख पंजीकृत किया जा सकता है और शिकायतकर्ता को विधिक एवं रहने योग्य कब्जा दिया जा सकता है। विपक्षी द्वारा दाखिल आपत्ति-पत्र में अंकित समस्त तथ्यों एवं अभिकथनों का शिकायतकर्ता द्वारा पूर्ण रूप से खण्डन करते हुए, अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख कर, मूल शिकायत में अंकित याचित अनुतोष को दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में wire फॉर सेल, दिनांक 3i-72-20i9 की प्रति, जमा धनराशि की wire, स्थलीय निरीक्षण आख्या सहित फोटोग्राफ्स, दिनांक 42-40-2024 एवं दिनांक 42-07-2022 की प्रतियाँ, इसी पीठ द्वारा अन्य शिकायतों में पारित आदेशों की प्रतियाँ, शपथ-पत्र कम अन्डरटेकिंग, दिनांक 30-04-2023 की प्रति, अन्य मा. न्यायालयों द्वारा पारित आदेशों की प्रतियाँ, लिखित बहस, ई-मेल संवाद, आदि अभिलेखों छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं।
प्रकरण में विपक्षी की ओर से अपना लिखित आपत्ति-पत्र, दिनांक 06—04—2023 एवं अतिरिक्त आपत्ति-पत्र, दिनांक t9-07-2025 दाखिल करते हुए कहा गया कि शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना "t4" Avenue (Group Housing)-Gaur City" के ब्लॉक-9 में यूनिट संख्या: i60:99, जिसका क्षेत्रफल 530 वर्ग फूट था, बुक करायी गयी थी, जिसके सम्बन्ध में पक्षकारों के मध्य Ure फॉर सेल/अनुबच्ध, दिनांक 34-42-2049 को निष्पादित एवं हस्ताक्षरित कराया गया। प्रश्नगत परियोजना रेरा में पंजीकृत है, जिसका रेरा पंजीयन नं.: UPRERAPRJ6742 है। विपक्षी का यह भी कहना है कि प्रश्नगत परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण करते हुए, चारों एन.ओ.सी. अर्थात् लिफ्ट एन.ओ.सी., दिनांक 48-08-2024, फायर एन.ओ.सी., दिनांक 29-44-2024, स्ट्रक्चरल एन.ओ.सी., दिनांक 46-42-2046 तथा इलेक्ट्रिकल एन.ओ.सी., दिनांक 46-0:-2048 को प्राप्त कर, प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में ओ.सी.,सी.सी. प्राप्त करने हेतु सक्षम प्राधिकरण के समक्ष आवेदन-पत्र, दिनांक 22-:-202i को प्रस्तुत किया गया और See ओ.सी./ सी.सी., दिनांक 07-2-2024 के आधार पर, शिकायतकर्ता को कब्जा ऑफर पत्र, दिनांक 08-42-202 को प्रेषित किया गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं औपचारिकतायें पूर्ण करते हुए, प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त नहीं किया गया | है। विपक्षी का यह भी कहना है कि उनके द्वारा शिकायतकर्ता को विधिक कब्जा ऑफर पत्र, दिनांक 08-42-2024 को प्रेषित किये जाने के बाद, शिकायतकर्ता से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट प्राप्त करने का अनुरोध किया गया, जो कि यह सुनिश्चित करता है कि शिकायतकर्ता द्वारा आवंटित यूनिट के सापेक्ष सम्पूर्ण धनराशि का भुगतान कर Page 3 of 6 PES E-Court
दिया गया है और शिकायतकर्ता, | यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त सकता है। शिकायतकर्ता द्वारा too प्रतिशत धनराशि का भुगतान कर दिया गया है, परन्तु विपक्षी कम्पनी द्वारा कई अनुरोधों के बावजूद, शिकायतकर्ता द्वारा आज तक एन.डी.सी. का निष्पादन नहीं किया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा उपलब्ध कराये जाने में विलम्ब हुआ है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को सभी औपचारिकताओं को पूर्ण करने के बाद प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा शीघ्र प्राप्त करने हेतु कई ई-मेल एवं अनुस्मारक-पत्र, दिनांक 49-09-2023, दिनांक 29-03-2024, दिनांक 48-04-2024, दिनांक 24-05-2024, दिनांक 49-06-2024, दिनांक 26-07-2024, दिनांक 09-09-2024, दिनांक 26-09-2024, दिनांक 27-09-2024, दिनांक 34-0:~-2025 एवं दिनांक 28-02-2025 को प्रेषित किये गये, परन्तु शिकायतकर्ता, प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त करने हेतु आगे नहीं आये। प्रश्नगत परियोजना सभी पहलुओं से पूर्ण होने के बाद, विपक्षी कम्पनी द्वारा प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में सक्षम प्राधिकरण से वास्तविक ओ.सी./ सी.सी.. दिनांक 7-09-2024 को प्राप्त किया जा चुका है।
परियोजना में दिल्ली-एन.सी.आर. में पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण, राष्ट्रीय हरित अधिकरण और मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश से विभिन्न अवसरों पर निर्माण गतिविधियाँ प्रभावित हुई हैं, क्योंकि दिल्ली-एन.सी.आर. में किसानों द्वारा gs जलाये जाने, निर्माण कार्य, उद्योग आदि के कारण प्रदूषण बढ़ गया था और केवल दिनांक 44-02-2020 तक पूरी तरह बहाल होने के बाद मा. सर्वोच्च न्यायालय ने सिविल अपील संख्या: 43029 //4985, “eet मेहता बनाम wea सरकार” के साथ कई अन्य हस्तक्षेप प्रार्थना-पत्र के माध्यम से प्रतिबन्ध हटा दिया गया। परियोजना में जब एक बार निर्माण कार्य प्रभावित हो जाता है अथवा बन्द हो जाता है, तो निर्माण कार्य को समान गति प्राप्त करने में आमतौर पर ०2 से 03 माह लग जाते हैं, क्योंकि यह सब निर्माण सामग्री, लोहा, श्रम बलों आदि की उपलब्धता जैसे विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, इसलिए स्थल पर कोई कार्य नहीं हुआ। वर्ष, 20:9-2020 4 दिनांक 26--0-2049 से दिनांक 30-40-20I9 तक ०05 दिन, दिनांक o4—74-20:9 से दिनांक 44—-02-2020 तक i02 दिन, वर्ष, 2024 में दिनांक 6-4 4-2024 से दिनांक 24-4-2024 तक 05 दिन, दिनांक 24~-4:-202: से दिनांक 29-44-2024 तक 05 दिन, दिनांक 47-42-2024 से दिनांक 20-42-2024 तक 03 दिन अर्थात् 43 दिन की अवधि सम्मिलित हैं। कोविड-49 के कारण भी प्रश्नगत परियोजना विलम्बित हुई है। OY उपर्युक्त कारण विपक्षी के नियंत्रण के बाहर है और यह फोर्स मैज्योर के अन्तर्गत आते है और @o-55 दिनों का लाभ फोर्स मैज्योर के मद में दिये जाने का अनुरोध किया गया है। इसी पीठ द्वारा विभिन्न शिकायतों में पारित आदेशों तथा रेरा अधिनियम, 2046 की घारा-9(6), 49(7) एवं t9(:0) एवं मा. अपीलीय अधिकरण द्वारा अपील संख्या: :97/2023
: Government Employees Welfare Housing Organisation Vs. Rajender Mohan Page 4 of 6 = a पारित आदेश, दिनांक 3-2-2024 का उल्लेख किया गया द | शिकायतकर्ता द्वारा किये गये समस्त तथ्यों एवं अभिकथनों का विपक्षी द्वारा अपने आपत्ति-पत्र में पूर्ण रूप से खण्डन कर, अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का secre किया गया है। इन आधारों पर विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की प्रश्नगत शिकायत को खारिज किये जाने तथा शिकायतकर्ता को एन.डी.सी. प्राप्त करते हुए, wand यूनिट के सम्बन्ध में कब्जे की औपचारिकतायें कर, प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में रेरा कार्यालय आदेश, दिनांक 46-09-2049 की प्रति, उपर्युक्त कथित ई-मेल की प्रतियाँ, सिविल Re याचिका संख्या: 4435/2020 4 मा. सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष हुई सुनवाई का रिकॉर्ड, पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण के विभिन्न पत्रों की प्रतियाँ, इसी पीठ द्वारा विभिन्न मामलों में पारित आदेशों की प्रतियाँ, ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त करने हेतु प्रस्तुत आवेदन-पत्र की प्रति, वांछित प्रमाण-पत्रों की प्रतियाँ, ओ.सी.,/सी.सी., दिनांक 47-09-2024 की प्रति, एग्रीमेन्ट फॉर सेल, दिनांक 3:-2-20:9 की प्रति, ऑफर ऑफ पोजेशन पत्र, दिनांक 08-42-2024 की प्रति, स्वागत पत्र, दिनांक 48-42-2049 की प्रति, आदि
अभिलेखों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। मैंने उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के तर्कों को विस्तार से सुना तथा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य एवं अभिलेखों का wen परिशीलन किया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दुओं पर विचार कियाः- 4. क्या Force Majeure Events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलम्बित हुई? यदि हाँ तो प्रभाव? 2... कया शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी? निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 बिन्दु संख्या: 04, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या Force Majeure Events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलम्बित हुई है? यदि हाँ तो प्रभाव? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। प्रकरण में विपक्षी द्वारा कहा गया है कि परियोजना में दिल्ली-एन.सी.आर. में पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण, राष्ट्रीय हरित अधिकरण और मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश से विभिन्न अवसरों पर निर्माण गतिविधियाँ प्रभावित हुई हैं, क्योंकि दिल्ली-एन.सी.आर. में किसानों द्वारा go जलाये जाने, निर्माण कार्य, उद्योग आदि के कारण प्रदूषण बढ़ गया था और केवल दिनांक 44--02--2020 तक Page 5 of 6 E-Court
पूरी. = बहाल होने के बाद मा. सर्वोच्च न्यायालय ने सिविल अपील संख्या: 43029 / 4985, 'एमसी. मेहता बनाम भारत सरकार” के साथ कई अन्य हस्तक्षेप प्रार्थना-पत्र के माध्यम से प्रतिबन्ध हटा दिया गया। परियोजना में जब एक बार निर्माण कार्य प्रभावित हो जाता है अथवा बन्द हो जाता है, तो निर्माण कार्य को समान गति प्राप्त करने में आमतौर पर 02 से 03 माह लग जाते हैं, क्योंकि यह सब निर्माण सामग्री, लोहा, श्रम बलों आदि की उपलब्धता जैसे विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, इसलिए स्थल पर कोई कार्य नहीं हुआ। वर्ष, 20:9-2020 में दिनांक 26-40-2049 से दिनांक 30-0-209 तक 05 दिन, दिनांक o4—4:-20:9 से दिनांक 44--02--2020 तक 402 दिन, वर्ष, 2024 में दिनांक 46--44-2024 से दिनांक 24-44-2024 तक 05 दिन, दिनांक 24-4-2024 से दिनांक 29-:-202 तक 05 दिन, दिनांक 47-42-2024 से दिनांक 20-42-2024 तक 03 दिन अर्थात् i3 दिन की अवधि सम्मिलित हैं। कोविड-49 के कारण भी प्रश्नगत परियोजना विलम्बित हुई है। उपर्युक्त कारण विपक्षी के नियंत्रण के बाहर है और यह फोर्स मैज्योर के अन्तर्गत आते है और कुल-455 दिनों का लाभ फोर्स मैज्योर के मद में दिये जाने का अनुरोध किया गया है। इसी पीठ द्वारा विभिन्न शिकायतों में पारित आदेशों का उल्लेख किया गया है। पत्रावली पर उपलब्ध एग्रीमेन्ट-फॉर--सेल, दिनांक 3-42--2049 के प्रस्तर-7. में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्नलिखित उल्लिखित है:-
ढ7.4 Schedule D for possession of the said [Apartment/Plot/Unit]: The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot/Unit] is the essence of the Agreement. The Promoter, based on the approved plans and specifications, assures to offer of possession of the Project on or before 3-/0-2020, unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot/Unit], provided that such Force Majeure conditions...” मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 // 4985, “MC. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04-44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure Page 6 of 6 E-Court se no such activity takes place.”
इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029,// 4985 4 पारित आदेश | दिनांक o9—i2-20:9 में निम्नलिखित निर्देश दिये &:— “In the affidavit dated 05.72.2079, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under: - 72, That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (2078) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed. ”
मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 260-40-2049 से दिनांक 30-0—209 तक | os दिन तथा (दिनांक 04-74-20I9 से दिनांक 44-02-2020 तक) की अवधि के लिए | निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश, दिनांक 09-42-2049 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 26-70-209 से दिनांक 30-40-2049 तक 05 दिन तथा 35 दिन (दिनांक 04-4:-209 से दिनांक 09-2-2049) एवं 33 दिन | (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02—2020 तक सॉँय 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। वर्ष, 202 में दिनांक 46-44-2024 से दिनांक 2I-74-202: तक 05 दिन, दिनांक 24-7:-2024 से दिनांक 29-44-2024 तक 05 दिन, दिनांक 47-42-2024 से दिनांक 20-42--2024 तक 03 दिन की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधियाँ विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थीं तथा इसके | लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न्यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित सभी अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है। अतः उपर्युक्त अवधियाँ कुल-वर्ष, 20:9-2020 में 05 दिन + 35 + 33 दिन + वर्ष, 2024 में 43 दिन अर्थात् 86 दिन निर्माण कार्य एब2९ 7 एण6 E-Court = _रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है तथा 86 दिन की अवधि के लिए ब्याज की गणना नहीं की जायेगी।
समस्त सुसंगत तथ्यों पर विचारोपरान्त उ.प्र. wr अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06-06-2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु, दिनाक 25-03-2020 से 06 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25-09-2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्ट्स के कारण मानी जायेगी। इसके दृष्टिगत दिनांक 25-03-2020 से दिनांक 25-09-2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या: 04 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या: 02 बिन्दु संख्या: 02, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को gerd यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है?
| प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा अवगत कराया गया है कि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का कब्जा, दिनांक 33-40-2020 तक दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त नहीं किया गया है और अभी तक ओ.सी. /सी.सी. लम्बित है। यह कभी स्पष्ट नहीं किया गया था कि बेसमेन्ट का उपयोग कॉमर्शियल मकसद हेतु किया जायेगा और वहाँ कई ac लगाये जायेगें। विपक्षी द्वारा ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त किये बिना कब्जा ऑफर किया गया है तथा क्या विपक्षी /प्रमोटर, इस बात की पुष्टि कर न् है कि आवंटी ओ.सी./सी.सी. के बिना भी अपार्टमेन्ट में रह सकता है। विपक्षी / प्रमोटर, रजिस्ट्रेशन ऑफ सेल डीड की तिथि निर्धारित / पुष्टि करें और जब तक AM /सी.सी. प्राप्त न हो, तब तक विपक्षी / प्रमोटर, कब्जा देने में हुए विलम्ब के आधार पर विलम्बित अवधि के ब्याज का भुगतान करें। विपक्षी / प्रमोटर, ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने की तिथि से मेंटेनेन्स चार्ज प्रारम्भ करें। विपक्षी / प्रमोटर, Sade eit BAC लगाने हेतु बेसमेन्ट का उपयोग कर रहा है, जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए, क्योंकि बुकिंग के समय उक्त के सम्बन्ध में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करायी गयी थी। विपक्षी / प्रमोटर, कारों एवं बाइकों की पार्किंग हेतु पेनाल्टी वसूल कर रहा है, परन्तु विपक्षी / प्रमोटर द्वारा पार्किंग की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करायी गयी है। इन आधारों पर शिकायतकर्ता द्वारा wera यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये Page 8 of 6 E-Court eer का अनुरोध किया गया है।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता की ओर से विपक्षी द्वारा प्रस्तुत आपत्ति-पत्र पर अपना प्र॒त्युत्तर, दिनांक 04—4:-2025 दाखिल करते हुए, मूल शिकायत में किये गये तथ्यों एवं अभिकथनों की पुनरावृत्ति की गयी है और कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट 40:30:30 पेमेन्ट प्लान के अन्तर्गत बुक करायी गयी थी। प्रश्नगत | ES के सम्बन्ध में उभय पक्षों के मध्य निष्पादित व हस्ताक्षरित एग्रीमेन्ट फॉर सेल, दिनांक 33-2-2049 के प्रस्तर-07 के अनुसार विपक्षी द्वारा yea यूनिट का कब्जा, दिनांक 33-40-2020 तक दिया जाना था, परन्तु अभी तक न तो विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया गया है और न ही प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण से ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किया गया है। इसलिए यह स्पष्ट है कि परियोजना में विकास कार्य समय पर पूर्ण नहीं हुआ है। स्थलीय निरीक्षण आख्या, दिनांक 42-40-2024 एवं जुलाई, 2022 के अनुसार प्रश्नगत परियोजना में सड़क का कार्य, फुटपाथ कार्य, जल निकासी कार्य, सामुदायिक भवन कार्य, जल संरक्षण प्रणाली कार्य, आपातकालीन निकासी सेवा एवं स्वीमिंग पूल का आदि कार्य लम्बित है। उक्त निरीक्षण आख्या की तिथि से प्रश्नगत शिकायत दर्ज करने की तिथि तक भी परियोजना के कार्य अपूर्ण हैं। शिकायतकर्ता द्वारा स्थलीय निरीक्षण में अंकित तथ्यों का विस्तृत उल्लेख किया गया है। विपक्षी / प्रमोटर को ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त किये बिना प्रश्नगत यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराये जाने का कोई अधिकार नहीं है। शिकायतकर्ता द्वारा विभिन्न विधिव्यवस्थाओं का veers किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा उ.प्र. अपार्टमेन्ट अधिनियम, 20:0 की धारा-4(5) सपठित रेरा अधिनियम, 2046 की धाराओं का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि किसी अपार्टमेन्ट का हस्तांतरण प्रमोटर द्वारा किसी व्यक्ति (आवंटी) को भवन उपनियमों के अनुसार ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त करने के बाद ही किया जा सकता है। विपक्षी /प्रमोटर को ओ.सी./सी.सी. प्राप्त करना अनिवार्य है, जिसके उपरान्त ही शिकायतकर्ता/आवंटी के पक्ष में प्रश्नगत यूनिट का हस्तांतरण विलेख पंजीकृत किया जा सकता है और शिकायतकर्ता को विधिक एवं रहने योग्य कब्जा दिया जा सकता है। विपक्षी द्वारा दाखिल आपत्ति-पत्र में अंकित समस्त तथ्यों एवं अभिकथनों का शिकायतकर्ता द्वारा पूर्ण रूप से खण्डन करते हुए, अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख कर, मूल शिकायत में अंकित याचित अनुतोष को दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। इस पर विपक्षी की ओर से अपना लिखित आपत्ति-पत्र, दिनांक 06--04-2023 vd अतिरिक्त आपत्ति-पत्र, दिनांक 49-07-2025 दाखिल करते हुए कहा गया कि शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना "24" Avenue (Group Housing)-Gaur City" के ब्लॉक-9 में यूनिट संख्या: 6099, जिसका क्षेत्रफल 530 वर्ग फुट था, बुक करायी गयी थी, जिसके सम्बन्ध में पक्षकारों के मध्य We फॉर सेल/अनुबन्ध, दिनांक 34-42-2049 को निष्पादित एवं हस्ताक्षरित कराया गया। प्रश्नगत परियोजना रेरा में
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G है, जिसका रेरा पंजीयन नं.: UPRERAPRJ6742 है। विपक्षी का यह भी कहना है कि प्रश्नगत परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण करते हुए, चारों एन.ओ.सी. अर्थात् लिफ्ट एन.ओ.सी., दिनांक 48-08-2024, फायर एन.ओ.सी., दिनांक 49-44-2024, स्ट्रक्चरल एन.ओ.सी., दिनांक 46-42-2046 तथा इलेक्ट्रिकल एन.ओ.सी., दिनांक 46-04-2048 को प्राप्त कर, venta परियोजना के सम्बन्ध में ओ.सी.»सी.सी. प्राप्त करने हेतु सक्षम | प्राधिकरण के समक्ष आवेदन-पत्र, दिनांक 22-4-2024 को प्रस्तुत किया गया और डीम्ड ओ.सी. / PM, दिनांक 07-42-2024 के आधार पर, शिकायतकर्ता को कब्जा ऑफर-पत्र, दिनांक 08-42-2024 को प्रेषित किया गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं औपचारिकतायें पूर्ण करते हुए, प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त नहीं किया गया है। विपक्षी का यह भी कहना है कि उनके द्वारा शिकायतकर्ता को विधिक कब्जा ऑफर पत्र, दिनांक 08-2-2024 को प्रेषित किये जाने के बाद, शिकायतकर्ता से नो-ड्यूज़ सर्टिफिकेट प्राप्त करने का अनुरोध किया गया, जो कि यह सुनिश्चित करता है कि शिकायतकर्ता द्वारा आवंटित यूनिट के सापेक्ष सम्पूर्ण धनराशि का भुगतान कर दिया गया है और शिकायतकर्ता, सीधे प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त कर सकता है। शिकायतकर्ता द्वारा 400 प्रतिशत धनराशि का भुगतान कर दिया गया है, परन्तु विपक्षी कम्पनी द्वारा कई अनुरोधों के बावजूद, शिकायतकर्ता द्वारा आज तक एन.डी.सी. का निष्पादन नहीं किया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा उपलब्ध कराये जाने में विलम्ब हुआ है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को सभी औपचारिकताओं को पूर्ण करने के बाद प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा शीघ्र प्राप्त करने हेतु कई ई-मेल एवं अनुस्मारक पत्र, दिनांक 49-09-2023, दिनांक 29-03-2024, दिनांक 48-04~2024, दिनांक 24-05-2024, _ दिनांक 49-06-2024, दिनांक 26-07-2024, दिनांक 09-09-2024, दिनांक 26-09-2024, दिनांक 27-09-2024, दिनांक 34-0:-2025 एवं दिनांक 28-02-2025 को प्रेषित किये गये, परन्तु शिकायतकर्ता, wet यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त करने हेतु आगे नहीं आये gerd परियोजना सभी पहलुओं से पूर्ण होने के बाद, विपक्षी कम्पनी द्वारा प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में सक्षम प्राधिकरण से वास्तविक ओ.सी./सी.सी., दिनांक 7-09-2024 को प्राप्त किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा रेश अधिनियम, 2046 की धारा-49(6), 9(7) एवं 49(0) एवं मा. अपीलीय अधिकरण द्वारा अपील संख्या: 97/2023 "Central Government Employees Welfare Housing Organisation Vs. Rajender Mohan Saxena" में पारित आदेश, दिनांक 43-42-2024 का secs किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा किये गये समस्त तथ्यों एवं अभिकथनों का विपक्षी द्वारा अपने आपत्ति-पत्र में पूर्ण रूप से खण्डन कर, अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख किया गया है। इन आधारों पर विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की gerd शिकायत को खारिज किये जाने तथा शिकायतकर्ता को एन.डी.सी. प्राप्त करते हुए, werd यूनिट के सम्बन्ध में कब्जे की औपचारिकतायें कर, प्रश्नगत यूनिट का
Page 0 of 6 E-Court a= कब्जा प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। भू-सम्पदा (fara और विकास) अधिनियम, 2076 की धारा-8() में प्राविधान है कि:- "Section 76. Return of Amount and Compensation- (2) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building: - (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as pro vided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be = by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed."
इस प्रकार आवंटी को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है, तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु | प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। प्रकरण में पत्रावली पर उपलब्ध उभय पक्षों के मध्य निष्पादित एवं हस्ताक्षरित एग्रीमेन्ट फॉर सेल / अनुबन्ध, दिनांक 33-2-2049 के प्रस्तर-7.4 के अवलोकन से यह विदित है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा, दिनांक | 34-40-2020 तक दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा उक्त निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया। प्रकरण में विपक्षी द्वारा wera परियोजना के सम्बन्ध में सक्षम प्राधिकरण से ओ.सी. / सी.सी., दिनांक 7-09-2024 को प्राप्त करने से पूर्व ही शिकायतकर्ता के पक्ष | में कब्जा ऑफर पत्र, दिनांक 08-42-2024 को प्रेषित कर दिया गया था, जिनकी छायाप्रतियाँ पोर्टल एवं पत्रावली पर उपलब्ध हैं। इस सम्बन्ध में सिविल अपील संख्या: 6649-50 / 2048, “M/s. Supertech Ltd. Versus Rajni Goyal” में मा. उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- Page ०06 E-Court
"the period of Interest should = on April 2076 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 40) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 2076. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 2076 with respect to delay in handing over possession. The Respondent - Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपर्युक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि के लिए | शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी है। अतः समस्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों के आलोक में शिकायतकर्ता को विपक्षी से दिनांक 34—-40-2020 में 86 दिन (निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 के अनुसार) जोड़ने के उपरान्त, अर्थात् दिनांक 26-04-2024 से ओ.सी.,सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि I7-09-2024 तक की अवधि के लिए विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना उचित | होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न , मा. बॉम्बे उच्च न्यायालय ERI “Neelkamal Realtors Suburban Pyt. Ltd. Versus Union of India & Ors.” में अभिनिर्धारित किया गया है कि:-
"Section 7807) (0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest Jor every month's delay till handing over of the possession. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. The interest is merely compensation for use of | money." अतः उपर्युक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर एवं आवंटी के बीच किये गये अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। Page 2 of 6 E-Court
= तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो = सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20:6 के अधीन दिनांक 42--40-2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 208 अधिसूचित की गयी हैं, जिसमें देय ब्याज दर भारतीय स्टेट बैंक द्वारा निर्धारित meres प्रतिशत निर्धारित की गयी है, जिसे मा. उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा Re याचिका संख्या: सी: 920 / 2020, “Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & Ors.” में भी उचित व विधिपूर्ण माना गया है। ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर #८7/२+7 प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से | प्रतिशत ज्यादा है, उचित एवं सही है। Te बिन्दु संख्या: 02 Pena किया जाता है। इसके अतिरिक्त विपक्षी /प्रमोटर को जो धनराशि शिकायतकर्ता को अदा की जानी | है, उसमें से आयकर अधिनियम का आधार लेकर टी.डी.एस. की कटौती नहीं कर सकता | है, क्योंकि var धनराशि को डिक्रिटल (0००४०) धनराशि के रूप में रेरा द्वारा शिकायतकर्ता के हक में प्रदान किया गया है। इस सम्बन्ध में मा. उच्च न्यायालय, हिमाचल प्रदेश द्वारा स्रीआर्ई टी बनाम हिमाचल प्रदेश आवास विकास परिषद 207/ SCC OnLine HP 5264 के मामले में निम्नवत् आदेश पारित किये गये:- “The following interesting questions arise for decision in the present case:
2. Whether, on the facts and in the circumstances of the case, the hon'ble Tribunal was right in holding that the interest paid or credited by the Housing Board to its allottees (payees) was of capital nature and thus not subject to deduction of tax at source when as per law it is the recipient (payee) who can decide if a particular receipt (interest in this case) is of revenue or capital in nature 27 9. While taking this view we are relying upon the judgment of the apex court in Bikram Singh v. Land Acquisition Collector (7997) 224 ITR 557 (SC). In the case before the apex court, the question was whether the interest paid to the persons whose land had been compulsorily acquired under sections 28 and 37 of the Land Acquisition Act was a revenue receipt or a capital receipt. The apex court held that though it was termed as interest on delayed payment, it was actually a revenue receipt and, therefore, the provisions of section 7944 of the Income tax Act would have no application. It would be pertinent to mention that the National Consumer Disputes Redressal Commission in Revision Petition No. 2244 of 49 Ob 2.2 Page 3 of 6 ‘ 2 E-Court = as Ghaziabad Development Authority v. Dr. N. K.Gupta (2002) 258 ITR 337 (NCDRO©) under similar situation held that when the State Commission directed payment of interest to the allottees for delayed completion of flats the same did not fall within the purview of section 7944 of the Income-tax Act.
40, In the present case, the allottees had not given the money to the Board by way of deposit nor had the Board borrowed the amount from the allottees. The amount was paid under a self-financing scheme for construction of the flat and the interest was paid on account of damages suffered by the claimant for delay in completion of the flats. 47, In view of the above discussion, we answer both the questions in favour of the assessee and against the Revenue. The appeal is accordingly dismissed with no order as to costs.” इसी प्रकार मा. राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग द्वारा भी एस्टेट ऑफीसर ग्रेटर मोहाली क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण व अन्य बनाम TRA FEAT! 2020 SCC OnLine Ncprc278@ मामले में समान न्यायिक सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया है। उपर्युकत वर्णित दोनों मामलों में प्रतिपादित न्यायिक सिद्धान्त को पुनः मा. उच्च न्यायालय, बम्बई द्वारा भी सारईनाथ राजकुमार सरोड़े व अन्य बनाम स्टेट ऑफ महाराष्ट्र | व अन्य 2027 SCC OnLine Bom 2498 के मामले में दोहराया गया है। निर्णय के सुसंगत प्रस्तर निम्नवत् हैः-
28. Coming to the admitted facts of the present case we hold that the amounts payable being in effect a refund of the amounts paid by the petitioners to Respondents 4 to 7, along with compensatory interest thereon, such a relationship does not spell out a debtor-creditor relationship nor is the payment made by Respondents 4 to 7 to the petitioners one in discharge of any pre-existing obligation, so as to attract Section 2(28-A) of the IT Act. We are in respectful agreement with the judgment of the Kerala High Court in Beacon Projects (P) Ltd. v. CIT [Beacon Projects (P) Ltd. v. CIT, 2075 SCC OnLine Ker 78597/ which takes the same view, in facts similar to those that we are dealing with in the present matter. 29. In view of the above, we hold that the compliance of Respondents 4 to 7 with the schedule of payments under the consent terms dated 4-3-2027 and our order dated 4-3-2027, is to be made without making any deduction of tax at source. Respondents 4 to 7 are directed to pay to the petitioners the balance sum of Rs 5,05,989 deducted from the Sth instalment which became due on 20-7-2027, in compliance with the consent terms, within a period of one week from today. उपर्युक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है:- Page 4 of 6 E-Court to =
विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता की यूनिट की सुविधाओं को एग्रीमेन्ट फॉर सेल /अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर ओ.सी. / सी.सी. सहित भौतिक कब्जा उपलब्ध कराते हुए, शिकायतकर्ता से देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर, शिकायतकर्ता के पक्ष में नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें | विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 3i-70-2020 4 86 दिन (निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 के अनुसार) जोड़ने के उपरान्त, अर्थात् दिनांक 26-04-2024 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि 47-09-2024 तक की अवधि के लिए, शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर ,४८7/२+7 प्रतिशत की दर से विलम्ब ब्याज की धनराशि अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। कोविड-49 के कारण “फोर्स मैज्योर” पीरियड के दृष्टिगत, दिनांक 25-03-2020 से दिनांक 25-09-2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज प्रोमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-2(७७)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी #८7#+7 प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा दिये जाते समय सभी चार्जेज़/धनराशि एग्रीमेन्ट फॉर सेल /अनुबन्ध में उल्लिखित सहमत पेमेन्ट प्लान/शर्तों के अनुसार ही प्राप्त करना सुनिश्चित करेंगे। विपक्षी आदेश अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के अन्दर आदेश का अनुपालन करना सुनिश्चित करें। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20:6 की Page 506 E-Court a तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। ॥ शिकायतकर्ता को यह भी निर्देशित किया जाता है कि यदि 45 दिनों के अन्दर विपक्षी द्वारा उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता “रेरा पोर्टल” के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन कराये जाने हेतु अनुरोध अपलोड कर, भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेगें | 9... पक्षकार अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। तदूनुसार पत्रावली दाखिल-दफ्तर हो। दिनांक: 23-05-2026. (संजय मु अध्यक्ष, उ.प्र. रेरा
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