Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Pushpendra Sharma v. Sikka Infrastructure Pvt Ltd
Complaint No. NCR144/10/63763/2020
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2021-04-15
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
= भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | पीठ-2 उपस्थिति:- श्री बलविन्दर कुमार, सदस्य [क्रम tol शिकायत संख्या व पटार44/0/63763/2020 | 30,59,699 / — 2, | NCRI44/08/59442/2020 | आकांशा मि I 26,29,824 /— NCR44/09/636/2020 27,69,060 /— NCRI44/0/6375/2020 25,80,55 /— बनाम सिक्का इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा0 लि0 शिकायतकर्ता पुष्पेन्द्र शर्मा के साथ 3 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान हैं और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें Sikka Karnam Greens परियोजना से सम्बंधित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत Ho NCRI44/0/63763/2020 YX शर्मा अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्द कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Sikka Karnam Greens में यूनिट सं०-704 बुक किया गया था, 00 |. लिए उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 30,59,6 = की धनराशि का भुगतान किया गया था। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को | आज तक कब्जा नहीं दिया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि परियोजना में 6 वर्ष से अधिक का विलम्ब है। अत: शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्द कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में आवेदन पत्र, फ्लैट आवंटन अनुबन्ध, जमा धनराशि की रसीदें आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है।
विपक्षी द्वारा प्रतिवाद पत्र दाखिल करते हुए wer गया है कि नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा आवंटित भूमि पर स्थित परियोजना के सम्बंध में विभिन्न वाद माननीय उच्च न्यायालय इलाहबाद में योजित किये गये थे, जिस कारण फोर्स मैज्योर की परिस्थिति उत्पन्न हुई, इस सम्बंध में नोएडा विकास प्राधिकरण को विभिन्न पत्र प्रेषित किये गये, जिससे कि भूमि का कब्जा पूर्ण रूप से मिल सके और परियोजना का निर्माण किया जा सके। शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना में फ्लैट सं०-704 बुक कराया गया था, जिसका क्रेता आवंटन ५2 mera दिनांक 46.09.2044 को निष्पादित कराया गया था। टावर को परियोजना के निर्माण शुरू होने से 36 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ पूर्ण कर दिया जाना था, परियोजना में विलम्ब नोएडा प्राधिकरण एवं किसानों के मध्य हुए विवाद के कारण हुआ। नोएडा प्राधिकरण द्वारा समय से परियोजना की भूमि का कब्जा भी नहीं दिया गया था। इसके अतिरिक्त पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान दिनांक 42.03.2024 को विपक्षी द्वारा कहा गया कि शिकायतकर्ता को जून 2024 तक कब्जा दे देंगे। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचारणीय किये गये हैं — (V Page 2 | 2 _ क्या force majeure होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव ? 2. क्या शिकायतकर्ता कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु सं० 4 बिन्दु सं? 4 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्ट्स होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है।
विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि कुछ अप्रत्याशित घटनाओं (force majeure cvents) (जैसे दंगा, आंदोलन, हडताल, औद्योगिक विवाद, परियोजना पर सेवाओं एवं आपूर्ति का बाधित होना, सरकार का नीति परिवर्तन, न्यायिक waa आदेश, निर्णय व डिकी से कार्य बाधित होना, अनुज्ञप्ति व संस्तुतियों में होने वाला विलंब आदि) के कारण परियोजना विलंबित हुई, साथ ही यह भी कहा गया कि परियोजना किसानों के उग्र ge, के कारण परियोजना प्रभावित हुई। विपक्षी की ओर से न तो यह कथन किया गया कि किन फोर्स मैज्योर की बाबत उसकी परियोजना विलंबित हुई और न ही फोर्स मैज्योर की बाबत कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल किया गया है जिससे की विदित हो कि परियोजना की भूमि पर कार्य बाधित था | इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 / 2047 बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं प्रस्तर 40 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया हैः- Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature. उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें की युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्रकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई और विपक्षी ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं तदनुसार बिन्दु vo 4 निस्तारित किया जाता है। WV Page 3 यु बिन्दु to 2
शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया है कि विपक्षी द्वारा अभी तक कब्जा नहीं दिया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है, जिस पर विपक्षी द्वारा जून 2024 में कब्जा दिये जाने की बात कही गयी है। पत्रावली पर दाखिल फ्लैट आवंटन अनुबन्ध दिनांक 46.09.2044 के पृष्ठ सं०-8 के प्रस्तर-26 के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा निर्माण शुरू होने की तिथि से 36 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ कब्जा दिया जाना था। अनुबन्ध में निर्माण शुरू होने की तिथि अंकित नहीं की गयी है, परन्तु रेरा में परियोजना शुरू होने की तिथि 34.42.2042 दर्शायी गयी है। ऐसे में उक्त परियोजना निर्माण शुरू होने की तिथि 3t.2.20I2 के अनुसार कब्जे की तिथि की गणना की जानी उचित होगी। ऐसी दशा में उपरोक्तानुसार कब्जे की तिथि 30.06.206 होती है| यह स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है और ऐसे में शिकायतकर्ता दिनांक 04.07.2046 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर विलंबित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी 3] इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:-
Section 8(l)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay = till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें WAR 9.2 Gi) 4 प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+H प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बंध में सिविल अपील सं० 6649-50 /20:8 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- " the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was J obtained as per the admission of the Respondent fv
— Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Page 5 = wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी.,/सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो, की तिथि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी./सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्ब के लिए ब्याज पाने के अधिकारी होगें। दिनांक 47.0.2048 को उ0प्र0 शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग--3 की अधिसूचना संख्या-4740,/8-3-48-65 विविध 46 के द्वारा मॉडल एग्रीमेन्ट की नियमावली के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है:- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
॥7,] Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on ; unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of VV Page 6 Es Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों एवं परिस्थितियों के बाद उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही आवंटियों से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-2 निस्तारित किया जाता है।
उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश 4, विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण की यूनिट्स के समस्त सुविधाओं को आवंटन-पत्र / अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 30.06.2024 तक ओ.सी./सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें | 2... विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 04.07.2046 से ओ.सी /सी.सी प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो, की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जाये। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। दूसरे शिकायतकर्ता के प्रकरण में आवंटन पत्र / अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी। pifas—s9 की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु देश में हुए लॉकडाउन एवं फोर्स मैज्योर को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जाएगी। 0० 3. a भी स्पष्ट किया जाता है कि रेरा अधिनियम 2046 के धारा 2 (ai) के अन्तर्गत ब्याज को परिभाषित किया गया है कि रेरा लागू होने के बाद यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। 4. विपक्षी, उपरोक्तानुसार कब्जा ऑफर पत्र ओ.सी. मिलने के उपरान्त जारी करना सुनिश्चित करें।
5. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित Rar के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी | इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्रावधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक:-- 06 / 04 / 2024 (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण a Page 8