Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Amit Goyal v. Wave Megacity Centre Pvt. Ltd
Complaint No. NCR144/10/124294/2024
- Decision date
- 2026-04-28
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 1 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
E-Court उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, एच-469, गामा-2, ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर-204308. सुनवाई पीठ-04 (पूर्व में पीठ-04-ए) निर्णय एवं आदेश अन्तर्गत धारा-34 सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारी: श्री संजय आर. भूसरेड्डी, मा. अध्यक्ष बी.बी.ए. / का अनुबन्ध न शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण pla Pi incall के अनुसार कब्जा यूनिट मुल्य S| शिकायतकर्ता द्वारा ् दिये जाने की हि जमा धनराशि तिथि ईश्वर सिंह 30(02), 0 ४(८२।44/॥ 00 24287/2024 42-40-2042 | Block-3E. 42-04-2047 रू.70,73,640 / %.43,9,775 / Livork 3I4/3E/ हु a २८७२।44/। 0/024258/2024 20% वाह हु 05-02-2043 | 3|५ Floor, 05-08-2047 रू.65,77,040 / रू.59,37,367 / षा कुशवाहा ४ Livork मेसर्स एवीए हाईड्रो 405, 38, 03, ४८॥२।44/] 0/॥ 23939/2024 पावर Gece =| 29-40-202 | 4 Floor, 29-04-2047 रू,55,40,640 / - रू.58,37,80/ - प्रा. लि. Livork 30(0I)/3E | | ३(८॥२।44/] 0/24263/2024 सरला देवी 06-07~20:2 | /30' Floor 06—0:—207 रू.70,73,640 / - रू.43,9,775 / Livork ; I8]I/8" — 05. ८॥२44/॥ 0/।24294/2024 अमित गोयल 29-0-202 | Floor/3E, 29-04—207 रू.55,40,640 / — ®.57,55,360 / | Livork c सुनैना सिंह एवं 2909, 29 | | ४८२।44/] 0/। 24374/2024 अरविन्द कुमार 25-04—202 Floor/3 E 25—0-206 ¥.87,2,000 /— रू.56,87,455 / - Livork ‘ हा वैभव गुप्ता एवं 280I/3E - | 07. ४(॥२ | 44/05/। 08483/2023 मानसी पांडे 25-06-2049 Tea” 34—2-2020 रू.,92,38,544 /— रू.87,02,383 / - राहुल सिंह एवं शारू 606/3E a _ |* | २८२ ।44/05/॥ 20343/2024 सिंह तथा शौर्यवीर| 28-08-2042 2 0 nee 28-02-2047 रू.65,38,500 / - रू.48,38,927 / सिंह तोमर Livork बनाम
वेव मेगासिटी सेन्टर प्रा. लि. निर्णय उपर्युक्त सारणी में अंकित समस्त शिकायतकर्तागण द्वारा प्रश्नगत यूनिट्स का कब्जा एवं विलम्बित अवधि के ब्याज सहित रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने के अनुतोष की प्रार्थना के साथ विपक्षी के विरूद्ध भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत शिकायतें योजित की गई हैं। Page | of I5 E-Court a सारणी में अंकित क्रमांक संख्या: 04 से 06 तक के शिकायतकर्तागण की शिकायतों में अन्तिम सुनवाई, दिनांक 07-44-2025 को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से कराई गई तथा पुकार पर शिकायतकर्तागण की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री दिव्यांशु सारस्वत उपस्थित हुए तथा विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री असित कुमार उपस्थित हुए। इस पर पीठ द्वारा पक्षकारों के विद्वान अधिवक्तागण के तर्कों को विस्तार से सुनते हुए, पत्रावलियाँ आदेश हेतु, दिनांक 07-44-2025 को ही सुरक्षित की गयीं | उपर्युक्त सारणी में अंकित क्रमांक संख्या: 07 के शिकायतकर्ता की शिकायत में अन्तिम सुनवाई दिनांक 42-7:-2025 को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से कराई गई तथा पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री प्रान््जल मिश्रा उपस्थित हुए तथा विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री असित कुमार उपस्थित हुए। इस पर पीठ द्वारा उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के cept को विस्तार से सुनते हुए, पत्रावली आदेश हेतु दिनांक 42-44-2025 को ही सुरक्षित की गयी।
उपर्युक्त सारणी में अंकित क्रमांक संख्या: 08 के शिकायतकर्ता की शिकायत में अन्तिम सुनवाई दिनांक 42-7:-2025 को वीडियो aise के माध्यम से कराई गई तथा पुकार पर शिकायतकर्ता स्वयं उपस्थित हुए तथा विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री असित कुमार उपस्थित हुए। इस पर पीठ द्वारा उभय पक्षों के cof को विस्तार से सुनते हुए, पत्रावली आदेश हेतु दिनांक 42-74-2025 को ही सुरक्षित की गयी। उपर्युक्त शिकायतें विपक्षी की “एधट८-3:" परियोजना (पंजीयन संख्या: UPRERAPRJ3337), गौतमबुद्धनगर से सम्बन्धित हैं। उपर्युक्त सारणी में अंकित समस्त शिकायतों के तथ्य समरूप हैं एवं अनुतोष भी समान हैं। अतः पुनरावृत्ति से बचने तथा सुगमता की दृष्टि से उपर्युक्त समस्त शिकायतों का एक ही निर्णय द्वारा निस्तारण किया जा रहा है। क्रम संख्या: 03-शिकायत संख्या: NCRI44/0/24287/2024,"S8RX सिंह बनाम aa मेगासिटी सेन्टर प्रा.लि.” अग्रणी परिवाद रहेगा। संक्षेप में शिकायतकर्तागण का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना “wmcc-3E” में आवासीय यूनिद्स के आवंटन हेतु आवेदन प्रस्तुत किये गये, जिसके उपरान्त विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण के पक्ष में प्रश्नगत यूनिट्स के सम्बन्ध में Serviced Studio Apartment Allottee(s) Arrangement / अनुबन्ध निष्पादित किये गये। अंग्रणी शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि परियोजना में विलम्ब हो रहा है और कार्य धीमा Sus गया है। अतः शिकायतकर्तागण द्वारा अपनी-अपनी मूल शिकायतों में अपने कथन | > | समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख करते हुए, प्रश्नगत यूनिट्स का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने तथा रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने का अनुरोध किया गया है।
इसके अतिरिक्त अग्रणी शिकायतकर्ता द्वारा विस्तृत लिखित शिकायत-पत्र, दिनांक 24--40--2024 तथा विपक्षी द्वारा प्रस्तुत आपत्ति-पत्र के विरूद्ध अपना प्रत्युत्तर, दिनांक Page 2 of 5 E-Court = 7-03-2025 दाखिल करते हुए, मूल शिकायत में किये गये तथ्यों की पुनरावृत्ति की गयी है और कहा गया है कि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का कब्जा, अनुबन्ध, दिनांक 42-40-2042 की तिथि से 48 माह + 06 माह ग्रेस पीरियड अर्थात् अप्रैल, 2047 तक दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। विपक्षी द्वारा अनुबन्ध में उल्लिखित शर्तों का उल्लंघन किया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता को भारी आर्थिक हानि तथा मानसिक उत्पीड़न व कष्ट हुआ है। विपक्षी द्वारा दाखिल आपत्ति-पत्रों में अंकित समस्त तथ्यों एवं अभिकथनों का | शिकायतकर्तागण द्वारा पूर्ण रूप से खण्डन करते हुए, अपने कथन के समर्थन में विभिन्न | तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख कर, मूल शिकायतों में अंकित याचित अनुतोष को दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। अग्रणी शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में कस्टमर स्टेटमेन्ट ऑफ spree की प्रति, Serviced Studio Apartment Allottee(s) Arrangement, दिनांक 42-40-2042 की प्रति, जमा धनराशि की रसीदें, लिखित बहस, दिनांक 48-44-2025 की प्रति, आदि अभिलेखों छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं।
अग्रणी शिकायतकर्ता के प्रकरण में विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति-पत्र, दिनांक 44-0-2025 दाखिल करते हुए कहा गया कि शिकायतकर्ता द्वारा “कन्स्ट्रक्शन fees प्लान” के अन्तर्गत यूनिट संख्या: 3E-30/02, Livork बुक करायी गयी, जिसकी कुल कीमत रू.70,73,640 / - (अन्य चार्जेज एवं कर छोड़कर) थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा रू.43,49,775 ,/- की धनराशि का भुगतान किया गया है। प्रश्नगत यूनिट के सम्बन्ध में पक्षकारों के मध्य अनुबन्ध, दिनांक 42-70-20:2 को निष्पादित व हस्ताक्षरित किया गया विपक्षी का यह भी कहना है कि मा. एन.जी.टी. न्यायालय द्वारा प्रदूषण के नियंत्रण के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। दिल्ली एन.सी.आर. में बढ़ते हुए प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए, मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गयी थी। कोविड-49 महामारी को दृष्टिगत रखते हुए भारत सरकार द्वारा वर्ष, 2020 में सम्पूर्ण देश में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया। मा. एन.जी.टी. द्वारा 44--08-2043 से दिनांक 49-08-2045, नवम्बर, 20i7 से जनवरी, 2048, अक्टूबर, 20i8 से दिसम्बर, 2078, अक्टूबर, 209 से जनवरी, 2020, अप्रैल, 2020 से मार्च, 2022 तक प्रदूषण के नियंत्रण के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया, जिसके कारण विकासकर्ता निर्माण कार्य पूर्ण करने में असमर्थ रहा। नोएडा प्राधिकरण द्वारा माँग किये जा रहे, मनमाने माँग के विरूद्ध da सिटी सेन्टर होम aad एसोसियेशन द्वारा मा. उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के समक्ष सिविल रिटस् योजित की गयी हैं। sad सिविल Rew समान तथ्यों के आधार पर योजित की गयी हैं। उपर्युक्त Ret के लम्बित होने की दशा में विपक्षी किसी भी आदेश का निष्पादन करने में असमर्थ है। Page 3 of 5 E-Court
= अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में भी विपक्षी द्वारा समान तथ्यों एवं अभिकथनों के आधार पर अपने आपत्ति-पत्र रेरा कम्प्लेन्ट पेज पर अपलोड एवं दाखिल किये गये हैं। विपक्षी द्वारा अपने आपत्ति-पत्रों में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख करते हुए, मा. उच्च न्यायालय में लम्बित याचिकाओं के निस्तारण तक, प्रश्नगत शिकायतों को Abeyance में रखे जाने का अनुरोध किया गया है। अग्रणी शिकायतकर्ता की शिकायत में विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में रिट से सम्बन्धित दस्तावेजों की प्रतियाँ, आदि अभिलेख की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं | मैंने पक्षकारों के विद्वान अधिवक्तागण के cat को विस्तार से सुना तथा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य एवं अभिलेखों का सम्यूक परिशीलन किया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दुओं पर विचार किया:- 4. gaye परियोजना के सम्बन्ध में मा. उच्च न्यायालय में लम्बित याचिकाओं के कारण प्रश्नगत शिकायतों का निस्तारण करना वैधानिक है अथवा नहीं ? 2 क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें और क्या विपक्षी की प्रश्नगत परियोजना रेरा में पंजीकृत हैं ? 3. क्या Force majeure events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलम्बित हुई? यदि हाँ तो प्रभाव? 4... कया शिकायतकर्तागण को प्रश्नगत यूनिट्स का भौतिक कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जायेगा? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी? निस्तारण बिन्दु संख्या: 04
बिन्दु संख्या: 04, इस तथ्य पर विचरित है कि क्या प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में मा. उच्च न्यायालय में लम्बित याचिकाओं के कारण प्रश्नगत शिकायतों का निस्तारण करना वैधानिक है अथवा नहीं? प्रश्नगत प्रकरणों में विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि नोएडा प्राधिकरण द्वारा माँग किये जा रहे, मनमाने माँग के विरूद्द da सिटी सेन्टर होम बायर्स एसोसियेशन द्वारा मा. उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के समक्ष सिविल Ree योजित की गयी हैं। उक्त सिविल Rey समान तथ्यों के आधार पर योजित की गयी हैं। उपर्युक्त Rel के लम्बित होने की दशा में विपक्षी किसी भी आदेश का निष्पादन करने में असमर्थ है। विपक्षी द्वारा अपने आपत्ति-पत्रों में विभिन्न तथ्यों का उल्लेख करते हुए, मा. उच्च न्यायालय में लम्बित याचिकाओं के निस्तारण तक प्रश्नगत शिकायतों को Abeyance में रखे जाने का अनुरोध किया गया है। Page 4 of 5 हर परियोजना के सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा मा. एन.सी.एल.टी. के समक्ष केस नं. TA. 2026/202! and IA. 2378/202. योजित किया गया था, जिसमें मा. एन.सी.एल.टी. द्वारा दिनांक 06--06-2022 को अंतिम रूप से निम्नवत् आदेश पारित किया गयाः- "40. IA 2026 AND 2378 of 2024 are accordingly allowed and 78-/972/08/2027 is accordingly dismissed." उपर्युक्त मा. एन.सी.एल.टी. द्वारा पारित आदेश के fase विपक्षी द्वारा मा. एन.सी.एल.ए.टी. के समक्ष अपील संख्या: 98/2022 योजित की गयी, जिसमें मा. एन.सी.एल.ए.टी. द्वारा दिनांक 05-04-2023 को अंतिम रूप से निम्नवत् आदेश पारित किया गयाः- "22. We do not find any merit in the Appeal. The Appeal is dismissed. No costs."
वर्णित स्थिति में उपरोक्त से यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा दाखिल किये गये उक्त वाद सम्बन्धित मा. न्यायालयों द्वारा खारिज किये जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त जहाँ तक विपक्षी द्वारा कहा गया कि नोएडा प्राधिकरण द्वारा माँग किये जा रहे, मनमाने माँग के fame वेव सिटी सेन्टर होम बायर्स एसोसियेशन द्वारा सिविल Ree योजित की गयी हैं। उक्त सिविल Rey समान तथ्यों के आधार पर योजित की गयी हैं। उपर्युक्त रिटों के | लम्बित होने की दशा में विपक्षी किसी भी आदेश का निष्पादन करने में असमर्थ है, परन्तु विपक्षी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य / प्रमाण दाखिल नहीं किया गया है, जिसके अवलोकन से यह विदित हो सके कि शिकायतकर्तागण var Re याचिकाओं में पक्षकार हों और da सिटी सेन्टर होम बायर्स एसोसियेशन में शिकायतकर्तागण सदस्य हों, साथ ही रेरा में लम्बित शिकायतों के निस्तारण सम्बन्धी किसे निषेधाज्ञा (5७४) आदेश का भी कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। अतः समस्त तथ्यों एवं वर्णित उपर्युक्त परिस्थितियों के आलोक में प्रस्तुत शिकायतों का निस्तारण करने पर कोई निषेध नहीं है तथा इस पीठ द्वारा प्रश्नगत शिकायतों का निस्तारण करना वैधानिक है। तदनुसार बिन्दु संख्या: 04 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या: 02 बिन्दु संख्या: 02, इस आशय से विचरित किया गया है कि gar wr आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें और क्या विपक्षी की प्रश्नगत परियोजना रेरा में पंजीकृत है ? Page 5 of 5 7 E-Court
= सम्बन्ध में मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 6745-6749 // 2024,._'मैसर्स॒न्यूटेक ग्रोगोटर्स vs डेवलपर्स om लि. बनाम oe राज्य व अन्य” में दिये गये निर्णय में स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि:- "354. From the scheme of the Act 2076, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on-going projects and future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 2076.
उपर्युक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण-पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन aa” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपर्युक्त मा. उच्च न्यायालय के आर्ब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका पंजीकरण संख्या: UPRERAPRI3337 है | अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईंग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में प्रश्नगत प्रकरणों में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तद्नुसार बिन्दु संख्या: 02 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या: 03 बिन्दु संख्या: 03, इस आशय से विचरित far गया है कि क्या Force Majeure Events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलम्बित हुई? यदि हाँ तो प्रभाव? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर |S
प्रश्नगत प्रकरणों में विपक्षी की ओर से अपना लिखित आपत्ति-पत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि मा. एन.जी.टी. न्यायालय द्वारा प्रदूषण के नियंत्रण के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। दिल्ली एन.सी.आर. में बढ़ते हुए प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए, मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गयी थी। कोविड-49 महामारी को दृष्टिगंत रखते हुए भारत सरकार द्वारा वर्ष, 2020 में सम्पूर्ण देश में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया। परियोजना में निर्माण कार्य, कोविड-49 के फैलने के कारण भी विलम्ब Page 6 of 5 E-Court E है। मा. एन.जी.टी. द्वारा 74-08-20:3 से दिनांक 49-08-2045, नवम्बर, 2047 से जनवरी, 208, अक्टूबर, 2048 से दिसम्बर, 2048, अक्टूबर, 2049 से जनवरी, 2020, अप्रैल, | 2020 से मार्च, 2022 तक प्रदूषण के नियंत्रण के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया, जिसके कारण विकासकर्ता निर्माण कार्य पूर्ण करने में असमर्थ रहा। मा. सर्वोच्च न्यायालय एवं मा. एन.जी.टी. द्वारा दिए गये स्थगनादेश सम्बन्धी अपने दावे के समर्थन में विपक्षी द्वारा कोई साक्ष्य /अभिलेख प्रस्तुत नहीं किये गये हैं। अतः उपर्युक्त आधार ग्राह्य नहीं है। अग्रणी शिकायतकर्ता द्वारा पत्रावली पर दाखिल Serviced Studio Apartment Allottee(s) Arrangement, दिनांक 42-40-2042 के प्रस्तर-5.2 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्नलिखित उल्लिखित है:- “For the purposes of the present transaction followed by Serviced Studio Apartment Allottee(s) Arrangement, "Force Majeure" shall mean any event or
circumstance or a combination of events and circumstances, whether occured or likely to occur, which satisfies all or any of the following conditions: (a) Materially and adversely affecting the said/project and/or the peformance of an obligation of the developer; (b) And are beyond the control of the Developer; (c) And includes (without limitation) subject to satisfaction of the above conditions, the following events and/or circumstance: i. War (whether declared or undeclared), invasion, armed conflict or act of foreign enemy; ii. Revolution, riot, insurrection or other civil comotion, act of terrorism or sabotage; iii. = Strikes, industrial disputes and/or lockouts and/or interrupting supplies and services to the Project; iv. Non-payment of sums due from the allottee(s) including payment of installment/applicable interest and levies as mentioned herein above on time by any of the allottee(s) of the super premium / premium "Serviced Residences"; v. Change in governmental policy, laws (including any statute, ordinance, rule, regulation, judgement, notification, order, decree, permission, license or approval). including but not limited to, exproportion or compulsory acquisition by any government / Noida of any part of the said’ project or rights therein;
vi. Acts of god or events beyond the reasonable control of the developer hich could bnot resonably have been expected, including any effect of the natural elements, including lightning, fire, earthquake, unprecedented Page 7 of 5 E-Court rains, lamdslide, subsidence, flood, storm, cyclone, epidemics or plagues or any other similar effect; vii. Any Dispute between the developer and the allottee(s) and/or between the developer and the person, persons association of persons obstructing and creating hurdle in the progress of the development work of the 'said project’ and/or the Super Premium "Serviced Residences" therein and/or any proceeding initiated in _ this regard; viii. Any judgement or order of any court of competent jurisdiction or Government of India or the state government or any local body or statutory authority, made against the developer in any proceedings; ix. Any other reason which can be construed to be beyond the control of the normal human being;..." मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 / 4985, “08.८. Mehta
Versus Union of India" में पारित आदेश, दिनांक 04-44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place." इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029 / 4985 4 पारित आदेश दिनांक 09-42-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये हैः- “In the affidavit dated 05./2.2079, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under: - 772, That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (2078) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in
construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. ""' Page 8 of 5 E-Court = the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed." पर्यावर्णीय आधार पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक 04—4-2079 दिनांक 44-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश, दिनांक 09-42-20॥9 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक o4—ti-20:9 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 दिन (6652) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02--2020 तक साँय 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न्यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनों अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 दिन +33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है तथा 68 दिन की अवधि के लिए ब्याज की गणना नहीं की जायेगी।
समस्त सुसंगत तथ्यों पर विचारोपरान्त उ.प्र. wr अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06-06-2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु, दिनाक 25-03-2020 से 06 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25-09-2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्ट्स के कारण मानी जायेगी। इसके दृष्टिगत दिनांक 25-03-2020 से दिनांक 25-09-2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा शिकायतकर्ता | को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। aq बिन्दु संख्या: 03 Pena किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 बिन्दु संख्या: 04, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्तागण को प्रश्नगत यूनिट्स का भौतिक कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जायेगा? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्तागण के अभिकथनों के आधार पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्तागण पर है। अग्रणी शिकायतकर्ता का कहना है कि परियोजना में विलम्ब हो रहा है और कार्य पड़ गया है। अतः शिकायतकर्तागण द्वारा अपनी-अपनी मूल शिकायतों में अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख करते हुए, प्रश्नगत यूनिट्स का Page 9 of 5 E-Court कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने तथा रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने का अनुरोध किया गया है |
इस पर अग्रणी शिकायतकर्ता के प्रकरण में विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति-पत्र, दिनांक 44--04-2025 दाखिल करते हुए कहा गया कि शिकायतकर्ता द्वारा “कन्स्ट्रक्शन लिंक्ड प्लान” के अन्तर्गत यूनिट संख्या: 3E-30/02, Livork बुक करायी गयी, जिसकी कुल कीमत रू.70,73,640 /— (अन्य चार्जेज एवं कर छोड़कर) थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा रू43,9.775,/- की धनराशि का भुगतान किया गया है। प्रश्नगत यूनिट के सम्बन्ध में पक्षकारों के मध्य अनुबन्ध, दिनांक 42-40-2042 को निष्पादित एवं हस्ताक्षरित किया गया। उपर्युकतानुसार अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में भी विपक्षी द्वारा समान तथ्यों एवं अभिकथनों के आधार पर अपने आपत्ति-पत्र रेरा कम्प्लेन्ट पेज पर अपलोड एवं दाखिल किये गये हैं। रेरा एक्ट की धारा-48(॥) में प्राविधान है किः- "Section 36. Return of Amount and Compensation- (4) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building: - (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf
including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed." इस प्रकार आवंटी को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नही मिलता है, तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरणों में शिकायतकर्तागण द्वारा प्रश्नगत ace का भौतिक कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज तथा रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने का अनुरोध किया गया है। Page 0 of 5 नि E-Court अग्रणी शिकायतकर्ता द्वारा पत्रावली पर दाखिल उपलब्ध Serviced Studio Apartment Allottee(s) Arrangement, दिनांक ॥2--40-2042 के प्रस्तर-5.4 के अनुसार विपक्षी द्वारा अनुबन्ध निष्पादित किये जाने की तिथि से 48 माह + 06 माह ग्रेस पीरियड अर्थात् दिनांक 42-04-2047 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किये जाने का दायित्व था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक शिकायतकर्तागण को प्रश्नगत यूनिट्स का भौतिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, इस सम्बन्ध में सिविल अपील संख्या: 6649-50 // 2048, “Ms. Supertech Ltd. Versus Rajni Goyal” में मा. उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:-
"the period of Interest should close on April 2076 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 2046. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20I6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपर्युक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक, शिकायतकर्तागण विलम्ब ब्याज पाने क॑ अधिकारी होगें | अतः ऐसी स्थिति में अग्रणी शिकायतकर्ता को विपक्षी से दिनांक 42--04-2047 + 68 दिन (निस्तारण बिन्दु संख्या: 03 के अनुसार) अर्थात् दिनांक 20-06-2047 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा विधिक कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, मा. बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “Neelkamal Realtors Suburban Pvt. Ltd. Versus Union of India & Ors.” के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "Section 78(7)(8) lays down that if the promoter fails to complete or is unable
to give possession of an apartment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, = case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received Page I of 5 E-Court नम of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till = time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः saad निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर एवं आवंटी के बीच किये गये अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20I6 के अधीन दिनांक 42-40-2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 20:8 अधिसूचित की गयी हैं, जिसमें देय ब्याज दर भारतीय स्टेट बैंक द्वारा निर्धारित #८70+7 प्रतिशत निर्धारित की गयी है जिसे मा. उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा Re याचिका संख्या: सी: 9420 / 2020, “Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & Ors.” में भी उचित एवं विधिपूर्ण माना गया है। ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर McLR+ प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर @ प्रतिशत ज्यादा है, उचित एवं सही है। तदनुसार बिन्दु संख्या: 04 Pena किया जाता है। इसके अतिरिक्त विपक्षी, प्रमोटर को जो धनराशि शिकायतकर्तागण को अदा की जानी है, उसमें से आयकर अधिनियम का आधार लेकर टी.डी.एस. की कटौती नहीं कर सकता है, क्योंकि उक्त धनराशि को डिक्रिटल (ecretal) धनराशि के रूप में रेरा द्वारा शिकायतकर्ता के हक में प्रदान किया गया है। इस सम्बन्ध में मा. उच्च न्यायालय, हिमाचल प्रदेश द्वारा स्रीआर्डटी: बनाम हिमाचल प्रदेश आवास विकास परिषद 2077 SCC OnLine HP 5204 के मामले में निम्नवत् आदेश पारित किये गये:- “The following interesting questions arise for decision in the present case:
2. Whether, on the facts and in the circumstances of the case, the hon 'ble Tribunal was right in holding that the interest paid or credited by the Housing Board to its allottees (payees) was of capital nature and thus not subject to deduction of tax at source when as per law it is the recipient (payee) who can decide if a particular receipt (interest in this case) is of revenue or capital in nature 27 9. While taking this view we are relying upon the judgment of the apex court in Bikram Singh ५. Land Acquisition Collector (79979 224 ITR 557 (SC). In the case before the apex court, the question was whether the interest paid to the persons Page 2 of 5 whose land had been compulsorily acquired under sections 28 and 37 of the Land Acquisition Act was a revenue receipt or a capital receipt. The apex court held that though it was termed as interest on delayed payment, it was actually a revenue receipt and, therefore, the provisions of section 7944 of the Income tax Act would have no application. It would be pertinent to mention that the National Consumer Disputes Redressal Commission in Revision Petition No. 2244 of 7999 titled as Ghaziabad Development Authority v. Dr. N. K.Gupta (2002) 258 ITR 337 (NCDRO) under similar situation held that when the State Commission directed payment of interest to the allottees for delayed completion of flats the same did not fall within the purview of section 7944 of the Income-tax Act.
40, In the present case, the allottees had not given the money to the Board by way of deposit nor had the Board borrowed the amount from the allottees. The amount was paid under a self-financing scheme for construction of the flat and the interest was paid on account of damages suffered by the claimant for delay in completion of the flats. 44. In view of the above discussion, we answer both the questions in favour of the assessee and against the Revenue. The appeal is accordingly dismissed with no order as to costs.” इसी प्रकार मा. राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग द्वारा भी एस्टेट ऑफीसर ग्रेटर गोहाली क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण व अन्य बनाम गौरव FEAT, 2020 SCC OnLine | NCDRC 278 के मामले में समान न्यायिक सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया है। उपर्युक्त वर्णित दोनों मामलों में प्रतिपादित न्यायिक सिद्धान्त को पुनः मा. उच्च न्यायालय, बम्बई द्वारा भी wea राजकुमार सरोड़े व अन्य बनाम स्टेट ऑफ महाराष्ट्र व अन्य 2024 SCC OnLine Bom 2798 के मामले में दोहराया गया है। निर्णय के सुसंगत प्रस्तर निम्नवत् हैः-
28. Coming to the admitted facts of the present case we hold that the amounts payable being in effect a refund of the amounts paid by the petitioners to Respondents 4 to 7, along with compensatory interest thereon, such a relationship does not spell out a debtor-creditor relationship nor is the payment made by Respondents 4 to 7 to the petitioners one in discharge of any pre-existing obligation, so as to attract Section 2(28-A) of the IT Act. We are in respectful agreement with the judgment of the Kerala High Court in Beacon Projects (P) Ltd. v. CIT [Beacon Projects (P) Ltd. v. CIT, 2075 SCC OnLine Ker 78597/ which takes the same view, in facts similar to those that we are dealing with in the present matter. 29. In view of the above, we hold that the compliance of Respondents 4 to 7 with the schedule of payments under the consent terms dated 4-3-2027 and our order dated 4-3-20247, is to be made without making any deduction of tax at source. Respondents 4 to 7 are directed to pay to the petitioners the balance sum of Page 3 of I5 a E-Court Rs 5,05,989 deducted from the 5th instalment which became due on 20-7-202], in compliance with the consent terms, within a period of one week from today. जहाँ तक शिकायतकर्तागण को वित्तीय हानि तथा मानसिक उत्पीड़न एवं कष्ट आदि
मदों में क्षतिपूर्ति दिलाये जाने का प्रश्न है, तो उसका क्षेत्राधिकार रेरा प्राधिकरण की पीठ को प्राप्त नहीं है। अतः शिकायतकर्तागण क्षतिपूर्ति के लिए अपने वाद /परिवाद सक्षम प्राधिकारी / न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए स्वतन्त्र हैं। vs) उपर्युक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है:- आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण की यूनिट्स की समस्त सुविधाओं @l Serviced Studio Apartment Allottee(s) Arrangement / अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराते हुए, ओ.सी. / सी.सी. सहित प्रश्नगत यूनिट्स का विधिक भौतिक कब्जा देते हुए, शिकायतकर्तागण से देय स्टाम्पशुल्क प्राप्त कर, शिकायतकर्तागण के पक्ष में नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें। विपक्षी, अग्रणी शिकायतकर्ता (ईश्वर सिंह) को दिनांक 42-04--2047 + 68 दिन (निस्तारण बिन्दु संख्या: 03 के अनुसार) अर्थात् दिनांक 20-06-2047 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा विधिक कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक की अवधि के लिए, अग्रणी शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर ॥#८7/+7 प्रतिशत की दर विलम्ब ब्याज की धनराशि अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी | ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। सारणी में अंकित अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में Serviced Studio Apartment Allottee(s) Arrangement / अनुबन्ध के अनुरूप उपर्युक्तानुसार विलम्ब ब्याज की गणना की जायेगी।
alfas—i9 के कारण “फोर्स मैज्योर” पीरियड के दृष्टिगत, दिनांक 25-03-2020 से दिनांक 25-09-2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज प्रोमोटर द्वारा शिकायतकर्तागण को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्तागण से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(७४)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्तागण द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर Page 4 of 5 - कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद हि से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 5. विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण को ओ.सी. / सी.सी. सहित प्रश्नगत यूनिट्स का भौतिक कब्जा दिये जाते समय सभी चार्जेज Serviced Studio Apartment Allottee(s) Arrangement / अनुबन्ध के अनुसार प्राप्त करने के अधिकारी हैं। 6. विपक्षी आदेश अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के अन्दर आदेश का अनुपालन करना सुनिश्चित करें| 7. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर संलग्न की जायें एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। 8. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा |
9. शिकायतकर्तागण को यह भी निर्देशित किया जाता है कि यदि 45 दिनों के अन्दर विपक्षी द्वारा उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में शिकायतकर्तागण “er पोर्टल” के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन कराये जाने हेतु अनुरोध अपलोड कर, भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेगें। 0. पक्षकार अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। तद्नुसार पत्रावलियाँ दाखिल-दफ्तर हों | दिनांक: 28-04-2026, Page 5 of 5