Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Deepak Goyal v. M/s. Antriksh Engineers Private Limited
Complaint No. NCR144/10/114184/2023
- Decision date
- 2026-08-03
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | रेक्टिफिकेशन आदेश पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) कार्यवाही अन्तर्गत धारा-39 पीठासीन अधिकारी — श्री हरीश त्रिपाठी, न््यायनिर्णायक अधिकारी / प्रत्यायोजित अधिकारी मैसर्स अंतरिक्ष इंजीनियर्स प्रा. लि. (प्रमोटर) बनाम [क्र . शिकायत जे | ः आवंटीगण i [ —— — I. | Sect-39/2/NCRI44/0/0032/2022 | अचिन कुमार एवं पूजा निगम Paes, I/NCR I44/09/99592/2022 | TGA स्वरूप शर्मा एवं सुधीर शर्मा | Sect-39/ /NCR 44/0/ 484/2023 ि दीपक गौयल (4... 56०-39र#एटार44/09/99540/2022 | देव करन सिंह एवं माधुरी सिंह | | Sect-39/I/NCR44/09/99502/2022 | कुमारी निभा + = 7 iE Sect-39/ I/NCR 44/0/0I007/2022 मनोज कुमार Rig Sect-39/I/NCRI44/| /I03934/2022 | निखिल कुमार अग्रवाल एवं हर्षिता अग्रवाल | Sect-39/I/NCRI —— 09997I/2022 | सुमन शर्मा एवं दीपेन्द्र कुमार शर्मा (9. | Sect-39/I/NCRI44/09/0076/2022 |. यतीश कुमार झा एवं रश्मि झा 4 न Sect-39/ |# 0८९ 44/09/9947/2022 | विजय कुमार एवं श्रीमती राजश्री -+- = = a) ‘y सम्पदा (विनिययन एवं विकास) afr 2076 की Rar में TET शक्तियों का. IPT करते हुए ग्राषिकरण द्वार उ्रत्यायोजन के सम्बन्ध में (लिये wet निर्णय को आधार पर जारी कार्यालय ST स्रख्या-6364 /UP.RERA/Admin/Del. /5-87/2026-27 दिनांक ॥906.2026 के द्वाय ग्रत्यायोजित शक्तियों का TIT करते हुए प्श्नगत शिकायतों को निस्तारण किया जा रहा BI”
प्रस्तुत प्रार्थना पत्र आवेदक » विपक्षी (प्रमोटर) द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 20i6 की धारा-39 के अधीन इस पीठ द्वारा उपर्युक्त तालिका में अंकित शिकायतों में धारा-34 के अधीन पारित आदेश दिनांक 44.40.2025 में सुधार / संशोधन की प्रार्थना के साथ प्रस्तुत किया गया है। प्रमोटर का प्रार्थना पत्र धारा-39 के अन्तर्गत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पुकार पर प्रमोटर की ओर से विद्वान अधि क्र हुए। शिकायतकर्ता (आवंटीगण) की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री पी.के. राय उपस्थित हुए। प्रमोटर का कथन है कि मा. पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 44.40.2025 में पूर्णता / अधिभोग प्रमाण-पत्र प्राप्त होने अथवा कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किये जाने, जो भी बाद में हो, की अवधि तक MCLR + I% की दर से विलम्ब ब्याज का भुगतान किये जाने का आदेश पारित किया गया है, जबकि प्रमोटर द्वारा आवंटीगण को कब्जा फिट आउट पज़ेशन वर्ष 2024 में आदेश पारित होने से पूर्व ही दिया जा चुका था। इस आधार पर आदेश में संशोधन की प्रार्थना की गयी है। प्रमोटर के कथनों के विरुद्ध आवंटीगण की ओर से कहा गया कि आवंटीगण को विधिपूर्ण कब्जा नहीं दिया गया है। फिट आउट पजेशन विधिपूर्ण कब्जा नहीं माना जा सकता। परियोजना का पूर्णता/अधिभोग प्रमाण-पत्र आज तक प्राप्त नहीं किया गया है। बिना पूर्णता प्रमाण पत्र,/अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त किये विधिपूर्ण कब्जा प्रदान नहीं किया जा सकता।
मा. पीठ द्वारा उभयपक्षों को सुनने के पश्चात् गुण-दोष के आधार पर आदेश पारित किया गया है। मा. प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 44.0.2025 के क्रियान्वयन हेतु धारा-38,/40,/63 के अधीन कार्यवाही मा. प्राधिकरण के समक्ष विचाराधीन है। प्रमोटर द्वारा मात्र निष्पादन की कार्यवाही को विलम्बित करने एवं आवंटी को तंग व परेशान करने के उद्देश्य से संशोधन आवेदन प्रस्तुत किया गया है। इस आवेदन के माध्यम से प्रमोटर आदेश का पुनर्विलोकन तथा सारवान् भाग को परिवर्तित कराना चाहता है। धारा-39 के अधीन कोई पुनर्विलोकन अथवा सारवान् भाग का परिवर्तन नहीं किया जा सकता। उपरोक्त आधार पर आवेदन खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्षों के विद्वान अधिवक्तागण को सुनने तथा अभिलेख का अवलोकन करने से यह प्रतीत होता है कि मा. प्राधिकरण द्वारा उभयपक्षों को अभिवचन, साक्ष्य व सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान करते हुए धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश दिनांक 44.0.2025 के द्वारा 45 दिन के अन्दर पूर्णता/अधिभोग प्रमाण-पत्र प्राप्त होने अथवा कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किये जाने, जो भी बाद में हो, की अवधि तक MCLR + I% की दर से विलम्ब ब्याज भुगतान किये जाने का आदेश पारित किया गया है। विचारणीय प्रश्न उत्पन्न होता है कि gar आदेश दिनांक 44.40.2025 में आवेदन के माध्यम से वांछित संशोधन किया जा सकता है। आदेश में संशोधन / परिर्वतन के सम्बन्ध में रेश अधिनियम, 2046 की धारा-39 में प्रावधान किया गया है। धारा-39 के प्रावधानों को उद्धरत किया जाना समीचीन प्रतीत होता है। धारा-39 के प्रावधान निम्नवत् हैं :- wre, उसके द्वारा पारित किसी आदेश को aaa कर सकेगा और यदि पक्षकारों द्वारा उसके ध्यान में गलती लायी जाती है तो ऐसा संशोधन करेया।
परन्तु ऐसा कोई सरशोधन किसी आदेश के सम्बंध में जिसके विरुद्ध इस अधिनियम के अधीन अपील उरख़ुत की TH & नहीं किया जायेगा। weg यह कि प्राधिकरण अभिलेख से प्रकट किसी गलती का छुधार करते समय इस अधिनियम को उपबन्ध को अधीन पारित उसके आदेश को साखान् APT का संशोधन नहीं BRT | उपरोक्त आदेश उभयपक्षों को सुनकर गुण-दोष के आधार पर पारित किया गया है। रेरा अधिनियम के अन्तर्गत प्राधिकरण को अपने आदेशों के पुनर्विलोकन का अधिकार प्राप्त नहीं है। पुनर्विलोकन का अधिकार एक सांविधिक अधिकार होता है। यदि किसी संविधि में किसी न्यायालय / प्राधिकरण को पुनर्विलोकन की शक्ति प्रदान नहीं की गयी है, तो उस न्यायालय / प्राधिकरण द्वारा अपने आदेशों का पुनर्विलोकन नहीं किया जा सकता। धारा-39 के अन्तर्गत अभिलेख से प्रकट त्रुटियों को सुधारने / संशोधित करने का प्रावधान किया गया है। धारा-39 में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस धारा में प्रदत्त अधिकार का प्रयोग करते हुए आदेश का कोई ARAM भाग संशोधित /» परिवर्तित नहीं किया जा सकता। उपर्युक्त तथ्यों एवं परिस्थितियों से यह स्पष्ट है कि प्रमोटर सुधार /संशोधन हेतु प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के माध्यम से गुण-दोष पर पारित आदेश के सारवान् भाग में परिवर्तन कराना चाहता है, जो रेरा अधिनियम की धारा-39 की परिधि के अन्तर्गत नहीं आता है। ऐसी दशा में प्रश्नगत प्रकरणों में पारित आदेश दिनांक 44.0.2025 में संशोधन / सुधार किये जाने का कोई समुचित आधार नहीं है। उपरोक्त तथ्यों के आधार पर प्रमोटर का प्रार्थना पत्र स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है। अतः प्रमोटर द्वारा दिया गया संशोधन प्रार्थना पत्र खारिज किया जाता है। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाए।
आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। तद्नुसार पत्रावलियाँ दाखिल दफ्तर हों। हरीश त्रिपाठी (्यायनिर्णायक अधिकारी / प्रत्यायोजित उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page 3