Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Anup Shukla v. Eco Green Buildtech Private Limited
Complaint No. NCR144/10/114004/2023
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2025-05-30
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
डा आओ भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | आदेश अन्तर्गत धारा-34, पीठ-2 (पूर्व पीठ-+) | | अधिकारी :- श्री टी. dees, सदस्य शिकायत संख्या :- एटारा44/0/4004/2023 अनूप शुक्ला एवं श्याम जी शुक्ला बनाम मैसर्स gar ग्रीन बिल्डटेक प्रा. लि. प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्नगत यूनिट को पुनर्स्थापित कर कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना SIKKA KAAMYA GREENS के cfat—-Amber में दिनांक 07.44.2044 को 4" फ्लोर पर यूनिट संख्या-404 बुक करायी गयी थी। यूनिट का कुल मूल्य 24,89,063 //-- रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 42,4,3i2 //- रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि उक्त afte की बुकिंग वर्ष 2044 में करायी गयी थी और वर्ष 2047 तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु आज तक विपक्षी द्वारा यूनिट का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है और न ही कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किया गया है तथा विपक्षी द्वारा आंवटित यूनिट को निरस्त कर दिया गया है, जबकि उनके द्वारा 50 प्रतिशत धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया जा चुका है, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत यूनिट को पुनर्स्थापित कर भौतिक कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में a3 के अन्तर्गत विस्तृत शिकायत प्रस्तुत करते हुए कहा गया है कि विपक्षी द्वारा विकसित की जा रही परियोजना "SIKKA KAAMYA GREENS” के टॉवर-#79७ में 4" फ्लोर पर oes लिंक्ड प्लान के अन्तर्गत वर्ष 2044 में आवंटी श्री अनूप शुक्ला एवं श्याम जे शुक्ला को दिनांक 26.07.2044 को यूनिट संख्या-404 आवंटित की गयी थी। यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 24,89,063 /- रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा अब तक 50 प्रतिशत से अधिक 2988 4
धनराशि अर्थात 2,4,32,//- रुपये का भुगतान विपक्षी को किया जा चुका है, हालांकि बुकिंग के दौरान बिक्री के लिए कोई अनुबन्ध निष्पादित नहीं किया गया था और शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक 07.44.2044 को एक स्वागत पत्र जारी किया गया था। बुकिंग के समय विपक्षी द्वारा यह आश्वासन दिया गया था कि wat यूनिट का कब्जा दिसम्बर, 2047 + 6 माह की अनुग्रह अवधि में सौंप दिया जाएगा, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक उक्त टॉवर का निर्माण io" फ्लोर तक ही किया गया है, हालांकि स्वीकृत मानचित्र के अनुसार विपक्षी द्वारा टॉवर का निर्माण 2i* फ्लोर तक किया जाना है। इसके अतिरिक्त यह भी कहा गया है कि उनके द्वारा 2,4,3I2/— रुपये (लगभग 50%) का भुगतान विपक्षी को किये जाने के बावजूद भी विपक्षी द्वारा बिना किसी कारण के यूनिट को निरस्त करने के सम्बन्ध में शिकायतकर्ता को दिनांक 25.44.2024 को ई-मेल प्रेषित किया गया और आवंटित यूनिट को निरस्त कर दिया गया है, जबकि परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है और विपक्षी द्वारा बिना किसी सूचना के दिनांक 20.09.2023 को 2,50,000/- रुपये की धनराशि शिकायतकर्ता के खाते में ट्रांसफर कर दी गयी थी, जिसे शिकायतकर्ता द्वारा वापस कर दिया गया था, जिसका साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल है। उपर्युक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट को पुनर्स्थापित कर ओ-.सी. /सी.सी. सहित यूनिट का कब्जा एवं ४८ा,२+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में वकालतनामा, धारा-34 के अन्तर्गत लिखित शिकायत, स्वागत पत्र दिनांकित 07.4.2044, बुकिंग /आवेदन फॉर्म दिनांकित 26.07.204, ई-मेल पत्राचार, ई-मेल के माध्यम से यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 25.44.2024, मांग पत्र, विपक्षी को भुगतान की गयी धनराशि की रसीदें, चेक, खाता विवरण, परियोजना के फोटोग्राफ, परियोजना का स्थलीय निरीक्षण कराये जाने हेतु प्रार्थना पत्र दिनांकित 30.04.2024, लिखित बहस, फ्लैट क्रेता age दिनांकित 05.40.202, विपक्षी द्वारा प्रेषित यूनिट निरस्तीकरण के सम्बन्ध में अनुस्मारक पत्र दिनांक 46.40.2023, लिखित बहस आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। विपक्षी की ओर से लिखित जवाब प्रस्तुत करते हुए यह कहा गया कि शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 05.40.2024 को यूनिट संख्या-404 बुक करायी गयी थी, जिसका कूल मूल्य 24,89,063 /- रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 05.40.2024 को फ्लैट आवंटन अनुबन्ध हस्ताक्षरित किया गया था। उक्त यूनिट की बुकिंग कस्ट्रक्शन fies प्लान के अन्तर्गत की गयी थी। फ्लैट Ce Page 2 |
आवंटन अनुबन्ध दिनांक 05.40.2024 को विधिवत निष्पादित किया गया है और विपक्षी द्वारा रेश अधिनियम, 2046 की wRI-73 का उल्लंघन नहीं किया गया है, क्योंकि अनुबन्ध हस्ताक्षरित करते समय date की एक मूल प्रति शिकायतकर्ता को सौंप दी गयी eft) उक्त यूनिट के सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि के भुगतान में डिफॉल्ट किये जाने के कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को निरस्तीकरण पत्र दिनांक 25.44.2024 प्रेषित किया गया और शिकायतकर्ता को अपनी देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु अन्तिम अवसर प्रदान किया गया। इसके पश्चात् दिनांक 6.40.2023 को शिकायतकर्ता को अपनी बकाया धनराशि का भुगतान करने के लिए यूनिट निरस्तीकरण हेतु अनुस्मारक पत्र प्रेषित किया गया। विभिन्न अनुस्मारकों के बावजूद शिकायतकर्ता की ओर से डिफॉल्ट किये जाने एवं भुगतान न किये जाने के कारण विपक्षी द्वारा दिनांक 49.09.2023 को शिकायतकर्ता की यूनिट को निरस्त कर दिया गया। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि उनके द्वारा दिनांक 24.08.2023 को शिकायतकर्ता को 2,50,000/— रुपये की धनराशि वापस कर दी गयी है। उ.प्र. रेरा अधिनियम, 2048 के नियम 9.3 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि आवंटी द्वारा भुगतान में डिफॉल्ट किया जाता है तो धनराशि जब्त कर ली जाएगी। सिविल अपील संख्या-7588 / 20042 “सतीश बत्रा बनाम सुधीर wae" के मामले में मा. सर्वोच्च न्यायालय ने इसी तरह के तथ्यों के आधार पर बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय दिया था कि विक्रेता द्वारा प्रासंगिक खंड के अनुसार 7,00,000/— रुपये की धनराशि जब्त करना उचित था, क्योंकि अर्नेस्ट मनी मुख्य रूप से अनुबन्ध के उचित निष्पादन के लिए एक सुरक्षा थी और परिणामस्वरूप, विक्रेता जमा धनराशि जब्त करने का अधिकारी है। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा अनुबन्ध की शर्तों का उल्लंघन किया गया है और विभिन्न अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये जाने के बावजूद आज तक अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है, जिसके कारण विपक्षी को वित्तीय हानि हुई है, इसलिए अनुबन्ध के प्रस्तर-49 के अनुसार विपक्षी यूनिट के कुल मूल्य का 5 प्रतिशत धनराशि जब्त करने तथा अनुबन्ध की शर्तों के अनुसार शेष धनराशि बिना किसी ब्याज के वापस करने का अधिकारी है। उपर्युक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा प्रश्नगत शिकायत को खारिज कर शिकायतकर्ता को शेष धनराशि प्राप्त करने का निर्देश दिये जाने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित जवाब, ई-मेल के माध्यम से यूनिट निरस्तीकरण हेतु अनुस्मारक पत्र दिनांकित 46.40.2023, 20.09.2023, लेजर अकाउंट, फ्लैट आवंटन अनुबन्ध दिनांकित 05.40.2024, की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में लिखित बहस दाखिल करते हुए कहा गया कि विपक्षी द्वारा विकसित की जा रही परियोजना "SIKKA KAAMYA GREENS” के टॉवर-&7०' में 4" फ्लोर पर OSA fies प्लान के अन्तर्गत वर्ष 2074 में आवंटी श्री अनूप शुक्ला एवं श्याम जे शुक्ला को दिनांक 26.07.2044 को यूनिट संख्या-404 आवंटित की गयी थी। यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 24,89,065 /- रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा वर्ष 20:4-45 के मध्य 50 प्रतिशत से अधिक धनराशि अर्थात 2,4,3I2/- रुपये का भुगतान विपक्षी को किया जा चुका है, हालांकि बुकिंग के दौरान बिक्री के लिए कोई अनुबन्ध निष्पादित नहीं किया गया था और शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक 07.4.20i4 को एक स्वागत पत्र जारी किया गया था। विपक्षी द्वारा अधिक धनराशि की मांग की जा रही थी, उस समय परियोजना का निर्माण कार्य स्थगित था। यह भी उल्लेख करना उचित है कि यूनिट हेतु आवेदन दाखिल करने के समय शिकायतकर्ता से एक खाली बी.बी.ए. पर हस्ताक्षर कराये गये थे और विपक्षी द्वारा बुकिंग के लिए अस्थायी आवेदन के आधार पर दिनांक 25.44.2024 को यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी गयी। विपक्षी द्वारा परियोजना के टॉवर का निर्माण कार्य केवल t0dt मंजिल तक ही किया गया है, हालांकि स्वीकृत नकशा 24वीं मंजिल का है। शिकायतकर्ता द्वारा यह भी कहा गया है कि विपक्षी द्वारा यूनिट निरस्तीकरण हेतु अनुस्मारक पत्र दिनांक 46.40.2023 को प्रेषित किया गया और अंतिम निरस्तीकरण पत्र दिनांक 49.09.2023 को प्रेषित किया गया है तथा दिनांक 24.08.2023 को 2.5 लाख रुपये की धनराशि वापस कर दी गयी, जिसे शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी कंपनी को वापस कर दिया गया। उपर्युक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये गये हैं — 4... क्या शिकायतकर्ता द्वारा We प्लान के अनुसार धनराशि का भुगतान किया गया है अथवा नहीं और क्या यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है 2. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या- 4 Page 4 बिन्दु der-i इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लान के अनुसार धनराशि का भुगतान किया गया है अथवा नहीं और क्या यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है ? यह वाद बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है।
शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया कि विपक्षी द्वारा विकसित की जा रही परियोजना "SIKKA KAAMYA GREENS” के @fa’—Amber ¥ 47 फ्लोर पर कस्ट्रशन fees प्लान के अन्तर्गत वर्ष 2044 में आवंटी श्री अनूप शुक्ला एवं श्याम जे शुक्ला को दिनांक 26.07.20i4 को यूनिट संख्या-404 आवंटित की गयी थी। यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 24,89,063 /“- रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा अब तक 50 प्रतिशत से अधिक धनराशि अर्थात 2,4,3I2/— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया जा चुका है, हालांकि बुकिंग के दौरान बिक्री के लिए कोई अनुबन्ध निष्पादित नहीं किया गया था और शिकायतकर्ता के पक्ष में feta 07.44.2074 को एक स्वागत पत्र जारी किया गया था। बुकिंग के समय विपक्षी द्वारा यह आश्वासन दिया गया था कि उक्त यूनिट का कब्जा दिसम्बर, 20i7 + 6 माह की aque अवधि में सौंप दिया जाएगा, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक उक्त टॉवर का निर्माण io" फ्लोर तक ही किया गया है, हालांकि स्वीकृत मानचित्र के अनुसार विपक्षी द्वारा टॉवर का निर्माण 2% फ्लोर तक किया जाना है। इसके अतिरिक्त यह भी कहा गया है कि उनके द्वारा 2,4,3i2/- रुपये (लगभग 50%) का भुगतान विपक्षी को किये जाने के बावजूद भी विपक्षी द्वारा बिना किसी कारण के यूनिट को निरस्त करने के सम्बन्ध में शिकायतकर्ता को दिनांक 25.44.2024 को ई-मेल प्रेषित किया गया और आवंटित यूनिट को निरस्त कर दिया गया है, जबकि परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है और विपक्षी द्वारा बिना किसी सूचना के दिनांक 20.09.2023 को 2,50,000/— रुपये की धनराशि शिकायतकर्ता के खाते में ट्रांसफर कर दी गयी थी, जिसे शिकायतकर्ता द्वारा वापस कर दिया गया था, जिसका साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट को पुनर्स्थापित कर भौतिक कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी द्वारा लिखित जवाब प्रस्तुत करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 05.40.2024 को यूनिट संख्या-404 बुक करायी गयी थी, जिसका कुल मूल्य 24,89,063 /— रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 05.40.2024 को फ्लैट आवंटन अनुबन्ध हस्ताक्षरित किया गया था। उक्त यूनिट की बुकिंग कंस्ट्रक्शन fies प्लान के अन्तर्गत की गयी eff) फ्लैट आवंटन अनुबन्ध दिनांक 05.40.2024 को विधिवत निष्पादित किया गया है और Page 5
विपक्षी arr eer अधिनियम, 2046 की धारा-43 का उल्लंघन नहीं किया गया है, क्योंकि अनुबन्ध हस्ताक्षरित करते समय aay की एक मूल प्रति शिकायतकर्ता को सौंप दी गयी थी। उक्त यूनिट के सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि के भुगतान में डिफॉल्ट किये जाने के कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को निरस्तीकरण पत्र दिनांक 25.44.2024 प्रेषित किया गया और शिकायतकर्ता को अपनी देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु अन्तिम अवसर प्रदान किया गया। इसके पश्चात् दिनांक 6.40.2023 को शिकायतकर्ता को अपनी बकाया धनराशि का भुगतान करने के लिए यूनिट निरस्तीकरण हेतु अनुस्मारक पत्र प्रेषित किया गया। विभिन्न अनुस्मारकों के बावजूद शिकायतकर्ता की ओर से डिफॉल्ट किये जाने एवं भुगतान न किये जाने के कारण विपक्षी द्वारा दिनांक 49.09.2023 को शिकायतकर्ता की यूनिट को निरस्त कर दिया गया। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि उनके द्वारा दिनांक 24.08.2023 को शिकायतकर्ता को 2,50,000/— रुपये की धनराशि वापस कर दी गयी है। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा अनुबन्ध की शर्तों का उल्लंघन किया गया है और विभिन्न अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये जाने के बावजूद आज तक अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है, जिसके कारण विपक्षी को वित्तीय हानि हुई है, इसलिए अनुबन्ध के प्रस्तर-49 के अनुसार विपक्षी यूनिट के कुल मूल्य का 45 प्रतिशत धनराशि जब्त करने तथा अनुबन्ध की शर्तों के अनुसार शेष धनराशि बिना किसी ब्याज के वापस करने का अधिकारी है। उपर्युक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा प्रश्नगत शिकायत को खारिज कर शिकायतकर्ता को शेष धनराशि प्राप्त करने का निर्देश दिये जाने का अनुरोध किया गया है।
भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 की धारा-9.2 एवं धारा-9.3 निम्नलिखित उललेखित है :- "In case of Default by Promoter under the conditions listed above a non defaulting Allottee is entitled to the following: i, Stop making further payments to Promoter as demanded by the Promoter. If the Allottee stops making payments, the Promoter shall correct the situation by completing the construction milestones and only thereafter the Allottee be required to make the next payment without any interest; or ii. The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, Page 6 along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +496 unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: Provided that where an Allottee does not intend to withdraw from the Project or terminate the Agreement, he shall be paid, by the Promoter, interest at the rate prescribed in the Rules, for every month of delay till the handing over of the possession of the [Apartment/Plot], which shall be paid by the Promoter to the Allottee within forty-five days of it becoming due." धारा-9.3 :- "The Allottee shall be considered under a condition of Default, on the occurrence of the following events:
i. In case the Allottee fails to make payments for 2 (two) - consecutive demands made by the Promoter as per the Payment Plan annexed hereto, despite having been issued notice in that regard the Allottee shall be liable to pay interest to the promoter on the unpaid amount at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +7% unless provided otherwise under the Rules. The Promoter must not be in default to take this benefit; ii. In case of Default by Allottee under the condition listed above continues for a period beyond 3 (three) consecutive months after notice from the Promoter in this regard, the Promoter may cancel the allotment of the [Apartment/Plot] in favour of the Allottee and refund the money paid to him by the Allottee by deducting the booking amount and the interest liabilities and this Agreement shall thereupon stand terminated. The Promoter must not be in default to take this benefit; Provided that the Promoter shall intimate the Allottee about such termination at least thirty days prior to such termination." अनुबन्ध / आवंटन पत्र के नियम एवं शर्तों के अनुसार यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता द्वारा बुक करायी गयी यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 24,89,063 /— रुपये के सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा i2,4372/- रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया है, जिसे विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को प्रेषित Page 7 le
मांग पत्र दिनांकित 07.09.2046 में स्वयं स्वीकार किया गया है कि आज तक हमें शिकायतकर्ता से 22,44,372/- रुपये की धनराशि प्राप्त हुई है और उभयपक्षों के मध्य निष्पादित फ्लैट आवंटन अनुबन्ध दिनांकित 05.40.2024 के पृष्ठ संख्या-8 के अनुसार टॉवर के राफ्ट कास्टिंग प्रारम्भ किये जाने की तिथि से ३6 माह में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर कब्जा प्रदान किया जाना था। अनुबन्ध में टॉवर के राफ्ट कास्टिंग प्रारम्भ किये जाने की तिथि स्पष्ट नहीं है, परन्तु विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को प्रेषित मांग पत्र दिनांक 07.09.2046 में wre कास्टिंग प्रारम्भ किये जाने की तिथि 02.09.2045 अंकित की गयी है, ऐसी स्थिति में sar तिथि से कब्जा दिये जाने की तिथि की गणना करना न्यायोचित है, ऐसे में उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 04.09.2048 तक प्रश्नगत यूनिट का कब्जा पाने का अधिकारी था। विपक्षी द्वारा परियोजना से सम्बन्धित ऐसा कोई साक्ष्य दाखिल नहीं किया गया है, जिससे यह विदित हो सके कि उनके द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका हो। यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा अभी तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है।
यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी के लिखित उत्तर के अनुसार शिकायतकर्ता को ई-मेल के माध्यम से यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 49.09.2023 को प्रेषित किया गया था, जिसके उपरान्त दिनांक 46.0.2023 के यूनिट निरस्तीकरण हेतु अनुस्मारक पत्र प्रेषित किया गया है। यदि यह मान भी लिया जाए कि विपक्षी द्वारा दिनांक 49.09.2023 को यूनिट निरस्त की है, परन्तु फ्लैट आवंटन अनुबन्ध के अनुसार यूनिट का कब्जा दिये जाने की तिथि 04.09.2048 के 5 वर्ष उपरान्त यूनिट निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किया गया और न ही विपक्षी द्वारा अभी तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है। wera प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान न किये जाने की स्थिति में अनुबन्ध के अनुसार कब्जा दिये जाने की समयावधि में ही यूनिट को निरस्त करते हुए उसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि ब्याज सहित उन्हें वापस कर देते, परन्तु शिकायतकर्ता की जमा धनराशि ब्याज सहित विपक्षी द्वारा वापस नहीं की गयी। प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं अपनी यूनिट सरेन््डर /निरस्त नहीं करायी गयी है। विपक्षी द्वारा ऐसा को साक्ष्य दाखिल नहीं किया गया है, जिससे यह विदित हो सके शिकायतकर्ता द्वारा बुक करायी गयी यूनिट को किसी अन्य क्रेता को विक्रय किया जा चुका हो और वर्तमान समय में शिकायतकर्ता की यूनिट उपलब्ध न हो तथा परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका हो। वर्णित परिस्थिति में यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा किये गये शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया अवैधानिक /अपूर्ण है। रेर अधिनियम की ais के अन्तर्गत पक्षकारों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के अनुसार परियोजना पूर्ण किये Page 8
जाने में हुए विलम्ब की स्थिति में शिकायतकर्ता जमा धनराशि मय ब्याज प्राप्त कर सकता है अथवा यदि शिकायतकर्ता अपनी यूनिट का कब्जा लेने के इच्छुक हैं, तो वह अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर कब्जा प्राप्त करें। Tage बिन्दु dea-i Pena किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-2 निस्तारण बिन्दु संख्या-2 इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना "SIKKA KAAMYA GREENS" के टॉवर-&70० में 4/ फ्लोर पर कस्ट्रशन fees प्लान के अन्तर्गत वर्ष 2044 में दिनांक 26.07.2074 को यूनिट संख्या-404 बुक करायी गयी थी। यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 24,89,063 /- रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा अब तक 50 प्रतिशत से अधिक धनराशि अर्थात 2,4,3I2/— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया जा चुका है। बुकिंग के समय विपक्षी द्वारा यह आश्वासन दिया गया था कि उक्त यूनिट का कब्जा दिसम्बर, 20i7 + 6 माह की अनुग्रह अवधि में सौंप दिया जाएगा, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक उक्त टॉवर का निर्माण io” फ्लोर तक ही किया गया है, हालांकि स्वीकृत मानचित्र के अनुसार विपक्षी द्वारा टॉवर का निर्माण 2I* फ्लोर तक किया जाना है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट को पुनर्स्थापित कर भौतिक कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। रेरा एक्ट की धारा is () में प्राविधान है कि :-
Section 8 (4) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the ne Page 9 = received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
पत्रावली पर फ्लैट आवंटन अनुबन्ध दिनांक 05.40.2024 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जो उभयपक्षों के मध्य निष्पादित है, जिसके पृष्ठ संख्या-8 के अनुसार टॉवर के राफ्ट कास्टिंग प्रारम्भ किये जाने की तिथि से 36 माह में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर कब्जा प्रदान किया जाना था। अनुबन्ध में टॉवर के राफ्ट कास्टिंग प्रारम्भ किये जाने की तिथि स्पष्ट नहीं है, परन्तु विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को प्रेषित मांग पत्र दिनांक 07.09.20॥6 में wee कास्टिंग प्रारम्भ किये जाने की तिथि 02.09.2045 अंकित की गयी है, ऐसी स्थिति में उक्त तिथि से कब्जा दिये जाने की तिथि की गणना करना न्यायोचित है, ऐसे में उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 04.09.2048 तक प्रश्नगत यूनिट का कब्जा पाने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील Wo 6649-50 // 2048 “सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल“ में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance
after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 02.09.2048 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल Raced सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8()0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession, The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him {s not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत water व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 2(za) F प्राविधान है कि :- (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation.—For the purpose of this clause— (i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest
which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय पट्टा के लिए करार) नियमावली 2oi8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय /पदट्टा विलेख के प्रारूप के we 9 में प्रमोटर्स के Pore प्रकरण vents of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(9) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी wea 930) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी McLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है। इसके अतिरिक्त दिनांक 47.40.2048 को उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना Wea—740 / 8--3-48-65 विविध ,/ 46 के द्वारा मॉडल WA के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT: Page 2
#7,] Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ.प्र. wr अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-2 निस्तारित किया जाता है।
उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाऐ हैं — आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता की यूनिट को पुनर्स्थापित करते हुए, इस आदेश के अनुरूप माँग पत्र जारी कर, शिकायतकर्ता से अवशेष देय धनराशि प्राप्त कर, फ्लैट क्रेता अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी. / सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। Page 3 nn a । 2... विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 02.09.20I8 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने अथवा विधिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर | ४८ा,॥२+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| कोविड-49 के दृष्टिगत दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। 3. विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(७४)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्तागण द्वारा भी MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी |
4. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 206 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 5... शिकायतकर्ता को यह भी निर्देशित किया जाता है कि यदि 45 दिनों के अन्दर विपक्षी द्वारा उपरोक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता “रेरा पोर्टल” के माध्यम से आदेश का क्रिगानज्वगनग कराये जाने हेतु अनुरोध अगजोड कर, उसकी भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें । आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। तदूनुसार पत्रावली दाखिल-दफ्तर हो। उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page 44