Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Shubham Sharma v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/10/100576/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2026-03-28
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ- भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:- So दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या जो यूनिट | जमा धनराशि vo | wie oe | कब्जा दिये वांछित अनुतोष | सं० न0 सेल/लीज जाने की की तिथि तिथि है «| पटार4470/005762022 | शुभम शर्मा 3425 | 0 3,03,680/ | 24.03.20i4 | 42 माह यूनिट का तथा 03 कब्जा व माह अनुग्रह | विलम्बित अवधि के | अवधि का साथ अर्थात | ब्याज दिलाये दिसम्बर जाने का 2047 अनुरोध किया गया है। बनाम एटीएस रिएलटी प्रा. लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह शिकायत संस्थितःकी गयी है। वर्तमान प्रकरण से सम्बन्धित यूनिट पूर्व में आवंटी प्रमोद कुमार शर्मा व सह आवंटी शुभम शर्मा के नाम सैंआवंटित.हुई थी| तत्पश्चात मूल आवंटी प्रमोद कुमार शर्मा का दिनांक 24.04.2024”को मृत्यु हो गयी जिंसकें सम्बन्ध में राजकीय जिला संयुक्त चिकित्सालय नोएडा द्वारा दिनांक 22.0.2024 को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया है जो पत्रावली पर उपलब्ध है। मूल आवंटी प्रमोद कुमार शर्मा के मृत्यु उपरांत सह-आवंटी द्वारा प्रकरण में उपजिलाधिकारी-सदर, मुरादाबाद द्वारा दिनांक 09.05.2022 को जारी पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र दाखिल किया गया है जो पत्रावली पर उपलब्ध है। सह-आवंटी द्वारा पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र के अनुसार मूल आवंटी की पत्नी श्रीमती सरोज कुमार व पुत्री श्रीमती दीप्ति शर्मा का यूनिट के सापेक्ष कोई आपत्ति न होने का शपथ पत्र दाखिल किया गया है।
पीठ द्वारा दिनांक 24.:4.2024 को उपरोक्त प्रपत्रों के आधार पर मूल आवंटी प्रमोद कुमार शर्मा के नाम के स्थान पर शुभम शर्मा का नाम अंकित करने हेतु आदेश पारित किया गया। इसके अतिरिक्त पीठ द्वारा दिनांक 25.03.2025 को शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल अनुतोष संशोधन प्रार्थना पत्र पर उभयपक्षों को सुनने के 47 इ्वकूछ- उपरांत अनुतोष संशोधन प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए जमा धनराशि मय ब्याज के स्थान पर कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज का अनुतोष कम्पलेंट पेज पर अंकित करने का आदेश पारित किया गया। उक्त के अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा कम्पलेंट पेज पर अंकित धनराशि Bo 40,00,000,// के स्थान पर GO 34,03,680/ संशोधित किये जाने का प्रार्थना पत्र दिया गया जिसे पीठ द्वारा दिनांक 47.07.2025 को स्वीकार करते हुए धनराशि WO 40,00,000/ के स्थान पर रु0 37,03,680 / संशोधन किये जाने हेतु आदेशित किया गया। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE में यूनिट Gear 3425 बुक कराई गई। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष विपक्षी को धनराशि रु० 37,03,680/ का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन"में, आवंटन पत्र, कस्टमर लेजर, मूल आवंटी प्रमोद कुमार शर्मा GAY .प्रमाण पत्र। परिवार, सदस्य प्रमाण पत्र, शपथ पत्र-श्रीमती सरोज कुमार व श्रीमती दीप्ति शर्मा की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी. को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् a क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु0) ] विपक्षी द्वारा जारी कस्टमर लेजर 25.07.2022 BO 34,03,680 /
विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए यह अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाया है कि विपक्षी ने अनुबंधात्मक दायित्व (contractual Obligation) का उल्लंघन किया है जिस कारण इसका निस्तारण किये जाने का क्षेत्राधिकार सिविल कोर्ट का है। इस प्रकार वाद को निरस्त किया जाए। शिकायतकर्ता द्वारा लगाये गये आरोप का निस्तारण करने का क्षेत्राधिकार प्राधिकरण को नहीं है, जिसके समर्थन में हरियाणा अपीलीय न्यायालय चण्ड़ीगण द्वारा अपील संख्या 6 /20:8 समीर महावर बनाम एमजी हाउसिंग wo लि0 में पारित निर्णय का संदर्भ अंकित किया है। वर्तमान परिवाद शिकायतकर्ता ने गलत तथ्यों पर विपक्षी को परेशान किये जाने हेतु वाद दायर की है। शिकायतकर्ता द्वारा समय से धनराशि a 2 का भी भुगतान नहीं किया गया है। विपक्षी ने यह भी उल्लिखित किया है कि शिकायतकर्ता ने जो अनुतोष मांगा है वह अनुबंध के अनुरूप नहीं है जिस कारण परिवाद को निरस्त किया जाए। विपक्षी शिकायतकर्ता को समय अवधि के अन्दर यूनिट का कब्जा दिये जाने के लिए बचनबद्ध था परन्तु फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना में निर्माण कार्य बाधित हुआ है। विपक्षी ने फोर्स मैज्योर के सम्बंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 43029 /4985 एस.सी मेहता बनाम यूओआई में पारित आदेश दिनांक 04.4.2049 का संदर्भ अंकित किया है।
यह कहना गलत है कि विपक्षी की ओर से विलम्ब किया गया है बल्कि शिकायतकर्ता की ओर से समय से धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। यह भी उल्लिखित है कि शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया जा चुका है शिकायतकर्ता को धनराशि भुगतान किये जाने के लिए कई अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये परन्तु शिकायतकर्ता ने न तो धनराशि का भुगतान किया और न ही कब्जा लेने आया। अतः विपक्षी ने शिकायत*“को_ निरस्त किये जाने का अनुरोध किया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03. 2022, इंटीमेशन ऑफर ऑफ aster 30.03.2022 व अनुस्मारक पत्र की छायाप्रति दाखिल की गयी है। ह उभयपक्षो के तर्कों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 2. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या 4-: प्रश्न संख्या-। इस आशय का विरचित किया गया है कि an परियोजना फोर्स मैज्योर seca होने के कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी द्वारा परियोजना विलम्बित होने का कारण माननीय उच्चतम 3 जा... अं शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि :-
“ प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर एग्रीमेंट में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना जाएगा।” माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 / 4985, “M.C. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04—7:-20:9 4 निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities:take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance: of:the:Court’s:ordersand»to ensure that no such activity takes place.” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029,/4985 में पारित आदेश दिनांक 09-42-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “in the affidavit dated 05.2.2049, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
"42, That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” —a>! 4 Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.”
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक 04-4:-20i9 से दिनांक 44-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक 09-42-2049 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04-44-2049 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 दिन(66+2) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02-2020 तक Ua 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न््यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 feat 35% दिन अर्थात् 68 fea "निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका art ar का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त pifts—i9 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनांक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और- यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। ह
उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी कोविड-49 के कारण फोर्स, मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि an शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों का अवलोकन किया। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से विदित है कि शिकायतकर्ता व विपक्षी के मध्य दिनांक 24. 03.2044 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा 42 माह तथा 03 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात दिसम्बर 20:7 में यूनिट का कब्जा दिया जाना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। पत्रावली के अवलोकन से यह भी स्पष्ट है कि यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 30.03.2022 को जारी अधिभोग प्रमाण पत्र विपक्षी को प्राप्त हो चुका है। उसके उपरांत विपक्षी द्वारा दिनांक ॥4.04.2022 को शिकायतकर्ता के पक्ष में ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया जा चुका है जिसकी प्रति पत्रावली पर उपलब्ध है। ॥ उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि*विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 05 वर्ष से अधिक का विलम्ब किया गया है। चूंकि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का. ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध कियां गया है जिस कारण शिकायतकर्ता को ae का कंब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा।
जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील to 6649-50 ,/2048 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20I6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. | अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “Arora रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section | 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the»promoter to .pay..interest till such time as the apartment is handed over,to,him is'not unreasonable, " अतः उपरोक्त निर्णय*के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा/«क्योंकिप्रमोटर्स*द्वाराण्ठक्त«धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,पटटा के लिए करार) नियमावली 20:8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय ,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर o2(ii) 4 प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Ss Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: " यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी were 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को McLR+ Ufc की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता ह है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी McLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(28)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। है।
उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता आदेश विपक्षी को आदेशितकिया--जांता-है.-कि.-वह आदेश! पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनछके भीतरहशिकायत॒कर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र, अनुबंध के. अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी/सी.सी के साथ यूनिट का कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.04.2048 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि BO 34,03,680/0% MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 4 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 43029 / 4985 के अनुसार ) 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 8 oo 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा।
विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 206 की धारा (zai) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा Mcie+ प्रतिशत की ब्याज दर से. ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 206 की धारा-63 तथा SI YT Ma के अन्तर्गत दंडनीय होगा। पे | विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण, के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा oat, sami Sea आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। (=) a eee . ol 2० ७७, 2026 (डा०दीपक स्वरूप ernie) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर