Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Rajan Sadana v. Sikka Infrastructure Pvt Ltd
Complaint No. NCR144/10/0068/2019
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2020-02-06
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar. Bench-2 Present: Shri Balvinder Kumar, Member | Serial | Complaint No. | Complainant | Unit | Amount (Rs.) | |---|---|---|---|---| | 1 | NCR44/08/0076/20i9 | Rakesh Singh and Premlata Singh | 50[?] | 4,42,439/- | | 2 | NCRI44/08/0078/209 | Ravi Monga and Shalu [?] | [?] 202 | 36,28,648/- | | 3 | NCRI44/08/0087/209 | Dhundup Gyalpo | 0 | 20,40,044/- | | 4 | NCR44/08/0i03/209 | Ajay Kumar Sharma and Anjali Sharma | 202 | 32,34,07/- | | 5 | [?]44/08/035/209 | Sheetal Sharma | 30[?] | 24,96,022/-. | | 6 | [?]44/08/0249/209 | Pulkit Dutt Mathur | 04 | 38,44,024/- | | 7 | NCR44/08/025/20i9 | Ajit Singh Shishodia and Sangita Shishodia | 602 | 32,64,903/- | | 8 | NCRI44/08/0256/209 | Rakesh Kumar Sharma | 80[?] | 27,36,387/- | | [?] | NCRI44/08/0440/209 | Vinder Sondhi and Neetu Gandhi | 206 | 37,87,869/- | | [?] | 282[?]44/08/0444/209 | Gaurav Sharma and Neha Sharma | 005 | 33,3,777/- | | [?] | NCRi44/08/0449/209 | Nishant Garg and Garima [?] | 202 | 32,82,837/- | | 2 | NCR44/08/045/20i9 | Shiv Kumar and Reena [?] | 00[?] | 22,20,396/- | | 3 | NCR44/08/0464/20I9 | Santosh Kumar Verma | 202 | 3,53,809/- | | 4 | NCR44/08/0742/209 | Abhishek Singh and Poonam [?] | 004 | 29,32,07/- | | 5 | NCRI44/08/0842/209 | Aniruddh Ringe and Hema [?] | 06 | 27,2i,084/- | | 6 | [?]44/0/0068/209 | Rajan Sadana | 405 | 48,48,480/- | Versus Sikka Infrastructure Pvt. Ltd.
The complainants Rakesh Singh and Premlata Singh, along with 45 other complainants, have filed a suit against the opposite party. The facts in all these complaints are the same, and they have the same evidence. All these complaints relate to the project Sikka Karnam Greens. Therefore they are being disposed of by a single order. The complaint NCR44/08/0076/209 of Rakesh Singh and Premlata Singh shall be the lead case. The present complaint application has been filed by the complainant against the opposite party seeking possession and interest for the delayed period. In brief, the complainant states that they booked Unit No. 504 in the opposite party's project Sikka Karnam Greens, for which they paid Rs.4,42,439/- from time to time in installments. The opposite party was to hand over possession to the complainant by 28.04.2045, but possession has still not been given to date. The complainant also states that the project is delayed by more than 45 months. The complainant therefore requests possession and interest for the delayed period from the opposite party. In support of the statement, the complainant has filed photocopies of the complaint application, the flat allotment agreement, receipts of the deposited amount, and other documents.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | पीठ-2 उपस्थिति:-- श्री बलविन्दर कुमार, सदस्य | ferro | शिकायत संख्या शिकायतकर्ता ad aed धनराशि रु. /— fo सं0 l. |NCR44/08/0076/20i9 | राकेश सिंह एवं प्रेमलता सिंह | 50l | 4,42,439/- 2. | NCRI44/08/0078/209 रवि मोंगा एवं शालू FY 202 | 36,28,648/- 3. | NCRI44/08/0087/209 धुंडुप ग्यालपो | 0 | 20,40,044/- 4. |NCR44/08/0i03/209 | अजय कुमार शर्मा एवं अंजली | 202 | 32,34,07/- शर्मा 5. [टारा44/08/035/209 | शीतल शर्मा 30। | 24,96,022/-. 6. |टार44/08/0249/209 पुल्कित दत्त माथुर 04 | 38,44,024/- 7. |NCR44/08/025/20i9 | अजीत सिंह शिशोदिया एवं | 602 | 32,64,903/- संगीता शिशोदिया 8. | NCRI44/08/0256/209 राकेश कुमार शर्मा 80I 27,36,387/- al NCRI44/08/0440/209 विन्दर सोंघी एवं नीतू गांधी | 206 | 37,87,869/- 0. | २८२44/08/0444/209 गौरव शर्मा एवं नेहा शर्मा 005 | 33,3,777/- Il. | NCRi44/08/0449/209 | निशांत गर्ग एवं गरिमा wt | 202 32,82,837/- 2. | NCR44/08/045/20i9 | शिव कुमार एवं रीना wT =| 00i | 22,20,396/- 3. | NCR44/08/0464/20I9 | संतोष कुमार वर्मा 202 3,53,809/- 4. | NCR44/08/0742/209 | अभिषेक सिंह एवं पूनम Ris | 004| 29,32,07/- 5. | NCRI44/08/0842/209 | अनिरुद्ध रिंगे एवं हेमा RR 06 | 27,2i,084/- 6. | सटारा44/0/0068/209 राजन सदाना 405 | 48,48,480/- Page 4 “ = & सिक्का इंफ्रास्ट्रक्चर wo feo
शिकायतकर्ता राकेश सिंह एवं प्रेमलता सिंह : साथ 45 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान हैं और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें Sikka Karnam Greens परियोजना से सम्बंधित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत wo NCR44/08/0076/209 राकेश सिंह एवं प्रेमलता सिंह अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के fg कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Sikka Karnam Greens में यूनिट सं0-504 बुक किया गया था, जिसके लिए उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 4,42,439 / - रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया था। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 28.04.2045 तक कब्जा दिया जाना था, किन्तु आज तक कब्जा नहीं दिया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि परियोजना में 45 माह से अधिक का विलम्ब है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के fase कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में शिकायती प्रार्थना पत्र, फ्लैट आवंटन अनुबन्ध, जमा धनराशि की रसीदें आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। विपक्षी द्वारा प्रतिवाद पत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा आवंटित भूमि पर स्थित परियोजना के सम्बंध में विभिन्न वाद माननीय उच्च न्यायालय इलाहबाद में योजित किये गये थे, जिस 0५४५ SL
फोर्स मैज्योर की परिस्थिति उत्पन्न हुई, इस सम्बंध में नोएडा विकास प्राधिकरण को विभिन्न पत्र प्रेषित किये गये, जिससे कि भूमि का कब्जा पूर्ण रूप से मिल सके और परियोजना का निर्माण किया जा सके। शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना में फ्लैट सं०-504 बुक कराया गया था, जिसका क्रेता आवंटन अनुबन्ध दिनांक i9.07.20i3 को निष्पादित कराया गया था। टावर को परियोजना के निर्माण शुरू होने से 36 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ पूर्ण कर दिया जाना था, परियोजना में विलम्ब नोएडा प्राधिकरण एवं | के मध्य हुए विवाद के कारण हुआ। नोएडा प्राधिकरण द्वारा समय से परियोजना की भूमि का कब्जा भी नहीं दिया गया था। परियोजना में निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है और वह जुलाई 2020 तक कब्जा दे देंगे। परियोजना के फेस-4 का ओ.सी. प्राप्त किया जा चुका है और क्रेताओं को कब्जे हेतु ऑफर भी किया जा चुका है। प्रश्नगत परियोजना में यूनिट का कब्जा जुलाई 2020 तक दे दिया जाएगा। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचारणीय किये गये हैं :- 4... क्या force majeure होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव? 2 कया शिकायतकर्ता कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु सं0० 4 बिन्दु to 4 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्ट्स होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि कुछ अप्रत्याशित घटनाओं (force majeure events) (जैसे दंगा, आंदोलन, हडताल, औद्योगिक विवाद, # 5/४ Page 3
परियोजना पर सेवाओं एवं आपूर्ति का बाधित होना, सरकार का नीति परिवर्तन, न्यायिक wer आदेश, निर्णय व feat से कार्य बाधित होना, अनुज्ञप्ति व संस्तुतियों में होने वाला विलंब आदि) के कारण परियोजना विलंबित हुई, साथ ही यह भी कहा गया कि परियोजना किसानों के उग्र Wee, के कारण परियोजना प्रभावित हुई। विपक्षी की ओर से न तो यह कथन किया गया कि किन फोर्स मैज्योर की बाबत उसकी परियोजना विलंबित हुई और न ही फोर्स मैज्योर की बाबत कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल किया गया है जिससे की विदित हो कि परियोजना की भूमि पर कार्य बाधित था । इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 /20:7 विकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं wee i0 A फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature. उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें की युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्रकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई और विपक्षी ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। तद्नुसार बिन्दु to 4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु सं0 2 शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 28.04.2045 तक परियोजना पूर्ण कर कब्जा दिया जाना था, किन्तु अभी तक कब्जा नहीं दिया गया है, जिस कारण जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है, जिस पर विपक्षी द्वारा जुलाई 2020 में कब्जा दिये जाने की बात कही गयी है।
पत्रावली पर दाखिल फ्लैट आवंटन अनुबन्ध दिनांक 49.04.2043 के पृष्ठ सं0-8 के प्रस्तर-26 के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा निर्माण शुरू होने की तिथि से 36 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ कब्जा दिया जाना था। अनुबन्ध में निर्माण शुरू होने की तिथि अंकित नहीं की गयी है, परन्तु रेरा में परियोजना शुरू होने की तिथि 34.42.2072 दर्शायी गयी है। ऐसे में उक्त परियोजना निर्माण शुरू होने की तिथि 34.2.2042 के अनुसार कब्जे की तिथि की गणना की जानी उचित होगी =a ऐसी दशा में उपरोक्तानुसार कब्जे की तिथि 30.06.2046 होती है। यह स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है और ऐसे में शिकायतकर्ता दिनांक 04.07.2046 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर विलंबित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है fH:—
Section 8(])(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. aa: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि vooo रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Gat के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय ,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में कि फी८८ट Page 5 ८-2
Re विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें weax 9.2 (0) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को |४८ा॥२+! प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बंध में सिविल अपील सं0 6649-50 /20:8 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- " the period of Interest should close on April 20l6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has |
admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent -- Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो की तिथि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज WV ee 6 ड़ अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी. / सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि तक विलम्ब के लिए ब्याज पाने के अधिकारी ert) तद्नुसार बिन्दु संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। & 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण की यूनिट्स के समस्त सुविधाओं को आवंटन-पत्र / अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 34.07.2020 तक ओ.सी./सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें |
2... विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक o.07.20I6 से ओ.सी /सी.सी प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो, की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर ,४०,२+] प्रतिशत की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जाये। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरण में अनुबन्ध // आवंटन के अनुरूप उपरोकतानुसार गणना की जायेगी। 3. यह भी स्पष्ट किया जाता है कि रेरा अधिनियम 20i6 के धारा 2 (ai) के अन्तर्गत ब्याज को परिभाषित किया गया है कि रेरा लागू होने के बाद यदि कोई ब्याज दर आयंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आंवंटी को दिया जायेगा। 4. विपक्षी उपरोक्तानुसार कब्जा ऑफर पत्र ओ.सी. मिलने के उपरान्त जारी करना सुनिश्चित करे | ye Page 7 5. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस ओदश में प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन उ0प्र0भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्रावधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक:- 34,/ 04 / 2020 000८: (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page 8 |