Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Priyanka Bansal and Vibhor Goyal v. Ats Dreamzone Private Limited
Complaint No. NCR144/09/99876/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-01-05
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Gemini 3.8 Flash, Antigravity), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Bench-2 Order passed under Section 31 of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 2046 Present: Dr. Deepak Swaroop Saxena, Member Complaint No. Unit No. Deposited amount as per receipts on record Rs. Allotment date Possession date as per agreement Relief sought ISIN I44 / 09 / 99876 / 2022 ए-0240 Rs. 45,3,579/ 20.07.20i6 36 months + 6 months grace period, i.e., January 2020 Possession of the unit and interest for the delayed period requested Ekta Bansal and Vibhor Goyal Versus ATS Dreamzone Pvt. Ltd. The complaint has been instituted by the complainant against the opposite party seeking delivery of possession of the unit and interest for the delayed period. In brief, the complainant states that unit number ए-0240 was booked in the project ATS BOUQUET operated by the opposite party, against which payment of Rs. 45,34,579/- was made by the complainant to the opposite party. The complainant has requested delivery of possession of the unit and interest for the delayed period. In support of their complaint, the complainant has filed photocopies of the allotment letter, statement of account and receipts. The details of the amount paid by the complainant to the opposite party are as follows: 26.04.2022 Rs. 45,3,579 /
Filing a reply on behalf of the opposite party, it has been stated that the complainant has alleged that the opposite party has committed breach of contractual obligations, which is why jurisdiction to decide the same lies with the civil court. For this reason the suit should be dismissed. The Authority does not possess jurisdiction to decide the allegations made by the complainant, in support of which reference has been made to the judgment passed by the Haryana Appellate Tribunal, Chandigarh in Appeal No. 6/20i8 Sameer Mahawar v. MG Housing Pvt. Ltd. The present matter has been instituted by the complainant on incorrect facts to harass the opposite party. The complainant also failed to make payment of the amount on time. Letters dated 46.07.2024, 03.08.2024, 44.08.2024, 25.44.2024, 48.02.2022, 9.04.2022, 47.05.2022, 45.06.2022, 45.06.2022 and 43.09.2022 were sent to the complainant for payment of the amount, but the complainant did not pay the amount. Offer of possession has already been sent by the opposite party to the complainant. The opposite party had applied for OC on 24.42.209. The opposite party obtained the OC and offer of possession was sent again to the complainant on 06.04.202, but the complainant has not paid the remaining amount. Arguments of both parties were heard and the record was perused, on the basis of which the following questions are framed:
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-2 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:- Slo दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य शिकायत संख्या |... यूनिट न0 | पत्रावली पर आवंटन की | अनुबंधानुसार | aie उपलब्ध रसीद के तिथि कब्जा दिये अनुतोष अनुसार जमा जाने की धनराशि रु0 तिथि ISIN I44 / 09 / 99876 / 2022 का बंसल व. | ए-0240 | Go 45,3,579/ | 20.07.20i6 | 36 माह + 6 | यूनिट का विभोर गोयल माह अनुग्रह | कब्जा व अवधि अर्थात | विलम्बित जनवरी 2020 | अवधि का अनुरोध किया गया है बनाम एटीएस ड्रीमजोन प्राएलि0 शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु परिवाद संस्थित की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS BOUQUET में यूनिट संख्या ए-0240 बुक कराई गई, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को bo 45,34,579/- की धनराशि भुगतान की गई। शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने परिवाद के समर्थन में आवंटन पत्र, स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट व रसीदों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् हैः- 26.04.2022 BO 45,3,579 / विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए यह अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाया है कि विपक्षी ने अनुबंधात्मक दायित्व (Contractual Obligation) का उल्लंघन किया है जिस कारण इसका निस्तारण किये १ अप SS
जाने का क्षेत्राधिकार सिविल कोर्ट का है। इस कारण वाद को निरस्त किया जाए। शिकायतकर्ता द्वारा लगाये गये आरोप का निस्तारण करने का क्षेत्राधिकार प्राधिकरण को नहीं है, जिसके समर्थन में हरियाणा अपीलीय न्यायालय चण्ड़ीगण द्वारा अपील संख्या 6/20i8 समीर महावर बनाम एमजी हाउसिंग प्राएलि0 में पारित निर्णय का संदर्भ अंकित किया है। वर्तमान प्रकरण शिकायतकर्ता ने गलत तथ्यों पर विपक्षी को परेशान किये जाने हेतु दायर किया है। शिकायतकर्ता ने समय से धनराशि का भी भुगतान नहीं किया है। शिकायतकर्ता को धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु पत्र दिनांक 46.07.2024, 03.08.2024, 44.08.2024, 25.44.2024, 48.02.2022, 9.04.2022, 47.05.2022, 45.06.2022, 45.06.2022 व 43.09.2022 को प्रेषित किये गये परन्तु शिकायतकर्ता ने धनराशि भुगतान नहीं किया है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ पजेशन भेजा जा चुका है। विपक्षी ने दिनांक 24.42.209 को ओ.सी हेतु आवेदन कर दिया था। विपक्षी को ओ.सी प्राप्त हो गया और शिकायतकर्ता को दिनांक 06.04.202 को पुनः ऑफर ऑफ पजेशन भेजा गया लेकिन शिकायतकर्ता ने अवशेष धनराशि का भुगतान नहीं किया है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या 4 :- प्रश्न WeT- इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी?
शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गई तालिका में अंकित धनराशि पर विपक्षी की ओर से कोई आपत्ति नहीं की गई है। उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 20.07.2046 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ। आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा 36 माह तथा 6 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात जनवरी 2020 में प्राप्त होना था। i —- 7 2 पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन पत्र के अनुसार शिकायतकर्ता को जनवरी 2020 तक यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अनुसार यह भी स्पष्ट है कि परियोजना पूर्ण है और विपक्षी को अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 46.06.202 को प्राप्त हो चुका है जो पत्रावली पर उपलब्ध है। आवंटन के अनुसार शिकातकर्ता को जनवरी 2020 में यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था परन्तु शिकायतकर्ता को अभी तक यूनिट का कब्जा प्राप्त नही हुआ है। विपक्षी का कहना है कि विपक्षी को अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 46.06.202 को प्राप्त हो चुका है। vat तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना करीब 4.5 वर्ष विलम्बित रही है। शिकायतकर्ता की ओर से यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है जिस कारण शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील do 6649-50 /20i8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 20l6 when the Full
Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी.//सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is
unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः wet निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Sar के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक ॥7.0.208 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के TER 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9200) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India —_=>. 4 +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+IMia की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(28)00)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। इसके अतिरिक्त फोर्स मैज्योर पीरिएड के सम्बंध में समस्त सुसंगत तथ्यों पर विचारोपरान्त उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं. को पूर्ण करने हेतु दिनोक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है जिसमें विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार प्रश्न Wwe निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्न का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश i. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट का कब्जा फरवरी 2024 तक ओ.सी /सी.सी के साथ उपलब्ध कराना Yad करें एवं देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराना भी सुनिश्चित करें।
2. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि शिकायतकर्ता को दिनांक 04.02.2020 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि रु0 45,34,579/—48 थश८टा॥रका प्रतिशत की दर से ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर 5्ज्ि्छि पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा rai) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी McLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2076 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी ge यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। —— ah yw —7 = BS. ०१. 2924
(डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर