Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Prem Sachdeva v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/09/99602/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2023-12-07
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Bench-2 Order passed under Section 34 of the Real Estate (Regulation and Development) Act 2046 ORDER Present: Dr. Deepak Swaroop Saxena, Member
| Serial | Complaint No. | Complainant | Unit | Amount paid as per receipts (Rs.) | Date (as in table) | Possession period | Relief sought | |---|---|---|---|---|---|---|---| | [?] | NCR44/07/9769/2022 | Seema Meshram | — | 32,2,475 | 3.02.204 | 42 months + 3 months grace period | Unit possession and interest for the delayed period, i.e. interest up to November 2047 | | 2 | NCR44/08/98[?]9/2022 | Ashfaq [?] | 3044[?] | 29,43,434 | 07.04.204 | 42 months + 3 months grace period | Unit possession and interest for the delayed period, i.e. interest up to January 2048 | | 3 | NCR44/08/98388/2022 | Priyanka Rana | 7066 | 39,98,380 | 78.05.20i5 | 42 months + 3 months grace period | Unit possession and interest for the delayed period, i.e. interest up to February 2049 | | 4 | NCR44/08/98733/2022 | Srinivas Mallikarjuna Swamy | 04424[?] | 38,8,040 | 24.04.2044 | 42 months + 3 months grace period | Unit possession and interest for the delayed period, i.e. interest up to October 2047 | | 5 | [?]44/08/98729/2022 | Midu Buragohain [?] | 05146 | 48,08,375 | 30.07.20i5 | 42 months + 3 months grace period | Unit possession and interest for the delayed period, i.e. interest up to April 2049 | | [?] | [?]44/08/98730/2022 | Gaurav Sharma [?] | 04275 | 44,3,00 | 23.0420i5 | 42 months + 3 months grace period | Unit possession and interest for the delayed period, i.e. interest up to January 2049 | | 7 | NCR44[?]/08/98732/2022 | Amita [?] | [?]4084 / 60 | 33,96,637 | 49.08.204 | 42 months + 3 months grace period | Unit possession and interest for the delayed period, i.e. interest up to May 20:8 | | [?] | NCR44[?]/08/98752/2022 | Moni [?] | 06096 | 42,93,075 | 43.07.206 | 42 months + 3 months grace period | Unit possession and interest for the delayed period, i.e. interest up to October 2049 | | 9 | [?]4[?]0999602/2022 | Prem [?] | 2404[?] | 33,40,889 | 28.07.2074 | 42 months + 3 months grace period | Unit possession and interest for the delayed period, i.e. interest up to October 2047 | | [?] | NCR44[?]/08/987342022 | Siddharth Goyal | 3075 / 80 | 29,84,382 | 03.02.2074 | 42 months + 3 months grace period | Unit possession and interest for the delayed period, i.e. interest up to November 2047 |
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-2 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थितः- डा०दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य i —— > व क्रम शिकायत संख्या ः यूनिट पत्रावली पर आवंटन की अनुबंधानुसार | वांछित अनुतोष xio न0 | उपलब्ध रसीद के तिथि कब्जा दिये जाने अनुसार जमा की तिथि धनराशि रु0 J. | NCR44/07/9769/2022 सीमा मेश्रराम | रु0 32,2,475 / 3.02.204 42 माह + 3 यूनिट का माह अनुग्रह कब्जा व अवधि अर्थात विलम्बित अवधि नवम्बर 2047 का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। 2, | पटर44/08/98]9/2022 अशफाक a | 3044... रु0 29,43,434 / 07.04.204 | 42 माह +3 माह | यूनिट का अनुग्रह अवधि | कब्जा व अर्थात जनवरी | विलम्बित अवधि 2048 का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। 3. | पटर44/08/98388/2022 प्रियंका राणा 7066 | रु0 39,98,380 / 78.05.20i5 | 42 माह +3 माह | यूनिट का अनुग्रह अवधि | कब्जा व अर्थात फरवरी | विलम्बित अवधि 2049 का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया... गया है। 4. | NCRI44/08/98733/2022 श्रीनिवास 04424_| रु0 38,8,040 / 24.04.2044 42 माह +3 माह | यूनिट का मल्लिकार्जुन अनुग्रह अवधि | कब्जा व मल्लिकार्जुन स्वामी अर्थात अक्टूबर | विलम्बित अवधि 2047 का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। 5. | एटरा44/08/98729/2022 | fig बुरागोहैन_ | 05१46 | vo 48,08,375/ 30.07.20i5 | 42 माह +3 माह | यूनिट का अनुग्रह अवधि | कब्जा व अर्थात अप्रैल | विलम्बित अवधि 2049 का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
हु पटरा44/08/98730/2022 पु गौरव शम 04275 | रु० 44,3,00/ 23.0420i5 | 42 माह +3 माह | यूनिट का अनुग्रह अवधि | कब्जा व अर्थात जनवरी | विलम्बित अवधि 2049 का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया _| | गया है। \—7__| हटराबबा0898732022 अमिता ठ4084.._| 60 33,96,637 / 49.08.204 | 42 माह +3 माह | यूनिट का an ग्रह अवधि | कब्जा व अर्थात मई 20:8 | विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया ul गया है। ह गटराबबा/0898752/2022 ः 06096 | रु0 42,93,075/ 43.07.206 | 42 माह +3 माह | यूनिट का अनुग्रह अवधि | कब्जा व अर्थात अक्टूबर | विलम्बित अवधि 2049 का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया | | गया है। | 9. | एलरा4क0999602/2022 | पु ; 2404... BO 33,40,889 / 28.07.2074 | 42 माह +3 माह | यूनिट का अनुग्रह अवधि | कब्जा व । अर्थात अक्टूबर | विलम्बित अवधि 2047 का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। 0., | एटरा44/08/987342022 | सिद्धार्थ गोय 3075 | 80 29,84,382/ 03.02.2074 | 42 माह +3 माह | यूनिट का अनुग्रह अवधि | कब्जा व अर्थात नवम्बर | विलम्बित अवधि 2047 का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया _| iL —_ गया है। बनाम एटीएस रिएलटी प्रा0 feo शिकायतकर्ता सीमा मेश्रराम के साथ 9 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह सभी शिकायतों एक ही परियोजना ATS ALLURE से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- NCR44/07/9769/2022 सीमा मेश्रराम की पत्रावली अग्रणी वाद रहेगा। शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह परिवाद संस्थित किया गया है। — लर2-
संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE में saa तालिका में अंकित यूनिट बुक कराई गई, जिसके सापेक्ष तालिका में अंकित धनराशि विपक्षी को भुगतान की गई। शिकायतकर्तागण का कहना है कि विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण कर तालिका में अंकित तिथि तक यूनिट का कब्जा दिया जाना था परन्तु अभी तक नहीं दिया गया, जिस कारण शिकायतकर्तागण द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत दर्ज करायी गयी है। शिकायतकर्तागण द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र, स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट व रसीद की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् हैः- क्रम विवरण दिनांक / अन्य साक्ष्य भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु0) — मेश्रराम ra रु0 32,2,475 / स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट 2 शिकायतकर्ता-अशफाक वेग 05.04.20i8 BO 29,43,434 / wie विवरण-पेज 4-4 a शिकायतकर्ता-प्रियंका राणा 8६658//00757/5-46 |रु0 40,90,735 / Rete sie एकाउंट [fem ra 0 38,8,040/ मल्लिकार्जुन स्वामी Rete sie एकाउंट है शिकायतकर्ता-मीदू बुरागोह rR रु० 45,79,842 / Rete sip एकाउंट ऑन लाइन पेमेंट- 27.04.2022 BO 80,833/ ऑन लाइन पेमेंट- 29.04.2022 BO 4,47,20 / ऑन लाइन पेमेंट- 25.04.2022 रुए0. 99 / ऑन लाइन पेमेंट- 25.04.2022 रु 299/ रु0 48,08,375 / a = a रु0 44,3,00 / | स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट 7 शिकायतकर्ता-अम री BO 33,96,635 / स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट ड़ शिकायतकर्ता-मोनि FARA 0 40,69,444 / स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट
रसीद संख्या 00257 / 22-23 40.05.2022 BO 4,05,934 / रसीद संख्या 00928 / 45-46 40.05.2022 BO 4,48,000 / 0 42,93,075 | _| a शिकायतकर्ता-प्रेम स ra SO 33,40,886 / स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट - 40 eee | य FAR 0 29,84,382/ | Rete aie एकाउंट विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल हुए यह अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाया है कि विपक्षी ने अनुबंधात्मक दायित्व (Contractual Obligation) का उल्लंघन किया है जिस कारण इसका निस्तारण किये जाने का क्षेत्राधिकार सिविल कोर्ट का है। इस प्रकार वाद को निरस्त किया जाए। शिकायतकर्ता द्वारा लगाये गये आरोप का निस्तारण करने का क्षेत्राधिकार प्राधिकरण को नहीं है, जिसके समर्थन में हरियाणा अपीलीय न्यायालय चण्ड़ीगण द्वारा अपील संख्या 6/2048 समीर महावर बनाम एमजी हाउसिंग प्रा0 लिए में पारित निर्णय का संदर्भ अंकित किया है। वर्तमान प्रकरण शिकायतकर्ता ने गलत तथ्यों पर विपक्षी को परेशान किये जाने हेतु वाद दायर किया है। शिकायतकर्ता समय से धनराशि भी भुगतान नहीं किया है। शिकायतकर्ता ने प्राधिकरण के भिन्न-भिन्न पीठों में वाद दायर किया जो निरस्त किया जा चुका है। विपक्षी शिकायतकर्ता को समय अवधि के अन्दर यूनिट का कब्जा दिये जाने के लिए बचनबद्ध था परन्तु फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना में निर्माण कार्य बाधित हुआ है। यह कहना गलत है कि विपक्षी की ओर से विलम्ब किया गया है बल्कि शिकायतकर्ता की ओर से समय से धनराशि भुगतान नहीं किया गया है। यह भी उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया जा चुका है परन्तु शिकायतकर्ता के न आने पर कई अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये परन्तु शिकातकर्ता कब्जा लेने नहीं आया।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में ऑफर ऑफ पजेशन, अनुस्मारक पत्र, स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट एवं अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 की छायाप्रति दाखिल की गयी है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलमिबत हुई है? 2. क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न He प्रश्न eT इस आशय का विचरित किया गया है कि परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से लिखित जवाब में यह उल्लेख किया गया है कि एन.जी.टी, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश व कोविड-49 महामारी के कारण निर्माण कार्य बंद था। विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 43029,// 985 एम.सी मेहता बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया पारित आदेश का संदर्भ अंकित किया गया है। उक्त के संदर्भ में यह उल्लेख करना आवश्यक है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 ,// 2047 “बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य“ के निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं प्रस्तर 40 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया हैः- "Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature."
उपरोक्त फोर्स AR के परिभाषा से यह we है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्राकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में wfas-i9 महामारी के अतिरिक्त अन्य ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई है जिस कारण विपक्षी इस आधार पर लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। कोविड-49 महामारी के सम्बंध में उ0प्र०0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06. 2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदनुसार प्रश्न संख्या- निस्तारित किया जाता है| निस्तारण प्रश्न संख्या-2 प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? अग्रणी शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य आवंटन पत्र दिनांक 43.02.2044 को निष्पादित हुआ। आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 माह तथा 3 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात नवम्बर 20:7 तक प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है।
विपक्षी का कहना है कि फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना विलम्बित हुई है। विपक्षी का यह भी कथन है कि शिकायतकर्ता ने भिन्न ft Hel में वाद दायर किया है जो निरस्त हो चुका है परन्तु विपक्षी द्वारा इस सम्बंध में पीठ द्वारा पारित ऐसे किसी आदेश की प्रति दाखिल नहीं की गई है। वहीं दूसरी ओर विपक्षी का यह भी तर्क है कि शिकायतकर्ता को ऑफर आफ पोजेशन दिनांक 30.03.2022 को जारी किया गया जो अनुबंधानुसार कब्जा दिये जाने के तिथि से काफी पश्चात् का है। पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन पत्र के अनुसार अग्रणी शिकायतकर्ता को नवम्बर 2047 तक यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था तथा अन्य उक्त शेष शिकायतकर्तागण को तालिका में अंकित तिथि तक कब्जा प्राप्त होना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। = 6 पत्रावली पर उपलब्ध विपक्षी को यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण से प्राप्त अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 में यह अंकित है कि प्राधिकरण द्वारा मैसर्स एटी.एस Raed ग्रालि को yes संख्या पी-7. टी.एस-०2 सेक्टर 22 डी भ्रृखण्ड में जो भूमि माउच्च न्यायालय के स्थयनादेश से THAT है अथवा जो शूमि संस्था के पक्ष में पूर्ण,//विधिक रुप से हस्ताक्षारित नहीं & उस पर arched जारी नही किया जा रहा है परन्तु विपक्षी द्वारा सितम्बर 2022 में प्रस्तुत लिखित आपत्ति के प्रस्तर संख्या 45 में यह उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी को अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त है, परियोजना पूर्ण है और शिकायतकर्ता धनराशि भुगतान करके कब्जा प्राप्त कर सकता है।
उपरोक्त तथ्य से स्पष्ट है कि वर्तमान प्रकरण में माननीय न्यायालय द्वारा निर्गत कोई err (Stay) आदेश नहीं है तथा विपक्षी अपने जवाब में उल्लिखित कर रहे है कि परियोजना कब्जे के लिए तैयार है और शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा ले सकता है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 6 वर्षों से अधिक का विलम्ब किया गया है। चूंकि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्तागण यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने के अधिकारी है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील Wo 6649-50 /20i8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी aaa" माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- "the period of Interest should close on April 20l6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The ~~ अ_ृ|छ3. 7 Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of
her own delay in taking possession. " sud विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from ~ the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. "
अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.20:8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय ,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें ar 8 प्रस्तर 9.2(i) 4 प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+i9feet की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी ॥४८,₹+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(»०)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्तागण यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश . विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण को आवंटित यूनिट अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर जनवरी 2024 तक ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2. विपक्षी, अग्रणी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.2.2047 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि GO 32,24,475/ पर MCLR+] प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को जा 25 9
दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। उक्त तालिका में अंकित क्रम संख्या 2 से 0 तक शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में आवंटन पत्र,/अनुबन्ध के अनुरूप तालिका में अंकित कब्जा दिये जाने की तिथि के उपरांत से प्रत्येक शिकायतकर्ता के सम्मुख अंकित धनराशि पर उपरोकक्तानुसार ब्याज की गणना की जायेगी। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20I6 की धारा 2(20)0)के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। = Vo 8 Gz 2523 (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर 0