Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Manoj Kumar v. Solitaire Realinfra Private Limited
Complaint No. NCR144/09/97062/2022
- Decision date
- 2026-08-14
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 / 40 ,//63 सपठित नियम-24 44rd WAT:—NCR44/09/97062/2022 मनोज कुमार बनाम सॉलिटेयर रियलइंफ्रा प्राइवेट लिमिटेंड आदेश-पत्र दिनांक: 44.08.2026 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता स्वयं उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से उनके विद्वान अधिवक्ता श्री प्रमोद शर्मा उपस्थित हुए। प्रश्नगत शिकायत में माननीय पीठ-2 द्वारा नियमानुसार सुनवाई के उपरान्त दिनांक 24.4.2023 को निम्नवत आदेश पारित किये गये हैं:- l. Ww विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण को आवंटित यूनिट का अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर 3 जनवरी 2024 तक ail. सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें।
विपक्षी, अग्रणी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.42.2049 से ओ.सी / MAM अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि BO 54,92,45/—(60 एक्यावन लाख बानबे हजार एक Bl Gwe) पर ॥४टाएका प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम देय धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में आवंटन पत्र,/अनुबन्ध के अनुरूप उक्त तालिका में अंकित कब्जा दिये जाने की तिथि के उपरांत से प्रत्येक शिकायतकर्ता के सम्मुख अंकित धनराशि पर SRI ब्याज की गणना की जायेगी। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा 2(«०)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी 0॥२+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी | 4. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये।
5. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमनन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन . नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 24.44.2023 का अनुपालन नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-63 के अन्तर्गत vat आदेश के क्रियान्वयन हेतु प्रार्थना-पत्र दाखिल किया गया। उपरोक्त शिकायत में मा. पीठ-3 द्वारा दिनांक 08.04.2025 को धारा-63 के अन्तर्गत निम्न आदेश पारित किया गया है कि:- उक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी ने पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 24.44.2023 के क्रम संख्या ४ व 2” का अनुपालन नहीं किया है। उपरोक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए पत्रावली रेरा नियमावली 2046 के नियम-24 में निहित शक्तियों के अन्तर्गत आदेश दिनांक 24.7.2023 के क्रम संख्या 4 के अनुसार यूनिट के भौतिक कब्जे व रजिस्ट्री की कार्यवाही हेतु न््यायनिर्णायक अधिकारी, sues समक्ष सुनवाई हेतु दिनांक 47.03.2025 के लिए संदर्भित की जाती है। सचिव, उ.प्र.रेरा, पीठ द्वारा दिनांक 24.:4.2023 को asi, के अन्तर्गत पारित आदेश के क्रम संख्या 2 के अनुसार जमा धनराशि पर विलम्बित अवधि का ब्याज हेतु वसूली प्रमाण पत्र” जारी करने हेतु नियमानुसार कार्यवाही कर, पत्रावली को सुनवाई की तिथि 47.03.2025 से पूर्व न्यायनिर्णायक अधिकारी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
यदि न्याय निर्णायक अधिकारी नियम 24 की कार्यवाही के दौरान यह पाते है कि विपक्षी / प्रमोटर द्वारा आदेश अन्तर्गत धारा-34, दिनांकित 24.44.2023 का समयबद्ध रूप से अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है तो ऐसी दशा में न्याय निर्णायक अधिकारी प्रकरण में रेरा अधिनियम की धारा 63 की कार्यवाही किये जाने हेतु पत्रावली पीठ को वापस संदर्भित कर सकते है। तदोपरान्त अन्तर्गत धारा-38,/40,/63 के कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध न कराये जाने एवं रजिस्ट्री निष्पादित न कराये जाने के कारण मा. पीठ-3 द्वारा पारित आदेश दिनांक 08.04.2025 के अनुसार पत्रावली नियम-24 की कार्यवाही हेतु इस पीठ को संदर्भित की हा विपक्षी की ओर से प्रार्थना-पत्र दिनांकित 40.08.2026 इस आशय का दाखिल किया गया है कि शिकायतकर्ता की यूनिट को aot से मुक्त किया जाये, ताकि वह शिकायतकर्ता की यूनिट तैयार कर, शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा दे सके। शिकायतकर्ता को यदि विपक्षी द्वारा दाखिल प्रार्थना-पत्र दिनांकित 40.08.2026 के विरुद्ध कोई आपत्ति है, तो वह अपनी आपत्ति एक माह के अन्दर रेरा पोर्टल पर अपलोड एवं भौतिक रूप से रेरा कार्यालय में दाखिल कर सकता है। विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि वह vad परियोजना /यूनिट की ओ.सी. /सी.सी. रेरा पोर्टल पर अपलोड करें। यदि ओ.सी. / सी.सी हेतु आवेदन किया गया है, तो विपक्षी ओ.सी. / सी.सी. आवेदन की प्रति wr पोर्टल पर अपलोड करें। पत्रावली अग्रिम सुनवाई हेतु दिनांक 9.40.2026 को पेश हो । आर. पी. सिंह (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण