Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Sidharth Jain v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/09/81571/2021
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- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। पीठ-2 उपस्थिति :-- श्री बलविन्दर कुमार, सदस्य शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण यूनिट सं० | धनराशि रु०0/- ॥९८7२44/09/8375/202] राजीव भारद्वाज | 745 33,40,4/- NCRI44/09/8566/202] कुमार सं 0393 35,69,76/- NCR44/09/867/202 दीपाली गुप्ता 0476 33,37,045/- NCR44/09/8564/202I विनोद डोभाल 5093 37,76,040/- NCR44/09/856/202 रूचि यादव 04083 36,46,92/- पटारा44/09/8568/2027 मीर फरियाद हुसे 2202 34,60,00/- NCRI44/09/8569/202 राखी चनाना ४ 7062 33,39,406/- ि९7२44/09/8570/202] area 4 503 37,78,800/- | NCR44/09/8572/202 मनिक आनंद 057l 47,42,83/- NCR44/09/8574/202 सिद्वार्थ जैन 06074 39,25,286/- किया l. NCRI44/09/8574/202 ऋचा UT 095 38,5,305/- 2. NCRI44/08/80446/202 वंद प्रकाश गुप्ता 462 7,42,538/- 43. | NCRI44/04/73903/202I कंचन चौघरी 3205 33,40,944/- बनाम ए.टी.एस रियल्टी प्रा.लि. शिकायतकर्ता राजीव भारद्वाज के साथ 42 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन संभी शिकायतों के तथ्य समान हैं और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें "ATS ALLURE" परियोजना से सम्बन्धित हैं। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत Wo NCR44/09/8i375/202i राजीव भारद्वाज अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्द कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज वापस दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है।
संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना "ATS ALLURE" में यूनिट सं०- 7245 बुक किया गया था, जिसके लिए उनके द्वारा यूनिट की कुल कीमत 36,70,000/— रूपये के सापेक्ष समय-समय पर किश्तों के आधार पर 33,40,04/- रुपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि आवंटन पत्र दिनांक 43.02.2044 के पृष्ठ-7 के अनुसार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 43.08.2007 तक कब्जा दिया जाना था। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह बकाया धनराशि का भुगतान कब्जा दिये जाने के समय करेंगे। अतः शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज सहित वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र दिनांक 43,02.2074, खाता विवरण, वकालतनामा आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए कहा गया कि उभयपक्षों के मध्य अनुबन्ध हस्ताक्षरित किये गये थे, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता को सिविल कोर्ट में अपना वाद दर्ज कराना था। उपयुक्त वाद रेरा प्राधिकरण के क्षेत्राधिकार में नहीं आता है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध Ww Page 2
शिकायत दर्ज करायी गयी है। विपक्षी का कहना है कि सक्षम प्राधिकरण द्वारा उनको जमीन का कब्जा दिये जाने में विलम्ब किया गया, जिसके लिए विपक्षी द्वारा अनेक अवसरों पर सक्षम प्राधिकरण को पत्र के माध्यम से सूचित किया गया, जिसकी वजह से विपक्षी की परियोजना में निर्माण कार्य विलम्ब हुआ। विपक्षी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष जमीन का कब्जा न दिये जाने के सम्बन्ध में अपने इस वाद को दर्ज कराया गया था, जिसका आदेश दिनांक 28.05.2020 माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित किया गया, जिसमें कहा गया है कि सक्षम प्राधिकरण द्वारा जो भी कार्य किया गया है वह गैर-कानूनी है एवं उनके क्षेत्राधिकार से बाहर है। साथ ही साथ कानून का भी उल्लंघन है। विपक्षी का कहना है कि उनके ओर परियोजना में कोई विलम्ब नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता अनुबन्ध के प्रस्तर-7.2 जोकि फोर्स की बात करता है, जिससे शिकायतकर्ता पूरी तरह से अवगत है। विपक्षी की परियोजना afas—ig महामारी की वजह से परियोजना में विलम्ब हुआ। विपक्षी का कहना है कि फोर्स मैज्योर को ध्यान में रखते हुए परियोजना की पूर्ण करने की तिथि अभी समाप्त नहीं हुईं है एवं शिकायतकर्ता की शिकायत प्री-मैज्योर है। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचारणीय किये गये :- 4.... क्या force majeure events अर्थात विभिन्न कारणों से विपक्षी की परियोजना का निर्माण कार्य प्रभावित हुआ? यदि हां तो प्रभाव? an शिकायतकर्ता कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु to 4 बिन्दु सं? 4 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी
के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि कुछ अप्रत्याशित घटनाओं (force majeure events) (जैसे दंगा, आंदोलन, हडताल, औद्योगिक विवाद, परियोजना पर सेवाओं एवं आपूर्ति का बाधित होना, सरकार का नीति परिवर्तन, न्यायिक स्थगन आदेश, निर्णय व Rat से कार्य बाधित होना, अनुज्ञप्ति व संस्तुतियों में होने वाला विलंब आदि) के कारण परियोजना विलंबित हुई, साथ ही यह भी कहा गया कि परियोजना माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के कारण कारण परियोजना प्रभावित हुई। विपक्षी की ओर से न तो यह कथन किया गया कि किन फोर्स मैज्योर की बाबत उसकी परियोजना विलंबित हुई और न ही फोर्स मैज्योर की बाबत कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल किया गया हैं जिससे की विदित हो कि परियोजना की भूमि पर कार्य बाधित था | इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 ,// 2047 विकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं we r0 4 फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature. उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें की युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्रकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई और विपक्षी ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। तदनुसार बिन्दु सं० 4 निस्तारित किया जाता है। |
निस्तारण बिन्दु सं० 2 शिकायतकर्ता का कहना है कि आवंटन पत्र दिनांक 43.02.2044 के पृष्ठ-7 के अनुसार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 43.08.2007 तक कब्जा दिया जाना था। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह बकाया धनराशि का कि पक सती अजीत घी, Page 4 भुगतान कब्जा दिये जाने के समय करेंगे, जिस कारण कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र दिनांक 3.02.20i4 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जिसके पृष्ठ सं0-7 के प्रस्तर-7.2 के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा अपार्टमेंट का कब्जा 42 माह एवं 3 माह की अनुग्रह अवधि के साथ 45 माह में कब्जा दिया जाना था। उक्त आवंटन पत्र दिनांक 43.02.204 को उभयपक्षों द्वारा हस्ताक्षरित करते हुए निष्पादित किया गया था। ऐसे में उपरोक्तानुसार कब्जे की तिथि 43.09.2047 होती है। यह स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है और ऐसे में शिकायतकर्ता दिनांक 44.09.2047 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि पर विलंबित अवधि का ब्याज -पाने का अधिकारी है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रा.ललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:-
"Section 8(4)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interést is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the 7. Page 5 apartment is handed over to him is not unreasonable." अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि Ww के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा vad धनराशि का उपभोग किया गया है। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.0.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 208 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण
(Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2 (i) FY प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि :- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: " यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 93(i) 4 निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLRtH प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बंध में सिविल अपील to 6649-50 /20:8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल" में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
" The period of Interest should close on April 20l6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent ~ Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent ~ Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी.,/सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो, की तिथि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी. / सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी ae में हो, की अवधि तक विलम्ब के लिए ब्याज पाने के अधिकारी होगें। इसके अतिरिक्त दिनांक 47.40.2048 को उ0प्र0 शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 ,/ 8—3-8-65 विविध 46 के द्वारा मॉडल एग्रीमेन्ट के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
"7,] Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the casc may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to’ hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on F unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी कम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद vowo रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 20.05.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनांक 25.03.2020 से 6 माह की
अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25. 03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब का आंकलन नहीं किया जाएगा तथा इस हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं :- आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण की यूनिट्स की समस्त सुविधाओं को आवंटन-पत्र/अनुबन्ध पत्र के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 28.02.2022 तक ओ.सी./ सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय रटाग्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 44.09.2047 से ओ.सी»सी.सी प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो, की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जाये। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरण में अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक््तानुसार गणना की जायेगी। कोविड-49 की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु देश में हुए लॉकडाउन एवं फोर्स मैज्योरको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जाएगी। विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम 2046 के धारा 2
(ai) के अन्तर्गत ब्याज को परिभाषित किया गया है कि Rr लागू होने के बाद यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित ब्याज | Vi दर MCLR+I प्रतिशत है। Page 9 4... विपक्षी उपरोक्तानुसार कब्जा ऑफर पंत्र ओ.सी. मिलने के उपरान्त जारी करना सुनिश्चित करे। ह 5. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी | इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक :- 2' / 42 /2024 leek (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण ?०४8९0