Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Rahul Kapoor v. Homekraft Infra Private Limited
Complaint No. NCR144/09/123021/2024
- Decision date
- 2026-06-09
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 20:6 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:- Slo दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या ea यूनिट | जमा धनराशि रु0 Me फॉर | अनुबंधानुसार | वांछित ष सं० न0 सेल,//लीज | कब्जा दिये की तिथि जाने की तिथि l. | ४८२।44/09/2302/2024 | राहुल कपूर | 807 | रु0 82,27,342/ | 24.40.2049 | 30.06.2024 यूनिट का व विभा कपूर कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम होमक्राफ्ट इन्फ्रा प्रा.लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु.यह शिकायत-संस्थित की.गयी है।
संक्षेप में शिकायत्रकर्ता का कथन्न-है fh. विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना PIOUS HIDEAWAYS में यूंनिट संख्या 8074 बुक कराई गई, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी..को...धन्तराशि..रु0...82,27,342,/ का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत पृष्ठ पर उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा परियोजना मार्च 2024 में पूर्ण किया जाना था लेकिन अभी तक विपक्षी की परियोजना पूर्ण नहीं है। विपक्षी परियोजना को पूर्ण करने में असफल रहा है। विपक्षी को आज की तिथि तक ओ.सी /सी.सी प्राप्त नहीं हुआ है। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष 95 प्रतिशत देय धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट निरस्त किये जाने हेतु मांग पत्र भेजा गया जिसमें विपक्षी द्वारा अनुचित धनराशि की मांग की गयी। आवंटित यूनिट की कंसीडेरेसन अमाउंट रु0 86,5,343, के सापेक्ष पेमेंट प्लान के अनुसार धनराशि का भुगतान किया गया। विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिसम्बर 2023 तथा 06 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात जून 2024 में दिया जाना था परन्तु अभी तक | wo) wer) 7 विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा नहीं दिया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट We का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। है बा ल्ल्क्डट शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में एग्रीमेंट फार सेल, लिखित बहस, कस्टमर लेजर, आर टी आई रिपोर्ट व फिट आउट पजेशन की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि | संख्या (रु0) ’ विपक्षी द्वारा जारी कस्टमर लेजर 40.06.2024 रु0 82,27,342 /
विपक्षी के अधिवक्ता दिनांक 24.40.2024 को प्रकरण में पीठ के समक्ष उपस्थित हुए। विपक्षी को लिखित जवाब दाखिल किये जाने हेतु पर्याप्त अवसर दिये गये परन्तु विपक्षी द्वारा प्रकरण में लिखित जवाब दाखिल नहीं किया गया जिस कारण पीठ द्वारा दिनांक 9.4.2025 को विपक्षी का लिखित जवाब दाखिल करने का अवसर समाप्त कर दिया गया। तत्पश्चात विपक्षी द्वारा प्रकरण में लिखित बहस दाखिल किया गया। विपक्षी द्वारा दाखिल लिखित बहस में यह उल्लिखित किया गया है कि दिनांक रहित शिकायत में उल्लिखित प्रत्येक कथन,*आरोप, तर्क झूठा और निराधार होने के कारण अस्वीकारूकिया cates शिकायतकर्ता द्वारा माननीय प्राधिकरण को गुमराह करने के उद्देश्य से विपक्षी के विरूद्ध अचल सम्पत्ति विनियमन एवं विकास अधिनियम 2046 के-प्राविधानों..के अनुपालन-के.सम्बन्ध में विभिन्न प्रकार के झूठे और निराधार आरोप लगाए गये है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि रेरा अधिनियम की धारा 48 के अनुसार दायित्व केवल उन मामलों में उत्पन्न होता है जहां निर्धारित समय सीमा के भीतर विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा देने में विलम्ब
किया गया हो। शिकायतकर्ता को अनुबंध के अनुसार 30.06.2024 में यूनिट का कब्जा दिया जाना था। रेरा प्राधिकरण द्वारा परियोजना पूर्ण किये जाने हेतु विपक्षी को 09 माह का समय विस्तार किया गया। इस प्रकार कब्जा दिये जाने की तिथि 30.03.2025 थी और शिकायतकर्ता द्वारा वर्तमान शिकायत दिनांक 07.09.2024 को योजित की गयी है जिस कारण शिकायत प्री-मैच्योर की श्रेणी में है और निरस्त किये जाने योग्य है। शिकायतकर्ता द्वारा शर्तों के अनुसार देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायत से स्पष्ट होता है कि शिकायतकर्ता ने उन महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया है जो इस शिकायत के निस्तारण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अदालतों ने हमेशा उन शिकायतकर्ताओं 2 —_— ATES / te 2 ws)
पर कडी कार्यवाही की है जिन्होंने महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया है। इस सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा के.डी शर्मा बनाम स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया व अन्य में पारित आदेश का उल्लेख किया गया है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट संख्या so7i बुक करायी गयी थी जिसके सम्बन्ध में दिनांक 24.0.2049 को एग्रीमेंट फॉर सेल निष्पादित हुआ। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष रु० 82,39,375,/ का भुगतान किया गया है। विपक्षी द्वारा दिनांक 06.02.2020 को शिकायतकर्ता को अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु अनुस्मरण पत्र कोरियर के माध्यम से प्रेषित किया गया परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। इसके पश्चात विपक्षी द्वारा दिनांक 49.05.2020 को पुनः अनुस्मरण पत्र प्रेषित किया गया। तत्पश्चात विपक्षी द्वारा दिनांक 03.06.2020 को फाइनल नोटिस फॉर टर्मिनेशन जारी किया गया। तत्पश्चात विपक्षी द्वारा क्रमशः दिनांक 04.02.2022, 23.02.2022, 44.40. 2023 व 09.4.2023 को अनुस्मरण पत्र Ma fed गये परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि का भुगतान नहीं किया गया+॥ तत्पश्चात विपक्षी द्वारा दिनांक 29.4.2023 को शिकायतकर्ता को चेतावनी पत्र जारी किया गया। विपक्षी द्वारा दिनांक 04.09. 2024 को पुनः नोटिस फॉर टर्मिनेशन जारी किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा निरंतर अनुस्मरण पत्रों के अनदेखीं किये जाने के कारण विपक्षी द्वारा दिनांक 23.09.2024 को यूनिट निरस्त कर दी wet) विपक्षी द्वारा एग्रीमेंट टू सेल के क्लाज 9.3 का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा रेश अधिनियम की धारा 49(6) का उल्लेख किया गया है। अतः विपक्षी द्वारा उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आधार पर वर्तमान शिकायत निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता द्वारा लिखित बहस दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना Plous HIDEAWAYS में यूनिट संख्या 807 बुक करायी गयी थी। आवंटित यूनिट की कीमत रु० 86,5,343 /e जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा रु० 82,27,342,//का भुगतान किया गया है अर्थात 95 प्रतिशत देय धनराशि का भुगतान किया गया है। विपक्षी द्वारा अनुबंध के अनुसार दिसम्बर 2023 व 06 माह अनुग्रह अवधि के साथ जून 2024 में यूनिट का कब्जा दिया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष 3 —_—_=
केवल रु० 42300i/ar भुगतान किया जाना शेष था परन्तु विपक्षी द्वारा अवैधानिक रु0 44,0,838/ की मांग की जा रही है। विपक्षी द्वारा दिनांक 04.06. 2024 को ऑफर ऑफ फिट आउट पेजशन बिना ओ.सी /सी.सी के जारी किया गया। रेरा कार्यालय आदेश दिनांक 29.05.2024 के अनुसार विपक्षी द्वारा फिट आउट पजेशन भेजे जाने का कोई प्राविधान नहीं है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने, यूनिट पर तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित न किये जाने हेतु यथास्थिति बनाये रखे जाने हेतु अनुरोध किया गया है। उभयपक्षों के Tet Hr सुना गया। उभयपक्ष के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. क्या प्रश्नगत शिकायत प्री-मैच्योर की श्रेणी में है अथवा नहीं? 2. क्या विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का निरस्त किया जाना वैधानिक है अथवा नही? 3. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर Sor facia हुई है? 4. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या 4 -- प्रश्न संख्या । इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या प्रश्नगत शिकायत प्री-मैच्योर की श्रेणी में है अथवा नहीं? विपक्षी की ओर से लिखित जवाब में यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि विपक्षी द्वारा अनुबंध के अनुसार 30.06.2024 में यूनिट का कब्जा दिया जाना था
परन्तु afas-i9 महामारी के कारण रेरा प्राधिकरण द्वारा परियोजना पूर्ण किये जाने हेतु 0०9 माह का समय विस्तार किया गया जिस कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को मार्च 2025 में यूनिट का कब्जा दिया जाना था परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा वर्तमान शिकायत दिनांक 07.09.2024 को ही योजित कर दी गयी है जिस कारण वर्तमान शिकायत प्री-मैच्योर की श्रेणी में है। पत्रावली पर उपलब्ध एग्रीमेंट फॉर सेल/लीज दिनांक 24.40.209 का अवलोकन किया। एग्रीमेंट फॉर सेल/लीज के प्रस्तर संख्या 7. में यह अंकित है कि ” Schedule for possession of the said Apartment-The Promoter agrees and ane 4 understands that timely delivery of possession of the Apartment to the Allottee’s and the handover of the common areas to the association of apartment owners, is the essence of this Agreement. The promoter assures to hand over possession of the Apartment along with ready and complete common Areas with all specifications amentities and facilities of the project in Place by 30.06.2024. उपरोक्त से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा 30 जून 2024 में दिया जाना था। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में यह उल्लिखित किया गया है कि रेरा प्राधिकारण द्वारा 09 माह परियोजना पूर्ण किये जाने हेतु समय विस्तार किया गया है जिस कारण परियोजना पूर्ण होने की तिथि मार्च 2025 है। उक्त के सम्बंध में Re याचिका संख्या 2737,//2047 नीलकमल Raced सबअर्बन प्रा.लि. बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के उद्धरत प्रकरण में माननीय बम्बई उच्च न्यायालय द्वारा कहा गया है कि :-
" The provisions of २६१७, however;.do not rewrite the clause of completion.or handing over, possession in agreement»,for. sale,..Section..4(2)()(C) enables the promoter to give fresh time line independent of the time period stipulated in the agreements for sale entered into between him and the allottees so that he is not visited with penal consequences laid down Under RERA. In other words, by giving opportunity to the promoter to prescribe fresh time line under Section 4(2)(4)(0) he is not absolved of the liability under the agreement for sale" उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा के प्राविधान के अनुसार अनुबंध में दिये गये पूर्णता एवं कब्जे देने के WER का पुनर्लेखन नहीं किया जा सकता और किसी आवंटी विशेष के प्रकरण में समय सीमा की गणना बी.बी.ए के प्राविधानुसार होगी। रेरा पंजीकरण के समय दी गई नई समय-सीमा केवल रेरा अधिनियम के अधीन “पीनल कॉन्सीक्वेसिज' से ही बचा सकती है। स्पष्टतया समय सीमा की गणना अनुबंध पत्र के अधीन होगी एवं यह प्राविधान रेरा में दी गई Fresh Time Line की तिथि से “ओवररिटिन' नहीं होगी। पत्रावली पर उपलब्ध अनुबंध पत्र से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक 24.40.2049 को अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा जून 2024 में यूनिट का कब्जा दिया जाना था।
उक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि परियोजना पूर्ण करने की तिथि एवं आवंटियों को निष्पादित अनुबंध के अनुसार कब्जा दिये जाने की तिथि ft है ऐसे में उक्त आदेश का आधार लेते हुये निष्पादित अनुबंध पत्र को प्राथमिकता दिया जाना न््यायोचित होगा। इस प्रकार शिकायत प्री-मैच्योर की श्रेणी में नहीं है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2 -: प्रश्न संख्या 2 इस आशय का विरचित किया गया
है कि gar विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट को निरस्त किया जाना वैधानिक है अथवा नहीं? इसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से लिखित जवाब में यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को देय धनराशि का भुगतान*“किये जाने के लिए क्रमशः दिनांक 06.02.2020, 9.05.2020, 04.02.2022,°23.02.2022, 44:40.2023 व 09.44.2023 को अनुस्मरण पत्र प्रेषित किये गये । परन्तु शिकायत्॒कर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। तत्पश्चात विपक्षी द्वारा दिनांक 03.06.2020 को फाइनल नोटिस, दिनांक 04.09.2024 को पुनः मांग पत्र प्रेषित किये गये फिर भी शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। विपक्षी द्वारा दिनांक 29.:4.2023 को चेतावनी पत्र जारी किया गया फिर भी शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। तत्पश्चात विपक्षी द्वारा दिनांक 23.09.2024 को आवंटित यूनिट अंतिम रूप से निरस्त कर दी गयी। उक्त के सम्बन्ध में भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय /पद्टा के लिए करार) नियमावली, 20i8 की धारा 9.2 (i) ) में यह प्राविधानित है कि :- धारा 9.2 In case of Default by Promoter under the conditions listed above a non defaulting Allottee is entitled to the following: iy Stop making further payments to Promoter as demanded by the Promoter. If the Allottee stops making payments, the Promoter shall correct the situation by completing the construction milestones and only thereafter the Allottee be required to make the next payment without any interest; or 6 OSS
उक्त प्राविधान के अनुसार प्रमोटर द्वारा देय धनराशि की मांग किये जाने पर आवंटी अगला देय धनराशि का भुगतान करना बंद कर देता है तो प्रमोटर निर्माण के सभी चरणों को पूरा करे तब उसके बाद ही आवंटी को बिना किसी ब्याज के अगला भुगतान करना होगा। उक्त के सम्बन्ध में यह स्पष्ट किया जाता है कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट कन्सट्रक्शन लिंक प्लान के अन्तर्गत यूनिट बुक करायी गयी थी और आवंटित यूनिट की कुल कीमत रु0 82,39,3975,/ थी जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा रु० 82,27,342/ का भुगतान किया जा चुका है। पत्रावली पर उपलब्ध अनुबंध पत्र के अवलोकन से यह भी विदित है कि पेमेंट प्लान शैड्यूल- ५ के अनुसार आवंटित यूनिट की कुल कीमत रु0 82,39,375/थी जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा रु० 82,27,342,/का भुगतान किया जा चुका है जो कुल कीमत के काफी मात्रा में है। उक्त से स्पष्ट है कि विपक्षी का यह कथन कि शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है*संधारणीय. नहीं है। उक्त के अतिरिक्त-विपक्षी:द्वारा.-दिन्नांक 04.06.2024 को ऑफर ऑफ फिट आउट पजेशन जारी कियाछगया sect पत्रावली पर उपलब्ध है। इस सम्बन्ध में BIRT द्वारा जारी कार्यालय आदेश दिनांकित 29.05.2024 के अनुसार फिट आउट OR पजेशन जारी किये जाने का कोई प्राविधान नहीं है जिस कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को जारी किया गया फिट आउट wR पजेशन दिनांकि 04.06.2024 वैधानिक नहीं है। इसके अतिरिक्त पत्रावली पर उपलब्ध आरटीआई ऑनलाइन दिनांकित 07.0.2025 के अवलोकन से यह भी विदित है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 9.04.2024 को ओ.सी हेतु आवेदन किया गया था जो दिनांक 04.02.2024 को निरस्त कर दिया गया है।
उपरोक्त वर्णित तथ्यों से यह स्पष्ट हो रहा है कि विपक्षी के पक्ष पर शिकायतकर्ता को समय सीमा के अन्दर यूनिट का कब्जा न दिये जाने का दोष है तथा विपक्षी को कब्जा दिये जाने की निर्धारित अवधि में ओ.सी / सी.सी प्राप्त नहीं हुआ था। इस प्रकार विपक्षी अपने ही दोष का लाभ नहीं ले सकता है। अतः ऐसी स्थिति में विपक्षी शिकायतकर्ता को समय से कब्जा निर्धारित अवधि में न देने कारण 7 व शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट की कुल कीमत के सापेक्ष काफी मात्रा में धनराशि अदायगी कर देने के कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त किया जाना उपरोक्त रेरा अधिनियम के प्राविधान के अनुरूप वैधानिक नहीं है। तद्नुसार प्रश्न संख्या 2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 3-: प्रश्न संख्या-3 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने के कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि :- “ प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर एग्रीमेंट में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम Maes Et पारित sears कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी.बाद में-हो ) को विलम्ब की अवधि माना जाएगा।”
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 / 985, “M.C. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04—-44-20:9 4 निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court's order and to ensure that no such activity takes place. ” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029 ,//4985 में पारित आदेश दिनांक 09-42-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “in the affidavit dated 05.2.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
"2, That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (20i8) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust 8 —_— control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed. ‘a
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक 04-7:-209 से दिनांक 44-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक 09-42-2049 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04-44-2049 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 दिन(66+2) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02-2020 तक Ura 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न््यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त. वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्बलके-लिए-विपक्षी, जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। पाने का अधिकारी है। 6 इसके अतिरिक्त pifls—i9 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी कोविड-49 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तद्नुसर प्रश्नग सख्या 3 निस्तारित किया जाता है। ——— 2 निस्तारण प्रश्न संख्या 4-: प्रश्न संख्या-4 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 24.40.2049 को एणग्रीमेंट or सेल निष्पादित हुआ जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा दिनांक 30.06.2024 में यूनिट का कब्जा दिया जाना था परन्तु विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अभी तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया और न ही विपक्षी द्वारा परियोजना के सापेक्ष ओ.सी /सी.सी प्राप्त होने का कोई साक्ष्य उपलब्ध कराया गया है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में लगभग 02 वर्ष का विलम्ब किया गया है। चूंकि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये>जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा। ; ः जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील vo 6649-50 ,// 208 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी Were माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः-
"the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20I6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent - Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल Raced waar प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- OO i0 "'Section | 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing
over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें Morse के. रूप में दिये गये विकय,पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9*में vated a डिफाल्टं "प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें wea.oa(ii), प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "चाल Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +]% unless provided otherwise under the
Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: i यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ४८टा,२+प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी McLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। a. है £ है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट को पुर्नस्थापित करते हुए शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की प्लॉट आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं।
विपक्षी शिकायतकर्ता को विलम्ब ब्याज दिनांक 04.07.2024 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि Bo 82,27,342,// पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी.| ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 3 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 43029,//985 के अनुसार ) 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 206 की धारा 2(2०)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को fear जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी Mcie+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के 2 पा कल बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा।
विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। नि (a है ser ome Ss Sj (Slo दीपक स्वरूप WRT) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामकं«प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर 43