Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Saurabh Vohra v. Spire Techpark Pvt. Ltd
Complaint No. NCR144/09/113396/2023
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2026-09-18
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (for the complainant)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित - Slo दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या | यूनिट न0 जमा धनराशि रु0 fic टू अनुबंधानुसार | वांछित do सब लीज कब्जा दिये अनुतोष की तिथि जाने की तिथि पर एिलकराग्राठग्राउठठ65025 | सौरम वोहरा [F-5-542 | Bo 52,54,979/ | 77.03.205 | 42 माह तथा | जमा 42 माह धनराशि > अनुग्रह अवधि | वापस के साथ दिलाये अर्थात जाने का सितम्बर अनुरोध 2049 किया गया है। बनाम स्पायर टेक पार्क प्रा.लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध जमा धनराशि वापस दिलाये जाने हेतु यह शिकायत योजित की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता-काःकहज्ना-है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना WTC Noida-Riverside Residences(#! यूनिट संख्या #5-532 बुक कराई गई थी जिसके एवज में शिकायतकर्ता> द्वारा विपक्षी को. धनराशि wo 52,54,979 / का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत पृष्ठ पर यह उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा वर्ष 2049 में दिया जाना सम्भावित था परन्तु विपक्षी की परियोजना में निर्माण कार्य बंद है जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा रेरा अधिनियम की धारा i के अनुसार जमा धनराशि वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में एग्रीमेंआ टू सब-लीज व एप्लिकेंट लेजर की छाया प्रतियां दाखिल की गई है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- क्रम विवरण | दिनांक भुगतान की गई धनराशि [संख्या (रु0) 4 विपक्षी द्वारा जारी | एप्लिकेंट लेजर 09.2.2024 रु0 52,5,979 /
विपक्षी दिनांक 49.02.2024 को उपस्थित हुए। विपक्षी को लिखित जवाब दाखिल करने हेतु पर्याप्त अवसर प्रदान किये गये परन्तु विपक्षी द्वारा लिखित जवाब दाखिल नहीं किया गया जिस कारण पीठ द्वारा दिनांक 40.02.2025 को विपक्षी का लिखित जवाब दाखिल करने का अवसर समाप्त कर दिया गया। पीठ द्वारा दिनांक 03.06.2026 को पत्रावली विपक्षी के विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही हेतु अग्रसारित की गयी। शिकायतकर्ता की एकपक्षीय बहस सुनी गयी। उपरोक्त वर्णित तथ्यों के कारण पत्रावली में एकपक्षीय निर्णय पारित किया जा रहा है। शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल प्रपत्रों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न विरचित किये गये :- ॥ . क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं ? तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 2. क्या शिकायतकर्ता को जमा धनराशि-वापसँ*दिलायी जा सकती है? निस्तारण प्रश्न संख्या-4 :- प्रश्न tent इस तथ्य परः विरचित है कि क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध ted दायरेःमें नहीं आते है तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित*किये जाने पर रेरा के wea लागू नहीं होगें ? इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745-6749 // 2024 “मैसर्स =a प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स wo fo बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :-
"54. From the scheme of the Act 20I6, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on- going projects and future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 206." उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर 2 न कट अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आर्ब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका पंजीकरण संख्या- UPRERAPRIZISS है। अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईंग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तद्नुसार प्रश्न संख्या-॥ निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या sa आशय का विरचित किया गया है
कि क्या शिकायतकर्ता को जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है? शिकायतकर्ता की ओर से कथन किया गया है कि विपक्षी की परियोजना विलम्बित है जिस कारण. उसके <द्वारा..जमा धनराशि को; वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। is विपक्षी की ओर से प्रकरेण में ct feat जवाब दाखिल किया गया है और न ही विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण होने के सम्बन्ध में कोई साक्ष्य दाखिल किया गया है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से विदित है कि उभयपक्षों के मध्य दिनांक 47.03.2045 को एगीमेंट टू सब-लीज निष्पादित हुआ जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा 42 माह तथा 42 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात सितम्बर 2049 में शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था परन्तु अभी तक विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। उपरोक्त से स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना लगभग 06 वर्ष से अधिक विलम्बित है। विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण होने के सम्बन्ध में ओ.सी /सी.सी की प्रति दाखिल नहीं किया गया है। इससे यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना पूर्ण नहीं है जिस कारण शिकायतकर्ता परियोजना में बने रहना नहीं चाहते है। 3 a | ऐसी स्थिति Fr अधिनियम की os 8(॥) में यह प्राविधानित है कि :- "Section 8 () “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,
in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf: including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed". उपरोकतानुसार यदि प्रोमोटर करार-के feat के अनुसार उसमें दिये गये अवधि तक समय से किसी अपार्टपेन्ट, भू-खंण्ड या ya py पूरा करने में असमर्थ रहता है या कब्जा देने में असमर्थ रहता हे, तो वह उपलब्ध किसी अन्य उपचार पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना आवंंडी की मांग पर यदि आवंटी परियोजना से बाहर होना चाहता है, तो प्रकरण के अनुसार, उस wee, भू-खण्ड या भवन के सम्बन्ध में उससे प्राप्त धनराशि ब्याज सहित लौटाने का दायी होगा। इसके अतिरिक्त इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि “माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील to 3482,/2049 कोलकाता वेस्ट इंटरनेशनल सिटी प्रा.लि. बनाम देवाशीष war’ में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"It would be manifestly unreasonable to construe the contract between the parties as requiring the buyer to wait indefinitaly for possession.by 206, nearly seven year has elapsed from the date of agreement. Even according to the developer, the completion certificate was received on 29 March 206. This was nearly seven years after the extended date for the handing = over of possession prescribed by the agreement. A buyer can be expected to wait for possession for a reasonable period. A period of seven years is beyond what is reasonable. Hence, it would have been manifestly unfair to non-suit the buyer merely on the basis of the first prayet in the reliefs sought before the SCDRC. There was in any event a prayer for refund. " इसी क्रम में “माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सिविल अपील Wea—i2238 / 208 पायनियर ada लैन्ड एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड बनाम गोविन्द wean” में भी अभिनिर्धारित किया गया है कि-:
"We see no illegality in the Impugned Order dated 23.0.20I8 passed by the National Commission. The Appellant - Builder failed to fulfill his contractual obligation of obtaining the Occupancy Certificate and offering possession of the flat to the Respondent — Purchaser within the time stipulated in the Agreement, or within a reasonable time thereafter. The Respondent — Flat Purchaser could not be compelled to take possession of the flat, even though it was offered almost 2 years after the grace period under the Agreement expired. During this period, the Respondent — Flat Purchaser had to service a loan that he had obtained for purchasing the flat, by paying Interest @0% to the Bank. In the meanwhile, the Respondent — Flat Purchaser also located an alternate property in Gurugram. In these circumstances, the Respondent — Flat Purchaser was entitled to be granted the relief prayed.for, i.e. refund of the entire amount deposited by himwith Interest." उपरोक्तानुसार दी गयी विधि व्यवस्था«में गृहक्रेता को एक उचित समय तक प्रतीक्षा करायी जा सकती है व लम्बे, विलम्ब की स्थिति में पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त होने के उपरान्त भी शिकायतकर्ता जमा. धनराशि पाने का अधिकारी है क्योंकि अनुबन्ध में दी गयी अवधि के अनुसार शिकायतकर्ता को कब्जा नहीं मिला है व प्रकरण में अत्यधिक विलम्ब हुआ है।
अतः उपरोक्त वर्णित तथ्यों के परिशीलन से यह विदित है कि विपक्षी की परियोजना लगभग 06 वर्ष से अधिक विलम्बित है और विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण होने के सम्बन्ध में ओ.सी/सी.सी की प्रति दाखिल नहीं किया गया है जिस कारण शिकायतकर्ता परियोजना में बने रहना नहीं चाहते है। उपरोक्त कारणों से शिकायतकर्ता जमा धनराशि मय ब्याज सहित पाने का अधिकारी है। जहां तक शिकायतकर्ता को मय ब्याज धनराशि वापस किये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment 5 —_——_s
due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is Compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable,"
अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। इसके अतिरिक्त Re संख्या-८.५० .3289/2020 दिनांक 06.02.2020 “war बिल्डवेल कस्ट्रक्शन्स mo लि0 बनाम पूनम सूद एवं अन्य” में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि उ0प्र0 भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) नियमावली, 2048 “की. प्रस्तर 9,24). के SRA प्रोमोटर की ओर से विलम्ब किये जाने की स्थिति Ford Sea अनुबन्ध को समाप्त करने का विकल्प होगा एवं इस स्थिति में प्रोमोटर "भारतीय स्टेट बैंक” के होम लोन दर धटा॥ए+] प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर-से-45 दिनों-में-समस्त-जमा-धनराशि वापस करने के लिए उत्तरदायी होगा। साथ ही साथ उच्च न्यायालय द्वारा MCLRH प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर को उचित एवं मान्य माना गया है। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा . (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 474020I8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय पट्टा के लिए करार) नियमावली ... 20:8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें दिये गये विक्रय ,/पट्टा विलेख के प्रारूप के हु on 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें WER 9.2(0) में water के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:-
"The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal 6 =_——= Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +I% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ॥४८॥२+ प्रतिशत की ब्याज दर पर धनराशि वापस दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। तदूनुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता हैं :- आदेश 4... विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के अन्दर शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि wo 52,5,979 // (रु० बावन लाख एक्यावन हजार नौ सौ उन्यासी) जमा किये जाने की तिथि से भुगतान किये जाने की तिथि तक मय McLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की aa शिकायतरकर्ता को वापस भुगतान करना सुनिश्चित करें। “ ह 2. इस आदेश का उल्लघंन भूं-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63-तथा अन्य 'सुसंगत-प्राविधानों -के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 3 favelt द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिनों में नहीं किया जाता है तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन करा सकेगे। 4 आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए।
YG 6 4.32824 - (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) कह सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर