Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Rajnee Singh v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/09/100078/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-01-05
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Bench-2 Order passed under Section 3[?] of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 2046 Present: Dr. Deepak Swaroop Saxena, Member | Complaint No. | Unit No. | Amount as per receipts on file (Rs.) | Date of allotment | Possession period as per agreement | Relief sought | |---|---|---|---|---|---| | [?]440900078/2022 | RR 6203 | 35,66,880/ | 27.04.20i5 | 42 months + 3 months grace period, i.e. January 2049 | Possession of the unit and interest for the delayed period | vs. ATS Realty Pvt. Ltd. The present complaint petition has been filed by the complainant against the opposite party seeking possession of the unit and interest for the delayed period. In brief, the complainant's case is that the unit mentioned in the above table was booked in the project ATS ALLURE run by the opposite party, and the amount mentioned in the table was paid to the opposite party against it. The complainant states that the opposite party was to complete the project and hand over possession of the unit by the date mentioned in the table, but possession has not been given so far. Due to this, the complainant has filed this complaint against the opposite party under Section 34 of the Real Estate (Regulation and Development) Act.
In support of the statement, the complainant has filed photocopies of the allotment letter, statement of account and receipts. The details of the amount paid by the complainant to the opposite party are as follows: as per the statement of account, the complainant, Rajni Singh, has paid Rs. 35,66,880/. In its reply, the opposite party stated that the complainant has alleged that the opposite party breached its contractual obligation, for which the jurisdiction to decide lies with the civil court, and that the complaint should therefore be dismissed. The opposite party stated that the Authority does not have jurisdiction to decide the allegations made by the complainant, and in support it cited the judgment passed by the Haryana Appellate Court, Chandigarh, in Appeal No. 6 /20i8, Sameer Mahawar vs. MG Housing Pvt. Ltd. The opposite party stated that the complainant has filed the present case on incorrect facts to harass the opposite party. The complainant also has not paid the amount on time. The complainant has filed suits before different Benches of the Authority, which have already been dismissed. The opposite party was committed to handing over possession of the unit within the time period, but due to force majeure, construction in the project was obstructed.
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-2 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-3॥ के अन्तर्गत पारिंत आदेश उपस्थित:ः- डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य [wa | शिकायत संख्या —_ * पत्रावली a «| आवंटन की | कब्जा दिये | | ष् ao | उपलब्ध रसीद के | तिथि जाने की तिथि सं0 अनुसार जमा धनराशि रु0 ._| हिलरा440900078/2022 | | RR 6203 | 60 35,66,880/ | 27.04.20i5 | 42 माह + 3 का माह अनुग्रह कब्जा व अवधि अर्थात विलम्बित अवधि जनवरी 2049 | का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया __ गया है। is बनाम एटीएस रिएलटी प्रा0 लि0 प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE में उक्त तालिका में अंकित यूनिट बुक कराई गई, जिसके सापेक्ष तालिका में अंकित धनराशि विपक्षी को भुगतान की गयी। शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण कर तालिका में अंकित तिथि तक यूनिट का कब्जा दिया जाना था परन्तु अभी तक कब्जा नहीं दिया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत दर्ज करायी गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र, स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट व रसीद की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् हैः- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गईं धनराशि संख्या (रु0) a शिकायतकर्ता-रजनी सिंह री रु0 35,66,880 / स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट
विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए यह अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाया है कि विपक्षी ने अनुबंधात्मक दायित्व (Contractual Obligation) का उल्लंघन किया है जिस कारण इसका निस्तारण किये जाने का क्षेत्राधिकार सिविल कोर्ट का है। इस प्रकार वाद को निरस्त किया जाए। शिकायतकर्ता द्वारा लगाये गये आरोप का निस्तारण करने का क्षेत्राधिकार प्राधिकरण को नहीं है, जिसके समर्थन में हरियाणा अपीलीय न्यायालय चण्ड़ीगण द्वारा अपील संख्या6 /20i8 समीर महावर बनाम एमजी हाउसिंग प्राएलि0 में पारित निर्णय का संदर्भ अंकित किया है। वर्तमान प्रकरण शिकायतकर्ता ने गलत तथ्यों पर विपक्षी को परेशान किये जाने हेतु दायर किया है। शिकायतकर्ता द्वारा समय से धनराशि का भी भुगतान नहीं किया है। शिकायतकर्ता ने प्राधिकरण की fafa det में वाद दायर किये जो निरस्त किये जा चुके है। विपक्षी शिकायतकर्ता को समय अवधि के अन्दर यूनिट का कब्जा दिये जाने के लिए वचनबद्ध था परन्तु फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना में निर्माण कार्य बाधित हुआ है। यह कहना गलत है कि विपक्षी की ओर से विलम्ब किया गया है बल्कि शिकायतकर्ता की ओर से समय से धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। यह भी उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया जा चुका है। शिकायतकर्ता के न आने पर कई अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये परन्तु शिकायतकर्ता कब्जा लेने नहीं आया। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में ऑफर ऑफ पजेशन, अनुस्मारक पत्र, स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट एवं अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 की छायाप्रति दाखिल की गयी है। उभयपक्ष के Tal Hl सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये गये :-
4. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 2. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या-4 प्रश्न संख्या-। इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु ee! 2 विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से लिखित जवाब में यह veers किया गया है कि एन.जी.टी, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश व कोविड-49 महामारी के कारण निर्माण कार्य बंद om) विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 73029 /4985 एम.सी मेहता बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया पारित आदेश का संदर्भ अंकित किया गया है। उक्त के संदर्भ में यह उल्लेख करना आवश्यक है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940,/2047 “बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य” के निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं प्रस्तर 440 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया हैः- "Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature."
उपरोक्त फोर्स मैज्योर की परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्राकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में aifas-i9 महामारी के अतिरिक्त अन्य ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई है। TIS—t9 महामारी के सम्बंध में Goo रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनांक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार प्रश्न संख्या-4 Prana किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2:- प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य आवंटन पत्र दिनांक i8.4420i5 को निष्पादित हुआ। आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 माह तथा 3 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात अगस्त 2049 तक प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी का कहना है कि फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना विलम्बित हुई है।
विपक्षी का यह भी कथन है कि शिकायतकर्ता ने fr भिन्न पीठों में वाद दायर किये है जो निरस्त हो चुके हैं परन्तु विपक्षी द्वारा इस सम्बंध में पीठ द्वारा पारित ऐसे किसी आदेश की प्रति दाखिल नहीं की गई है। वहीं दूसरी ओर विपक्षी का यह भी तर्क है कि शिकायतकर्ता को ऑफर आफ पोजेशन दिनांक 30.03.2022 को जारी किया गया जो अनुबंधानुसार कब्जा दिये जाने की तिथि से काफी पश्चात् का है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अनुसार यह भी स्पष्ट है कि परियोजना पूर्ण है और विपक्षी को अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 को प्राप्त हो चुका है तथा शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक 30.03.2022 एवं 44.04.2022 को ऑफर ऑफ पजेशन( जिसमें दिनांक 30.03.2022 को ओ-सी प्राप्त होना अंकित है) जारी करने के उपरांत कब्जा लेने हेतु कई अनुस्मारक पत्र भेजे गये जिसकी प्रति पत्रावली पर उपलब्ध है। इस प्रकार विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 4 वर्षों से अधिक का विलम्ब किया गया है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्ता विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने के अधिकारी है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील Wo 6649-50 ,/ 208 "'सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल/'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer जा ee 4
Complaint, wherein she has admitted that the Appellant Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20I6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी.,//सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल Raced सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete ot is
unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is " not unreasonable. अतः: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 206 के अधीन दिनांक 47.:0.20i8 को भू-सम्पदा 5 -——-
(विनियमन और विकास) (विकय /पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय ued विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +][% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I9feed की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+I प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश
i. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर फरवरी 2024 तक ail. सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2. विपक्षी, अग्रणी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.02.2049 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा — Oe 6 जमा धनराशि BO 35,66,880/ पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 206 की धारा Azaige अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा aT MCLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा।
विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। we ke [pti 3. el. VueFt (डा०दीपक स्वरूप WaT) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर