Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
RashmiDeepChand Jaiswal v. Futureworld Greenhomes Pvt. Ltd
Complaint No. NCR144/08/98170/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
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- Not recorded
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- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, , क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित : Slo दीपक स्वरूप सक्सेना,सदस्य क्रम सं0 शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण | यूनिट 0 जमा धनराशि GO एग्रीमेंट = सेल की तिथि वांछित अनुतोष ]४८०२44/08/98]70/2022 रश्मि दीप चंद | 67#-42 जयसवाल BO 3,65,000 / 25.09.208 यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। NCR44/08/9872/2022 रश्मि दीप चंद | LG-0l जयसवाल रु0 24,00,000 / 25.09.208 यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम नाम फ्यूचरवर्ल्ड Ua नस SIRT oT fer. शिकायतकर्ता रश्मि दीपचंद जयसवाल ने 04 और अन्य शिकायत के साथ यह शिकायत विपक्षी के es aera की गयी है। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह सभी शिकायतें एक ही परियोजना Future Estate (?॥9४९-/९-।) से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- Ncri44/08/9870/2022 रश्मि दीप चंद जयसवाल की पत्रावली अग्रणी शिकायत रहेगी। संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Future Estate (Phase-fe-l) में यूनिट संख्या GF-I2 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि Go 43,65,000,//- का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल लिखित कथन दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी की परियोजना रेरा में पंजीकृत है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में यूनिट संख्या 42 बुक करायी गयी थी। ae न
आवंटित यूनिट की कुल कीमत wo 27,30,000/ थी। आवंटित यूनिट के सापेक्ष दिनांक 25.09.2048 को एग्रीमेंट टू सेल निष्पादित हुआ। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष 50 प्रतिशत धनराशि wo 73,65,000 / का भुगतान किया जा चुका है और 50 प्रतिशत धनराशि कब्जा के समय मार्च 2049 में भुगतान किया जाना था। विपक्षी द्वारा दिनांक 27.05.2022 अंतिम मांग पत्र ऑफर ऑफर पजेशन के नाम से जारी किया गया जिसमें अवशेष देय धनराशि GO 73,65,000 / के बजाए रु0 49,8,074 / का देय धनराशि अंकित है। शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 3.7.2022 को विपक्षी को जमा धनराशि वापस भुगतान करने या आवंटित यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराये जाने के लिए लीगल नोटिस भेजा गया। अतः शिकायतकर्ता द्वारा आदेश दिनांक 06.7.2025 के अनुपालन में बिन्दु “ए” अंकित अनुतोष को विपक्षी द्वारा जारी यूनिट निरस्तीकरण पत्र को निरस्त किये जाने, यूनिट का कब्जा, विलम्बित अवधि का ब्याज व रु0 45- लाख क्षततिपूर्ति दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। इसी प्रकार तालिका. में वर्णित क्रम॑ संख्या-2 के शिकायतकर्ता द्वारा भी उपरोक्त वर्णित अनुतोष दिलाये जाने का-अंनुरोध-किया गया है। शिकायतकर्तागण द्वाशाःअपने शिकायत के समर्थन में अनुबंध पत्र, प्रतिउत्तर पत्र व एकाउंट Rete की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी | शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् हैः-
क्रम Poe Sd दिनांक भुगतान की गई धनराशि [संख्या (रु0) 4 शिकायतकर्ता-रश्मि दीपचंद विपक्षी द्वारा जारी रसीद संख्या 2048 _ ‘| 44.08.2048 BO 3,65,000 / रसीद संख्या 20:8 44.08.2048 रु0 40,00,000 / कुल योग :_|[रु0 73,65,000 / 2 शिकायतकर्ता-रश्मि दीपचंद विपक्षी द्वारा जारी रसीद संख्या 20:8 40.40.2048 %0 6,00,000/ रसीद संख्या 20:8 25.09.2048 %0 5,,00,000/ रसीद GAM 208 25.09.208 रु0 8,00,000 / रसीद संख्या 20:8 25.09.2048 रु0 2,00,000 / कुल aT: | wo 27,00,000 / Aaa को और से लिखित आपत्ति दाखिल की गई है जिसमें यह उल्लिखित है कि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट संख्या जीएफ 42 बुक करायी गयी थी जिसके सापेक्ष दिनांक 25.09.20i8 को अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ। विपक्षी द्वारा 2 परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है जो विपक्षी के नियत्रंण से बाहर थी। विपक्षी द्वारा फोर्स मैज्योर के सम्बंध में माननीय उच्च न्यायालय बाम्बे द्वारा प्रतिपादित नीलकमल रिएलटर सुबर्बन प्रालि. बनाम यूओआई व अन्य का संदर्भ अंकित किया गया है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता की यूनिट धनराशि का भुगतान न किये जाने के कारण निरस्त कर दी गयी है। विपक्षी शिकायतकर्ता को 6 से 8 मासिक किश्तों में धनराशि वापस करने को तैयार है। विपक्षी की परियोजना किसान आन्दोलन के कारण विलम्बित हुई है। अतः विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को 6 से 8 मासिक किश्तों में दिसम्बर 2022 से धनराशि. लिये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
अग्रणी शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के लिखित जवाब पर प्रतिउत्तर दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में यूनिट जीएफ 42 बुक करायी गयी थी जिसके क्रम में दिनांक 25.09. 2048 को अनुबंधपत्र निष्पादित हुआ था।-अनुबंध पत्र के अनुसार यूनिट की कुल कीमत रु० 27,30,000 / थी.-जिसके सापेक्ष शिंकायतकर्ता द्वारा WO 43,65,000 / का भुगतान किया गया है जो कि यूनिट की कुल कीमत का 50 प्रतिशत है परन्तु विपक्षी द्वारा अंतिम मांग पत्र के समय अवैधानिक रूप से यूनिट के सापेक्ष अवशेष देय धनराशि में वृद्धि करते हुए wo 49,8,074,/का मांग पत्र प्रेषित किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम के प्राविधानों के अनुसार आवंटित यूनिट निर्धारित कीमत पर प्राप्त करने के अधिकारी है। शिकायतकर्ता द्वारा उल्ल्खित-किया गया है कि विपक्षी द्वारा अनुबंध के अनुसार निर्धारित समय अवधि में परियोजना पूर्ण करते हुए ओ.सी प्राप्त नहीं किया गया है। अत: शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्षों के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये गये हैं :- उमयपक्षों के dal के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. कया विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण की आवंटित यूनिट निरस्त किया जाना वैधानिक है अथवा नहीं? 2. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 2] a 3. क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या | -:_ प्रश्न संख्या । इस आशय का विरचित किया गया
है कि क्या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण की आवंटित यूनिट निरस्त किया जाना वैधानिक है अथवा नहीं। इसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि शिकायतकर्तागण द्वारा यूनिट के सापेक्ष अवशेष देय धनराशि का भुगतान न किये जाने के कारण दिनांक 23.08.2022 को यूनिट निरस्त कर दी गयी है। पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों के अवलोकन से विदित है कि उभयपक्षों के मध्य दिनांक 25.09.2048 को अनुबंधपत्र निष्पादित हुआ जिसमें शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष देय धनराशि की अदायगी किये जाने हेतु 50 : 50 प्रतिशत- पेमेंट प्लान का चयन किया गया जिसके अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट की कीमत के सापेक्ष 50 प्रतिशत धनराशि-की अंदायगी बुकिंग के समय तथा 50 प्रतिशत धनराशि की अदायगी ऑफर ऑफ tera समय की जानी थी। शिकायतकर्ता द्वारा आवंटित यूनिट की कुल...कीमत .रु0...27,30,000./ का...50 प्रतिशत धनराशि रु0 43,65,000 / का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा चयनित पेमेंट प्लान के अनुसार शेष 50 प्रतिशत धनराशि का भुगतान ऑफर आफ पजेशन के समय किया जाना था। विपक्षी द्वारा अनुबंध की शर्तों के अनुसार परियोजना पूर्ण करते हुए सक्षम प्राधिकरण से अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त करते हुए शिकातयकर्ता को ऑफर ऑफ पजेशन प्रेषित किये जाने का कोई साक्ष्य पत्रावली पर प्रस्तुत नहीं किया गया है जिस कारण विपक्षी द्वारा किया जाना यह तर्क कि शिकायतकर्ता द्वारा अनुबंध अनुसार देय धनराशि का भुगतान न किये जाने के कारण यूनिट निरस्त की गयी है संधारणीय नहीं है। इसके अतिरिक्त सामान्यतः यदि शिकायतकर्ता द्वारा समय से देय धनराशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो विपक्षी की जिम्मेदारी बनती है कि वह उक्त के — 4
सम्बन्ध में भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय,/पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 की धारा 9.2 एवं धारा 9.3 में यह प्राविधानित है कि :- धारा 9.2 In case of Default by Promoter under the conditions listed above a non defaulting Allottee is entitled to the following: i. Stop making further payments to Promoter as demanded by the Promoter. If the Allottee stops making payments, the Promoter shall correct the situation by completing the construction milestones and only thereafter the Allottee be required to make the next payment without any interest; or __ ii. The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: Provided that where an Allottee does not intend to withdraw from the Project or terminate the Agreement, he shall be paid, by the Promoter, interest at the rate prescribed in the Rules, for every month of delay till the handing over of the possession of the [Apartment/Plot], which shall be paid by the Promoter to the Allottee within forty-five days of it becoming due.
धारा 9.3 The Allottee shall be considered under a condition of Default, on the occurrence of the following events: * i. In case the Allottee fails to make payments for 2 (two) - consecutive demands made by the Promoter as per the Payment Plan annexed hereto, despite having been issued:notice in that regard the Allottee shall be liable to pay interest to the promoter on the unpaid amount at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate).on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. The Promoter must not be in default to take this benefit; ii. In case of Default by Allottee under the condition listed above continues for a period beyond 3 (three) consecutive months after notice from the Promoter in this regard, the Promoter may cancel the allotment of the [Apartment/Plot] in favour of the Allottee and refund the money paid to him by the Allottee by deducting the booking amount and the interest liabilities and this Agreement shall thereupon stand terminated. The Promoter must _ not be in default to take this benefit; Provided that the Promoter shall intimate the Allottee about such termination at least thirty days prior to such termination.
उक्त प्राविधानों के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष बकाया धनराशि का भुगतान न किये जाने पर मांग पत्र, अनुस्मरण पत्र तथा प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किये जाने का प्राविधान है परन्तु wea शिकायत में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट निरस्तीकरण के सम्बन्ध में केवल एक अंतिम मांग पत्र दिनांकित 27.05.2022 को प्रेषित किया गया है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को नियमानुसार मांग पत्र उपरांत कोई अनुस्मारक पत्र प्रेषित नहीं किया गया न ही विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट निरस्त किये जाने से पूर्व प्री-कैंसिलेशन पत्र प्रेषित किया गया है। इसके उपरांत विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट दिनांक 93.08.2022 को अंतिम रूप से निरस्त कर दी गयी जो कि उपरोक्त उल्लिखित प्राविधानों के विपरीत है। इसके अतिरिक्त उपरोक्त प्राविधानों के अनुसार यदि विपक्षी द्वारा वैधानिक रूप से शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त की जाती है तो विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को उनके द्वारा यूनिट के सापेक्ष जमा की गयी धन्तराशि वापस किये जाने का प्राविधान है जोकि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को वापस नहीं की गयी। यहां यह भी स्पष्ट कियां जाता है कि वर्तमान प्रकरण में विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण करके अनुबंध पत्र में कब्जा दिये जाने की तिथि अंकित नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में माननीय उच्चतम न्यायालय के सिविल अपील संख्या 3533-3534 / 2047 M/s. Fortune Infrastructure (now known as M/s. Hicon Infrastructure) & ANR. Vs. Trevor Dima & Ors 4 स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है कि-
Moreover, a person cannot be made to wait indefinitely for the possession of the flats allotted to them and they are entitled to seek the refund of the amount paid by them. along with compensation. Although we are aware of the fact that when there was no delivery period stipulated in the agreement, a reasonable time has to be taken into consideration. In the facts and circumstances of this case, a time period of 3 years would have been reasonable for completion of the contract i.e.. the possession was required to be given by last quarter of 204. Further there is no dispute as to the fact that until now there is no redevelopment of the property. Hence, in view of the above discussion, which draw us to an irresistible conclusion that there is deficiency of service on the part of the appellants and accordingly the issue is answered. उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार फ्लैट के कब्जे हेतु किसी व्यक्ति को अनिश्चित समय तक प्रतीक्षा नहीं करायी जा सकती है, जहाँ अनुबन्ध में कब्जे की तिथि नहीं दी गयी है वहाँ एक रीज़नेवल समयावधि 3 वर्ष कब्जे हेतु अवधारित की जानी होगी | प्रस्तुत शिकायत में शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 25.09.2048 को अनुबंध पत्र निष्पादित हुए परन्तु अनुबंध पत्र में कब्जा दिये जाने की तिथि अंकित नहीं है। ऐसी स्थिति में उपरोक्त माननीय उच्चतम न्यायालय की न्याय नजीरों के अनुसार 6 —
कब्जा देने की अवधि 3 वर्ष मानी गयी है। इस प्रकार विपक्षी द्वारा सितम्बर 20:8 से 03 वर्ष अर्थात सितम्बर 202 में कब्जा दिया जाना था परन्तु विपक्षी के पक्ष पर शिकायतकर्तागण को समय सीमा के अन्दर यूनिट का कब्जा न दिये जाने का दोष है तथा विपक्षी को कब्जा दिये जाने की निर्धारित अवधि में ओ.सी /सी.सी प्राप्त नहीं है। अतः ऐसी स्थिति में विपक्षी शिकायतकर्तागण को समय से कब्जा निर्धारित अवधि में न देने कारण शिकायतकर्तागण के पक्ष में जारी अनुबंध को निरस्त नहीं कर सकता है जिस कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण की यूनिट्स निरस्त किया जाना उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। इसके अतिरिक्त उपरोक्त प्राविधानों में यह स्पष्ट उल्लिखित है कि यदि प्रमोटर स्वयं दोषी है तो वह उपरोक्त प्राविधानों के अनुसार शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त नहीं कर सकता है और न ही उपरोक्त प्राविधानों के अनुसार लाभ ले सकता है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण की यूनिट को निरस्त किया जाना उपरोक्त उल्लिखित रेरा अधिनियम के प्राविधानों के अनुरूप वैधानिक नहीं है। तद्नुसार-प्रश्न संख्या 4-निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स-मैज्योरे इवेन्टर्से होने के कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि :-
“ प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर wile में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना TET |” TS 7 माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 / 4985, “M.C. Mehta Versus Union of India” 4 पारित आदेश, दिनांक o4—74-20i9 4 निम्नलिखित निर्देश दिये हैः- “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 73029//7985 में पारित आदेश दिनांक 09-42-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “in the affidavit dated 05.2.2029, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
"42. That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much-asino.construction should:-be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities-and: closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. “ Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central. Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.”
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक 04-7:-2049 से दिनांक 44-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक o9—t2-20:9 4 पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04-4-20:9 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 दिन(66+2) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02—2020 तक साय 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी 8 —_—— तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तंरदायी ठहराना न््यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त कोविड-49 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 Wr अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। ह
उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी pifas—t9 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तदनुसर प्रश्नग सख्या 2 Prec किया जाता है। 7 निस्तारण प्रश्न संख्या 3-: प्रश्न संख्या-3 इस आशय का विरचित किया गया है कि an शिकायतकर्तागण को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से विदित है कि उभयपक्षों के मध्य दिनांक 25.09.208 को अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ जिसमें कब्जा दिये जाने की तिथि अंकित नहीं है। ऐसी स्थिति में माननीय उच्चतम न्यायालय के सिविल अपील संख्या 3533--3534 / 2047 Mis. Fortune Infrastructure (now known as M/s. Hicon Infrastructure) & ANR. Vs. Trevor D'lima & 0७ में स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है कि-+ - Moreover, a person cannot be made to wait indefinitely for the possession of the flats allotted to them and they are entitled to seek the refund of the amount paid by them, along with compensation. a आला खा
Although we are aware of the fact that when there was no delivery period stipulated in the agreement, a reasonable time has to be taken into consideration. In the facts and circumstances of this case, a time period of 3 years would have been reasonable for completion of the contract i.e., the possession was required to be given by last quarter of 204. Further there is no dispute as to the fact that until now there is no redevelopment of the property. Hence, in view of the above discussion, which draw us to an irresistible conclusion that there is deficiency of service on the part of the appellants and accordingly the issue is answered.
उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार फ्लैट के कब्जे हेतु किसी व्यक्ति को अनिश्चित समय तक प्रतीक्षा नहीं करायी जा सकती है, जहाँ अनुबन्ध में कब्जे की तिथि नहीं दी गयी है वहाँ एक रीज़नेवल समयावधि 3 वर्ष कब्जे हेतु अवधारित की जानी होगी। प्रस्तुत शिकायत में शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 25.09.20:8 को अनुबंध पत्र निष्पादित हुए परन्तु अनुबंध पत्र में कब्जा दिये जाने की तिथि अंकित नहीं है। ऐसी स्थिति में उपरोक्त माननीय उच्चतम न्यायालय की न्याय नजीरों के अनुसार कब्जा देने की अवधि 3 वर्ष मानी गयी है।इस प्रकार विपक्षी द्वारा सितम्बर 2078 से 03 वर्ष अर्थात सितम्बर 2024 में कब्जा दिया जाना था परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक शिकायतकर्तागण को यूनिट का- कब्जा नहीं दिया गया है और न ही विपक्षी द्वारा परियोजना के सापेक्ष ओसी /सी-सी प्राप्त होने का साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल किया गया है। इससे स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना अभी पूर्ण नहीं है। चूंकि शिकयतर्तागण द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया जिस कारण शिकायतर्कागण को यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील wo 6649-50 / 208 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयंल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:-
"the period of Interest should close on April 20l6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206, The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " 0 a उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्तागण विलम्ब ब्याज पाने के अधिकारी होगें। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल Raced सबअर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8(I)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project. without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अत: उपरोक्त निर्णय-के aie Fae we है कि wow रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Sar के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भूनसम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2076 के अधीन दिनांक 7.0.20i8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय /पटटा के लिए करार) नियमावली ooi8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के ER 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर o2(i) 4 प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the ona set termination notice. a. SS
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी wa 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ sfc की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्तागण की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+I प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की eR Aaya भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। अतः wad तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्तागण यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने के अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-3 Prema किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। | आदेश \. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन-के भीतर शिकायतकर्तागण की aca को पुर्नस्थापित करते हुए, शिकायतकर्तागण -से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, आवंटन पत्र/ अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी/सी.सी सहित कब्जा a. gad. करें. और .देय...स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। 2. विपक्षी शिकायतकर्तागण को दिनांक 04.0.2024 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्तागण ERI जमा धनराशि क्रमशः BO 43,65,000,/ व BO 24,00,000,// पर MCLRH प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार प्रत्येक शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 2
के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 43029,/4985 के अनुसार ) 68 दिन 42 Ss तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा AS अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान * पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश HP sae 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। * प्रश्नगत शिकायतों में इस पीठ द्वारा यथास्थिति बनाये रखने हेतु पूर्व में पारित PHT आदेश को ACTA समाप्त किया जाता है। आदेश की एक प्रति उक्त सम्बन्धित पत्रावली पर रखी जाए। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। —$22rrrme (2B aa डरजबवनबुकंआाा —_> = Vo a Ws USS (डा०दीपक स्वरूप WR) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर 43