Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Veena Sharma and Ram Kishan Sharma v. PATEL ADVANCE JV Registered Office
Complaint No. NCR144/08/98137/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
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- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:- डा०दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या शिकायतकर्ता | यूनिट न0 पत्रावली पर आवंटन, | अनुबंधानुसा | वांछित ष् . उपलब्ध फ्लैट बायर | र कब्जा Wo रसीद/साक्ष्य के | wie की | दिये जाने अनुसार जमा तिथि की तिथि धनराशि रु0 I, | NCRI44/08/9837/2022 | dr wat a | जी 4- | BO 2,39,788/ | 48.07.204 | 40 माह + | यूनिट का राम किशन शर्मा | 4792 6 माह कब्जा व अनुग्रह विलम्बित अवधि अवधि का ब्याज अर्थात मई | दिलाये जाने का 2048 अनुरोध किया गया है। बनाम पटेल एडवांस जेवी शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह परिवाद संस्थित की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना NEOTOWN एप्त&57- में यूनिट संख्या जी 4-4702 बुक करायी गयी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि wo 24,39,788 /“/-का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता की ओर से लिखित कथन दाखिल करते हुए यह तर्क उल्लिखित किया गया है कि प्रारम्भ में यूनिट संख्या vi-cor बुक करायी गयी थी जिसके सापेक्ष दिनांक 26.03.2044 को फ्लैट बायर एग्रीमेंट निष्पादित हुए। विपक्षी द्वारा कब्जा दिये जाने की प्रस्तावित तिथि तक कार्य पूर्ण नही किया जा सका। तब शिकायतकर्ता द्वारा ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण से सम्पर्क किया गया तो ज्ञात हुआ कि टॉवर-ए में निर्माण कार्य बंद है। शिकायतकर्ता द्वारा 4 साल विपक्षी से प्रोविजनल बुकिंग को किसी अन्य टावर में शिफ्टिंग के लिए सम्पर्क किया गया।
तत्पश्चात शिकायतकर्ता ने विपक्षी के प्रस्ताव पर आवंटित यूनिट को टॉवर ए से टॉवर जी में स्थानान्तारित करने की सहमति दी। वर्तमान प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा टॉवर-जी में यूनिट आवंटित किये जाने के लिए पुनः आवेदन व लायक, किया गया। यूनिट संख्या जी 4,/4702 के के लिए दिनांक 48.07.2044 को फ्लैट बायर एग्रीमेंट निष्पादित हुआ। फ्लैट बायर एग्रीमेंट के अनुसार शिकायतकर्ता को मई 2048 तक यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था। शिकायतकर्ता ने विपक्षी से परियोजंना में निर्माण कार्य की स्थिति व कब्जा दिये जाने के बारे में कई बार सम्पर्क किया। विपक्षी की परियोजना पूर्ण नहीं है और न ही विपक्षी को ओ.सी / सी. सी प्राप्त हुआ है। अतः विपक्षी ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज 24 प्रतिशत तथा रु० 5,00,000 / मानसिक उत्पीड़न व विधिक खर्च दिलाये जाने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता द्वारा परिवाद के समर्थन में मांग पत्र, आवंटन, फ्लैट बायर एग्रीमेंट व रसीदों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् हैः- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु) रसीद संख्या 6883 44.07.2044 BO 3,39,894 / 2 रसीद संख्या 7098 22.09.204 BO 4,00,000 / 3 रसीद संख्या 7025 20.09.2044 BO 4,58,485 / | 4 रसीद संख्या 7432 47.04.2045 रु0 2,24,594/ Bi रसीद संख्या 679 44.06.2045 BO 3,36,89 / e | रसीद संख्या 650 44.07.2045 रु0 2,26,827/ 7 रसीद संख्या 8573 30.42.205 रु0 2,25,487/ 8 | रसीद संख्या 9054 09.06.2046 BO 2,27,63/ erat | ये रु0 2,39,788 /
विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को जुलाई 2044 में यूनिट आवंटित की गयी थी। आवंटन के क्लाज-24(ए) के अनुसार यूनिट का कब्जा 40 माह तथा 6 अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात मई 20i8 तक दिया जाना था। विपक्षी द्वारा वांछित एनओसी प्राप्त करते हुए ओ.सी/सी.सी के लिए आवेदन किया जा चुका है। विपक्षी ने शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि का भुगतान न किये जाने पर आवंटित यूनिट निरस्त कर दी है जिस कारण शिकायतकर्ता आवंटी की श्रेणी में नहीं है और वर्तमान प्रकरण पोषणीय नहीं है क्योंकि विपक्षी ने रेश अधिनियम की धारा 446) के अनुसार 2 _— 7
यूनिट निरस्त कर दी है। विपक्षी ने उल्लिखित किया है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से भूमि विवाद होने पर प्राधिकरण के पत्र दिनांक 37.05.200 से निर्माण कार्य रोक दिया गया। भूमि से सम्बन्धित याचिका संख्या 27508 /20I0 माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन थी। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा याचिका का निस्तारण करते हुए भूमि पर कार्य प्रारम्भ किये जाने का आदेश पारित किया गया। विपक्षी को दिनांक 26.7.20I5 को पत्र प्राप्त हुआ कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विवाद का निस्तारण करते हुए भूमि मालिक को अतिरिक्त कम्पनसेशन दिये जाने का आदेश पारित किया गया है। विपक्षी ने कथन किया कि भूमि विवाद, नोट बंदी, दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण होने से निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध, wtfrs—t9 महामारी के कारण परियोजना विलम्बित हुयी है। विपक्षी ने फोर्स मैज्योर के सम्बंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बिक्रम चटर्जी व अन्य बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया व अन्य सिविल अपील संख्या o40/20I7 में पारित आदेश, उ.प्र.रेरा पीठ-4 द्वारा शिकायत संख्या wrens /44 / 85434 // 202 सुनील कुमार जैन बनाम एम आर मित्तल व शिकायत संख्या एनसीआर444 /09 /6244 / 2020 निखिल सिंघल बनाम मैसर्स गौर war हाई-टेक इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. में पारित आदेश का संदर्भ अंकित किया है। शिकायतकर्ता ने अवशेष देय धनराशि wo 5,54,457 / का भुगतान नहीं किया जिसके लिए कई मांग पत्र दिनांक 07.42.2024 व 49.04.2022 को प्रेषित किये गये है। लेकिन शिकायतकर्ता ने आज तक धनराशि का भुगतान नहीं किया है। शिकायतकर्ता मांग पत्र के अनुसार धनराशि भुगतान करने में असफल रहा है जिस कारण दिनांक 27.09.2022 को आवंटित यूनिट निरस्त करते हुए शिकायतकर्ता को दिनांक 44.44.2022 को पत्र जारी किया गया कि वह चेक संख्या 264675 धनराशि GO 49,60,758,/ का भुगतान प्राप्त करें। अतः विपक्षी ने परिवाद को निरस्त करने तथा विपक्षी से शिकायतकर्ता को अवशेष धनराशि प्राप्त किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया है।
विपक्षी द्वारा अपनी लिखित आपत्ति के समर्थन में विद्युत सुरक्षा प्रमाण पत्र दिनांक 03.09.202, लिफ्ट सुरक्षा प्रमाण पत्र दिनांक 26.07.2024, अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र दिनांक 06.08.2024, rarer सुरक्षा प्रमाण पत्र दिनांक 04.09.2024, ब्लाक 3 कम्पलीशन सर्टिफिकेट आवेदन हेतु 24.09.2024, मांग पत्र, अंतिम अनुस्मारक पत्र व यूनिट निरस्तीकरण पत्र की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता की ओर से विपक्षी के लिखित आपत्ति पर जवाब दाखिल किया गया जिसमें लिखित कथन की पुनवित्ति करते हुए यूनिट का कब्जा , विलम्बित अवधि का ब्याज एवं क्षतिपूर्ति दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी की ओर अतिरिक्त जवाब दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु दिनांक 07.42. 2024 व 9.04.2022 को अनुस्मरण पत्र भेजे गये परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि का भुगतान न किये जाने पर आवंटित यूनिट दिनांक 27.09.2022 को निरस्त करते हुए दिनांक 25.0.2023 को तृतीय पक्ष (अनुजा सक्सेना व नवनीत कुमार सक्सेना) के अधिकार सृजित कर दिये गये जिसका साक्ष्य Wear बी व सी है। अतः विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को टर्म्स एण्ड कंडीशन के अनुसार धनराशि फॉरफीट करके अवशेष धनराशि वापस करने की. अनुमति दिये जाने तथा यूनिट पर तृतीय पक्ष के अधिकार को कायम रखने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्ष के cal को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ?
निस्तारण प्रश्न संख्या i: प्रश्न Sea इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया wld? ule हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 8.07.204 को एलॉटमेंट /फ्लैट बायर ऐएग्रीमेंट निष्पादित हुआ। एलॉटमेंट / फ्लैट बायर एग्रीमेंट के अनुसार यूनिट का कब्जा 40 माह तथा 6 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात मई 208 तक प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। 4
विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति में यह उल्लिखित किया गया कि शिकायतकर्ता को जुलाई 204 में यूनिट आवंटित की गयी थी। आवंटन के क्लाज-2(ए) के अनुसार यूनिट का कब्जा 40 माह तथा 6 अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात मई 2048 तक दिया जाना था। विपक्षी द्वारा वांछित एनओसी प्राप्त करते हुए ओ.सी,/सी.सी के लिए आवेदन किया जा चुका है। विपक्षी ने शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि का भुगतान न किये जाने पर आवंटित यूनिट निरस्त कर दी है जिस कारण शिकायतकर्ता आवंटी की श्रेणी में नहीं है और वर्तमान प्रकरण पोषणीय नहीं है क्योंकि विपक्षी ने रेश अधिनियम की धारा i4(5) के अनुसार यूनिट निरस्त कर दी है। शिकायतकर्ता ने अवशेष देय धनराशि Go 5,54,457 ,/ का भुगतान नहीं किया जिसके लिए कई मांग पत्र दिनांक 07.42.2024 व 49.04.2022 को प्रेषित किये गये है। लेकिन शिकायतकर्ता ने आज तक धनराशि का भुगतान नहीं किया है। शिकायतकर्ता मांग पत्र के अनुसार धनराशि भुगतान करने में असफल रहा है जिस कारण दिनांक 27.09.2022 को आवंटित यूनिट निरस्त करते हुए शिकायतकर्ता को दिनांक 4.4.2022 को पत्र जारी किया गया कि वह चेक संख्या 264675 के माध्यम से धनराशि GO 49,60,758 / का भुगतान प्राप्त कर सकते है। अतः विपक्षी ने परिवाद को निरस्त करने तथा विपक्षी से शिकायतकर्ता को अवशेष धनराशि प्राप्त किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया है।
पत्रावली पर उपलब्ध एलॉटमेंट,/फ्लैट बायर एग्रीमेंट के अनुसार शिकायतकर्ता को मई 2048 तक यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अनुसार यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी को वांछित अनापत्त्ति प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुके है तथा दिनांक 24.09.2024 को कम्पलीशन सर्टीफिकेट हेतु आवेदन भी किया जा चुका है जो पत्रावली पर उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि का भुगतान न किये जाने पर आवंटित यूनिट संख्या जी 3-4206 दिनांक 27.09.2022 को निरस्त करते हुए प्रश्नगत यूनिट पर दिनांक 25.40.2023 को तृतीय पक्ष (अनुजा सक्सेना व नवनीत कुमार सक्सेना) के अधिकार सृजित किये जा चुके है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्गगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु शिकायत संस्थित की गयी है परन्तु तृतीय पक्ष के अधिकार 5 का वा के सृजित हो जाने के कारण शिकायत में याचित अनुतोष यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना सम्भव नहीं है। उपरोक्त वर्णित यूनिट पर तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित किये जा चुके है तथा विपक्षी द्वारा दिनांक 74.24. 2022 को पत्र के माध्यम से शिकायतकर्ता को चेक संख्या 264675, धनराशि wo 49,60,758 / का भुगतान प्राप्त करने हेतु सूचित भी किया जा चुका है। तब ऐसी स्थिति में प्रकरण में शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुतोष दिया जाना सम्भव नहीं है। तद्नुसार प्रश्न संख्या 4 निस्तारित किया जाता है। आदेश प्रस्तुत परिवाद निरस्त की जाती है। आदेश रेरा पोर्टल पर अपलोड किया जाये। पत्रावली दाखिल दफ्तर हो। =D 7 २-०४ Tr 2. 2024
(डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर