Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Veena Sharma and Ram Kishan Sharma v. PATEL ADVANCE JV Registered Office
Complaint No. NCR144/08/97977/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-04-24
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar Status-Disposed
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Bench-3 Order passed under Section 3 of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 2006 Present: Dr. Deepak Swaroop Saxena, Member | Complaint No. | Complainant | Unit No. | Amount as per receipts / evidence (Rs.) | Date of Flat Buyer Agreement | Possession period as per agreement | Relief sought | |---|---|---|---|---|---|---| | [?]44/08/97977/2022 | Veena Sharma and Ram Kishan Sharma | G 3-4206 | 37,00,060/ | 74.07.20i4 | 40 months + 6 months grace period, i.e. May 2048 | Possession of the unit and interest for the delayed period | The complainant has filed this complaint against the opposite party seeking possession of the unit and interest for the delayed period. In brief, the complainant's case is that unit no. G 3—2206 was booked in the project NEOTOWN [?] run by the opposite party, and against it the amount shown in the table, Rs. 34,00,060/-, was paid to the opposite party. The complainant has requested possession of the unit and interest for the delayed period.
In the written statement filed on behalf of the complainant, it is argued that initially unit no. A4-604 was booked, against which flat buyer agreements were executed on 26.03.20. Thereafter, on the opposite party's proposal, the complainant agreed to shift the allotted unit from Tower A to Tower G. In the present case the complainant again applied for allotment of a unit in Tower G. Against unit no. G 3,/4206, a flat buyer agreement was executed on 44.07.204. As per the flat buyer agreement, the complainant was to get possession of the unit by May 2048. The complainant contacted the opposite party several times about the status of construction and the handing over of possession. The opposite party's project is not complete, and it has not received OC/CC. Hence the complainant has requested possession of the unit, interest for the delayed period at 24 per cent, and Rs. 5,00,000/ for mental harassment and legal expenses. In support of the complaint, the complainant has filed photocopies of demand letters, the allotment and flat buyer agreement, and receipts. The details of the amounts paid by the complainant to the opposite party are as follows:
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2006 की धारा-3 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:-- So दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या शिकायतकर्ता | यूनिट न0 पत्रावली पर आवंटन/ | अनुबंधानुसा | वांछित अनुतोष | उपलब्ध फ्लैट बायर | र कब्जा do रसीद /साक्ष्य के | एग्रीमेंट की | दिये जाने अनुसार जमा तिथि की तिथि धनराशि रु0 ._ फ्टरा44/08/97977/2022 | वीना शर्मा व जी 3- | रु0 37,00,060/ | 74.07.20i4 | 40 माह + | यूनिट का राम किशन शर्मा | 4206 6 माह कब्जा व अनुग्रह विलम्बित अवधि अवधि का ब्याज अर्थात मई | fear जाने का 2048 अनुरोध किया |_ गया है। बनाम पटेल एडवांस जेवी शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह परिवाद संस्थित की गयी है।
संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना NEOTOWN एप्त&57- में sac तालिका में अंकित यूनिट संख्या जी 3—2206 बुक करायी गयी, जिसके सापेक्ष तालिका में अंकित धनराशि Go 34,00,060 / -का विपक्षी को भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता की ओर से लिखित कथन दाखिल करते हुए यह तर्क उल्लिखित किया गया है कि प्रारम्भ में यूनिट संख्या ए4-604 बुक करायी गयी थी जिसके सापेक्ष दिनांक 26.03.20 को फ्लैट बायर एग्रीमेंट निष्पादित हुए। तत्पश्चात शिकायतकर्ता ने विपक्षी के प्रस्ताव पर आवंटित यूनिट को टॉवर ए से टॉवर जी में स्थानान्तारित करने की सहमति दी वर्तमान प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा टॉवर-जी में यूनिट आवंटित किये जाने के लिए पुनः आवेदन किया गया। यूनिट संख्या जी 3,/4206 के सापेक्ष दिनांक 44.07.204 को फ्लैट बायर एग्रीमेंट निष्पादित हुआ। फ्लैट बायर Wie के Sa अनुसार शिकायतकर्ता को मई 2048 तक यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था। शिकायतकर्ता ने विपक्षी से परियोजना में निर्माण कार्य की स्थिति व कब्जा दिये जाने के बारे में कई बार सम्पर्क किया। विपक्षी की परियोजना पूर्ण नहीं है और न ही विपक्षी को ओ.सी /सी.सी प्राप्त हुआ है। अत: विपक्षी ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज 24 प्रतिशत तथा oO 5,00,000 / मानसिक उत्पीड़न व विधिक खर्च दिलाये जाने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता द्वारा परिवाद के समर्थन में मांग पत्र, आवंटन फ्लैट बायर एग्रीमेंट व रसीदों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:-
क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु0) रसीद संख्या 4475 25.07.200 BO 4,00,000/ 2 रसीद संख्या 2058 29.08.2040 रु0 4,25,000/ 3 रसीद संख्या 2955 06.09.2040 रु0 82,56/ 4 रसीद संख्या 2587 (9.0.2040 रु0 ,74,944/ 5... रसीद संख्या 678 = 27.06.2044 रु0 47,628/ ॥ 6 रसीद संख्या 725 |27.09.207 रु0 40,00,000,/ । 7 रसीद संख्या 726 27.09.2044 रु04,2276/... 7 eB | रसीद संख्या 7996 48.05.2045 BO 3,24,940 / 9 रसीद संख्या 9200 27.06.2046 रु0 6,57,822/ 40 रसीद संख्या 9429 22.08.2046 रु0 3,30,326 / रसीद संख्या 40439 42.04.2047 रु0 4,64,6896/. : कुल य रु0 34,00,060/ विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को जुलाई 2044 में यूनिट आवंटित की गयी थी। आवंटन के क्लाज-24(ए) के अनुसार यूनिट का कब्जा 40 माह तथा 6 अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात मई 2048 तक दिया जाना था। विपक्षी द्वारा वांछित एनओसी प्राप्त करते हुए ओ.सी /सी.सी के लिए आवेदन किया जा चुका है। विपक्षी ने शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि का भुगतान न किये जाने पर आवंटित यूनिट निरस्त कर दी है जिस कारण शिकायतकर्ता आवंटी की श्रेणी में नहीं है और वर्तमान _—_—o 2
प्रकरण पोषणीय नहीं है क्योंकि विपक्षी ने रेश अधिनियम की धारा 44(5) के अनुसार यूनिट निरस्त कर दी है। विपक्षी ने उल्लिखित किया है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से भूमि विवाद होने पर प्राधिकरण के पत्र दिनांक 3.05.200. से निर्माण कार्य रोक दिया गया। भूमि से सम्बन्धित याचिका संख्या 27508 / 2040 माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन थी। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा याचिका का निस्तारण करते हुए भूमि पर कार्य प्रारम्भ किये जाने का आदेश पारित किया गया। विपक्षी को दिनांक 26.7.20i5 को पत्र प्राप्त हुआ कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विवाद का निस्तारण करते हुए भूमि मालिक को अतिरिक्त कम्पनसेशन दिये जाने का आदेश पारित किया गया है। विपक्षी ने कथन किया कि भूमि विवाद, नोट बंदी, दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण होने से निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध, aifas—to महामारी के कारण परियोजना विलम्बित हुयी है। विपक्षी ने फोर्स मैज्योर के सम्बंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बिक्रम चटर्जी व अन्य बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया व अन्य सिविल अपील संख्या o40/20i7 में पारित आदेश, TART पीठ-4 द्वारा शिकायत संख्या एनसीआर445 / 44 / 85434 /202 सुनील कुमार जैन बनाम एम आर मित्तल व शिकायत संख्या एनसीआर।44 / 09 / 64244 / 2020 निखिल सिंघल बनाम मैसर्स गौर war हाई-टेक इन्क्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. में पारित आदेश का संदर्भ अंकित किया है। शिकायतकर्ता ने अवशेष देय धनराशि wo 5,54,457 // का भुगतान नहीं किया जिसके लिए कई मांग पत्र प्रेषित किये गये है। लेकिन शिकायतकर्ता ने आज तक धनराशि का भुगतान नहीं किया है। शिकायतकर्ता मांग पत्र के अनुसार धनराशि भुगतान करने में असफल रहा है जिस कारण दिनांक 27.09.2022 को आवंटित यूनिट निरस्त करते हुए शिकायतकर्ता को दिनांक 44.4.2022 को पत्र जारी किया गया कि वह चेक संख्या 264677 धनराशि GO 28,36,800/ का भुगतान प्राप्त करें। अतः विपक्षी ने परिवाद को निरस्त करने तथा विपक्षी से शिकायतकर्ता को अवशेष धनराशि प्राप्त किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया है।
विपक्षी द्वारा अपनी लिखित आपत्ति के समर्थन में विद्युत सुरक्षा प्रमाण पत्र दिनांक 03.09.2024, लिफ्ट सुरक्षा प्रमाण पत्र दिनांक 26.07.2024, अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र दिनांक 06.08.2024, स्ट्रक््चरल सुरक्षा प्रमाण पत्र दिनांक 04.09.2024, 3 a Pl कम्पलीशन सर्टिफिकेट आवेदन हेतु 24.09.2024, यूनिट निरस्तीकरण पत्र की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता की ओर से विपक्षी के लिखित आपत्ति पर जवाब दाखिल किया गया जिसमें लिखित कथन की पुनवृत्ति करते हुए यूनिट का कब्जा , विलम्बित अवधि का ब्याज एवं क्षतिपूर्ति दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. क्या विपक्षी द्वारा यूनिट निरस्त किया जाना वैधानिक है? 2. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 3. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की gar दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या et संख्या Se आशय का विरचित किया गया है कि क्या विपक्षी द्वारा यूनिट का निरस्त किया जाना वैधानिक है। इसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि शिफायतकर्ता को देय धनराशि का भुगतान किये जाने के लिए अनेकों मांग पत्र भेजे गये परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष देय धनराशि का भुगतान नही किया गया जिस कारण आवंटित यूनिट दिनांक 27.09.2022 को निरस्त कर दी गयी तथा शिकायतकर्ता को धनराशि wo 28,36,800,/ वापस किये जाने के लिए चेक तैयार करके शिकायतकर्ता को सूचित भी किया गया कि धनराशि भुगतान हेतु चेक प्राप्त कर ले परन्तु शिकायतकर्ता चेक लेने नहीं आया।
शिकायतकर्ता की ओर से यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि विपक्षी द्वारा वर्तमान प्रकरण के विचाराधीन रहने पर यूनिट दिनांक 27.09.2022 को निरस्त किया जाना वैधानिक नहीं है। इसके अतिरिक्त विपक्षी ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से ओ. सी /सी.सी प्राप्त किये बिना ही यूनिट निरस्त किया है। जबकि विपक्षी को 95 प्रतिशत धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त विपक्षी ने यूनिट oe 4 निरस्त किये जाने के सम्बंध में कोई पत्र नहीं भेजा है। अतः शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है। पत्रावली के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी ने लिखित आपत्ति में यह तर्क प्रस्तुत किया है कि शिकायतकर्ता को देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु अनेको मांग पत्र भेजे गये लेकिन शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान न किये जाने पर आवंटित यूनिट दिनांक 27.09.2022 को निरस्त कर दी गयी है। पत्रावली पर उपलब्ध एलॉटमेंट / फ्लैट बायर एग्रीमेंट दिनांक 44.07.2044 से स्पष्ट है कि आवंटित यूनिट की कुल कीमत धनराशि Go 32,34,000 /है। शिकायतकर्ता द्वारा रु० 34,00,060,/ का भुगतान किया जा चुका है। इससे यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष 95 प्रतिशत से अधिक कीमत की अदायगी की जा चुकी है। अतः विपक्षी द्वारा उठाया गया यह तर्क कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि की अदायगी नहीं की जा रही है, संधारणीय नहीं है ।
उपरोक्त के अतिरिक्त वर्तमान प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत परिवाद दिनांक 05.08.2022 को योजित की गयी है तथा उसके उपरांत विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 27.09.2022 को प्रेषित किया गया है जिससे यह स्पष्ट होता है कि वर्तमान परिवाद के लम्बित रहने के दौरान विपक्षी द्वार शिकायतकर्ता की यूनिट को कैंसिल करने की कार्यवाही की गयी है जो विधिक रूप से सही नहीं है। प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं अपनी यूनिट सरेन््डर निरस्त नहीं करायी गयी है। विपक्षी द्वारा भी ऐसा कोई साक्ष्य दाखिल नहीं किया गया है कि प्रश्नगत यूनिट किसी अन्य क्रेता को आवंटित की जा चुकी हो और उक्त यूनिट उपलब्ध न हो। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी का यह कथन कि शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान न किये जाने पर आवंटित यूनिट निरस्त कर दी गयी है स्वीकार होने योग्य नही है तथा विपक्षी द्वारा प्रकरण के विचाराधीन रहने के दौरान आवंटित यूनिट को निरस्त किया जाना वैधानिक नहीं है। तद्नुसार प्रश्न संख्या । निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न Ge इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु 5 SS विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति में यह उल्लेख किया गया है कि एन. HA, नोट बंदी, भूमि विवाद व कोविड-49 महामारी के कारण निर्माण कार्य बंद था, जिस कारण परियोजना विलम्बित हुई है।
उक्त के संदर्भ में यह उल्लेख करना आवश्यक है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील deat-o40/20:7 “faa चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य“ के निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं प्रस्तर 440 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- "Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature.” उपरोक्त फोर्स मैज्योर की परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्राकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में कोविड-49 महामारी के अतिरिक्त अन्य ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई है। कोविड-49 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06. 2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये विपक्षी ofas—i9 के अतिरिक्त अन्य किसी आधार पर फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 3-:: प्रश्न संख्या-3 इस आशय का विरचित किया गया है
कि an शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट qe करायी गयी थी, जिसके उपरान्त vat यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 74.0720i4 को एलॉटमेंट “फ्लैट बायर Wie निष्पादित हुआ। एलॉटमेंट / फ्लैट बायर एग्रीमेंट के अनुसार यूनिट का कब्जा 40 माह तथा 6 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात मई 2008 तक प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। पत्रावली पर उपलब्ध एलॉटमेंट /फ्लैट बायर Wc के अनुसार शिकायतकर्ता को मई 2048 तक यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अनुसार यह भी स्पष्ट है कि वांछित अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुके है तथा दिनांक 24.09.2024 को कम्पलीशन सर्टीफिकेट हेतु आवेदन भी किया जा चुका है जो पत्रावली पर उपलब्ध है। इस प्रकार विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 4 वर्ष का विलम्ब किया गया है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील to 6649--.50,/ 2048 "'सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- "the period of Interest should close on April 20l6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder
had obtained the Completion Certificate as late as 7 OS April 206, The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार aL / सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्राललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि — "Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the नाच.
promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व dar के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 7.0.208 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर o2(ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ४८ ॥२+]प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय ~~ चल 9 है, तो उस पर विपक्षी भी |॥2॥7+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(०४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। अतः उक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने के अधिकारी है। dager प्रश्न संख्या-3 निस्तारित किया जाता है। शिकायतकर्ता द्वारा जो क्षतिपूर्ति (compensation) दिलाये जाने सम्बंधी याचना की गयी है। इस सम्बंध में क्षतिपूर्ति (Compensation) के प्रकरण पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार रेर अधिनियम की धारा 7} अन्तर्गत न्यायानिर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) को है। अतः पीठ द्वारा इस सम्बंध में आदेश पारित नहीं किया जा सकता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट को पुर्नस्थापित करते हुए, शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर 30 जून 2024 TH ओ-.सी / सी. सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय Ce शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें।
विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.06.2048 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि BO 34,00,060,// पर MCLR+] प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि = i0 शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा Aa) अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विल॑म्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें | आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। — r= Wao, 29rzy (डा०दीपक स्वरूप Wa) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर 44