Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Rajesh Kumar v. S. J. P. Hotels & Resorts Pvt Ltd
Complaint No. NCR144/08/79684/2021
- Decision date
- 2026-02-11
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 /“ 40 ,//63 सपठित नियम-24 46—freprarct WAT—NCR 44/08/79684/202 राजेश कुमार बनाम एस. जे. पी. होटल्स एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड आदेश-पत्र दिनांक: 44.02.2026 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो कॉनन््फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री अंजलि सिंह उपस्थित हुई। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री आशु चौधरी उपस्थित Ee | उभयपक्षों को सुना गया एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा अवगत कराया गया है कि विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा नहीं दिया गया है और न ही हस्तान्तरण विलेख निष्पादित एवं पंजीकृत कराया गया है। ved शिकायत में माननीय पीठ-04ए द्वारा नियमानुसार सुनवाई के उपरान्त दिनांक 07.06.2023 को निम्नवत आदेश पारित किये गये हैं:- 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण की यूनिटस् की समस्त सुविधाओं को अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 34.07.2023 तक ओ. सी/सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और शिकायतकर्तागण से देय erg शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें।
2... विपक्षी, शिकायतकर्ता (सतीश कुमार) को दिनांक 20.08.2020 से ओ.सी/सी. सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLRH प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। कोविड-49 के कारण फोर्स मैज्योर पीरियड ot gerd रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही इस अवधि में शिकायतकर्ता द्वारा यदि कोई अत्तिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का व्याज देय न होगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में आवंटन / अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक्तानुसार विलम्ब ब्याज की गणना की जायेगी। आर 3. विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा Aza) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी धटा॥रका प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु व्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 4. विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण को यूनिट्स् का भौतिक का कब्जा देते समय सभी चार्जेज आवंटन पत्र /अनुबन्ध के अनुरूप अधिरोपित करेगें ।
5. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में त्रिपक्षीय अनुबन्ध,/ एम.ओ.यू. के अनुसार प्री--ई.एम.आई. का भुगतान करें तथा यदि पूर्व में किसी किश्त का भुगतान नहीं किया गया है अथवा विपक्षी का विधिक उत्तरदायित्व होने के बाद भी शिकायतकर्तागण द्वारा वित्तीय संस्था को किया गया हो, तो उसका समायोजन अंतिम देय धनराशि में करना सुनिश्चित करें। 6. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व व्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। 7. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। 8. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है. तो शिकायतकर्तागण को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 07.06.2023 का अनुपालन नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-38,40,/63 के अन्तर्गत var आदेश के क्रियान्वयन हेतु प्रार्थना-पत्र दाखिल किया गया। उपरोक्त शिकायत में मा. tte—or (पूर्व में पीठ-0९) द्वारा दिनांक 30.06.2025 को धारा-63 के अन्तर्गत निम्न आदेश पारित किया गया है कि:-
उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं समस्त परिस्थितियों के दृष्टिगत पत्रावली नियम-24 में निहित शक्तियों के अधीन पीठ द्वारा enrs के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 07-06-2023 के प्रस्तर-04 के अनुसार प्रश्नगत यूनिट के भौतिक कब्जे एवं रजिस्ट्री तथा उक्त आदेश के प्रस्तर-05 के अनुसार प्री-ई.एम.आई. के भुगतान की कार्यवाही हेतु मा. mises अधिकारी के समक्ष सुनवाई के लिए, दिनांक 28-08-2025 को संदर्भित की जाती है। सचिव, उ.प्र. रेरा प्रकरण में आदेश, दिनांक 07-06-2023 के प्रस्तर-02 के अनुसार दिनांक 45-08-2025 से पूर्व विपक्षी द्वारा रह विलम्बित अवधि के ब्याज की धनराशि हेतु वसूली प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु नियमानुसार कार्यवाही कर, पत्रावली को सुनवाई की तिथि से पूर्व मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें| यदि मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी नियम-24 की कार्यवाही के दौरान यह पाते हैं कि विपक्षी / प्रोमोटर द्वारा आदेश अन्तर्गत ai—3i, दिनांक 07-06-2023 का समयबद्ध रूप से अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है, तो ऐसी दशा में मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी प्रकरण को रेरा अधिनियम की धारा 63 की कार्यवाही किये जाने हेतु पीठ को वापस सन्दर्भित कर सकते हैं। तदोपरान्त अन्तर्गत धारा-38,/40,/63 के कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध न कराये जाने एवं रजिस्ट्री कराये जाने के कारण मा. पीठ-0 (पूर्व में पीठ-04ए) द्वारा पारित आदेश दिनांक 30.06.2025 के अनुसार पत्रावली नियम-24 की कार्यवाही हेतु इस पीठ को संदर्भित की गई।
इस पीठ के समक्ष पत्रावली आने पर विपक्षी को निर्देशित किया गया कि वह आदेश दिनांक 07.06.2023 के अनुपालन हेतु कब्जा प्रस्ताव-पत्र वैध ओ.सी. सहित बकाया देयों की मांग सहित (यदि कोई हो तो) शिकायतकर्ता को प्रेषित करना सुनिश्चित करें तथा रेरा पोर्टल पर भी अपलोड करना सुनिश्चित करें। लेकिन विपक्षी द्वारा ऐसा नहीं किया गया। विपक्षी द्वारा जो अपना जवाब दाखिल किया गया है, उसमें बताया गया कि शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त कर दी गई है और तृतीय पक्ष का हित सर्जित कर दिया गया है और रजिस्ट्री की प्रक्रिया चल रही है। शिकायतकर्ता द्वारा अपनी आपत्ति की गई कि दिनांक 06.03.2024 को धारा-63 की कार्यवाही के अन्तर्गत पीठ संख्या-04 द्वारा विपक्षी को निर्देशित किया गया था कि वह अग्रिम सुनवाई की तिथि तक प्रकरण में यूनिट के सम्बन्ध में यथास्थिति बनाये रखेंगे। var आदेश दिनांक 47.05.2024 को मामले के निस्तारण तक यथावत बनाये रखने का भी आदेश पीठ संख्या-04 द्वारा पारित किया गया। aa: ऐसी स्थिति में माननीय रेरा पीठ-04 द्वारा पारित सटे आदेश के पश्चात भी विपक्षी द्वारा यूनिट को अवैधानिक और मनमाने तरीके से निरस्त किया गया और तृतीय पक्ष का हित सर्जित किया गया। विपक्षी द्वारा आज तक माननीय रेरा पीठ-04ए द्वारा पारित आदेश 07.06.2023, 06. 03.2024 एवं 7.05.2024 का अनुपालन न करने के कारण धारा-63 भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम-206 के अन्तर्गत भारी अर्थदण्ड /पेनल्टी अधिरोपित किया जाना आवश्यक होगा।
माननीय रेरा पीठ-0(ए द्वारा पारित आदेश दिनांक 07.06.2023 के क्रम में प्रस्तुत पत्रावली पीठ के आदेश के उल्लंघन की बाबत भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम-2046 की धारा-63 के अन्तर्गत अर्थदण्ड अधिरोपित हेतु प्राधिकरण के समक्ष पेश हो। आदेश की एक प्रति श्रीमान सचिव, रेरा को इस आशय से प्रेषित की जाये कि प्रकरण को तत्काल प्राधिकरण के संज्ञान में लाते हुए प्रकरण विपक्षी पर भारी अर्थदण्ड / पेनल्टी हेतु पेश हो। क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को लगभग समस्त धनराशि अदा की जा चुकी है और विपक्षी द्वारा माननीय रेरा पीठ-04ए द्वारा पारित आदेश दिनांक 07.06.2023 नहीं किया जा रहा है और यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही यूनिट की रजिस्ट्री कराई गई। अतः ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता को कब्जा उपलब्ध कराये जाने हेतु एवं आदेश दिनांकित 07.06.2023 का अनुपालन कराये जाने हेतु आदेश-2। सिविल प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत कार्यवाही करने के अलावा कोई विकल्प शेष नहीं है। अत: ऐसी स्थिति में नियम-24 में दी गई व्यवस्था के अनुसार और नियम-24 की कार्यवाही के अन्तर्गत शिकायतकर्ता को कब्जा उपलब्ध कराये जाने हेतु आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत कार्यवाही करते हुए तथा कार्यालय आदेश संख्या-3839 /यूपी. रेरा / USM. / 2025-26 दिनांक 28.08.2025 के अनुसार परियोजना--शाछ8ण Wynn में यूनिट संख्या-$00-5-0606 को इस न्यायालय द्वारा कुर्क किया जाता है तथा कार्यालय आदेश संख्या-42482 / यू.पी.रेरा / TEM. / 2024-25 दिनांक 24.08.2024 के अनुसार श्री रजत शर्मा, अवर अभियन्ता को रिसीवर नियुक्त किया जाता है।
अतः श्री रजत शर्मा, अवर अभियंता को निर्देशित किया जाता है कि वह यूनिट को कुर्क कर न्यायालय के कब्जे में लेकर अपनी आख्या 5 दिनों के अन्दर इस न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत कार्यवाही करते हुए स्वयं इस न्यायालय द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जा सके और आदेश दिनांक 07.06.2023 का अनुपालन कराया जा सके। पत्रावली अग्रिम सुनवाई हेतु दिनांक 05.03.2026 को पेश हो। मिल बे: = (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण