Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Manoj Kumar v. Newtech Promoters and Developers Pvt. Ltd
Complaint No. NCR144/08/59073/2020
- Decision date
- 2026-03-11
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar Status-Disposed
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 ,/“ 40 ,/63 सपठित नियम-24 42-शिकायत संख्या:-0८९44/08/59073/2020 मनोज कुमार बनाम न्यूटेक प्रमोटर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड आदेश-पत्र दिनांक: 40.03.2026 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री राज सिंह उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री सहेली चक्रवर्ती उपस्थित हुई। उभयपक्षों को सुना गया एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा अवगत कराया गया है कि विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा नहीं दिया गया है और न ही हस्तान्तरण विलेख निष्पादित एवं पंजीकृत कराया गया है। gerd शिकायत में माननीय tro-oiy द्वारा नियमानुसार सुनवाई के उपरान्त दिनांक 24.:0.202 को निम्नवत आदेश पारित किये गये हैं:- 4... शिकायतकर्तागण द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुतोष स्वीकार किया जाता है।
(gS aN विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 04.:4.20i5 से दिनांक 30.04.2047 तक 5/— wad प्रति वर्ग फूट प्रतिमाह की दर से व दिनांक 04.05.207 से ओ.सी./ सी.सी. प्राप्त गै| जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की ent ux शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर विलम्ब ब्याज के रूप में धटा॥रका तिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। व्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की देय धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनाक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही इस अवधि में शिकायतकर्ता द्वारा यदि कोई अतिदेय Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरण में उपरोक्तानुसार अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब ब्याज की गणना की जायेगी। च्छ- 3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा 2(za)(i) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी।
4. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी | 5... इस आदेश का उल्लंघन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 6. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का क्रियान्वयन करा way | विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 24.0.2024 का अनुपालन नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-38,40,/63 के अन्तर्गत var आदेश के क्रियान्वयन हेतु प्रार्थना-पत्र दाखिल किया गया। उपरोक्त शिकायत में मा. पीठ-0०१ए द्वारा दिनांक 04.07. 2022 को धारा-63 के अन्तर्गत निम्न आदेश पारित किया गया है कि:- समस्त वर्णित तथ्यों एवं समस्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए यदि विपक्षी द्वारा दिनांक 34.08.2023 तक कब्जा दिये जाने की सूचना, आदेश दिनांक 24.40.2024 के अनुसार अंतिम अकाउन्टस् सैटेल कर कम्पलेन्ट to पर अपलोड नहीं की जाती है, तो Ih 37.08.2022 के बाद सचिव, रेरा प्रकरण में आदेश दिनांक 24.40.2024 के पृष्ठ eI-3 के आदेश के बिन्दु संख्या-02 एवं रेक्टिफिकेशन आदेश दिनांक 30.42.2024 के ् yey विलम्बित अवधि के ब्याज की धनराशि हेतु वसूली प्रमाण पत्र जारी करायें एवं sel ,/ प्रमोटर के विरुद्ध रेरा अधिनियम, 20I6 की धारा-63 के अन्तर्गत यथोचित र्थदण्ड अधिरोपित किये जाने हेतु पत्रावली प्राधिकरण के समक्ष पेश की जाये।
तदोपरान्त अन्तर्गत धारा-38,40,/63 के कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध न कराये जाने के कारण अध्यक्ष महोदय, रेरा द्वारा पारित आदेश दिनांक 05.03.2024 के अनुसार पत्रावली नियम-24 की कार्यवाही हेतु इस पीठ को संदर्भित की गई। इस पीठ द्वारा विपक्षी को बार-बार आदेशित किये जाने के बावजूद भी ओःसी. /सी.सी. सहित शिकायतकर्ता को कब्जा प्रस्ताव-पत्र नहीं भेजा गया है और न ही =a शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया गया है। यूनिट तैयार नहीं है और परियोजना का ओ.सी. / सी.सी. भी प्राप्त नहीं है, जैसा कि विपक्षी द्वारा आज सुनवाई के दौरान कहा गया है। विपक्षी द्वारा माननीय रेरा पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 24.0.2024 का अनुपालन न करने के कारण विपक्षी के विरुद्ध धारा-63 के अन्तर्गत अर्थदण्ड /पेनल्टी अधिरोपित करने हेतु आदेश दिनांक 09.05.2025 पारित करते हुए प्राधिकरण को लिखा गया और आदेश की प्रति श्रीमान सचिव, रेरा को प्रेषित की गई। आदेश दिनांक 76.:2.2024 के अनुपालन में रेरा अधिकृत रिसीवर द्वारा यूनिट को कुर्क कर, न्यायालय के कब्जे में लेकर अपनी smear दिनांकित 4.07.2025 दाखिल की गई | शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट न्यायालय के कब्जे में है। ऐसी स्थिति में कार्यालय आदेश पत्रांक संख्या-3839 / यू पी. रेरा / प्रशा. / 2025-26 दिनांक 28.08.2025 के अनुसार यूनिट /इकाई ol om कर, रिसीवर नियुक्त कर, कब्जा दिलाये जाने हेतु अधिकृत किया गया है, लेकिन नियम-24 की कार्यवाही के अन्तर्गत आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुसार शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा नहीं दिलाया जा सकता है, क्योंकि यूनिट» परियोजना तैयार नहीं है और विपक्षी के पास ओ.सी. / सी.सी. भी प्राप्त नहीं है।
अतः क्योंकि विपक्षी के पास उक्त परियोजना / यूनिट का ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त नहीं है और बिना ओ.सी. / सी.सी. के शिकायतकर्ता को वैधानिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया जा सकता है और अब ऐसी स्थिति में विपक्षी के पास ओ.सी./सी.सी. न होने के कारण शिकायतकर्ता को वैधानिक कब्जा नहीं दिलाया जा सकता है। आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अन्तर्गत विपक्षी को सिविल कारागार में निरुद्ध कर आदेश» डिक्री का निष्पादन कराये जाने का प्रावधान है, लेकिन इस सम्बन्ध में उ.प्र. भू-सम्पदा ne प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा सिविल अरेस्ट हेतु कोई अधिकारी / कर्मचारी / bailiff ava va नहीं है, इसलिए विपक्षी को गिरफ्तार कर सिविल कारागार में भेजे जाने का भी पारित नहीं किया जा सकता है। अतः ऐसी स्थिति में इस पीठ द्वारा आदेश fi 24.40.2024 का निष्पादन कराया जाना संभव नहीं हो पा रहा है। अतः पत्रावली सम्बन्धित पीठ को वापस भेजी जाये। सम्बन्धित पीठ यदि चाहे, तो नियम-24 के प्रावधानों के अन्तर्गत अपने आदेश के क्रियान्वयन हेतु पत्रावली प्रधान दीवानी न्यायालय को संदर्भित कर सकती है, ताकि विपक्षी #डायरेक्टर को सिविल कारागार में निरुद्ध कराकर आदेश का क्रियान्वयन कराया जा सके। सम्बन्धित पीठ यदि ओ.सी./सी.सी. के सम्बन्ध में विपक्षी के विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही कर, ओ.सी./ सी.सी. उपलब्ध करा देती है, तो सम्बन्धित पीठ पुनः यदि पत्रावली न
इस पीठ को नियम-24 के अन्तर्गत सन्दर्भित करती है, तो ऐसी दशा में इस पीठ द्वारा ८6 विनक्भीय्रम-24 के अन्तर्गत कार्यवाही करते हुए कार्यालय आदेश पत्रांक संख्या-8839 / यू पी eV प्रशा, / 2025-26 दिनांक 28.08.2025 के अनुसार शिकायतकर्ता /आवंटी को कब्जा MY जाने एवं आदेश दिनांक 24.0.2024 के अनुपालन हेतु अग्रिम कार्यवाही की जा अतः पत्रावली नियमानुसार सम्बन्धित पीठ को वापस भेजी जाये। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। i ea आर. पी. सिंह 5४7“ (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण