Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Ashish Kumar v. Aims Promoters Private Limited
Complaint No. NCR144/08/58132/2020
- Decision date
- 2026-06-04
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar Status-Disposed
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 / 40 ,/63 सपठित नियम-24 4-शिकायत PAM:—NCR44/08/5832/2020 आशीष कुमार बनाम एम्स प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड आदेश-पत्र दिनांक: 02.06.2026 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो कॉन््फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता स्वयं उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री यशोदा उपस्थित हुई।
उभयपक्षों को सुना गया एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया। विपक्षी द्वारा समय से शिकायतकर्ता' को यूनिट का कब्जा उपलब्ध न कराये जाने और यूनिट की रजिस्ट्री न कराये जाने के कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत अपनी शिकायत योजित की गई। were शिकायत में माननीय पीठ-02 द्वारा नियमानुसार सुनवाई के उपरान्त दिनांक 06.04.2024 को निम्नवत आदेश पारित किये गये हैं:-- 4. faueft को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता की यूनिट के समस्त सुविधाओं को आवंटन पत्र/अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 34.05.2024 तक ओ. सी.सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराये। 2 विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 04.07.2045 से दिनांक 30.04.2046 से 5/- पे प्रतिवर्ग फुट प्रतिमाह की दर से व दिनांक 07.05.20:6 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने aR कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो की तिथि तक की अवधि पर R द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत की दर से विलम्बित अवधि का cats अदा करना सुनिश्चित करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जाए। 3. विपक्षी, उपरोक्तानुसार कब्जा ऑफर पत्र ओ.सी./सी.सी. सहित जारी करना सुनिश्चित करें। —~
4. विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम 2046 के धारा 2 «४)()के अन्तर्गत यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित ब्याज दर धटा॥२+ प्रतिशत है। 5. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत dete होगा। विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 06.04.2024 का अनुपालन नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-38/40,/63 के अन्तर्गत var आदेश के क्रियान्वयन हेतु प्रार्थना-पत्र दाखिल किया गया। उपरोक्त शिकायत में मा. पीठ-4 द्वारा दिनांक t422. 2023 को धारा-63 के अन्तर्गत निम्न आदेश पारित किया गया है कि:- अतः समस्त तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए सचिव, रेरा को निर्देशित किया जाता है कि प्रश्नगत प्रकरण में पीठ द्वारा पूर्व में धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश दिनांक 06.04.202 के प्रस्तर संख्या-2 के अनुसार विलम्बित अवधि के ब्याज का वसूली प्रमाण पत्र जारी करना सुनिश्चित करें । विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 06.04.2024 का अनुपालन न किये जाने के कारण रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-63 के अन्तर्गत यथोचित अर्थदण्ड अधिरोपित किये जाने हेतु पत्रावली प्राधिकरण के समक्ष पेश की जाए।
तदोपरान्त अन्तर्गत धारा-38,40,/63 -के कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध न कराये जाने एवं रजिस्ट्री न कराये जाने के कारण पत्रावली नियम-24 की कार्यवाही हेतु इस पीठ को संदर्भित की गई। (Ss इस पीठ द्वारा भी विपक्षी को बार-बार निर्देशित किया गया कि शिकायतकर्ता को के a “afte का कब्जा उपलब्ध कराना तथा यूनिट की रजिस्ट्री कराने हेतु कब्जा प्रस्ताव-पत्र 50 tage या देयों की मांग सहित यदि कोई हो, तो प्रेषित करें। विपक्षी द्वारा अपना जवाब wren शीट सहित दाखिल किया गया, जिस पर शिकायतकर्ता द्वारा अपनी आपत्ति दाखिल की गई है। शिकायतकर्ता द्वारा अपनी आपत्ति दाखिल की गई कि दिनांक 44.03.2026 को इस पीठ द्वारा उभयपक्षों को सुनकर बकाया देयों के सम्बन्ध में स्पष्ट आदेश पारित किया गया fer:— “माननीय रेरा पीठ-02 द्वारा दिनांक 06.04.2024 को कब्जे एवं रजिस्ट्री का आदेश पारित किया गया, लेकिन विपक्षी द्वारा आज तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। ae. 9७४४ ऐसी स्थिति में उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय,/पदट्टा के लिए करार)नियमावली-2048 के नियम-9.2 के अनुसार शिकायतकर्ता, विपक्षी को कोई होल्डिंग चार्ज अदा करने के लिए बाध्य नहीं है।” विपक्षी की गणना के अनुसार आवंटित यूनिट के सम्बन्ध में शिकायतकर्ता की ओर रु.36,62,437.23 //- बकाया दर्शाया गया है। उक्त धनराशि शिकायतकर्ता, विपक्षी को अदा नहीं करना चाहता है और शिकायतकर्ता द्वारा यह कथन किया गया है कि माननीय रेरा पीठ-02 द्वारा अपने आदेश दिनांकित 06.04.2024 के प्रस्तर-2 में निम्न आदेश पारित किया गया है:-
“विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 04.07.2045 से दिनांक 30.04.2046 से 5/- रुपये प्रतिवर्ग फूट प्रतिमाह की दर से व दिनांक 04.05.2046 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो की तिथि तक की अवधि पर शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत की दर से विलम्बित अवधि का व्याज अदा करना सुनिश्चित करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जाए ।” लेकिन विपक्षी द्वारा बकाया देयों को sat आदेश के अनुसार समायोजन नहीं किया गया है। पिछली .तिथि पर शिकायतकर्ता को यह स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि:- 'शिकायतकर्ता बकाया धनराशि को विलम्ब ब्याज की धनराशि में समायोजित कराना चाहता है, तो वह इस सम्बन्ध में श्रीमान सचिव, रेरा के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकता है। ताकि वसूली प्रमाण-पत्र की धनराशि में ved बकाया धनराशि को समायोजित किया जाये, लेकिन शिकायतकर्ता द्वारा ऐसा नहीं किया गया। आज शिकायतकर्ता द्वारा पुनः यह बात उठाई गई कि विपक्षी ने बकाया देयों को विलम्ब ब्याज की धनराशि में समायोजन करके कोई मांग-पत्र नहीं भेजा है और वह उक्त बकाया धनराशि को अदा नहीं करना चाहता है, क्योंकि वसूली प्रमाण-पत्र की धनराशि बा oN धनराशि से अधिक है और उसको उसी में समायोजित करना चाहिए 2 विचित्र स्थिति उत्पन्न हो रही है कि इस पीठ द्वारा विलम्ब ब्याज के सम्बन्ध में गी प्रमांण-पत्र या जारी होने वाली वसूली प्रमाण-पत्र में से बकाया धनराशि का किस प्रकार से कराया जाये।
उल्लेखनीय है कि माननीय रेरा पीठ-02 द्वारा दिनांक 06.04.2024 को अपने आदेश के प्रस्तर-2 में समायोजन की बात कही गई है, जिसका अनुपालन विपक्षी द्वारा नहीं किया गया है और निष्पादन की कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 /40 / 63 में भी आदेश दिनांक 4.(2.2023 को सम्बन्धित पीठ द्वारा vad बकाया धनराशि को विलम्ब ब्याज की धनराशि में समायोजित नहीं किया गया और न ही ऐसा कोई निर्देश श्रीमान सचिव, रेरा को दिया, केवल विलम्ब ब्याज की वसूली हेतु प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु श्रीमान सचिव, रेरा को निर्देशित किया गया।
प्राय: सभी पीठों द्वारा धारा-38,/40,/63 की कार्यवाही के दौरान बकाया धनराशि को विलम्ब ब्याज की धनराशि में समायोजन करने हेतु श्रीमान सचिव, रेरा को निर्देशित नहीं किया जाता है, जिससे नियम-24 की कार्यवाही के दौरान बकाया देयों को निश्चित कराने और भुगतान प्रक्रिया में अनावश्यक रूप से बहुत विलम्ब होता है। इस पीठ द्वारा शिकायतकर्ता के अनुरोध परप्रार्थना-पत्र पर पत्रावली श्रीमान सचिव, रेरा को वसूली प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु संदर्भित कर दिया जाता है, लेकिन प्रस्तुत मामले में शिकायतकर्ता ऐसा नहीं चाहता है और उसका कथन है कि माननीय रेरा पीठ द्वारा ही अपने आदेश का अनुपालन करना चाहिए। अतः पत्रांवली सम्बन्धित पीठ को इस अनुरोध के साथ वापस की जाती है कि धारा-38 / 40 ,/63 की निष्पादन की कार्यवाही में बकाया धनराशि को विलम्ब ब्याज की धनराशि में समायोजन कराने हेतु श्रीमान सचिव, रेरा को लिखा जाये। तद्पश्चात सम्बन्धित पीठ पुनः इस पीठ को नियम-24 की कार्यवाही हेतु प्रश्नगत प्रकरण को संदर्भित कर सकती है। आदेश की प्रति श्रीमान अध्यक्ष महोदय, रेरा को इस अनुरोध के साथ प्रेषित की कि यदि संभव हो, तो सभी पीठ को इस सम्बन्ध में उचित कार्यवाही हेतु व्यवस्था की Amy कि धारा-38 /40/63 की कार्यवाही के दौरान ही बकाया धनराशि को विलम्ब ब्याज SY धनराशि में समायोजित कराया जाये या तो प्रमोटर /विपक्षी से समायोजित कराया जाये या वसूली प्रमाण-पत्र जारी करने के समय श्रीमान सचिव, रेरा को विलम्ब ब्याज की धनराशि को बकाया धनराशि में समायोजित करने हेतु लिखा जाये। पत्रावली सम्बन्धित पीठ को तत्काल वापस भेजी od आदेश रेरा पोर्टल पर अपलोड किया जाये। ehh आर. पी. सिंह Bea’ (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण