Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Pradeep Jain v. Uppal Chadha Hi-Tech Developers Pvt. Ltd
Complaint No. NCR144/08/57638/2020
Verified by Puneet Jain, Editor
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- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the complainant)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Gemini 3.8 Flash, Antigravity), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority Regional Office, va-t69, Gamma-2, Greater Noida, Gautam Buddha Nagar-204308. Hearing Bench-0॥ (Formerly Bench-04-A) Shri Sanjay R. Bhoosreddy, Hon'ble Chairman Complaint No.: NCRI44/08/57638/2020 Pradeep Jain vs. Uppal Chadha Hi-Tech Developers Pvt. Ltd. Order under Section-38, 40(2) and 63 The complaint was presented for final arguments through video conferencing on date t8-06—2025. On call, learned advocate Mr. Puneet Jain, proxy counsel for learned advocate Mr. Manendra Kumar appeared on behalf of the applicant / complainant, and learned advocate Mr. Asit Kumar appeared on behalf of the respondent. Thereupon, hearing the arguments of learned advocates for both parties at length, the file was reserved for orders on date 48-06-2025 itself. The primary objective of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 2046 is to protect the interests of consumers in the real estate sector and ensure speedy resolution of disputes. To fulfill this objective, obligations and powers have been conferred upon the Authority under the RERA Act. The functions of the Authority have been described in Section-34(8), Real Estate (Regulation and Development) Act, 20t6. The following provision is in Section-34(8):- "34(8) - to ensure compliance of its regulations or orders or directions made in exercise of its powers under this Act;"
According to the provision of Section-38, Real Estate (Regulation and Development) Act, 20i6, the Authority has been empowered that if any obligations cast upon the promoter are violated, the Authority may impose penalty or interest under this Act and the rules and regulations made thereunder. Section-38, RERA Act is as follows:- "38. (7) The Authority shall have powers to impose penalty or interest, in regard to any contravention of obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents, under this Act or the rules and the regulations made thereunder. (2) The Authority shall be guided by the principles of natural justice and, subject to the other provisions of this Act and the rules made thereunder, the Authority shall have powers to regulate its own procedure. (3) Where an issue is raised relating to agreement, action, omission, practice or procedure that— (a) has an appreciable prevention, restriction or distortion of competition in connection with the development of a real estate project; or (b) has effect of market power of monopoly situation being abused for affecting interest of allottees adversely, then the Authority, may suo motu, make reference in respect of such issue to the Competition Commission of India." Section-40 of the RERA Act is as follows:
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, va-t69, गामा-2, ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर-204308. सुनवाई पीठ-0॥ (पूर्व में पीठ-04-ए) श्री संजय आर. भूसरेड्डी, माननीय अध्यक्ष शिकायत संख्या: NCRI44/08/57638/2020 प्रदीप जैन बनाम उप्पल चड्ढा हाई-टेक डेवलपर्स प्रा. लि. आदेश अन्तर्गत धारा-38, 40(2) एवं 63 = का परिवाद अंतिम बहस हेतु वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दिनांक t8-06—2025 को प्रस्तुत किया गया। पुकार पर प्रार्थी / शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री मनेन्द्र कुमार के प्रॉक्सी अधिवक्ता श्री पुनीत जैन उपस्थित हुए तथा विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री असित कुमार उपस्थित हुए। इस पर पीठ द्वारा उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के तर्कों को विस्तार से सुनते हुए, पत्रावली आदेश हेतु दिनांक 48-06-2025 को ही सुरक्षित की गयी। भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 का मुख्य उद्देश्य यह है कि भू-सम्पदा सेक्टर में उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण किया जाए तथा विवादों का शीघ्र निस्तारण किया जाए। इस उददेश्य की पूर्ति हेतु प्राधिकरण को रेरा अधिनियम के अन्तर्गत दायित्व तथा शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं। धारा-34(8), भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20t6 F प्राधिकरण के कृत्यों का veers किया गया है। धारा-34(8) में निम्नलिखित प्राविधान है:- 734(6) - to ensure compliance of its regulations or orders or directions made in exercise of its powers under this Act;" धारा-38, भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20i6 & प्राविधान के
अनुसार प्राधिकरण को यह अधिकार दिया गया है कि प्रोमोटर द्वारा उस पर डाली गयी बाध्यताओं का उल्लंघन किया जाता है, तो प्राधिकरण इस अधिनियम और उसके अधीन Page l| of 7 { E-Court = गए नियमों एवं विनियमों के अधीन Gated] या ब्याज अधिरोपित कर सकता है। धारा-38, रेरा अधिनियम निम्नवत् है:- 738. (7) The Authority shall have powers to impose penalty or interest, in regard to any contravention of obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents, under this Act or the rules and the regulations made thereunder. (2) The Authority shall be guided by the principles of natural justice and, subject to the other provisions of this Act and the rules made thereunder, the Authority shall have powers to regulate its own procedure. (3) Where an issue is raised relating to agreement, action, omission, practice or procedure that— (a) has an appreciable prevention, restriction or distortion of competition in connection with the development of a real estate project; or (b) has effect of market power of monopoly situation being abused for affecting interest of allottees adversely, then the Authority, may suo motu, make reference in respect of such issue to the Competition Commission of India." रेरा अधिनियम की धारा-40 निम्नवत् हैः-
40. (7) If a promoter or an allottee or a real estate agent, as the case may be, fails to pay any interest or penalty or compensation imposed on him, by the adjudicating officer or the Regulatory Authority or the Appellate Authority, as the case may be, under this Act or the rules and regulations made thereunder, it shall be recoverable from such promoter or allottee or real estate agent, in such manner as may be prescribed as an arrears of land revenue, (2) If any adjudicating officer or the Regulatory Authority or the Appellate Tribunal, as the case may be, issues any order or directs any person to do any act, or refrain from doing any act, which it is empowered to do under this Act or the rules or regulations made thereunder, then in case of failure by any person to comply with such order or direction, the same shall be enforced, in such manner as may be prescribed. धारा-63, भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2006 F प्राधिकरण को यह अधिकार दिया गया है कि यदि प्रोमोटर प्राधिकरण के आदेश का अनुपालन करने में असमर्थ रहता है, तो प्राधिकरण प्रोमोटर के विरूद्ध प्रोमोटर की भू-सम्पदा परियोजना की अनुमानित लागत का 05 प्रतिशत तक पैनाल्टी लगा सकता है। धारा-63 निम्नवत् eH Page 2 of 7 E-Court
= If any promoter, who fails to comply with, or contravenes any of the orders or directions of the Authority, he shall be liable toa penalty for every day during which such default continues, which may cumulatively extend up to five per cent. of the estimated cost of the real estate project as determined by the Authority.” यहाँ यह उल्लेखनीय है कि धारा-40, भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2006 के अध्याय-5 के अन्तर्गत आता है, जो कि भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण से सम्बन्धित है तथा धारा-63, भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 के अध्याय-8 के अन्तर्गत आता है, जोकि अपराध, शास्तियाँ और न्यायनिर्णयन से सम्बन्धित है। उपरोक्त प्राविधानों से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम के अन्तर्गत प्राधिकरण को यह अधिकार दिया गया है कि प्राधिकरण प्रोमोटर द्वारा आदेशों का अनुपालन न करने पर धारा-40 के अन्तर्गत अपने आदेशों का क्रियान्वयन कराए तथा धारा-63 के अन्तर्गत प्रोमोटर पर अर्थदण्ड लगाए। प्राधिकरण दोनों कार्यवाही एक साथ कर सकता है। प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा रेरा पोर्टल के माध्यम से आदेश क्रियान्वयन कराये जाने हेतु आवेदन किया गया, जिस पर प्राधिकरण द्वारा विपक्षी को नोटिस जारी करते हुए दिनांक 45-08-2024 तक पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 22-04-2024 का अनुपालन कर, अनुपालन आख्था प्रस्तुत करने हेतु निर्देश दिये गये, परन्तु विपक्षी द्वारा अनुपालन आख्या उपलब्ध नहीं करायी गयी।
प्राधिकरण द्वारा कारण दर्शाओ नोटिस, दिनांक 03-09-202 को जारी करते हुए विपक्षी को निर्देशित किया गया है कि वह दिनांक 45-09-2024 तक उक्त आदेश का अनुपालन कर, अनुपालन आख्या प्रस्तुत करने हेतु निर्देश दिये गये, परन्तु विपक्षी द्वारा कोई अनुपालन आख्या दाखिल नहीं किया गया है। प्राधिकरण द्वारा धारा-63 के अन्तर्गत नोटिस जारी की गयी, जिसके क्रम में पीठ द्वारा सुनवाई, दिनांक 24-7-202:, दिनांक 46-02-2022, दिनांक 06-04--2022, दिनांक. 43--07-2022, दिनांक. 25-40-2022,. दिनांक. 49-42-2022, दिनांक 24-04-2023,. दिनांक. 24-04-2023, .. दिनांक. 23-05-2023, दिनांक. 42-04-2024, feaie 0-04-2024, feaie 06-09-2024, दिनांक 25-40-2024, दिनांक 23-04-2025, दिनांक 04-04-2025 एवं दिनांक 48-06-2025 को की गयी। प्रकरण में प्रार्थी / शिकायतकर्ता द्वारा अपना लिखित जवाब, दिनांक 24-04-2025 दाखिल करते हुए, विपक्षी द्वारा प्रस्तुत अनुपालन आख्या में किये गये समस्त तथ्यों, अभिकथनों or weit / शिकायतकर्ता द्वारा पूर्ण रूप से खण्डन करते हुए, अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों / अभिकथनों का उल्लेख कर, पीठ द्वारा a3 के अन्तर्गत Page 3 of 7 E-Court पारित आदेश, दिनांक 22-0:-2027 का पूर्ण रूप से अनुपालन कराये जाने का अनुरोध किया गया है। मैंने उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के तर्कों को विस्तार से सुना तथा अभिलेख पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य एवं सामग्री का सम्यूक परिशीलन किया। mead शिकायत के सम्बन्ध में पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत दिनाक 22-0i-202 को अन्य शिकायतकर्तागण के साथ निम्न् समेकित आदेश पारित किये गये:-
74. विपक्षी को आदेशित किया जाता है fe वह शिक्रायतकतायिण के CHET की समस्त QT को अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 29-605--2027 तक ऐसी,” सीसी सहित कब्जा देना छुनिश्वित करें और देय स्टास्प YOR ITT कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें/ 2 विपक्षी थिकरायतकर्ता को दिनांक 22-08-20/6 से ae ee अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक की अवधि पर Rove ब्याज के रूप में MCLR+ WIT की दर से ब्याज अदा करना चुनिश्चित करें। ब्याज की यह rT अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की rere देय धनराधि a aie होने पर थथिकायतकर्ता को वापस की जायेगी । फोर्स Hoare पीरियड wt gerd रखते हुए दिनांक 25-03-2020 से दिनाक 25-09-2020 तक प्रस्योजना में हुए विलग्ब bg ब्याज की गणना नहीं की जायेगी/ साथ ही यदि शिकरायतकर्ता का कोर्ड आतिदेय (Over Dues) & तो OW पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा/ अन्य थिकायतकतगिण के प्रकरण में अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक्तानुसार यणना की att 3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेश अधिनियम 2076 की धारा 2(६०)6) के अनुसार यदि Kr ary होने के are ws ब्याज दर आवंटी को डिफॉल्ट से ग्रोग्रोटर द्वारा लिया जाता & तो उसी दर से ब्याज nee द्वारा डिफॉल्ट किये जाने प्र थी आवंटी को दिया जायेगा/ अतः विनाशित TTT प्र शिकायतकर्ता द्वारा थी MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से als धनयाशि er लागू होने के are आवंटी से Roe eg ली ययी हैं. तो विलम्बित अवधि eg ब्याज की धनराशि की थी उसी दर से गणना की जायेगी । 4. विपक्षी द्वारा agregar यदि कोर्ड धनराशि alder में शासन या किसी स्टेच्यूटरी एजेन्सी को दी जाती & तो yw site dare व शिकायतकर्ता का
प्रो-रेटा शेयर उम्रके द्वारा देय होगा। \, 2 4 Page 4 of 7 4 E-Court 5. पेरीफेरल,/ इन्फास्ट्रक्चरल डवलपमेन्ट ard 850,“- रुपये ग्रति वर्ग गज़ के अनुसार गणना की जायेगी। 6. कन्वर्जन ae अनुबन्ध के ग्रस्तर-7.4 में दी गयी है. जो कि aft की विक्रय Trey का 72 ग्रतिशत होगी और उसी के अनुसार देय होगी। # अस्तर-7.7 के अनुसार बिजली,/ वाटर,“ Ma आदि के मेन लाईन से कनेक्शन देते समय निर्धारित किये यये चार्जेज़ का भुगतान थिकायतकतगिण Ber) इस ya में शिकायतकतगयिण को कनेक्शन देते समय faRre एस्टिमेन्ट (Specific Estimate) के साथ धनराथि विपक्षी मांय सकते हैं तथा शिकायतकतायिण उसके सापेक्ष कार्य पूरा होने के बाद ऑडिटिड अकाउन्टस WT सकते है/ इन हाउस सुपरविजन, एडिगिनिस्ट्रोडिव चार्जेज की धनराशि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एन बी सी. सी को Re याचिका संख्या--940,22077 ‘feed चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ star’ में अनुमन्य करायी है (अर्थात् 8 ग्रतिशत) उससे अधिक धनराशि नहीं लेगें/ यदि भविष्य में अन्य 220 KVA या अधिक के सब-स्टेशन बनाने की आवश्यकता होती & तो उसकी प्रो-रेटा धनराशि शिकायतकतगिण से प्राप्त करने का अधिकार विपक्षी को होगा तथा यह ग्रस्तर-7.7 में भी ग्राविधानित ay इसकी भी पूर्ववत yer अकाउटिय होगी व इन हाऊस एडमिन्सिट्रेटिव या सुपर विजन चार्जज 8 ग्रतिशत से अधिक नहीं होंगें। 8. वाटर हारवेस्टिय के सम्बन्ध में होने वाले व्यय के सम्बन्ध में यह MTT किया जाता है कि क्रेता के ग्रो-रेटा शेयर की सूचना उपलब्ध कराते हुए यह TARA ली जायेगी ।
9. क्लब का एस्टिमेट व ग्रो-रेटा शेयर बताते हुए धनराशि ATA जा सकती है। क्लब की ReRT चार्जेज़ Fare WRT होने या प्लॉट का कब्जा ऑफर होने जो भी बाद में हो तभी से ग्राएग्भ होगा। 70 विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह उपरोकतानुसार कब्जा दिये जाने के समय सशोधित माँग पत्र जारी करना छुनिश्चित करें/ 77. परियोजना में शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट के रखरखाव का You कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि से ही देय होगा/.. उपर्युक्त पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 22-04-2024 के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि पीठ द्वारा विपक्षी कम्पनी को प्रस्तर-04 एवं 02 के अनुसार दिनांक 29-05-202 तक प्रार्थी / शिकायतकर्ता के प्लॉट की समस्त सुविधाओं को अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर ओ.सी. / MA. सहित भौतिक कब्जा देते हुए, रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने तथा देय विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करने हेतु आदेशित किया गया था, परन्तु विपक्षी कम्पनी द्वारा पोर्टल पर अपलोडेड एवं दाखिल अनुपालन Page 5 of 7 AT. 4 E-Court aren तिथि रहित तथा दिनांक 47-06-2025 को भौतिक रूप से दाखिल अनुपालन aren, दिनांक 47-06-2025 के साथ ऐसा कोई साक्ष्य / प्रमाण रेरा कम्प्लेन्ट पेज पर अपलोड एवं प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 22-04-2024 के अनुपालन में विपक्षी कम्पनी द्वारा वर्तमान समय में प्रार्थी,/ शिकायतकर्ता को प्रश्नगत प्लॉट का भौतिक कब्जा देते हुए, अंतिम spree सैटेल कर, रजिस्ट्री निष्पादित करा दी गयी हो।
अतः उपर्युक्त समस्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों के आलोक में यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा अभी तक पीठ द्वारा पारित आदेश, दिनांक 22-04-2024 के किसी भी प्रस्तर का कोई अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया गया है। रेरा नियमावली, 20i6 के नियम-24 में प्राधिकरण के आदेशों एवं निर्देशों को क्रियान्वित करने की रीति दी हुई है। अतः: उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं समस्त परिस्थितियों के दृष्टिगत पत्रावली नियम-24 में निहित शक्तियों के अधीन पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 22-0i—-202 के प्रस्तर-04 के अनुसार प्रश्नगत प्लॉट के भौतिक कब्जे एवं रजिस्ट्री की कार्यवाही हेतु मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष सुनवाई के लिए, दिनांक 43-44-2025 को संदर्भित की जाती है। जहाँ तक विपक्षी कम्पनी के कथनानुसार उनके द्वारा प्रश्नगत प्रकरण के सम्बन्ध में मा. अपीलीय अधिकरण, लखनऊ के समक्ष अपील संख्या: 708/2023 योजित की गयी थी, परन्तु var अपील मा. अपीलीय अधिकरण, लखनऊ द्वारा अपने अंतिम आदेश, दिनांक 24-09--2024 के माध्यम से खारिज की जा चुकी है। अतः उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में प्रश्नगत प्रकरण को वर्तमान में Abeyance में रखे जाने का कोई विधिक आधार एवं औचित्य नहीं है। अतः सचिव, उ.प्र. रेरा प्रकरण में आदेश, दिनांक 22-0:-202 के प्रस्तर-02 के अनुसार दिनांक 34-70-2025 8 पूर्व विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के ब्याज की गणना कराकर निम्नानुसार कार्यवाही करें:-
(क) यदि मा. अपीलीय अधिकरण से उपर्युक्त अपील संख्या: 708/2023 के क्रम में रेरा प्राधिकरण के सम्बन्धित खाते में कोई धनराशि प्राप्त हुई है, तो उसे तत्काल प्रार्थी / शिकायतकर्ता के खाते में स्थानांतरित कर, पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश के प्रस्तर-02 के अनुसार विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के ब्याज की धनराशि में घटाते हुए, अवशेष धनराशि की वसूली हेतु, नियमानुसार वसूली प्रमाण-पत्र जारी करायें। (ख) यदि मा. अपीलीय अधिकरण से उपर्युक्त अपील संख्या: 708/2023 के क्रम में रेरा प्राधिकरण के सम्बन्धित खाते में कोई धनराशि प्राप्त नहीं हुई है, तो ऐसी स्थिति में Page 6 of 7 E-Court पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश के प्रस्तर-02 के अनुसार विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के ब्याज की समस्त धनराशि की वसूली हेतु, नियमानुसार वसूली प्रमाण-पत्र जारी करायें। तदोपरान्त पत्रावली को सुनवाई की तिथि से पूर्व मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें| यदि मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी नियम-24 की कार्यवाही के दौरान यह पाते हैं कि विपक्षी / प्रोमोटर द्वारा आदेश अन्तर्गत धारा-34, दिनांक 22-04-2024 का समयबद्ध रूप से अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है, तो ऐसी दशा में मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी प्रकरण को रेरा अधिनियम की धारा-63 की कार्यवाही किये जाने हेतु पीठ को वापस सन्दर्भित कर सकते हैं। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक: 29-09-2025. Page 7 of 7