Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Amritpal Singh Gill v. Logix Infrastructure Pvt.ltd
Complaint No. NCR144/08/1668/2019
- Decision date
- 2019-11-28
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-04ए श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य कम Go | शिकायत सं0 शिकायतकर्तागण् | एन.सी.आर444 / 08 / 4668 / 2049 सिंह गिल 2 एन.सी.आर444 / 08 / 454 / 2049 कुमार | ३3 [एन.सी.आर44,/08 /i846/20i9 | निधि जैन व अंकुर झिंगरान न शिकायतकर्तागण बनाम मैसर्स लॉजिक्स इन्फास्ट्रक्चर्स प्रा.लि. शिकायतकर्ता अमृतपाल सिंह गिल के साथ 2 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें Blossom County, Phase-3 से सम्बंधित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत to एन.सी. आर444,/ 08 // 4668 // 2049 अमृतपाल सिंह गिल अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत प्रार्थना पत्र Ripple द्वारा facet के fg कब्णा एवं विजम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना Blossom County, Phase-3 के टॉवर-३] में फ्लैट नं०-2007 बुक किया गया, जिसके लिए शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 30,89,228 /- रूपये का भुगतान किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 05.40.205 तक पूर्ण कर कब्जा दिया जाना था, किन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक कब्जा नहीं दिया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी की परियोजना 3 वर्ष से अधिक विलम्ब है। अतः or 2 शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्द कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र, फ्लैट केता अनुबन्ध, त्रिपक्षीय अनुबन्ध, परियोजना का विवरण आदि की छायाप्रति दाखिल की गयी है। विपक्षी द्वारा प्रतिवादपत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विधि का दुरूपयोग करते हुए वाद योजित किया गया है। परियोजना Blossom County, Phase3 WA पंजीकृत है, जिसका पंजीकरण संख्या-एशरा्रार७शरत4व] है। परियोजना के टॉवर का फिनिशिंग कार्य पूर्ण हो चुका है और ओ.सी हेतु आवेदन भी किया जा चुका है। शिकायतकर्ता को कब्जे हेतु ऑफर दिनांक 76.09.20'9 को कर दिया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा आवासीय यूनिट संख्या-2007 उनकी परियोजना के टॉवर- J में बुक कराया गया था। आवंटन पत्र दिनांक 22.03.2074 को जारी किया गया। फ्लैट केता अनुबन्ध दिनांक 05.04.2044 को निष्पादित कराया गया। निर्माण में विलम्ब फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण हुआ, जो कि उनके नियंत्रण में नहीं था। विपक्षी की ओर से अपने कथन के समर्थन में अधिभोग प्रमाण पत्र हेतु किये गये आवेदन दिनांक 23.04.2049 की छायाप्रति दाखिल की गयी है। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचरित किये गये :- 4... क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते है ? 2 क्या force majeure events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई यदि हां तो प्रभाव? 3. क्या बिल्डर द्वारा फ्लैट के सुपर एरिया का क्षेत्रफल बढ़ाया गया है, यदि हाँ तो किस दर से गणना की जायेगी ? 4... क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज का दर क्या होगा ? निस्तारण बिन्दु Ho 4
बिन्दु संख्या । इस तथ्य पर विचरित है क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रे्रा के दायरे में नहीं आते है? इस सम्बंध में मुम्बई उच्च न्यायालय द्वारा रिट याचिका संख्या- 2737 /207 नीलकमल Raced सबर्बन प्राणलि0 एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण हैं जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है fe: oe XN The provisions of RERA, however, do not rewrite the clause of completion or handing over possession in agreement for sale. Section 4(2)(I)(C) enables the promoter to give fresh time line independent of the time period stipulated in the agreements for sale entered into between him and the allottees so that he is not visited with penal consequences laid down under RERA. In other words, by giving opportunity to the promoter to prescribe fresh time line under Section 4(2)0)(0) he is not absolved of the liability under the agreement for sale. उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा के प्राविधान के अनुसार अनुबन्ध में दिये गये पूर्णता एवं कब्जे देने के प्रस्तर का पुनर्लेखन नहीं किया जा सकता। धारा 4(2)0)(सी) के अन्तर्गत प्रोमोटर एक नई समय सीमा दे सकता है, जो कि अनुबन्ध पर निर्भर नहीं होगा और var धारा रेरा में दिये गये प्राविधान के परिणाम स्वरूप केवल अर्थदंड से बचाया जा सकता है। अतः इससे अवधारित किया जाता है कि प्रोमोटर अनुबन्ध में दिये गये कब्जे की तिथि के लिए उत्तरदायी है। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते है। तद्नुसार बिन्दु संख्या 4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु to 2
बिन्दु Wo 2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या force majeure होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव? यह वाद बिन्दु भी विपक्षी के अभिकथनों के आधार पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि कुछ अप्रत्याशित घटनाओं (force majeure events) (जैसे दंगा, आंदोलन, हडताल, औद्योगिक विवाद, परियोजना पर सेवाओं एवं आपूर्ति का बाधित होना, सरकार का नीति परिवर्तन, न्यायिक Ver आदेश, निर्णय व feet से कार्य बाधित होना, अनुज्ञप्ति व संस्तुतियों में होने वाला विलंब आदि) के कारण परियोजना विलंबित हुई, विपक्षी की ओर से न तो यह कथन किया गया कि किन फोर्स मैज्योर की बाबत उसकी परियोजना विलंबित हुई और न ही फोर्स मैज्योर की बाबत कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल किया गया है। इसके अतिरिक्त माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 /207 विकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में अभिनिर्धारित किया गया है:- ला
i4. On behalf of Amrapali group, learned senior counsel submitted that there were force majeure conditions in completing the projects. There were legal impediments in the completion of projects within the period given in the flat-buyers agreement during the period from 0-5. The submission is baseless. It is apparent that the Full Bench of the High Court though held that the land acquisition was vitiated but still it was upheld. The High Court did not quash it for the reason that development has taken place. Higher compensation was ordered to be paid. That order was affirmed by this Court in 205 in Savitri Devi v. State of U.P. (20I5) 7 SCC 2i. There was no interim stay granted by the High Court on construction work, is made clear by the Noida and Greater Noida authorities. There was no room to entertain any doubt as to the fact whether for a particular village the acquisition had been quashed. There was no quashing of land acquisition and moreover, there was no stay. Only higher compensation was ordered to be paid. There was no force majeure condition or any legal impediment as such the period from 2044 to 205 cannot be treated as a moratorium period vis-a-vis the dues of Noida and Greater Noida authorities. The submission made as to the farmers’ agitation etc. is too vague and 30% of the projects have come up; whereas 70% have not yet come up, out of the projects in Noida and Greater Noida alone.
उपरोक्त अबज़॒रवेशन से यह स्पष्ट है कि वर्ष 2044 से वर्ष 2045 के मध्य निर्माण कार्य पर कोई VIA आदेश नहीं थे, जो कि नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा दर्शित किया गया और इस आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2044 से वर्ष 20:5 के बीच कोई फोर्स मैज्योर कारण या विधिक रूप से रोक नहीं था। चूंकि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वार भी यह स्पष्ट किया जा चुका है कि वर्ष 2044 से वर्ष 20i5 के बीच कोई फोर्स मैज्योर gre नहीं था, ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। तद्नुसार बिन्दु सं0 2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु Ho 3 शिकायतकर्ता द्वारा पीठ के समक्ष दिनांक 74.4.20i9 को कहा गया कि उनके फ्लैट का सुपर एरिया बढ़ा दिया गया है। इस सम्बंध में अनुबन्ध के WER 6. ॥0 में स्पष्ट रूप से उललखित है कि-: The parties agree and acknowledge that the superarea of the apartment is subject to variation and change to maximum extent of 5%,at the time of the delivery of possession of the apartment to the buyer ,and the charges in relation to the same will be payable/adjusted as specified af hereinabove.no claim,demand,suit and/or litigation,shall be raised by the buyer in relation to such variation in the superarea and the buyer hereby waives all rights in relation to the same.
उक्त अनुबन्ध पर पक्षकारों के हस्ताक्षर है जिससे विदित है कि उपरोक्त नियम एवं शर्तों को शिकायतकर्ता द्वारा स्वीकार्य किये गये है। उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता द्वारा सहमति दी गयी है कि अपार्टमेन्ट का सुपर एरिया अधिकतम 5 प्रतिशत तक सुपर एरिया बढ़ाया जा सकता है और उसकी धनराशि अनुबन्ध में विस्तृत रूप से दी गयी है जिसके अनुसार गणना की जायेगी। इस सम्बंध में विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि अनुबन्ध के समय सुपर एरिया के विभिन्न मदों का विवरण वर्तमान में उन्हीं मदों में परियोजना के परिवर्तित क्षेत्रफल व उस परिवर्तन का कारण बताते हुए एवं दोनों स्थितियों में शिकायतकर्ता के क्षेत्रफल की गणना का आधार स्पष्ट करने व उसे वेबसाइट पर डालने के बाद ही यह धनराशि देय होगा। तदनुसार बिन्दु संख्या-3 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु to 4 शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है, जिस पर विपक्षी का कहना है कि परियोजना पूर्ण है और ओ. सी हेतु आवेदन किया जा चुका है। पत्रावली पर दाखिल फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट दिनांक 05.04.2044 को निष्पादित किया गया एवं अनुबन्ध के WER 6.4 के अनुसार विपक्षी को 8 एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ 05.04.20I6 तक कब्जा देना था, किन्तु विपक्षी द्वारा आज तक कब्जा नहीं दिया गया है। विपक्षी का कहना है कि शिकायतकर्ता को कब्जे हेतु ऑफर किया जा चुका है। रेरा पोर्टल पर जाँच के उपरान्त यह पाया गया कि परियोजना की पूर्णता तिथि 3.0.2048 थी, जो कि बीत चुकी है। इस सम्बन्ध में विपक्षी परियोजना के विस्तारण हेतु शीघ्र आवेदन करें अन्यथा अर्थदंड अधिरोपित कर दिया जायेगा।
ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 06.04.2046 से ओ.सी /सी.सी अथवा इलैक्ट्रिकल सर्टिफिकेट, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट, स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट, लिफ्ट FREE सर्टिफिकेट सहित कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- Qe Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay. till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable.
अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा wad धनराशि का उपभोग किया गया है। यह भी उल्लेखनीय है कि पक्षकारों के मध्य एक अनुब॒न्ध निष्पादित है, जो कि उभयपक्ष द्वारा हस्ताक्षरित है, जिससे यह अवधारित किया जा सकता है कि उभयपक्ष को उक्त अनुबन्ध की शर्ते स्वीकार हैं। अनुबन्ध के प्रस्तर 6.6 के अनुसार परियोजना के विलंब की अवधि में 5 रूपये प्रतिवर्ग फुट प्रतिमाह की दर से धनराशि का प्राविधान है, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता धनराशि पाने का अधिकारी है, रेरा के प्राविधानों के अनुसार जिस दर से विपक्षी द्वारा धनराशि प्राप्त की गयी है उसी दर से धनराशि देने का प्राविधान है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय मुम्बई द्वारा उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह भी अभिनिर्धारित किया गया है कि — For the reasons already indicated, aforesaid decisions are not applicable to the facts of the present case. I have already indicated that the provisions of RERA are prospective in nature. The penalty under Sections 48, 38, 59, 60, 67, 63 and 64 is to be levied on account of contravention of provisions of RERA, prospectively and not retrospectively. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्राविधानित दंड पूर्वव्यापी नही, बल्कि भविष्यलक्षी होना d
चाहिये। ऐसी दशा में रेरा के प्रभाव में (दिनाक 4.5.206) से पूर्व अनुबन्ध के अनुसार धनराशि भुगतान किया जाना चाहिये और रेरा के आने के बाद दिनांक 4.5.2046 से रेरा के प्राविधानो के अनुसार विलंबित अवधि में जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है, जिस वाद में पक्षकारों के मध्य कोई अनुबन्ध निष्पादित नही है, वहां शिकायतकर्ता रेरा के प्राविधानों के अनुरूप जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय / पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2 (8) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+H प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी McLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है। जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बंध में सिविल अपील do 6649-50 // 2048 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि — " the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, Ye wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के के अनुसार ओ.सी.//सी.सी मिलने या कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि पर शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी.,/सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक ही ब्याज पाने के अधिकारी होगें। तद्नुसार बिन्दु सं०-4 निस्तारित किया जाता है।
उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश 4... विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि शिकायतकर्तागण के फ्लैट की समस्त सुविधाओं को आवंटन पत्र के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 34. 42.2049 तक कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराये। 2... विपक्षी दिनांक 06.04.206 से दिनांक 30.04.206 तक 5/- रूपये प्रति वर्गफूट प्रतिमाह की दर से व दिनांक 07.05.2046 से ओ.सी /सी.सी अथवा इलैक्ट्रिकल सर्टिफिकेट, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट, स्ट्रक््चरल सर्टिफिकेट, लिफ्ट इन्स्टालेशन सर्टिफिकेट सहित कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि के लिए शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLRH प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर निम्रयानुसार वापस की जायेगी। अन्य शिकायतकर्तागण के मामलों में अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी। 3. विपक्षी उपरोक्तानुसार संशोधित मांग पत्र जारी करना सुनिश्चित करें | 4 विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि अनुबन्ध के समय सुपर एरिया के विभिन्न मदों का विवरण वर्तमान में उन्हीं मदों में परियोजना के a 9 परिवर्तित क्षेत्रफल व उस परिवर्तन का कारण बताते हुए एवं दोनों स्थितियों में शिकायतकर्ता के क्षेत्रफल की गणना का आधार स्पष्ट करने व उसे वेबसाइट पर डालने के बाद ही यह धनराशि देय होगा।
5. यह भी स्पष्ट किया जाता है कि रेरा अधिनियम 2046 के धारा 2 (zai) के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है कि रेरा लागू होने के बाद यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। ब्याज की दर ॥/८४+१ प्रतिशत होनी चाहिए। 6. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस ओदश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। 7. इस आदेश का veda उ0प्र0भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक / /2049 esa \\4 (कल्पना मिश्रा) (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण