Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Vikrant Singh v. WTC Noida Development Company Pvt Ltd
Complaint No. NCR144/08/122594/2024
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2025-11-21
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (for the complainant)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित - Slo दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या लि यूनिट जमा धनराशि vo | अनुबंध की | अनुबंधानुसार वांछित सं0 संख्या तिथि कब्जा दिये अनुतोष जाने की तिथि I. | ए्टरा44/08722594/2024 | विक्रांत सिंह ८-08-200 | रु0 20,72,342// | 30.07.2020 | 27.02.2024 | जमा धनराशि वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम डब्ल्यू टी सी नोएडा डेवलपमेंट कम्पनी प्रा.लि. शिकायतकर्ता द्वारा शिकायतकर्ता के विरूद्ध जमा धनराशि वापस दिलाये जाने के लिए यह शिकायत संस्थित की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ५श८ Noida ८80 में अंकित यूनिट संख्या ८-08-207बुक कराई गई थी जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की, धनराशि रु 20,72,342/ का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत पृष्ठ पर यह उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी की परियोजना विलम्बित है जिस कारण 'शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया TAPS ४ शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में अनुबंध पत्र व रसीदों की छायाप्रतियां दाखिल की गई है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि [संख्या (रु0) | विपक्षी द्वारा जारी रसीद संख्या 2093 45.04.2020 BO 48,48,342 / रसीद संख्या 5937 45.04.2020 BO 2,24,000/ कुल योग : रु0 2072,342/
विपक्षी दिनांक 09.40.2024 को पत्रावली पर उपस्थित हुए। विपक्षी को लिखित जवाब दाखिल किये जाने हेतु पर्याप्त अवसर दिये गये परन्तु विपक्षी द्वारा प्रकरण में अपना लिखित जवाब दाखिल नहीं किया गया जिस कारण पीठ द्वारा दिनांक 25.06.2025 को विपक्षी का लिखित जवाब दाखिल करने का अवसर समाप्त करते हुए पत्रावली विपक्षी के विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही हेतु अग्रसारित करते हुए शिकायतकर्ता की एकपक्षीय बहस र+ = ०7. अल सुनी गयी। उपरोक्त वर्णित तथ्यों के कारण प्रकरण में एकपक्षीय निर्णय पारित किया जा रहा है। शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल प्रपत्रों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न विरचित किया जाता हैं :- 4. क्या शिकायतकर्ता को जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है? निस्तारण प्रश्न संख्या -: 4 क्या शिकायतकर्ता को जमा धनराशि वापिस दिलायी जा सकती है? शिकायतकर्ता की ओर से परियोजना विलम्बित होने के कारण जमा धनराशि वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन किया। पत्रावलियों के अवलोकन से विदित है कि शिकायतकर्ता व उभयपक्ष के मध्य दिनांक 30.07.2020 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को फरवरी 2024 में यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी की ओर से परियोंजना&पूर्ण होने के सम्बन्ध"में न तो ओ.सी/सी.सी की प्रति और न ही लिखित कथन्न-की प्रति.दाखिल की गयी है। इससे स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना पूर्ण नहीं है। जबकि शिंकायतकर्ता को अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा उपरोक्त वर्णित अवधि में प्राप्त होना था। इस प्रकार विपक्षी की परियोजना लगभग Ot वर्ष से अधिक विलम्बित हैं। |
ऐसी स्थिति में रेरा अधिनियम की aRrie(!) में यह प्राविधानित है कि यदि प्रोमोटर करार के निबन्धों के अनुसार उसमें दिये गये अवधि तक समय से किसी अपार्टपेन्ट, भू-खण्ड या भवन को पूरा करने में असमर्थ रहता है या कब्जा देने में असमर्थ रहता है, तो वह उपलब्ध किसी अन्य उपचार पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना आवंटी की मांग पर यदि आवंटी परियोजना से बाहर होना चाहता है, तो प्रकरण के अनुसार, उस अपार्टमेन्ट, भू-खण्ड या भवन के सम्बन्ध में उसके प्राप्त धनराशि ब्याज सहित लौटाने का उत्तरदायी होगा जिस कारण शिकायतकर्ता परियोजना में बने रहना नहीं चाहते है। उक्त तथ्यों के आधार पर शिकायतकर्ता जमा धनराशि मय ब्याज वापस पाने के अधिकारी हैं। जहां तक शिकायतकर्ता को मय ब्याज धनराशि वापस किये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन 2 Ss प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 48(4)(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का&उपभोग किया गया है। जहां तक देय Soe OT Wee, ARE द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन
एवं विकास) अधिनियम 2orewd अधीनथदिनांक y7.0.20I8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें दिये गये विक्रय / पट्टा... विलेख... के | प्रारूप के... प्रस्तर. 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(ii) 4 प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +4% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। अत: उक्त प्राविधानों के आधार पर शिकायतकर्तागण जमा धनराशि मय ब्याज MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से प्राप्त करने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्न का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता हैं :- आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के अन्दर शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि रु0 20,72,342/ (रु० बीस लाख बहत्तर हजार तीन सौ ब्यालिस) पर धनराशि जमा किये जाने की तिथि से भुगतान किये जाने की तिथि तक मय MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से शिकायतकर्ता को वापस भुगतान करना सुनिश्चित करें।
2. इस आदेश का vera भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 3. विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिनों में नहीं किया जाता है तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन करा सकेंगे। 4. आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। oye 2a Ne VAS (Soda Sat सक्सेना) ees ek उ.प्र. भूल्सम्पदाहृविनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर