Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Neelaish Tiwari v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/08/121973/2024
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2026-09-08
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
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Judgment text
(4 उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:- डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या | | यूनिट न0 | जमा धनराशि vo | wie फॉर | अनुबंधानुसार वांछित eo सेल की तिथि | कब्जा दिये अनुतोष जाने की तिथि ; . | ॥८२44/08/2973/2024 | नीलेश 77-305 | रु0 48,02,624,// | 48.0.2048 | 30.06.20:8 | यूनिट का तिवारी व कब्जा व ईशा तिवारी विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम एटीएस रियलटी प्रा.लि. प्रश्नगत प्रकरण के. सम्बन्ध में yee किया जाता है कि शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत संख्या Wisi एन्नसीआर।44 / 04 ,/93488 /2022 नीलेश तिवारी बनाम मैसर्स ए.टी.एस रियलटी wifes विरूद्ध न्यायनिर्णायक अधिकारी के पीठ में पूर्व में योजित की गयी थी. जो*पीठ द्वारा. दिनांक 09.42.2022 को निरस्त कर दी गयी थी। ततपश्चात शिकायतकर्ता द्वारा न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा पारित आदेश के विरूद्ध अपील संख्या 82,/2023 रेरा, अपीलीय अधिकरण लखनऊ में योजित की गयी। माननीय अपीलीय अधिकरण द्वारा दिनांक 07.05.2024 को अपील Pata करते हुए अपीलकर्ता को यह आदेशित किया गया कि रेरा अधिनियम की धारा t8(!) के अनुसार विलम्बित अवधि के ब्याज हेतु सक्षम प्राधिकरण के समक्ष वाद योजित करें। तत्पश्चात शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु वर्तमान शिकायत संस्थित की गयी है।
संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE में यूनिट संख्या ॥#-3045 बुक कराई गई, आवंटित यूनिट की कुल कीमत %O रु० 37,45,250/ थी जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को ———
धनराशि wo 8,02,624/ का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल लिखित कथन में यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना एटीएस एल्लोर में यूनिट संख्या 305 बुक करायी गयी थी। विपक्षी की परियोजना में रेरा में पंजीकृत है जिसका पंजीयन संख्या यूपीरेरापीआरजे948 है। gerd यूनिट के सम्बन्ध में दिनांक i806.20I8 को अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ। अनुबंध पत्र के क्लाज 7. के अनुसार 30620i8 में यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था। विपक्षी द्वारा दिनोक 30.03.2022 को पत्र के माध्यम से सूचित किया गया कि विपक्षी को ओससी प्राप्त हो चुका है। विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में यूनिट का कब्जा देने में असफल रहा है। शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 34.03.2022 को विपक्षी को ईमेल के माध्यम से विलम्ब ब्याज समायोजित करते हुए मांग पत्र प्रेषित किये जाने का अनुरोध किया गया परन्तु विपक्षी द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया। विपक्षी द्वारा दिनांक 44.042022 को विलम्ब ब्याज को बिना समायोजित किये हुए अहस्ताक्षारित ऑफर ऑफ पजेशन पत्र aera जो शिकायतकर्ता को दिनांक 24.04.2022 को प्राप्त हुआ। शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक...22.04.2022 को विपक्षी से विलम्ब ब्याज समायोजित करते हुए हस्ताक्षारित मांग पत्र भेजे जाने का अनुरोध किया गया लेकिन विपक्षी की ओर... से कोई जवाब नहीं दिया गया। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा, विपक्षी को हस्ताक्षारित व विलम्ब ब्याज समायोजित करते हुए पुनः मांग पत्र प्रेषित किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का व मानसिक उत्पीडन हेतु Bo 50,000/ क्षतिपूर्ति दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में लिखित कथन, आवंटन पत्र, रसीद, इन्टीमेशन ऑफ फाइनल ऑफर ऑफ पजेशन व फाइनल ऑफर ऑफ पजेशन की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् हैः- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि (रु0) [संख्या विपक्षी द्वारा जारी रसीद संख्या 0024 42.04.20i8 |®0 3,00,000/ रसीद संख्या 0023 42.04.20i8 |®0 4,00,000/ रसीद GT 0409 2.02.20i8 |¥0 74,02,624 / | कुल योग : | wo 78,02,624/ 2 ——S
विपक्षी द्वारा लिखित जवाब दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायत कानूनी प्रकिया का स्पष्ट दुरुपयोग है और यह शिकायत विपक्षी को दबाव में लाने और दबाव डालने के एकमात्र उद्देश्य से दायर की गयी है। ताकि वह कब्जे में कथित देरी के लिए मुआवजा प्रदान करें जो कि कानूनी दृष्टिकोण से विपक्षी करने के लिए बाध्य नहीं है। प्रस्तुत शिकायत में कोई दम नहीं है और यह निराधार आधारों पर आधारित है जिसका किसी भी प्रकार के दस्तावेजों से कोई समर्थन नहीं मिलता है। इस सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रशांत कुमार शाही बनाम गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में पारित आदेश का उल्लेख किया गया है जिसमें यह अवधारित किया गया है कि अनुबंध के अपने हिस्सों को पूरा करने में विफल रहने के कारण, अपीलकर्ता को यह तर्क लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती कि ब्याज सहित शेष राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं है क्योंकि उसके अनुसार विपक्षी प्राधिकरण ब्रोशर की शर्तों के अनुसार कब्जा देने में विफल रहा है। विपक्षी*द्वारा उल्लिखित किया गया है कि वर्तमान प्रकरण में शिकायतकर्ता eRe wae लगातार चूक की गयी है और आज तक बकाया धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा सही तथ्यों को छिपाया गया है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया हैं कि शिकायतकर्ता err परियोजना एटीएस एल्लौर में बुकिंग फार्म दिनांक t5.0:.208 के माध्यम से यूनिट संख्या 3045 बुक करायी गयी थी। आवंटित यूनिट की कुल कीमत रु० 37,45,250,// थी। आवंटित यूनिट के सम्बन्ध में दिनांक i80:20i8 को अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ। विपक्षी द्वारा परियोजना को पूर्ण करते हुए दिनांक 30.03.2022 को इंटीमेशन ऑफ ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया गया। तत्पश्चात विपक्षी द्वारा दिनांक 74.04.2022 को अंतिम ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया गया। विपक्षी द्वारा क्रमशः दिनांक 74.06.2022, 02. 08.2022 व 08.08.2022 को अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु अनुस्मरण पत्र प्रेषित किये गये। शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। विपक्षी द्वारा पुनः दिनांक 07.40.2022 व 05.05.2023 को अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु समय प्रदान किया गया परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। विपक्षी को दिनांक 30.03.2022 को
3 — oon
अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने के उपरांत विपक्षी द्वारा दिनांक 44.04.2022 को शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा अनुबंध के पेमेंट प्लान के अनुसार देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। विपक्षी द्वारा दिनांक 29.07.2020 को oifas-i9 महामारी व अन्य विषम परिस्थितियाँ होने के बावजूद ओ.सी हेतु आवेदन किया गया। विपक्षी द्वारा रेरा आदेश दिनांक 46.0920:9 का संदर्भ अंकित करते हुए परियोजना को डीम्ड माने जाने का उल्लेख किया गया है क्योंकि विपक्षी द्वारा दिनांक 29.07.2024 ओ.सी हेतु आवेदन किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि कोविड-49 महामारी, एन.जी.टी व प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड द्वारा समय समय पर लगाये गये प्रतिबन्धों के कारण 378 दिन निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है जिस कारण विपक्षी की परियोजना विलम्बित हुई है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 26.05.2022 को शिकायतकर्ता को कब्जे का प्रस्ताव दिया और उप-पटटा विलेख के पंजीकरण के लिए निवेदन fear हालांकि शिकायतकर्ता ने अपने स्वार्थवश औपचारिकताओं BT args टालने का रास्ता अपनाया। शिकायतकर्ता द्वारा बकाया धनराशि के भुगतान में लापरवाही बरतने के बावजूद विपक्षी ने न केवल अपना दायित्व को पूरा किया afew शिकायतकर्ताओं के लिए यूनिट को आरक्षित रखने का खर्च भी वहन किया हैं जिससे विपक्षी को नुकसान हुआ है। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट रूप से अनदेखा किया। इसलिए शिकायतकर्ताओं को विलम्बित ब्याज की मांग करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उन्होंने आवंटन पत्र के मूल सिद्धान्तों पालन नहीं किया है और समय पर देय धनराशि का भुगतान नहीं किया है। शिकायतकर्ता द्वारा 50 प्रतिशत से अधिक देय धनराशि का भुगतान किये जाने में विलम्ब किया गया है। तत्पश्चात विपक्षी द्वारा दिनांक 20.4.2024 को यूनिट निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किया गया जो शिकायतकर्ता को दिनांक 24.44.2024 को प्राप्त हुआ है। अतः विपक्षी द्वारा वर्तमान शिकायत अर्थदण्ड के साथ निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी द्वारा दाखिल लिखित जवाब पर प्रतिउत्तर दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट की कुल कीमत का 50 प्रतिशत धनराशि भुगतान किया गया है तथा 50 प्रतिशत धनराशि 4 Sa eee ?
विपक्षी द्वारा वैध रूप से कब्जा का प्रस्ताव व मांग पत्र भेजे जाने पर भुगतान किया जाना था। जबकि विपक्षी विधिवत हस्ताक्षारित और वैध मांग कब्जा प्रस्ताव जारी करने में लगातार विफल रहा है। विपक्षी से बार बार अनुरोध करने और यहां तक न्यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष विशेष प्रार्थना करने के बावजूद विपक्षी ने अपेक्षित हस्ताक्षारित कब्जा पत्र जारी नहीं किया है। विपक्षी का यह आरोप है कि कब्जा पत्र दिनांक 44.04.2022 ईमेल द्वारा भेजा गया इसलिए हस्ताक्षर आवश्यक नहीं है। विपक्षी द्वारा फ्लैट सौपने में चार साल की देरी के बाद दिनांक 44.04.2022 को डाक द्वारा एक अहस्ताक्षारित मांग कब्जा पत्र भेजा, जो शिकायतकर्ता को 24.04. 2022 को प्राप्त हुआ। शिकायतकर्ता ने तुरंत पत्र का जवाब देते हुए कमी को इंगित किया और समय पर भुगतान करने के लिए एक वैध हतस्ताक्षारित पत्र का अनुरोध किया। शिकायतकर्ता द्वारा माननीय न्यायालय से निवेदन किया गया कि विपक्षी को तत्काल वैध, विधिवत हस्ताक्षारित कब्जा /मांग पत्र जारी करने का निर्देश दे ताकि शिकायतकर्ता बकाया भुगतान दायित्वों>का. निर्वहन कर सके। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी द्वारा दाखिल लिखित ज़वांब के प्रत्येक प्रस्तर का खण्डन करते हुए यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 20.42024 को निरस्त किये जाने, यूनिट का कब्जा, विपक्षी द्वारा फ्रेश मांग. पत्र जारी किये जाने, विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने व विपक्षी द्वारा लगाये गये अतिरिक्त चार्ज को हटाये जाने का अनुरोध किया गया है। उक्त के अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा लिखित बहस दाखिल करते हुए शिकायत के समर्थन में न्याय नजीरों की प्रतियां दाखिल की गयी है। उभयपक्षों के तर्कों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किया जाता हैं :-
4. कया विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट निरस्त किया जाना वैधानिक है अथवा नही? निस्तारण प्रश्न संख्या 4 -: प्रश्न संख्या se आशय का विरचित किया गया है कि gar विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट निरस्त किया जाना वैधानिक है अथवा नहीं? विपक्षी द्वारा दाखिल लिखित जवाब में यह तर्क लिया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने पर 5 ee
विपक्षी द्वारा क्रमशः दिनांक 74.06.2022, 02.08.2022 व 08.08.2022 को अनुस्मरण पत्र प्रेषित किये गये परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। विपक्षी द्वारा पुनः दिनांक 07.0.2022 व 05.05.2023 को अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु समय प्रदान किया गया फिर भी शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया जिस कारण विपक्षी द्वारा दिनांक 20.44.2024 को यूनिट निरस्त कर दी गयी। इसके अतिरिक्त दिनांक 44.05.2026 को सुनवाई के दौरान विपक्षी द्वारा कहा गया कि उन्हें कई वर्ष पूर्व परियोजना के सापेक्ष ओ.सी प्राप्त हो गया है तथा शिकायतकर्ता के डिफाल्टर होने के कारण से उनकी यूनिट निरस्त करते हुए उक्त पर तृतीय पक्ष के अधिकार सूजित किये जा चुके है। पत्रावली के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी ने लिखित जवाब में यह तर्क प्रस्तुत किया है कि शिकायतकर्ता को देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु अनुस्मरण पत्र क्रमशः दिनांक 44.06.2022, 02:.08.2022, 07.0.2022 व 05.05..2023 को भेजे गये लेकिन शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान न किये जाने पर विपक्षी द्वारा आवंटित यूनिट दिनांक 20.2.2024 को निरस्त कर दी गयी है। उक्त के सम्बन्ध में भू-सम्पदा<.(विनियमन एवं विकास) (विक्रय /पदढ्टा के लिए करार) नियमावली, 20i8 की धारा 9.3 (2) में यह प्राविधानित है कि :- धारा 9.3 ii. In case of Default by Allottee under the condition listed above continues for a period beyond 3 (three) consecutive months after notice from the Promoter in this regard, the Promoter may cancel the allotment of the [Apartment/Plot] in favour of the Allottee and refund the money paid to him by the Allottee by deducting the booking amount and the interest liabilities and this Agreement shall thereupon stand terminated. The Promoter must not be in default to take this benefit; Provided that the Promoter shall intimate the Allottee about such termination at least thirty
days prior to such termination. पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट है कि उभयपक्ष के मध्य दिनांक 8.07.20:8 को आवंटन पत्र निष्पादित किया गया था जिसके अनुसार यूनिट का कब्जा 30.06. 2048 तक उपलब्ध कराया जाना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का 6 —_—SS कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा अनुबंध के अनुसार यूनिट के सापेक्ष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु 50 : 50 का प्लान चयन किया गया था जिसके अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन से पूर्व 50 प्रतिशत धनराशि तथा 50 प्रतिशत ऑफर ऑफ पजेशन के समय भुगतान किया जाना था। पत्रावली पर उपलब्ध पेमेंट प्लान के अनुसार यूनिट की कुल कीमत रु0 37,45,230/ थी। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को पेमेंट प्लान के अनुसार 50 प्रतिशत धनराशि का भुगतान किया जाना था परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष 50 प्रतिशत से कम धनराशि Go 48,02,624 / का भुगतान किया गया है और शिकायतकर्ता द्वारा fede मांग पत्रों की अनदेखी की गयी है और serene अनुबंध पत्र में वर्णित पेमेंट प्लान का अनुपालन भी नहीं किया गया है। उक्त के सम्बन्ध में रेश अधिनियम की ai—i9 की उप-धारा 6 में यह प्राविधानित है कि :-
(6) Every allottee, who».has entered into an agreement for sale to take an. apartment, plot or building as the.case may. be, under'section 3, shall be responsible to make necessary payments in the mannerand within the time as specified in the said agreement _ forsale and shall pay at the proper time and place, the share of. the registration charges, municipal taxes, water and electricity charges, maintenance charges, ground rent, and other charges, if any. उक्त से स्पष्ट है कि प्रत्येक शिकायतकर्ता का यह दायित्व है कि वह आवंटित यूनिट के सापेक्ष अनुबंधानुसार निर्धारित समय अवधि के अन्दर धनराशि का भुगतान करें, इसके अतिरिक्त यदि अन्य कोई चार्ज जैसे मुनीस्पिल टैक्स, पानी व विद्युत शुल्क व मैन्टेनेस शुल्क है तो इसका भी भुगतान करें। पत्रावली के अवलोकन से यह भी विदित है कि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 30.03.2022 को विपक्षी के पक्ष में प्रश्नगत परियोजना के सापेक्ष ओ.सी जारी किया गया। तत्पश्चात विपक्षी द्वारा दिनांक 30.03.2022 को शिकायतकर्ता को इन्टीमेशन ऑफर फाइनल ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया गया। इसके पश्चात विपक्षी द्वारा दिनांक 44.04.2022 को फाइनल ऑफर ऑफ पजेशन पत्र जारी किया गया परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा पेमेंट प्लान के 7 SS
अनुसार ऑफर ऑफ पजेशन के समय यूनिट के सापेक्ष अवशेष देय धनराशि 50 प्रतिशत का भुगतान नहीं किया गया। जबकि विपक्षी द्वारा ओ.सी दिनांक 30.03. 2022 को प्राप्त होने के उपरांत शिकायतकर्ता को अवषेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु निरतंर अनुस्मरण पत्र प्रेषित किये गये लेकिन शिकायतकर्ता द्वारा अनुबंधानुसार ऑफर ऑफ पजेशन के समय भी 50 प्रतिशत देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा अनुबंधानुसार 50 प्रतिशत धनराशि ऑफर ऑफ पजेशन से पूर्व भुगतान किया जाना था परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन से पूर्व भी 50 प्रतिशत धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा अधिभोग प्रमाणपत्र प्राप्त होने के उपरांत जारी मांग पत्र के अनुसार शिकायतकर्ता को विपक्षी से सम्पर्क करके एकाउंट सेटल करते हुए कब्जे की कार्यवाही के लिए सम्पर्क स्थापित कर यूनिट के सापेक्ष अवशेष देय धनराशि का भुगतान किया जाना विधिक कर्तव्य था परन्तु विपक्षी के द्वारा शिकायतकर्ता को बार-बार अनुस्मरण पत्र ooh बाद भी शिकायतकर्ता द्वारा मांग पत्रों की अनदेखी की गयी जिस कारण से विपक्षी द्वारा दिनांक 20.44.2024 को प्रश्नगत यूनिट को निरस्त oy दिया गया। उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आधार पर विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट... का निरस्त किया जाना वैधानिक है। इसलिए शिकायतकर्ता कोई अनुतोष पाने का अधिकारी नहीं है। तद्नुसार प्रश्न संख्या 4 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आधार पर शिकायत निरस्त किये जाने योग्य है। आदेश प्रस्तुत शिकायत oR निरस्त की जाती है। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। पत्रावली दाखिल दफ्तर हो। $a ५५-०८
Nines हि ase (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) जल है शक सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर