Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Dipesh Rattan Bhardwaj and Ashwani Kumar Bhardwaj v. Solitaire Realinfra Private Limited
Complaint No. NCR144/08/112419/2023
- Decision date
- 2026-01-21
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की aRIH-3t के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:- Slo दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य , शिकायत संख्या शिकायतकर्ता | यूनिट न0 | जमा.धनराशि रु० | बिल्डर बायर | अनुबंधानुसार | वांछित io एग्रीमेंट की कब्जा दिये अनुतोष * तिथि जाने की तिथि | NCRI44/08 72479/2023 | दीपेश रतन | 77-704. | Wo 38,3,57/ | 30.32.2005 | 45 माह तथा | यूनिट का -भारद्वाज 06 माह कब्जा व व अनुग्रह अवधि | विलम्बित अश्वनी के साथ अवधि का कुमार अर्थात मार्च ब्याज भारद्वाज 2020 दिलाये ; जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम सॉलिटेयर,,रिएलइन्फ्रा प्रा.लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह शिकायत संस्थित की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना SOLITAIRIAN CITY (SOL) PHASE-2 में यूनिट संख्या टी4-4704 बुक कराई गई, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि रु0 38,3,57/ or भुगतान किया var) शिकायतकर्ता ने शिकायत पृष्ठ पर यह उल्लिखित किया है कि विपक्षी की परियोजना 04 वर्ष विलम्बित है और विपक्षी की परियोजना अभी पूर्ण नहीं है। विपक्षी द्वारा विलम्बित अवधि का ब्याज भी भुगतान नहीं. किया गया है। इसके अतिरिक्त विपक्षी को परियोजना के सापेक्ष -ओ.सी » सी. सी भी प्राप्त नहीं है। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि रेरा तकनीकी दल द्वारा विपक्षी की परियोजना की गयी स्थलीय निरीक्षण आख्या दिनांक 02.04.2022 के, अनुसार परियोजना में निर्माण कार्य बंद है तथा waar वर्क 70
प्रतिशत, ब्रिक वर्क 65 प्रतिशत, प्लास्टर वर्क 20 प्रतिशत, पेंट, कॉमन eRe में कार्य 0 प्रतिशत, फ्लोरिंग 02 प्रतिशत, लिफ्ट कार्य 0 प्रतिशत, कुल मिलाकर ५ . * परिय्रोजना में 40 से 45 प्रतिशत कार्य पूर्ण हुआ है। ara: शिकायतकर्ता. द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में बिल्डर बायर एग्रीमेंट दिनांकित 30.42.205 व जमा धनराशि Wie की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- क्रम विवरण दिनांक भुगतान को ग संख्या धनराशि (रु0) ‘ विपक्षी द्वारा जारी- की रसीदों का विवरण , रसीद संख्या 5736 06.05.204 रु0. 2,00,000/ रसीद संख्या 5737 46.04.2044 BO 4,9,658 / रसीद संख्या 5730 46.07.204 BO 3,9,658 / रसीद Wet 5739; 49.07.206 BO 6 ,39,346 / रसीद संख्या 5740 47.07.207 ¥%O 4,00,000 / रसीद संख्या 5753 ४ 27.02.202 BO 6,00,000/ रसीद संख्या 5863 43.09.2024 BO 6,33,350/ रसीद संख्या 5995 24:44.2022 WO 4,42,805 / रसीद संख्या 6293 26.04.2023 BO 4,62,790 / रसीद संख्या 650: 40.08.2023 BO ,62,790/ रसीद संख्या 6844 * 47.04.2024 BO 4,62,790/ , कुल योग : रु0 38,3,457 /
विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति दाखिल की गई, जिसमें यह उल्लिखित है कि शिकायतकर्ता द्वारा निवेश के उद्देश्य से यूनिट बुक करायी गयी थी। विपक्षी: द्वारा उल्लिखित किया गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य समय से पूर्ण किया जाना आवंटियों द्वारा समय से देय धनराशि का भुगतान किये जाने पर निर्भर था परियोजना के कई आवंटियों द्वारा देय धनराशि का भुगतान किये जाने में विलम्ब किया गया है। शिकायतकर्ता को दिसम्बर 20i5 में यूनिट आवंटित की गयी थी। इसके उपरांत उभयपक्षों के मध्य दिनांक 29.04.202 को एडेन्डम एग्रीमेंट निष्पादित हुआ है। शिकायतकर्ता द्वारा कन्सट्रक्शन लिंक प्लान का विकल्प चुना गया। शिकायतकर्ता द्वारा आवंटित यूनिट के सापेक्ष एस.बी.आई से लोन लिया गया है। शिकायतकर्ता को दिसम्बर 20i5 में यूनिट आवंटित की गयी थी। बिल्डर 'बायर एग्रीमेंट के gant 24.4 के अनुसार यूनिट का कब्जा मार्च 2020 में फोर्स मैज्योर के. अधीन दिया जाना था। विपक्षी द्वारा उंल्लिखित किया गया है कि परियोजना में निर्माण कार्य विलम्ब होने का कारण फोर्स मैज्योर परिस्थितियों माननीय एन.जी.टी द्वारा भू-जल निकासी पर लगाये गये प्रतिबंध, माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा बढ़ते प्रदूषण के कारण.
निर्माण कार्य पर लगाये गये प्रतिबन्ध व कोविड-49 महामारी को बताया गया है। विपक्षी द्वारा फोर्स मैज्योर के सम्बंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बिक्रम चटर्जी व अन्य बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया व अन्य सिविल अपील संख्या s4o/20i7 में पारित आदेश .व रेरा पीठ द्वारा शिकार्यत संख्या एनसीआर+१45 // 44 // 85434 // 2024 सुनील कुमार बनाम एम आर मित्तल में पारित आदेश दिनांक 45.4.2022 व एनसीआर संख्या 444 / 09 / 64244 / 2020 निखिल सिंघल बनाम ARR गौर WRT हाईटेक इन्फ्रास्ट्रक्चर्स प्रा.लि. में पारित आदेश दिनांक 46.42.2020 का संदर्भ अंकित किया है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित कियां गया है कि वह शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा जुलाई 2025 में उपलब्ध करा देंगे। विपक्षी द्वारा लिखित आपत्ति के समर्थन में बिल्डर बायर एग्रीमेंट, रेरा कार्यालय आदेश व फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में पीठ द्वारा पारित आदेश की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है | उभयपक्षों की बहस सुनी गयी | उभयपक्षों के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये गये है :- i. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने के कारण विलम्बित हुई ? 2. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या 4-: प्रश्न Ve इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने के कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। ॥ विपक्षी द्वारा परियोजना विलम्बित होने का कारण माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्माण कार्य पर लगायी गयी रोक के आदेश, एनजीटी द्वारा जारी आदेश व कोविड-49 महामारी को बताया गया है। 3 मी
फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के wer 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि :- ” प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर एग्रीमेंट में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय ‘ अंथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को werd हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवों अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना OTT |” माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 /985, “M.C. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04-74-20:9 F निम्नलिखित निर्देश दिये है:- ह “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local, administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order = and to ensure that no such activity takes place.” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029/985 में पारित आदेश दिनांक o9—2-20:9 में निम्नलिखित निर्देश दिये हैः- “In the affidavit dated 05.2.2029, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
"42. That it is respectfully submitted that it is normally * experienced - that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in maderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient (=) AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 om > \ hours or more. "” §e3 ह 2 Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted 4 है above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.” * माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक o4—-r:-20:9 से दिनांक
44-02—2020 तक) की अवधि के: लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक 09-42-2049 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04-44-2049 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33° दिन(6+2) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02-2020 तक Wa 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि var अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को gare ठहराना न््यायोचित नहीं होगा | अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त afts—i9 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण aR जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। .
उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन. के अतिरिक्त विपक्षी wifas—i9 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न Seer निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न. संख्या-2 प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकांयतकर्ता का कहना है कि विपक्षी की परियोजना 04 वर्ष विलम्बित हैं और उन्हें अभी तक यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ जिस कारण शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है। विपक्षी का कहना है कि फोर्स मैज्योर, एनजीटी व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश से निर्माण कार्य प्रतिबन्धित था जिस कारण परियोजना विलम्बित हुई है। विपक्षी द्वारा लिखित आपत्ति में शिकायतकर्ता को जुलाई 2025 में कब्जा उपलब्ध कराये जाने का तथ्यं उल्लिखित किया गया है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से यह विदित है कि विपक्षी व शिकायतकर्ता के मध्य दिनांक 30.:2.20:5 को बिल्डर बायर एग्रीमेंट निष्पादित हुआ . जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा 45 माह तथा 06 माह अनुग्रह _ अवधि के साथ अर्थात मार्च 2020 में दिया जाना था परन्तु शिकांयतकर्ता को अभी तक यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी की ओर से दाखिल लिखित आपत्ति में 'शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा जुलाई 2025 में उपलब्ध कराये जाने का उल्लेख किया गया है परन्तु विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को कब्जा उपलब्ध कराये जाने का कोई साक्ष्य दाखिल नहीं किया गया है और न ही विपक्षी द्वारा ओसी /सी.सी की प्रति. दाखिल की गयी है।
उपरोक्त से स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना अभी पूर्ण नहीं है। इस प्रकार विपक्षी की परियोजना लगभग 05 वर्ष से अधिक विलम्बित है। विपक्षी की ओर से ओसी / सी.सी या वांछित अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई है। . इससे स्पष्ट है कि विपक्षी को ओसी aia प्राप्त नहीं हुआ है। : चूंकि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। ऐसी स्थिति में परियोजना विलम्बित होने के बावजूद भी यदि आवंटी परियोजनां में बना रहना चाहता है तो उक्त के सम्बन्ध में रेश अधिनियम की धारा is ())बी में यह प्रावधान दिया गया है कि परियोजना 6 बनाम] बााछ- होने के बावजूद भी यदि आवंटी परियोजना में बना रहना चाहता है तो उपरोक्त वर्णित प्राविधानों के अनुसार शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील Ho 6649-50 /20:8 "'सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:-
"the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent - Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में'हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का. प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबशर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ fears वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apriment due to discontinuance: of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest. for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व oat के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल हि = गन्टड- धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा POUT (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2or6 के अधीन दिनांक 27.:020I8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,पटटा
विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स क॑ डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) i ‘ : परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर o2(i) 7 प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +!% unless provided otherwise under the Rules. within’ forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिंगत रखते हुए आवंटी को श८,९+। प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी mcLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। Ser की धारा-2(०७)0) में भी यही ब्याज की प्ररिभाषा दी गयी है। अतः शिकायतकर्ता यूंनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जांता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। ।. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से अवशेष देय धनराशि प्राप्त ‘ae आवंटित यूनिट को बिल्डर बायर एग्रीमेंट के अनुसार समस्त सुविधाओं 8 —— vs)
को पूर्ण कराकर ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.04.2020 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा * धनराशि Bo 38,43,57 /—UX ४८ ॥रक] प्रतिशत ब्याज अदा -करना सुनिश्चित करें| ब्याज की यह धनराशि अंतिम देय धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 4 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09. 2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी | साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dies) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। . विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा 2(28)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी McLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से fora हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज, की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेंगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2076 * की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत, प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा।
5. विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा aaa | 6. आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। Te ADVTS (डा०दीपक स्वरूप WRT) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर 0