Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Ashok Kumar Mishra v. Habitech Infrastructure Ltd
Complaint No. NCR144/08/112385/2023
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-06-13
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | आदेश अन्तर्गत धारा-34, पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) उपस्थिति :- श्री टी. वेंकटेश, सदस्य मैसर्स हैबिटेक इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड I aad सं. शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण यूनिट संख्या जमा धनराशि [. पटार44/09/99424/2022 फुरकान अहमद शम्सी 004 7,83,437 /- 2. | रिटारा44॥/0896/2022 अशोक कुमार रॉय 533 0,27,763 /— 3. | NCRI44//090/2022 oer मिश्रा 520 0,27,760 /— | * | पटारा44/09/99777/2022 जसीम अहमद | 0 | ,47,500 /- | | पटार44/09/00642/2022 जसीम अहमद F-26 26,44,300 /— | | पिटारा44/0/054/2022 हसीब आलम ब-3 2,82,635 /— 7. | फ्टारा44/08/2385/2023 शोक कुमार मिश्रा | | ,26,558 /- | | पिटारा44/2/0335/2022 साहिब सिंह C-44 7,4,949 /— बनाम शिकायतकर्ता फुरकान अहमद शम्सी के साथ 07 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध usana शिकायतें योजित की गयी हैं। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें एक ही परियोजना HABITECH CRYSTAL 36 से सम्बन्धित हैं। अतः एक ही निर्णय से प्रश्नगत शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- प८ट२44/09/99424/2022 फुरकान अहमद शम्सी अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध समस्त जमा धनराशि ब्याज सहित वापस दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना "HABITECH CRYSTAL 36" में यूनिट संख्या-007 बुक करायी Page l en
गयी थी। यूनिट का कुल मूल्य 2,49,500/— रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 7,83,437 //- रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के अनुसार विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 24 माह का विलम्ब किया गया है। जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत धनराशि वापस कराये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में एम.ओ.यू. दिनांकित 03.03.207, खाता विवरण, लिखित पत्र /बहस दिनांकित 40.:4.2023, अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी की ओर से लिखित जवाब प्रस्तुत करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना "HABITECH CRYSTAL 36" में 40वीं मंजिल पर आवेदन पत्र दिनांकित 3007.20i7 के माध्यम से एक यूनिट संख्या-004 बुक करायी गयी थी। आवेदन पत्र के खण्ड संख्या-5(७), (०) & (० के अनुसार किसी भी फ्लोर पी.एल.सी को चार्ज किये बिना यूनिट,/फ्लोर को बदलने पर सहमति हुई थी, पक्षकारों के मध्य हस्ताक्षरित एम.ओ.यू. दिनांकित 03.03.20i7 में भी यही शर्त दोहराई गई थी। आवेदन पत्र दिनांकित 30.07.20:7 की प्रति अनुलग्नक-# के रूप में संलग्न है। एम.ओ.यू. दिनांकित 03.03.2044 की प्रति अनुलग्नक-8 के रूप में संलग्न है। विपक्षी द्वारा पत्र दिनांकित 44.42.2024 के माध्यम से शिकायतकर्ता को यूनिट के स्थानांतरण के लिए सूचित किया गया और उक्त परियोजना में 4वीं मंजिल पर यूनिट den—aor के लिए पूर्व में बुकिंग दर पर बिना किसी फ्लोर पी.एल.सी चार्ज किये दिनांक 44.42.2024 को कब्जे हेतु प्रस्ताव पत्र प्रेषित किया गया, जिसकी प्रति अनुलग्नक-८ के रूप में संलग्न है। विपक्षी द्वारा यह भी प्रस्तुत किया गया है कि उनके द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 20.05.20i8 तक एश्योर्ड रिटर्न के रूप में gi246/- रुपये (0% टी.डी.एस. सहित) की धनराशि का भुगतान किया गया है, जिसकी प्रति अनुलग्नक-0 के रूप में संलग्न है। विपक्षी द्वारा परियोजना से सम्बन्धित चारों एन.ओ.सी. प्राप्त करने के पश्चात् सक्षम विकास प्राधिकरण के समक्ष ओ.सी. हेतु दिनांक 30.04.2044 को आवेदन किया गया था, चारों एन.ओ.सी. की प्रति अनुलग्नक-8 के रूप में संलग्न है। शिकायतकर्ता द्वारा बुक करायी गयी यूनिट समस्त सुविधाओं से पूर्ण है और परियोजना का निर्माण कार्य भी पूर्ण किया जा चुका है। परियोजना में कुल 350 यूनिद्स हैं, जिनमें से विपक्षी द्वारा लगभग 230 आवंटियों को उनकी यूनिट का भौतिक कब्जा सौंप दिया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा जानबूझकर दिनांक 28.08.2047 से अपनी देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है, क्योंकि उक्त तिथि के
Page 2 on बाद शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को दिये गये सभी चेक बाउंस हो गये। उपर्युक्त तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए शिकायतकर्ता द्वारा दायर की गयी वर्तमान शिकायत को विपक्षी द्वारा खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित जवाब, आवेदन पत्र दिनांकित 30.07.20:7, एम.ओ-यू. दिनांकित 03.03.2044, विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को उक्त परियोजना में 4वीं मंजिल पर वैकल्पिक यूनिट संख्या-40। के लिए पूर्व में बुकिंग दर पर बिना किसी फ्लोर पी.एल.सी चार्ज किये कब्जे हेतु प्रस्ताव पत्र दिनांकित 44.2.2024, शिकायतकर्ता को दिनांक 0.05.20i8 तक एश्योर्ड रिटर्न के रूप में भुगतान की गयी धनराशि का साक्ष्य, परियोजना से सम्बन्धित चारों अनापत्ति प्रमाण-पत्र एवं ओ.सी दिनांकित 45.04.2023, अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में 6 नवम्बर, 2023 को हुई सुनवाई के अनुसार उत्तर पत्र दिनांकित 40.44.2023 में अंकित किया गया है कि विपक्षी कंपनी द्वारा vera शिकायत के सम्बन्ध में दिये गये लिखित जवाब एवं उसके अनुलग्नकों के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि विपक्षी कंपनी को परियोजना के लिए अधिभोग प्रमाण-पत्र दिनांकित 45.04.2023 को प्राप्त हो गया है। ऐसा लगता है कि परियोजना पूर्ण हो चुकी है और जहां परियोजना का ओ.सी. सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रदान किया गया है, वहां उ.प्र. रेरा की पीठ न्यायिक निर्णयों के अनुसार रिफंड का निर्देश नहीं दे रही है (जैसा कि शिकायतकर्ता द्वारा यहां प्रार्थना की गयी है)। हालांकि, शिकायतकर्ता एम.ओ.यू. /अनुबन्ध की तिथि के अनुसार परियोजना के पूर्ण होने की तिथि के बाद हुए विलम्ब के कारण दिनांक 30.06.2048 एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ दिनांक 34.42.2048 से विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी है। उपरोक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए शिकायतकर्ता दिनांक 04.04.2049 से ओ.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि 45.04.2023 अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक McLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी है। साथ ही विपक्षी के अनुरोध के अनुसार चौथी मंजिल की यूनिट wear की रजिस्ट्री समस्त सुविधाओं के साथ कराये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्नलिखित बिन्दु विचारणीय हैं :- 4. क्या शिकायतकर्ता की जमा धनराशि ब्याज सहित वापस दिलायी जा सकती है ? Page 3 निस्तारण बिन्दु संख्या-4
बिन्दु deni इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता की जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है ? यह वाद बिन्दु भी शिकायतकर्ता के अभिकथनों के आधार पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि उभयपक्ष के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के अनुसार विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में विलम्ब किया गया है और अनुबन्ध के अनुसार सभी नियमों एवं शर्तों का उल्लंघन किया गया है, जिस कारण वह परियोजना के साथ नहीं रहना चाहते हैं एवं उनके द्वारा जमा धनराशि ब्याज सहित वापस दिलाये जाने की मांग की गयी है। इस पर विपक्षी द्वारा जवाब दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा बुक करायी गयी यूनिट समस्त सुविधाओं से पूर्ण है और परियोजना का निर्माण कार्य भी पूर्ण किया जा चुका है तथा परियोजना से सम्बन्धित चारों एन.ओ.सी. प्राप्त करने के पश्चात् सक्षम विकास प्राधिकरण से दिनांक 45.04.2023 को परियोजना का ओससी. प्राप्त किया जा चुका है। परियोजना में कुल 350 यूनिट्स हैं, जिनमें से विपक्षी द्वारा लगभग 230 आवंटियों को उनकी यूनिट का भौतिक कब्जा सौंप दिया गया है। उपरोक्त कथन के आधार शिकायतकर्ता द्वारा दायर की गयी वर्तमान शिकायत को विपक्षी द्वारा खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है। पत्रावली पर एम.ओ.यू /अनुबन्ध दिनांकित 03.03.20:7 की छायाप्रति दाखिल है, जो उभयपक्षों के मध्य निष्पादित है, जिसके पृष्ठ संख्या-3 के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा जून, 20:8 एवं 6 माह की aque अवधि के साथ शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था। ऐसे में उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 37.:2.20:8 तक यूनिट का कब्जा पाने का अधिकारी था।
यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा पत्र दिनांकित 44.42.2024 के माध्यम से शिकायतकर्ता को यूनिट के स्थानांतरण के लिए सूचित किया गया और उक्त परियोजना में चौथी मंजिल पर वैकल्पिक यूनिट tena के लिए पूर्व में बुकिंग दर पर बिना किसी फ्लोर पी.एल.सी चार्ज किये दिनांक 44.42.2024 को कब्जे हेतु प्रस्ताव पत्र प्रेषित किया गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा वैकल्पिक यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं किया गया। | Page 4 जहाँ तक क्रेता द्वारा रिफण्ड के अनुरोध का प्रश्न है, इस विषय में रेरा अधिनियम के प्राविधानों को समग्र रूप से पढ़ा जाना आवश्यक है, ताकि सभी पक्षों के मत को दृष्टिगत रखते हुए एक संतुलित निर्णय लिया जा सकें। RI एक्ट की धारा 48 (॥) में प्राविधान है कि :- Section 8 (l) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act:
Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें Whe के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापस मांग सकते हैं अथवा मासिक दर से ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें। रेरा अधिनियम की धारा 34 में रेरा के अन्य “फंग्शन्स” के साथ-साथ "to ensure compliance of the obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents under this Act and the rules and regulations made thereunder" का भी उल्लेख है | इसी प्रकार धारा 32 में रियल gece सेक्टर के विकास हेतु अथॉरिटी के उत्तरदायित्वों में निम्न भी सम्मिलित हैं :- Page 5 O | “32. The Authority shall in order to facilitate the growth and promotion of a healthy, transparent, efficient and competitive real estate sector make recommendations to the appropriate Government of the competent authority, as the case may be, on,— (a)protection of interest of the allottees, promoter and real estate agent,....... (any other issue that the Authority may think necessary for the promotion of the real estate sector.” उक्त प्राविधानों से यह स्पष्ट है कि “रियल एस्टेट सेक्टर” के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने के लिए इसके सभी स्टोक होल्डर्स के हितों को समग्र रूप से देखते हुए समुचित निर्णय लेने का उत्तरदायित्व इस अथॉरिटी का है।
इस क्रम में मा. बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “aera रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया“ जिसमें रेरा अधिनियम की वैद्यानिकता के सम्बंध में निर्णय दिया गया था, के प्रस्तर 424 में मा. उच्च न्यायालय द्वारा निम्न संवीक्षण किया :- +*[24, The entire scheme of the RERA is required to be kept in mind. It is already submitted during the course of hearing that in many cases helpless allottees had approached consumer forum, High Courts, Apex Court in a given fact situation of the case. The courts have been passing orders by moulding reliefs by granting interest, compensation to the allottees, and issuing directions for timely completion of project, transit accommodation during completion of project, so on and so forth. Under RERA now this function is assigned to the authority, tribunal. An appeal lies to the High Court. Under one umbrella, under one regulation and one law all the issues are tried to be resolved. उक्त से स्पष्ट है कि सभी पक्षों को सुनने के बाद, यद्यपि समय a इकाई न मिलने की दशा में आवंटी का अपनी धनराशि ब्याज सहित मांगने का अधिकार है, तथापि उक्त वर्णित संवीक्षा को देखते हुए अथॉरिटी, प्रकरण के समस्त तथ्यों, के आधार पर 497 moulding reliefs by granting interest, compensation to the _allottees, and issuing directions for timely completion of project, transit accommodation during completion of project, so on and so forth’ के अनुरूप आदेश पारित किए जा सकते हैं। Page 6 |
एलॉटीज़ द्वारा धनराशि वापस किए जाने व परियोजना में बने रहने वाले एलोटीज के हितों में सन्तुलन के प्रसंग में “चित्रा शर्मा बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया” (744 / 2047) के निर्णय में मा. सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय के प्रस्तर 40 में निम्न ऑब्जरवेशन किया है :- "40. As we have stated earlier, an amount of Rs 750 crores is lying in deposit before this Court pursuant to the interim directions, on which interest has accrued. The home buyers have earnestly sought the issuance of interim directions to facilitate a pro-rata disbursement of this amount to those of the home buyers who seek a refund. "We are keenly conscious of the fact that the claim of the home buyers who seek a refund of monies deserves to be considered with empathy. Yet, having given our anxious consideration to the plea and on the balance, we are not inclined to accede to it for more than one reason. Firstly wees Secondly, the figures which have been made available presently, following the opening of the Web portal by the amicus curiae, indicate that 8% of the home buyers have sought a refund of their monies while 92% would evidently prefer possession of the homes which they have purchased. We cannot be unmindful of the interests of 92% of the home buyers many of whom would also have obtained loans to secure a home. They would have a legitimate grievance if the corpus of Rs 750 crores (together with accrued interest) is distributed to the home buyers who seek a refund."
मा. उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उक्त प्रस्तरों में उद्धरत “ऑब्जरवेशन” एवं RI एक्ट की समग्र व्यवस्था को देखते हुए यह भी स्पष्ट है कि यदि विलम्ब के प्रत्येक मामले में धनराशि लौटाने का ही निर्णय लिया जाये तो निश्चय ही यह अधिनियम के “ऑब्जेक्टिव” तथा “स्कीम” के अनुरूप न होगा। रिफण्ड का निर्णय लेते समय प्रत्येक मामले की “यूनीकनेस” प्रकरण के समस्त तथ्यों यथा “कस्ट्रक्शन” की स्थिति, कम्पलीशन की “टाईम लाईन”, प्रोमोटर्स के द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन के “कमिटमेन्ट” की स्थिति, अन्य “wa होल्डर्स”, विशेष रूप से परियोजना के साथ बने रहने वाले “एलॉटीज” पर प्रभाव, “प्रस्तावित पजेशन डेट” के विषय में “कन्सेन्स्स” आदि पर विचार किया Page 7 Cle न्यायहित में होगा। ww के गठन के सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 / 20:7 “बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य” में दिनांक 23.07.2049 को परित आदेश के पृष्ठ Pea के प्रस्तर-420 में निम्नवत् उल्लेख किया है:-
!20 It is apparent that RERA intends protection of home-buyers and aims at completion of the buildings. The buildings have to be completed, for that,we are required to pass orders. We have already assigned the task to NBCC for completion of buildings as the promoters/builders have failed to complete the building within the time fixed and the time which could have been extended. Now, more than [0 years have passed and buyers were given the assurances that they would get flats within three years period by _ the promoter/builder.The maximum time fixed in RERA has also expired and extension could not have been beyond | year. जाना wad में होगा। Wr के गठन के मूल उद्देश्य एवं समस्त परिस्थितियों को देखते हुए समुचित निर्णय लेकर आदेश पारित किया जाना BRIAN यह स्पष्ट किया गया है कि रेरा आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए है और उसका लक्ष्य यह है कि प्रमोटर्स द्वारा बिल्डिंग के समस्त विकास कार्यों को पूर्ण कराते हुए गृहक्रेताओं को उनका आवास / ute मिल Ue | तत्क्रमानुसार आदेश के पृष्ठ संख्या-255 के प्रस्तर-437 में निम्नवत् उल्लेख किया है:- "The provisions of RERA are beneficial to the home buyers and are intended to insulate them from fraudulent action, ensures completion of the building and it is the duty of the court to protect and ensure the home buyers’interest and at the same time to hold them responsible for the duties enjoined upon them under the said statute. We are not Page 8
absolving the home buyers from the discharge of their liability if any. At the same time, they have the right of enforcement of their right for compensation due to undue delay in completion of the project." उक्त ऑब्ज़रवेशन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि रेरा के प्राविधान गृहक्रेताओं के लिए लाभकारी हैं और किसी प्रकार के विश्वासघात होने से आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए हैं एवं बिल्डिंग को पूर्ण कराने हेतु निगरानी का कार्य 'रेरा' का है और पक्षकारों के कर्तव्यों एवं उत्तरदायित्व अधिनियम में तय किये गये हैं। यह भी लाभ दिया गया है कि परियोजना विलम्ब होने पर गृहक्रेताओं का यह अधिकार होगा कि वह विलम्ब के लिए परियोजना पूर्ण होने तक नियमानुसार ब्याज पा सके | इसी के पश्चात् पुनः रेरा के सम्बंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-43 / 209 “पायनियर ada लैन्ड एण्ड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“ एवं अन्य में दिनांक 09.08.2079 को आदेश के पृष्ठ संख्या-86 के प्रस्तर-29 में निम्नवत् उल्लेख किया है:-
"The object of RERA is to see that real estate projects come to fruition within the stated period and to see that allottees of such projects are not left in the lurch and are finally able to realise their dream of a home, or be paid compensation if such dream is shattered, or at least get back monies that they had advanced towards the project with interest. At the same time, recalcitrant allottees are not to be tolerated, as they must also perform their part of the bargain, namely, to pay instalments as and when they become due and payable." उक्त ares में महत्वपूर्ण ऑब्जरवेशन यह दिया गया है कि ww का लक्ष्य है कि वह अपनी निगरानी एवं देखरेख में प्रोमोटर्स द्वारा भू-सम्पदा परियोजना को एक निर्धारित अवधि में फलस्वरूप पूर्ण करा ली जाये, जिससे कि आवंटी अपने फ्लैटस् पाने से वंचित न हो जाये और उन्हें अपने सपनों का घर मिल सके, साथ ही साथ दुर्दम्य (Recalcitrant) आवंटियों को भी परियोजना पूर्ण कराने का सहयोग न करने में उत्तरदायित्व माना है। यह भी कहा गया है कि आवंटी अपने कर्तव्यों को सम्यक रूप से पूर्ण करें, मुख्य रूप से जैसे कि Page 9 a किश्तों का समय से भुगतान करना सुनिश्चित कर लें, जिससे कि परियोजना को पूर्ण किया जा सके।
ऐसे में उपरोक्त माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित की गयी विधि व्यवस्था के अनुसार यह स्पष्ट है कि रेरा का मुख्य उद्देश्य, परियोजना को फलस्वरूप प्रोमोटर्स द्वारा पूर्ण कराना और आवंटियों द्वारा सम्यक रूप से अपनी किश्तों का भुगतान सुनिश्चित कर लिया जाना, जिससे कि परियोजना को निर्धारित अवधि में पूर्ण कराया जा सके। आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए परियोजना विलम्ब होने पर ब्याज का लाभ भी आवंटियों को देय होगा, परन्तु इससे पूर्व शिकायतकर्ता का यह भी उत्तरदायित्व होगा कि वह अपनी किश्तों का समय से भुगतान करें। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा “ईरियो te रियलटेक प्रा. लि. बनाम अभिषेक wen एवं आदि" में दिनांक 44.04.2024 को पारित आदेश में जहाँ परियोजना का ओ.सी. प्राप्त किया जा चुका है, उसके सम्बन्ध में निम्न ऑब्जरवेशन दिया है कि :- 2.4. The issue which now arises is whether the apartment buyers are bound to accept the offer of possession made by the Developer where the Occupation Certificate has been issued, along with the payment of Delay Compensation, or are entitled to terminate the Agreement. (i) We are of the view that allottees at Serial Nos. I and 2 in Chart A are obligated to take possession of the apartments, since the construction was completed, and possession offered on 28.06.209, after the issuance of Occupation Certificate on 3.05.209. The Developer is however obligated to pay Delay Compensation for the period of delay which has occurred from 27..208 till the date of offer of possession was made to the allottees.
मा. उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा var wen में उद्धरत “ऑब्जर्वेशन्स” एवं रेरा एक्ट की समग्र व्यवस्था को देखते हुए यह भी स्पष्ट है कि यदि विलम्ब के प्रत्येक मामले में धनराशि लौटाने का ही निर्णय लिया जाये तो निश्चय ही यह अधिनियम के “ऑब्जेक्टिव” तथा “स्कीम” के अनुरूप न होगा। रिफण्ड का निर्णय लेते समय प्रत्येक मामले की “यूनीकनेस” प्रकरण के समस्त तथ्यों यथा “कन्सट्रक्शन” की स्थिति, कम्पलीशन की “टाईम लाईन”, प्रोमोटर्स के द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन के “कमिटमेन्ट” की स्थिति, अन्य “wa Page 0 होल्डर्स”, विशेष रूप से परियोजना के साथ बने रहने वाले “एलॉटीज” पर प्रभाव, “प्रस्तावित पजेशन डेट” के विषय में “कन्सेन्सस्” आदि पर विचार किया जाना न्यायहित में होगा। चूंकि विपक्षी द्वारा ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण से दिनांक 5.04.2023 को परियोजना का अधिभोग प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जा चुका है, जिससे यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा परियोजना को पूर्ण कर लिया गया है, ऐसे में यह उचित होगा कि शिकायतकर्तागण अपने भवन / यूनिट का कब्जा लेने पर विचार करें। यदि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को उनकी यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया जाता है तो शिकायतकर्तागण अनुबन्ध के अनुसार विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा प्राप्त करने हेतु रेरा प्राधिकरण के समक्ष शिकायत योजित करने लिए स्वतंत्र होंगे। वैसे भी शिकायतकर्तागण द्वारा परियोजना में यूनिट के कब्जे हेतु धनराशि का निवेश किया गया था, जिसका उपयोग परियोजना के निर्माण में किया गया है। ऐसी स्थिति में शिकायतकर्तागण को जमा धनराशि वापस दिलाया जाना नन््यायोचित नहीं है। तद्नुसार बिन्दु Geri निस्तारित किया जाता है।
उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं :- आदेश werd शिकायतों में की गयी जमा धनराशि की मांग का अनुतोष निरस्त किया जाता है। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। तदनुसार पत्रावली दाखिल दफ्तर हो। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाए। jon | ४2५ (सदस्य) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page 44