Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Arpit Agarwal v. Project Category-Un-Register LOGIX INFRASTRUCTURE PVT.LTD
Complaint No. NCR144/08/0383/2019
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2020-09-25
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Hearing Bench-0[?]A Shri Rajeev Kumar, Chairman Complaint No. —NCRI44/08/0383/209 Arpit Agarwal Versus M/s Logix Infrastructure Pvt. Ltd. The present complaint application has been filed by the complainant against the respondent, seeking possession, rectification of construction defects, grant of a private lawn along with registration, and interest for the delayed period. In brief, the complainant's case is that the complainant booked Flat No. 7-002 in the respondent's project, for which the complainant paid Rs. 77,88,309/- from time to time in instalments. The respondent was obliged to complete the project and hand over possession by 20.08.200, but to date the respondent has not handed over possession. The complainant also says that the respondent promised possession of a unit of i875 sq. [?] together with a private lawn, that the [?] for the lawn was calculated at half the basic sale price of the unit, and that to date the area of the lawn has not been demarcated. The complainant has therefore requested possession, rectification of construction defects, grant of the private lawn along with registration, and interest for the delayed period.
In a detailed written complaint, the complainant has stated that the respondent's project is delayed by more than 6 years and 6 months, that construction of the project has still not been completed, and that money is being demanded for the increased super area of their unit. If the respondent is unable to give possession of the unit together with the lawn, the complainant has requested that the amount taken for the lawn be refunded, or that possession of another alternative unit be given with the complainant's consent. Further, by filing a written argument dated 26.07.2020, the complainant has stated that although the respondent obtained a "Completion Certificate" on 29.05.2045, an offer of possession letter dated 30.04.2047 has been issued, and the area of the unit has been increased by 93 sq. ft., for which no explanation has been given. The complainant has therefore requested refund of the amount deposited with interest, and compensation for mental harassment. In support of the complainant's statement, photocopies have been filed of the written argument dated 26.07.2020, the detailed written complaint, the allotment letter dated 24.02.2040, the flat buyer agreement dated 45.40.2040, the receipts for the amount deposited, and the transfer letter dated 28.04.2045.
ह॥ उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-0॥ए श्री राजीव कुमार, अध्यक्ष शिकायत संख्या —NCRI44/08/0383/209 अर्पित अग्रवाल बनाम मैसर्स लॉजिक्स इन्फास्ट्रक्चर प्राणलि0 प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा, निर्माण की कमियों को सही किये जाने, निजी लॉन को पंजीकरण सहित दिये जाने एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी a परियोजना में फ्लैट संख्या-7-002 बुक किया गया, जिसके लिए शिकायतकर्ता द्वारा समय समय पर किश्तों के आधार पर 77,88,309/— रूपये का भुगतान किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता दिनांक 20.08.200 तक परियोजना पूर्ण कर कब्जा दिये जाने का दायित्व था, किन्तु विपक्षी द्वारा आज तक कब्जा नहीं दिया गया है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा i875 वर्ग Ge की यूनिट एवं उसके साथ निजी लॉन का कब्जा दिये जाने का वचन दिया गया था और लॉन का ante, यूनिट के आधे बेसिक सेल प्राईस की दर से अंगणित की गयी थी और अभी तक लॉन के क्षेत्रफल का रेखांकित नहीं किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा, निर्माण की कमियों को सही किये जाने, निजी लॉन को पंजीकरण सहित दिये जाने एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता द्वारा विस्तृत लिखित शिकायत पत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि विपक्षी की परियोजना 6 वर्ष 6 माह से अधिक विलम्बित है और परियोजना का निर्माण कार्य अभी तक पूर्ण नहीं किया गया है और उनकी यूनिट के बढ़े हुए सुपर एरिया के मद में धनराशि की मांग की जा रही है और यदि विपक्षी यूनिट के साथ लॉन का कब्जा देने में असमर्थ रहते हैं, तो ऐसी स्थिति में लॉन के मद में ली गयी धनराशि को वापिस दिलाये जाने अथवा किसी अन्य वैकल्पिक यूनिट का कब्जा उनकी सहमति से दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। १८ yi 2 इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा लिखित बहस दिनांक 26.07.2020 दाखिल करते हुए कहा गया है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 29.05.2045 को “कम्पलीशन सर्टिफिकेट” प्राप्त किये जाने के बावजूद ऑफर ऑफ पोजेशन पत्र दिनांक 30.04. 2047 को दिया गया है और यूनिट का क्षेत्रफल 93 वर्ग फुट बढ़ाया गया है, जिसके सम्बन्ध में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज वापस एवं मानसिक उत्पीड़न हेतु क्षतिपूर्ति दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में लिखित बहस दिनांक 26.07.2020, विस्तृत लिखित शिकायत पत्र, आवंटन पत्र दिनांक 24.02.2040, फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट दिनांक 45.40.2040, जमा धनराशि की Wie, स्थानांतरण पत्र दिनांक 28.04.2045 की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी द्वारा प्रतिवादपत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विधि दुरूपयोग करते हुए वाद योजित किया गया है। प्रश्नगत परियोजना का पूर्णता / अधिभोग प्रमाण पत्र नोएडा प्राधिकरण द्वारा दिनाक 29.05.20i5 को प्राप्त किया जा चुका है। रेरा लागू होने की तिथि 04.05.2047 से पूर्व, पूर्णता प्रमाण प्राप्त होने से प्रश्नगत प्रकरण रेरा की परिधि में नहीं आयेगा और परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराये जाने की आवश्यकता नहीं है। पक्षकारों के मध्य अनुबन्ध रेरा आने से पूर्व निष्पादित कराया गया है। इसके अतिरिक्त पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान दिनांक 24.07.2020 को विपक्षी द्वारा कहा गया है कि वह शिकायतकर्ता की यूनिट के साथ लॉन का भी कब्जा देने हेतु तैयार हैं और वह रजिस्ट्री कराते समय उसे अंकित कर देगें। वर्तमान में परियोजना को ७.0. को सुपुर्द नहीं किया गया है, क्योंकि कोई पंजीकृत ४.0. नहीं है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में पूर्णता /अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 29.05.205 की छायाप्रति दाखिल की गयी है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया गया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचारणीय a क्या यह परियोजना रेरा के क्षेत्राधिकार से बाहर है ? 2 क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते a 3 3. क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 4. क्या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता से निजी लॉन दिये जाने के मद में ली गयी धनराशि के अनुसार निजी लॉन दिलाया जाये ?
5 क्या बिल्डर द्वारा फ्लैट के सुपर एरिया का क्षेत्रफल बढ़ाया गया है, यदि हाँ तो क्या यह ape थी व इस अतिरिक्त क्षेत्रफल की किस दर से गणना की जायेगी ? 6. क्या शिकायतकर्ता की जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है ? Th क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? निस्तारण बिन्दु Wea बिन्दु संख्या se आशय से विचरित किया गया है कि क्या यह परियोजना रेरा के क्षेत्राधिकार से बाहर है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा अनुबंधित अवधि में कब्जा नही दिया गया है, जिस कारण वह कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज चाहता है, जिस पर विपक्षी की ओर से कहा गया कि अधिभोग प्रमाण पत्र (ओक्यूपेन्सी सर्टिफिकेट) 29.05.2045 को प्राप्त किया जा चुका है और यह प्रमाण पत्र रेरा लागू होने से पूर्व का है। यह निर्विवादित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में फ्लैट बुक कराया था। इस तथ्य पर भी कोई विवाद नहीं है कि विपक्षी अनुबंधित अवधि में कब्जा प्रदान करने में असमर्थ रहा है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को कब्जा अनुबन्ध निष्पादन की तिथि t5.40.20I0 से 48+4 माह के साथ दिनांक 75.08.20i2 तक कब्जा दिया जाना था, परनतु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। विपक्षी द्वारा अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 29.05.2045 को प्राप्त किया जा चुका a) रेरा की वेबसाइट पर जांच के उपरान्त यह भी पता चला है कि प्रश्नगत परियोजना रेरा में पंजीकृत नहीं है। इस सम्बन्ध में रेश अधिनियम की धारा 32)0) में उल्लेखित है कि :-
(2) Notwithstanding anything contained in sub-section (I), no registration of the real estate project shall be Sn yh (b) where the promoter has received completion certificate for a real estate project prior to commencement of this Act; उपरोक्त धारा से we है कि रेरा के प्राविधानों के लागू होने से पूर्व यदि पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया गया हो तो परियोजना के पंजीकरण कराने के आवश्यकता नहीं है। प्रश्नगत प्रकरण में अधिभोग प्रमाण पत्र 29.05.2045 को प्राप्त किया गया है न कि पूर्णता प्रमाण ga चूंकि रेरा के प्राविधान 04.05.2047 से लागू हुए है। रेरा अधिनियम में यह भी प्राविधान दिये गये है कि विपक्षी फेज़वार पंजीकरण करा सकते है। ऐसे में विपक्षी द्वारा प्राप्त किये गये टॉवरों का अधिभोग प्रमाण पत्र से उन्हें मात्र उन टॉवरों को पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं है, परन्तु जब तक पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया जाता है, तब वह रेरा की परिधि में आयेगें। रेरा अधिनियम “कम्पलीशन सर्टिफिकेट” को धारा 2q) में निम्न रूप से परिभाषित किया है-: "completion certificate" means the completion certificate, or such other certificate, by whatever name called, issued by the competent authority certifying that the real estate project has been developed according to the sanctioned plan, layout plan and specifications, as approved by the competent authority under the local laws; इसके साथ-साथ भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) नियमावली, 20I6 के नियम 200) में "Ongoing Project" को निम्नानुसार परिभाषित किया गया है :- "Ongoing project" means a project where development is
going on and for which completion certificate has not been issued but excludes such projects which fulfill any of the following criteria on the date of notification of these rules. उपरोक्त नियम के अन्तर्गत यदि किसी परियोजना के सभी विकास कार्य पूर्ण कर लिये गये एवं पूर्णता प्रमाण पत्र हेतु सक्षम प्राधिकरण को आवेदन किये जा चुके है तो ऐसी स्थिति वह “ऑनगोईंग प्रोजेक्ट” की परिभाषा में नहीं आयेगा और जो परियोजना ऑनगोईंग की परिभाषा में नहीं आते है, तो उन्हें रेरा में पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं है। तथापि ऐसा कोई प्राविधान रेरा अधिनियम में नहीं है, जिसमें यह कहा गया हो कि जिन परियोजनाओं को रेरा में पंजीकृत कराना अपेक्षित नहीं है, वे रेरा के सभी प्राविधानों से मुक्त है। उदाहरणार्थ oe—i4(3) रेरा अधिनियम के अधीन ‘Ysera डिफेक्टस” आदि की लाइबिलिटीज़ कब्जा मिलने 'के 5 वर्ष तक ०) ‘y है। स्पष्टतया यह अपेक्षित नहीं है कि ऐसे मामले में बायर किसी अन्य फोरम में जाकर रेरा अधिनियम के उल्लंघन की बात रखे, विशेष रूप से यह देखते हुए कि रेरा एक Self Contained Act है। यही “मोहम्मद जैन खान बनाम महाराष्ट्र भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण” में भी माननीय बाम्बे उच्च न्यायालय ने अवधारित किया है। अत: उपरोक्त प्राविधानों के अन्तर्गत यह स्पष्ट है कि petra परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराना अपेक्षित नहीं है, किन्तु यह निष्कर्ष निकाला जाना उपयुक्त नहीं कि रेरा के सभी प्राविधानों से यह परियोजना मुक्त है।
माननीय उच्च न्यायालय बॉम्बे ने Re पिटीशन कमांक 908 /2048 “मोहम्मद जैन खान विरूद्द महाराष्ट्र रियल एस्टेट अथॉरिटी व अन्य“ के प्रकरण में सुनवाई उपरान्त अपने पारित आदेश दिनांक 34.07.208 में यह भी स्पष्ट किया गया है कि रेरा में अपंजीकृत रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के विरूद्द भी प्राधिकरण द्वारा सुनवाई की जा सकती है। स्पष्ट है कि प्रश्नाधीन प्रोजेक्टस् के विरूद्द भी प्राधिकरण द्वारा सुनवाई की जा सकती है। यह भी स्पष्ट है कि प्रश्नाधीन “प्रोजेक्ट” के रेरा में पंजीकृत न होने मात्र के आधार पर शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत शिकायत अस्वीकार नहीं Hor सकती है। अतः प्रश्नाधीन “प्रोजेक्ट” के विरूद्ध प्रस्तुत शिकायत रेरा में सुनवाई योग्य होने से विपक्षी की प्रारंभिक आपत्ति स्वीकार योग्य नहीं है। तद्नुसार बिन्दु dei निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-2 बिन्दु संख्या 2 इस तथ्य पर विचरित है कि क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध ww के दायरे में नहीं आते है? इस सम्बंध में बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा Re याचिका संख्या- 2737/20i7 “नीलकमल रियलटर्स users प्राणलि0 एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :-
"The provisions of RERA, however, do not rewrite the clause of completion or handing over possession in agreement for sale. Section 4(2)(I)(C) enables the promoter to give fresh time line independent of the time period stipulated in the agreements for sale entered into between him and the allottees so that he is not visited with penal consequences laid down under RERA. In other words, by giving opportunity to the promoter to prescribe fresh time line under Section 4(200)(0) he is not absolved of the liability under the agreement for sale." OS उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा के प्राविधान के अनुसार अनुबन्ध में दिये गये पूर्णता एवं कब्जे देने के प्रस्तर का पुनर्लेखन नहीं किया जा सकता। धारा 4(2)0)(सी) के अन्तर्गत प्रोमोटर एक नई समय सीमा दे सकता है, जो कि aged पर निर्भर नहीं होगा और उक्त धारा रेरा में दिये गये प्राविधान के परिणाम स्वरूप केवल अर्थदंड से बचाया जा सकता है। अतः इससे अवधारित किया जाता है कि प्रोमोटर अनुबन्ध में दिये गये कब्जे की तिथि के लिए उत्तरदायी है। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन Wea" परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते है। तद्नुसार बिन्दु संख्या 2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-3
बिन्दु संख्या 3 इस तथ्य पर विचरित है कि क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने .पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें? इस सम्बंध में बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा Re याचिका संख्या- 2737,/2047 “नीलकमल Raced सबअर्बन प्राणलि0 एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है जिसके प्रस्तर-86 में स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :- "On behalf of the petitioners it was submitted that registration of ongoing project under RERA would be contrary to the contractual rights established between the promoter and allottee under the agreement for sale executed prior to registration under RERA. In that sense, the provisions have retrospective or retroactive application. After assessing, we find that the projects already completed are not in any way affected and, therefore, no vested or accrued rights are getting affected by RERA. The RERA will apply after getting the project registered. In that sense, the application of RERA is prospective in nature." उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आर्तब्जेवेशन से यह we है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। स्पष्ट है कि प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है rey 7 यह ates की श्रेणी में है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तदनुसार बिन्दु संख्या-3 rena किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-4
क्या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता से निजी लॉन दिये जाने के मद में ली गयी धनराशि के अनुसार निजी लॉन दिलाया जाये? शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया कि यूनिट संख्या-7-002 को आवंटित करने के उपरान्त फ्लैट का क्षेत्रफल 4875 वर्ग फूट एवं निजी लॉन 93750 वर्ग फुट दिये जाने का वादा किया गया था और ofa का चार्जेज़, यूनिट के आधे बेसिक सेल प्राईस की दर से अंगणित की गयी थी और अभी तक लॉन के क्षेत्रफल का रेखांकित नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा निजी लॉन की स्थिति के बारे में अपने प्रतिवाद में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है, परन्तु पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान दिनांक 24.07.2020 को विपक्षी द्वारा कहा गया है कि वह शिकायतकर्ता को उसकी यूनिट के साथ लॉन का भी कब्जा देने के लिए तैयार हैं और वह रजिस्ट्री कराते समय उसे अंकित कर देगें। पत्रावली पर फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट की प्रति दाखिल की गयी है, जिसके प्रस्तर-4.2 में निम्नलिखित उल्लेख है :- 4.2 The consideration includes payments towards the items as detailed and listed out in Annexure A:- यद्यपि Annexure-A अंकित नहीं है, तथापि एग्रीमेन्ट के पृष्ठ tears पर अंकित अन्य मदों के अतिरिक्त चार्जेज़ में “लॉन चार्जेज” 7,80,34/- रूपये + कर 4,2,554 /- रूपये = 43,04,688 /- रूपये अंकन है।
उपरोक्त से यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता द्वारा लॉन हेतु विपक्षी को धनराशि अदा की गयी है, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता यह सुविधा प्राप्त करने का अधिकारी है। इस सम्बन्ध में विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को लॉन की भूमि उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें एवं देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार पंजीकरण करायें। यदि विपक्षी द्वारा किसी कारणवश निजी लॉन उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो शिकायतकर्ता से निजी लॉन के मद में ली गयी धनराशि MCLRH प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर सहित धनराशि दिये जाने की तिथि से वापस अदा करें। तद्नुसार बिन्दु संख्या-4 Peake किया जाता है। BG निस्तारण बिन्दु संख्या-5 शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया कि विपक्षी द्वारा फ्लैट का क्षेत्रफल बढ़ाकर अतिरिक्त धनराशि की मांग की जा रही है, जिसको माफ किये जाने हेतु अनुरोध किया गया है। इस सम्बन्ध में अनुबन्ध के प्रस्तर-6.40 में उललखित है कि :- "The Parties agree and acknowledge that the superarea of the apartment is subject to variation and change to maximum extent of 5%, at the time of the delivery of possession of the apartment to the buyer, and the charges in relation to the same will be payable/adjusted as specified hereinabove. No claim, demand, suit and/or litigation, shall be raised by the buyer in relation to such variation in the superarea and the buyer hereby waives all rights in relation to the same."
उक्त अनुबन्ध पर पक्षकारों के हस्ताक्षर है, जिससे विदित है कि उपरोक्त नियम एवं शर्तों को शिकायतकर्ता द्वारा स्वीकार्य किये गये है। उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता द्वारा सहमति दी गयी है कि अपार्टमेन्ट का सुपर एरिया अधिकतम 5 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है और उसकी धनराशि अनुबन्ध में विस्तृत रूप से दी गयी है, जिसके अनुसार गणना की जायेगी। इस सम्बंध में विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि अनुबन्ध के समय सुपर एरिया के विभिन्न मदों का विवरण वर्तमान में उन्हीं Fal में परियोजना के परिवर्तित क्षेत्रफल व उस परिवर्तन का कारण बताते हुए एवं दोनों स्थितियों में शिकायतकर्ता के क्षेत्रफल की गणना का आधार स्पष्ट करके उसे “आकिटेक्ट” से प्रमाणित कराकर व उसे वेबसाइट पर डालने के बाद ही यह धनराशि देय होगी। cage बिन्दु संख्या-5 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-6 बिन्दु संख्या-0 इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता की जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है? यह वाद बिन्दु भी शिकायतकर्ता के अभिकथनों के आधार पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 20.08.204 तक परियोजना पूर्ण कर कब्जा दिये जाने का दायित्व था, किन्तु विपक्षी द्वाव आज तक कब्जा नहीं दिया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा लिखित बहस दिनांक 26.07.2020 दाखिल करते हुए कहा गया है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 29.05.205 को BES Cc
सर्टिफिकेट” प्राप्त किये जाने के बावजूद ऑफर ऑफ पोजेशन पत्र दिनांक 30.0. 2047 को दिया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है, जिस पर विपक्षी द्वारा पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान दिनांक 24.07.2020 को कहा गया है कि वह शिकायतकर्ता की यूनिट के साथ लॉन का भी कब्जा देने हेतु तैयार हैं और वह रजिस्ट्री कराते समय उसे अंकित कर देगें | यह निर्विवादित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में फ्लैट बुक कराया था। इस तथ्य पर भी कोई विवाद नहीं है कि विपक्षी अनुबंधित अवधि में कब्जा प्रदान करने में असमर्थ रहा है। जहाँ तक केता द्वारा रिफण्ड के अनुरोध का प्रश्न है, इस विषय में रेरा अधिनियम के प्राविधानों को समग्र रूप से ver जाना आवश्यक है ताकि सभी पक्षों के मत को दृष्टिगत रखते हुए एक संतुलित निर्णय लिया जा सकें | रेरा एक्ट की धारा is ()) में प्राविधान है कि :- Section 786. Return of Amount and Compensation- (7) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building.- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason,
he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the 0 handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. इस प्रकार केता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस माँग सकते हैं अथवा मासिक दर से ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें। रेरा अधिनियम की धारा 34 में रेरा के अन्य “फंग्शन्स” के साथ-साथ सब-क्लॉज (f) में "to ensure compliance of the obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents under this Act and the rules and regulations made thereunder" का भी उल्लेख है। इसी प्रकार धारा 32 में रियल gece सेक्टर के विकास हेतु अथॉरिटी के उत्तरदायित्यों में निम्न भी सम्मिलित हैं :- “The Authority shall in order to facilitate the growth and promotion of a healthy, transparent, efficient and competitive real estate sector make recommendations to the appropriate Government of the competent authority, as the case may be,
on— (a)protection of interest of the allottees, promoter and real estate agent........ (any other issue that the Authority may think necessary for the promotion of the real estate sector.” उक्त प्राविधानों से यह स्पष्ट है कि “रियल एस्टेट सेक्टर” के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने के लिए इसके सभी wea होल्डर्स के हितों को समग्र रूप से देखते हुए समुचित निर्णय लेने का उत्तरदायित्व इंस ऑथरिटी का है। इस कम में माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा Re याचिका संख्या- 2737 /20i7 “नीलकमल रियलटर्स सबअरबन wife. बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया”, जिसमें रेरा अधिनियम की वैद्यानिकता के सम्बंध में निर्णय दिया गया था, के प्रस्तर 24 में मा. उच्च न्यायालय द्वारा निम्न संवीक्षण किया :- “The entire scheme of the RERA is required to be kept in mind. It is already submitted during the course of hearing that in many cases helpless allottees had approached consumer forum, High Courts, Apex Court in a given fact situation of the case. The courts have been passing orders by moulding reliefs by granting interest, compensation to the allottees, and issuing directions for timely completion of project, transit accommodation during completion of project, so on and so forth. Under RERA now this “S Cc 42
function is assigned to the authority, tribunal. An appeal lies to the High Court. Under one umbrella, under one regulation and one law all the issues are tried to be resolved. Provisions of Section 77 refers to power to adjudicate. A District Judge is conferred with the power to adjudicate compensation under Sections 72, 74, 768 and 49. A promoter could very well put up his case before the adjudicator who deals with the issues in the light of the fact situation of each case. Therefore, there should not be any apprehension that mechanically compensation would be awarded against a promoter on failure to complete the development work.” उक्त से we है कि सभी पक्षों को सुनने के बाद, यद्यपि समय से इकाई न मिलने की दशा में आवंटी का अपनी धनराशि ब्याज सहित मांगने का अधिकार है, तथापि उक्त वर्णित संवीक्षा को देखते हुए अथॉरिटी, प्रकरण के समस्त तथ्यों, के आधार पर ‘by moulding reliefs by granting interest, compensation to the interest, compensation to the allottees, and issuing directions for timely completion of project, transit issuing directions for_timely completion _of project, transit accommodation during completion of project, so on and so forth during completion of project, so on and so forth’ के अनुरूप आदेश पारित किए जा सकते हैं। एलोटीज़ द्वारा धनराशि वापस किए जाने व परियोजना में बने रहने वाले एलोटीज के हितों में ager के प्रसंग में “चित्रा शर्मा बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया” (744 / 207) के निर्णय में मा. सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय के प्रस्तर 40 में निम्न ऑबजरवेशन किया है :-
"As we have stated earlier, an amount of Rs 750 crores is lying in deposit before this Court pursuant to the interim directions, on which interest has accrued. The home buyers have earnestly sought the issuance of interim directions to facilitate a pro-rata disbursement of this amount to those of the home buyers who seek a refund. "We are keenly conscious of the fact that the claim of the home buyers who seek a refund of monies deserves to be considered with empathy. Yet, having given our anxious consideration to the plea and on the balance, we are not inclined to accede to it for more than one reason. Firstly 475 Secondly, the figures which have been made available presently, following the opening of the Web ay 2 portal by the amicus curiae, indicate that 8% of the home buyers have sought a refund of their monies while 92% would evidently prefer possession of the homes which they have purchased. We cannot be unmindful of the interests of 92% of the home buyers many of whom would also have obtained loans to secure a home. They would have a legitimate grievance if the corpus of Rs 750 crores (together with accrued interest) is distributed to the home buyers who seek a refund." इसके अतिरिक्त रेरा के गठन के सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिंविल अपील संख्या-940,// 2047 “बिकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य” में दिनांक 23.07.209 को परित आदेश के पृष्ठ We के प्रस्तर-420 में निम्नवत् उल्लेख किया है:-
"It is apparent that RERA intends protection of home- buyers and aims at completion of the buildings. The buildings have to be completed, for that, we are required to pass orders. We have already assigned the task to NBCC for completion of buildings as _ the promoters/builders have failed to complete the building within the time fixed and the time which could have been extended. Now, more than 0 years have passed and buyers were given the assurances that they would get flats within three years period by the promoter/builder. The maximum time fixed in RERA has also expired and extension could not have been beyond | year." उक्तानुसार यह स्पष्ट किया गया है कि रेरा आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए है और उसका लक्ष्य यह है कि प्रोमोटर्स द्वारा बिल्डिंग के समस्त विकास कार्यों को पूर्ण कराते हुए गृहकेताओं को उनका आवास / फ्लैट मिल सके | तत्कमानुसार आदेश के पृष्ठ संख्या-255 के प्रस्तर-437 में निम्नवत् उल्लेख किया हैः- "The provisions of RERA are beneficial to the home buyers and are intended to insulate them from fraudulent action, ensures completion of the building and it is the duty of the court to protect and ensure the home buyers’interest and at the same time to hold हट (A v 43 them responsible for the duties enjoined upon them under the said statute. We are not absolving the home buyers from the discharge of their liability if any. At the same time, they have the right of enforcement of their right for compensation due to undue delay in completion of the project."
उक्त आब्जर्वेशन में यह भी we किया गया है कि रेरा के प्राविधान गृहकेताओं के लिए लाभकारी हैं और किसी प्रकार के विश्वासघात होने से आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए हैं एवं बिल्डिंग को पूर्ण कराने हेतु निगरानी का कार्य रेरा का है और पक्षकारों के कर्तव्यों एवं उत्तरदायित्व अधिनियम में तय किये गये हैं। यह भी लाभ दिया गया है कि परियोजना विलम्ब होने पर गृहकेताओं का यह अधिकार होगा कि वह विलम्ब के लिए परियोजना पूर्ण होने तक नियमानुसार ब्याज पा सके। इसी के पश्चात् पुनः रेरा के सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-43,/2049 “”पायनियर अर्बन aes एंड इन्फास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य“ में दिनांक 09.08.209 को आदेश के पृष्ठ संख्या-86 के प्रस्तर-29 में निम्नवत् उल्लेख किया a "The object of RERA is to see that real estate projects come to fruition within the stated period and to see that allottees of such projects are not left in the lurch and are finally able to realise their dream of a home, or be paid compensation if such dream is shattered, or at least get back monies that they had advanced towards the project with interest. At the same time, recalcitrant allottees are not to be tolerated, as they must also perform their part of the bargain, namely, to pay instalments as and when they become due and payable."
उक्त आदेश में महत्वपूर्ण आब्जर्वेशन यह दिया गया है कि रेरा का लक्ष्य है कि वह अपनी निगरानी एवं देखरेख में प्रोमोटर्स द्वारा भू-सम्पदा परियोजना को एक निर्धारित अवधि में फलस्वरूप पूर्ण करा ली जाये, जिससे कि आवंटी अपने फ्लैटस् पाने से वंचित न हो जाये और उन्हें अपने सपनों का घर मिल सके, साथ ही साथ दुर्दम्य (Recalcitrant) आवंटियों को भी परियोजना पूर्ण कराने का सहयोग न करने में उत्तरदायित्व माना है। यह भी कहा गया है कि आवंटी अपने कर्तव्यों को सम्यक रूप os 44 से पूर्ण करें, मुख्य रूप से जैसे कि किश्तों का समय से भुगतान करना सुनिश्चित कर लें, जिससे कि परियोजना को पूर्ण किया जा सके। ऐसे में उपरोक्त माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित की गयी विधि व्यवस्था के अनुसार यह स्पष्ट है कि रेरा का मुख्य उद्देश्य, परियोजना को फलस्वरूप प्रोमोटर्स द्वारा पूर्ण कराना और आवंटियों द्वारा सम्यक रूप से अपनी किश्तों का भुगतान सुनिश्चित कर लिया जाना, जिससे कि परियोजना को निर्धारित अवधि में पूर्ण कराया जा सके। आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए परियोजना विलम्ब होने पर ब्याज का लाभ भी आवंटियों को देय होगा, परन्तु इससे पूर्व शिकायतकर्ता का यह भी उत्तरदायित्व होगा कि वह अपनी किश्तों का समय से भुगतान He |
मा. उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा vat wert में उद्धरत “ऑबजरवेशनस्” एवं रेरा एक्ट की समग्र व्यवस्था को देखते हुए यह भी स्पष्ट है कि यदि विलम्ब के प्रत्येक मामले में धनराशि लौटाने का ही निर्णय लिया जाये तो निश्चय ही यह अधिनियम के “ऑबजेक्टिव” तथा “स्कीम” के अनुरूप न होगा। रिफण्ड का निर्णय लेते समय प्रत्येक मामले की “यूनीकनेस” प्रकरण के समस्त तथ्यों यथा “कन्सट्रक्शन” की स्थिति, कम्पलीशन की “टाईम लाईन“, प्रोमोटर्स के द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन के “कमिटमेन्ट” की स्थिति, अन्य “स्टेक seed", विशेष रूप से परियोजना के साथ बने रहने वाले “एलॉटीज” पर प्रभाव, “प्रस्तावित पज़ेशन डेट” के विषय में “artery” आदि पर विचार किया जाना न्यायहित में होगा। चूंकि विपक्षी द्वारा पीठ के समक्ष सुनवाई के दौंरान दिनांक 24.07.2020 को कहा गया है कि वह शिकायतकर्ता की यूनिट के साथ लॉन भी कब्जा देने हेतु तैयार है। ऐसे में यह उचित होगा कि शिकायतकर्ता कब्जा लेने पर विचार करें| उसके बाद फ्लैट के भविष्य में उपयोग के सम्बन्ध में वे स्वयं निर्णय ले सकते है। वैसे भी शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना में फ्लैट के कब्जे हेतु धनराशि का निवेश किया गया था, जिसका उपयोग परियोजना के निर्माण में किया गया है। निश्चय ही परियोजना में बने रहने की दशा में एलॉटी को विलम्ब हेतु नियमानुसार ब्याज प्रोमोटर्स द्वारा देय होगा। समस्त परिस्थितियों एवं रेरा के गठन के मुख्य उद्देश्य को देखते हुए यह उचित होगा कि शिकायतकर्ता को आगामी नवम्बर 2020 तक कब्जा देना सुनिश्चित करें, यदि विपक्षी, शिकायतकर्ता को नवम्बर 2020 तक कब्जा देने में असफल रहते हैं, तो ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता अपनी समस्त जमा धनराशि मय ब्याज वापस प्राप्त करने का अधिकारी होगा। निस्तारण बिन्दु संख्या-6 Pena किया जाता है oh
Cc i5 निस्तारण बिन्दु संख्या-7 शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 20.08.2044 तक परियोजना पूर्ण कर कब्जा दिये जाने का दायित्व था, किन्तु विपक्षी द्वारा आज तक कब्जा नहीं दिया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा लिखित बहस दिनांक 26.07.2020 दाखिल करते हुए कहा गया है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 29.05.205 को “कम्पलीशन सर्टिफिकेट” प्राप्त किये जाने के बावजूद ऑफर ऑफ deem पत्र दिनांक 30.04. 20:7 को दिया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है, जिस पर विपक्षी द्वारा पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान दिनांक 24.07.2020 को कहा गया है कि वह शिकायतकर्ता की यूनिट के साथ लॉन का भी कब्जा देने हेतु तैयार हैं और वह रजिस्ट्री कराते समय उसे अंकित कर देगें, परन्तु ऑफर ऑफ पोजेशन पत्र की प्रतिलिपि पत्रावली पर दाखिल नहीं की गयी है। प्रश्नगत प्रकरण में फ्लैट केता अनुबन्ध दिनांक 5.0.20i0 मैसर्स लॉजिक्स इन्फास्ट्रक्चर wo fio एवं श्री सौरभ कुमार सिंह व प्रवीना वेजन्दला के मध्य निष्पादित कराया गया, जो कि बाद में अर्पित अग्रवाल द्वारा के पक्ष में दिनांक 28.07. 20i5 को स्थानांतरण कर दिया गया, जिसकी प्रतिलिपि पत्रावली पर उपलब्ध है। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट दिनांक 5.t0. 2040 के अवलोकन से यह विदित है कि अनुबन्ध निष्पादित करने से 8+4 माह (ग्रेस पीरियड) में कब्जा दिया जाना था। फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट दिनांक 45.0.200 को निष्पादित किया गया है एवं अनुबन्ध के प्रस्तर-6.4 के अनुसार विपक्षी को 5.08. 2042 तक कब्जा दिया जाना था, किन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है।
ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 6.08.202 से ओ.सी. / सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, णो भी बाद में हो तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा Re याचिका संख्या- 2737/20i7 “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्राणललि0 एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on Os 46 account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. "
अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 ww के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। यह भी उल्लेखनीय है कि पक्षकारों के मध्य एक अनुबन्ध निष्पादित है, जो कि उभयपक्ष द्वारा हस्ताक्षरित है, जिससे यह अवधारित किया जा सकता है कि उभयपक्ष को उक्त अनुबन्ध की शर्ते स्वीकार हैं। अनुबन्ध के प्रस्तर-6.6 के अनुसार परियोजना में हो रहे विलम्ब के लिए 5/- रूपये प्रतिवर्ग फुट प्रतिमाह की दर से धनराशि का प्राविधान है, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता धनराशि पाने का अधिकारी है, रेरा के प्राविधानों के अनुसार जिस दर से विपक्षी द्वारा धनराशि प्राप्त की गयी है उसी दर से धनराशि देने का प्राविधान है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय मुम्बई द्वारा उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह भी अभिनिर्धारित किया गया है कि :- For the reasons already indicated, aforesaid decisions are not applicable to the facts of the present case. I have already indicated that the provisions of RERA are prospective in nature. The penalty under Sections 76, 38, 59, 60, 67, 63 and 64 is to be levied on account of contravention of provisions of RERA, prospectively and not retrospectively. ae: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्राविधानित दंड पूर्वव्यापी नही, बल्कि भविष्यलक्षी होना चाहिये। ऐसी > 7
दशा में रेरा के प्रभाव में (दिनाक 04.05.2046) से पूर्व अनुबन्ध के अनुसार धनराशि भुगतान किया जाना चाहिये और रेरा के आने के बाद दिनांक 04.05.2046 से रेरा के प्राविधानो के अनुसार विलंबित अवधि में जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है, जिस वाद में पक्षकारों के मध्य कोई अनुबन्ध निष्पादित नही है, वहां शिकायतकर्ता रेरा के प्राविधानों के अनुरूप जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक ॥7.0.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20:8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ॥४८,२+ प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी MCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील wo 6649-50 / 2048 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल" में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गय। है किः- "the period of Interest should close on April 20I6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted 48 that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20I6. The Respondent - Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के के अनुसार ओ.सी./सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी.//सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक की अवधि पर ब्याज पाने के अधिकारी होगें।
इसके अतिरिक्त दिनांक 47.40.2048 को उ0प्र0 शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 /8—3—48-65 विविध १6 के द्वारा मॉडल ite के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT: ",] Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on 5 unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी कम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 20.05.2020 को सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनांक 25.03.2020 से 6 माह 49
की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03. 2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और a ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदनुसार बिन्दु संख्या-7 Pena किया जाता है। जहाँ तक मानसिक उत्पीड़न हेतु क्षतिपूर्ति का प्रश्न है, तो रेश अधिनियम की धारा-74 के अनुसार धारा-42,44,48 व १9 में क्षतिपूर्ति के आधार दिये गये है, जिनमें मानसिक उत्पीड़न सम्मिलित नहीं है। अतः क्षतिपूर्ति निर्धारण हेतु प्रकरण को एडज्यूडिकेटिंग ऑफिसर को सन्दर्भित करने का कोई औचित्य नहीं है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश i. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता के फ्लैट की समस्त सुविधाओं को अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 30..2020 तक ओ.सी. / सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराना सुनिश्चित करें।
2... विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 46.08.2042 से दिनांक 30.04.20i6 तक 5/- रूपये प्रति वर्गफुट प्रतिमाह की दर से व दिनांक 04.05.206 से it. सी. / सी.सी. अथवा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक, शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर विलम्ब ब्याज के रूप में MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोसे मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09. 2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। 20 विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20I6 की धारा 2(2४)6) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी।
विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता के 937.5 वर्ग फुट क्षेत्रल के निजी लॉन को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें एवं देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार पंजीकरण करायें। यदि विपक्षी द्वारा निजी लॉन उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो शिकायतकर्ता से निजी लॉन के मद में ली गयी धनराशि MCLR+ प्रतिशत ब्याज सहित, आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों में शिकायतकर्ता को वापस करना सुनिश्चित करें। विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह अनुबन्ध के समय सुपर एरिया के विभिन्न मदों का विवरण वर्तमान में wel मदों में परियोजना के परिवर्तित क्षेत्रल व उस परिवर्तन का कारण बताते हुए एवं दोनों स्थितियों में शिकायतकर्ता के क्षेत्रफल की गणना का आधार “आर्किटेक्ट” से प्रमाणित कराकर शिकायतकर्ता को स्पष्ट कराने एवं वेबसाईट पर डालने के बाद ही अत्तिरिक्त क्षेत्रफल की धनराशि प्राप्त करेगें। यदि विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 30.4.2020 तक कब्जा देने में असफल रहता है, तो दिनांक 30.44.2020 के पश्चात् 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता द्वारा समस्त जमा धनराशि पर धनराशि जमा करने की तिथि से, धनराशि भुगतान करने की तिथि त्तक Ke बैंक ऑफ इंडिया की ब्याज दर MCLR+I प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर सहित वापस अदा करना सुनिश्चित करें | इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। है 22 8, यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिंकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। दिनांक १28/० /2020 जी
(राजीव कुमार) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण