Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Krishan Lal Bhatia v. Greater NOIDA Industrial Development Authority
Complaint No. NCR144/08/0133/2019
- Decision date
- 2019-11-15
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-04ए श्री राजीव कुमार, अध्यक्ष | कम सं0 शिकायत Ho शिकायतकर्तागण 4 UA S.3TI844 / 08 / 0896 / 209 [अरविन्द कुमार शर्मा | कुमार शम 2 [एन.सी.आर44// 08 / 033 / 2009 | कृष्ण लाल भाटिया । eT शिकायतकर्तागण बनाम ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण, गौतमबुद्धनगर शिकायतकर्ता अरविन्द कुमार शर्मा के aero अन्य शिकायकत्तकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन दोनों शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह दोनों शिकायतें छा्त5-7 LOHIYA ENCLAVE OMICRON-IA से सम्बंधित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत Ho एन.सी.आर444 / 08 / 0896 / 2049 लक्ष्मी HT आजाद अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थनापत्र शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा दिये जाने की तिथि तक १2 प्रतिशत ब्याज एवं अतिरिक्त मांगो को वापस लिये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना छप्त5-]7 LOHIYA ENCLAVE OMICRON-IA में यूनिट आवंटित की गयी थी, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा 25,25,700/- रूपये की धनराशि अदा की गयी। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 28.04.2047 तक परियोजना को पूर्ण कर कब्जा दिया जाना था, परन्तु आज तक कब्जा नहीं os 2
दिया गया है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि प्राधिकरण द्वारा 5.i8/— लाख रूपये की कीमत भी बढ़ा दी गयी है और विलम्ब प्राधिकरण की ओर से किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा दिये जाने की तिथि तक i2 प्रतिशत ब्याज एवं अतिरिक्त मांगो को वापस लिये जाने हेतु संस्थित किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र, आवेदन फार्म, ब्रोशर आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। विपक्षी की ओर से प्रतिवादपत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि face अप हाउसिंग योजना बी.एच.एस-॥7 के अन्तर्गत आवेदन संख्या-42663 के माध्यम से पंजीयन धनराशि 2,57,000,/-रूपये का भुगतान करते हुए 58.48 के भवन हेतु आवेदन किया गया। आवंटन पत्र दिनांक 29.04.2044 को जारी किया गया। सेक्टर ओमीकॉन-4ए के आवंटियों को माह दिसम्बर 2049 में भवनों को हस्तगत किया जाना सम्भावित है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में खाता विवरण, आवंटन पत्र, एग्रीमेन्ट टू-लीज़ आदि की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। शिकायतकर्ता की शिकायत को दृष्टिगत रखते हुए निम्न बिन्दु विचारणीय है। 4 «ae शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये यदि हाँ तो किस ब्याज दर से ? निस्तारण बिन्दु do 4 पत्रावली पर दाखिल ब्रोशर के प्रस्तर-एन में आवंटन पत्र जारी होने से 3 वर्ष में कब्जा दिये जाने का उल्लेख है। प्रश्नगत प्रकरण में आवंटन पत्र दिनांक 29.04. 2044 को जारी किया गया, जिसके अनुसार दिनांक 29.04.2047 तक कब्जा दिया जाना था। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता दिनांक 30.04.2047 से कब्जा ऑफर किये जाने की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है।
इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- 4 Section 48()(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20:6 के अधीन दिनांक 47.0.2078 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली cos अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के vex 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2 (ti) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +I% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice A यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी MCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है।
जहाँ तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बन्ध में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग द्वारा सी.सी 739,//2047 विकास गर्ग बनाम एम.आर.एम.जी.एफ as लिमिटेड एवं अन्य में निम्नवत निर्णित किया गया है, जिसमें स्पष्ट रूप से उललेखित है कि:-
The contention of the learned counsel is that having taken possession of the plot and got the conveyance deed executed in his favour, the complainant is estopped from raising any claim against the opposite party. I however, find no merit in the contention, as far as the compensation for the delay in delivery of possession of the plot is concerned. While, taking possession, the complainant inter-alia stated that he had no claim with respect to the size, dimension, area, location and legal status of the plot. He did not say that he had no claim with respect to the delay in delivery of possession of the plot to him. While executing the conveyance deed, he recorded his satisfaction about the plot, area, dimension, boundaries etc. and stated that he had no claim of any nature regarding the same, meaning thereby that he had no claim with respect to the plot, area, dimension, boundaries etc. He did not say that he did not have claims of any nature whatsoever. Use of the words “regarding the same” qualified the claim, which he confirmed having not been left against the vendor. Therefore, neither the possession letter nor the conveyance deed would come in way of the complainant claiming possession for the delay in delivery of the plot to him. ‘) 5 उपरोक्त माननीय राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के आब्जर्वेशन से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक विलम्बित अवधि के ब्याज की धनराशि पाने का अधिकारी है। तद्नुसार बिन्दु सं0-॥ निस्तारित किया जाता है।
उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण के यूनिट को आवंटन पत्र/ब्रोशर के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर दिनांक 34.:2.20I9 तक कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराये | विपक्षी दिनांक 30.04.2047 से कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक की अवधि के लिए शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर निमयानुसार वापस की जायेगी। अन्य शिकायतकर्ता के प्रकरण में आवंटन पत्र के अनुरूप उपरोकतानुसार गणना की जायेगी। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि रेरा अधिनियम 2046 के धारा 2 (za)(i) के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है कि यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। ब्याज की दर MCLR+I प्रतिशत होनी चाहिए। विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि यदि शिकायतकर्तागण को सेक्टर-ओमीकॉन--4 में उनकी समकक्ष इकाई का भवन दिया जाता है, तो बढ़े हुए की कीमत का कारण बताते हुए aaa विवरण साक्ष्यों सहित शिकायतकर्तागण को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। तदोपरान्त शिकायतकर्तागण द्वारा भुगतान किया जायेगा। 0) 6 5. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस ओदश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी।
6. इस आदेश का उल्लघंन उ0प्र0भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक3]| 7X /2029 as (राजीव कुमार) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण | ill aA