Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Satish Kumar Choubey v. PATEL ADVANCE JV Registered Office
Complaint No. NCR144/07/97404/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-06-20
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Bench-3 Order passed under Section 34 of the Real Estate (Regulation and Development) Act 2046 Present: Dr. Deepak Swaroop Saxena, Member | Serial | Complaint No. | Complainant | Unit (as per file) | Amount paid per receipts/evidence (Rs.) | Possession period (as in table) | Relief sought | |---|---|---|---|---|---|---| | [?] | NCRI44/07/97404/2022 | Satish Choubey | F 4-204 | 7,60,0009 65597 | 40 [?] 56 months | Unit possession and interest for the delayed period, i.e. interest up to March 2024 | Versus Patel Advance JV The complainant has filed this complaint against the opposite party seeking possession of the unit and interest for the delayed period. According to the office report dated 48.06.2024, no document relating to Section 8, or to [?] fund disbursement, or to NCLT, has been made available by the parties on the RERA portal or on the case file in the present case. In brief, the complainant states that unit no. F 4-204 shown in the above table was booked in the project NEOTOWN PHASE-I run by the opposite party, and against it the amount shown in the table, Rs.7,60,000/-, was paid to the opposite party. The complainant has requested possession of the unit and interest for the delayed period.
In support of the complaint, the complainant has filed photocopies of the allotment/flat buyer agreement and receipts. The details of the amount paid by the complainant to the opposite party are as follows: - Receipt no. 44027 issued by the opposite party, dated 09.05.2047: Rs.20,000/- - Receipt issued by the opposite party (number not legible), dated 03.08.2047: Rs.7,40,000/- - Total: Rs.7,60,000/- In its written objection, the opposite party states that the complainant booked the unit for investment purposes. Because the complainant and other allottees did not pay the amount, construction work in the project was affected. As per clause 2[?] (a) of the allotment, the unit was to be handed over with 40 months plus a 6-month grace period, i.e., by March 2020. The complainant is not within the category of allottee in view of Section 2(d) of the RERA Act. The complainant's allotted unit has already been cancelled in accordance with [?] 44% of the agreement. In the present case, the complainant has paid only 0 percent of the basic price.
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थितः- Sto दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या शिकायतकर्ता | यूनिट पत्रावली पर आवंटन/ | अनुबंधानुसार | वांछित q | . = उपलब्ध फ्लैट बायर कब्जा दिये Wo रसीद/साक्ष्य के | एग्रीमेंट की | जाने की तिथि अनुसार जमा तिथि | धनराशि रु0 I. | NCRI44/07/97404/2022 | सत्तीश ae | एफ 4- | Bo 7,60,0009 65597 | 40 सह य 56 यूनिट का चौबे 204 माह अनुग्रह कब्जा व अवधि अर्थात विलम्बित अवधि मार्च 2024 का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम पटेल एडवांस जेवी शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह परिवाद संस्थित की गयी है। कार्यालय आख्या दिनांक 48.06.2024 के अनुसार वर्तमान प्रकरण में धारा-8 अथवा स्वामहि फण्ड डिस्बर्समेंट अथवा एनसीएलटी से सम्बन्धित कोई प्रपत्र पक्षकार द्वारा रेरा पोर्टल पर या पत्रावली पर उपलब्ध नहीं कराया गया eI - किसी संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालिंत परियोजना NEOTOWN PHASE-I में उक्त तालिका में अंकित यूनिट संख्या एफ 4-204 बुक करायी गयी, जिसके सापेक्ष तालिका में अंकित धनराशि wo 7,60,000 /-का विपक्षी को भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता द्वारा परिवाद के समर्थन में आवंटन / फ्लैट बायर एग्रीमेंट व रसीदों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- रू - 9
क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु0) विपक्षी द्वारा जारी कं रसीद संख्या 44027 09.05.2047 %O 20,000/ a विपक्षी द्वारा जारी रसीद संख्या 03.08.2047 रु0 7,40,000/ _ कुल योग — |रु0 7,60,000/ विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट निवेश के उद्देश्य से बुक करायी गयी थी। शिकायतकर्ता व अन्य आवंटी द्वारा धनराशि का भुगतान नहीं किया गया जिस कारण परियोजना में निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है। आवंटन के क्लाज-2॥ (ए) के अनुसार यूनिट का कब्जा 40 माह तथा 6 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात मार्च 2020 तक दिया जाना था। शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम की धारा 2डी के परिप्रेक्ष्य में आवंटी की श्रेणी में नहीं है। शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट अनुबंध के wee 44% अनुसार निरस्त की जा चुकी है। वर्तमान प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा बेसिक कीमत की 0 प्रतिशत धनराशि का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता ने परिवाद में विपक्षी को wo 7,60,000,//का भुगतान किया जाना अंकित किया है जबकि शिकायतकर्ता ने रु० 20,000,” का भुगतान किया है। शिकायतकर्ता द्वारा जो रसीद 7,40,000/ का प्रस्तुत किया गया है। वह विपक्षी द्वारा जारी नहीं किया गया है और न ही यह धनराशि विपक्षी को भुगतान हुआ है। शिकायतकर्ता धनराशि vo 7,40,000,/ भुगतान किये जाने का बैंक Rede प्रस्तुत करने में असफल रहा है। शिकायतकर्ता द्वारा जो कथित रसीद प्रस्तुत की गयी है उसे विपक्षी द्वारा कभी जारी नहीं किया गया है। अतः विपक्षी ने परिवाद शिकायतकर्ता आवंटी की श्रेणी में न होने के कारण निरस्त किये जाने का अनुरोध किया है। उभयपक्षों के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :--
4. क्या शिकायतकर्ता आवंटी की श्रेणी में है अथवा नही? 2. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? — sa 2 निस्तारण प्रश्न संख्या oe संख्या 4 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता आवंटी की श्रेणी में है अथवा नहीं? इसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता की ओर से यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि उसके द्वारा विपक्षी को धनराशि wo 7,60,000/ का भुगतान far जा चुका है जिसका साक्ष्य पत्रावली पर उपलब्ध है। विपक्षी की ओर से तर्क प्रस्तुत किया गया कि उसे शिकायतकर्ता से धनराशि रु० 20,000/ का ही भुगतान हुआ है। विपक्षी द्वारा यह भी तर्क प्रस्तुत किया गया है कि रु0 7,40,000,// का भुगतान उसे प्राप्त नहीं हुआ है और शिकायतकर्ता द्वारा जो रसीद दाखिल की गयी है। वह गलत है। शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि भुगतान न किये जाने के कारण आवंटन के क्लाज 44 के अनुसार आवंटित यूनिट निरस्त की जा चुकी है। इसलिए शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम की धारा-2डी के अनुसार आवंटी की श्रेणी में नहीं है। ॥ पत्रावजी पर उपलब्ध आवंटन पत्र व रसीदों का अवलोकन far) पत्रावली पर उपलब्ध Wiel के अवलोकन से यह विदित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को दिनांक 09.05.2047 को रु० 20,000,// व दिनांक 03.08.2047 को रु० 7,40,000/e भुगतान किया गया है। विपक्षी का यह तर्क कि उसे wo 7.40,000 / प्राप्त नहीं हुआ है तो इस सम्बन्ध में यह स्पष्ट किया जाता है कि विपक्षी द्वारा क्रमशः जारी रसीद दिनांकित 03.08.20:7 में यह अंकित है कि “ We
acknowledge the transfer of below mentioned payment made by Mr. Satish Kumar Choubey s/o Sh. Chhote lal Choubey against the booked unit no F 4-202.” इससे स्पष्ट है कि विपक्षी को स्थानान्तारित धनराशि प्राप्त हो चुकी है। अतः विपक्षी का यह तर्क कि उसे Bo 7,40,000 / प्राप्त नहीं हुये हैं संधारणीय नहीं है। विपक्षी की ओर से यह भी तर्क लिया गया है कि यूनिट अनुबंध के क्लाज 44 के अनुसार आवंटी द्वारा तीन feed लगातार समय से भुगतान न किये जाने पर यूनिट निरस्त किये जाने का प्राविधान है जिस कारण विपक्षी द्वारा आवंटन के क्लाज 4 के तहत आवंटित यूनिट को निरस्त किया जा चुका है। पत्रावली के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी की ओर से आवंटित यूनिट निरस्त किये जाने का नोटिस व निरस्तीकरण पत्र से सम्बन्धित कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है जिस कारण विपक्षी का यह भी तर्क संधारणीय नहीं है। उपरोक्त तथ्यों एवं अभिलेखों से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता आंवटी की श्रेणी में है। तद्नुसार प्रश्न संख्या 4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त var यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 40.05.2047 को एलॉटमेंट/फ्लैट बायर wite निष्पादित gel
एलॉटमेंट / फ्लैट बायर एग्रीमेंट के अनुसार यूनिट का कब्जा 40 माह तथा 6 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात मार्च 2024 तक प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायत॒कर्ता को आवंटित यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी की ओर से परियोजना पूर्ण होने अथवा ओ.सी /सी.सी प्राप्त होने का कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस प्रकार विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 3 वर्ष का विलम्ब किया गया है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील to 6649-50 /20i8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 20I6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, न 4 wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. "
उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee OS 5 who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable."
अतः: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Sar के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें wer 9.2(ii) ¥ प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी wer 9.3() में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ॥/८ा॥२+प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता 6
है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(»४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। अत: उक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश l. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता से आवंटित यूनिट के सापेक्ष अवशेष देय धनराशि प्राप्त करके, शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर 34 अगस्त 2024 तक SAM /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय wre शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2. विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.04.2024 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि BO 7,60,000,/ पर MCLR+I प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान हेतु देय धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। 3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा 2(2०)0)के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के मम 7
डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अत: विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। — yu. \Q. 06.2024 (डा०दीपक स्वरूप WRT) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर