Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Seema Sahni v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/07/97143/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- Not recorded
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar. Present:-- Dr. Deepak Swaroop Saxena, Member Table as available on the file (complaint no. / complainant / allotment and date of possession to be given): - NCRI44/07/9736/2022 / Sanjeev Sahni / 42 months + 3 months grace period, i.e. November 207 / 34.08.2049 - NCRI44/07/96009/2022 / Suman Rathi / 42 months + 3 months grace period, i.e. November 207 - NCR44/07/95955/2022 / Ashish Narula / 42 months + 3 months grace period, i.e. November 207 - NCRI44/07/96720/2022 / Janmajaya Singh / 42 months + 3 months grace period, i.e. November 2047 - NCR44/07/96870/2022 / [?] Ramchandani - NCRI44/07/96922/2022 / S K Gagaru / 34.08.2049 / 42 months + 3 months grace period, i.e. October _20॥7 - NCRI44/07/97 43/2022 / Seema Sahni / 42 months + 3 months grace period, i.e. October _2047 Respondent: ATS Realty Pvt. Ltd. Along with the lead complainant Sanjeev Sahni, 07 other complainants have filed a complaint against the opposite party. The facts and the common evidence in all these complaints are the same. All these complaints relate to the same project, ATS ALLURE. Therefore they are being disposed of by a single decision. The file of complaint no. NeR44/07/9736/2022, Sanjeev Sahni, shall remain the lead case. The present complaint petition has been instituted by the complainants against the opposite party seeking possession of the unit and interest for the delayed period.
Briefly, the submission of the lead complainant is that the units noted in the above table were booked in the project ATS ALLURE run by the opposite party, and against them the amounts noted in the table were paid to the opposite party. The complainants' submission is that the opposite party was to complete the project and give possession of the unit by the date noted in the table, but it has not been given till now, due to which the complainants have filed this complaint against the opposite party under Section 3i of the Real Estate (Regulation and Development) Act. In support of their submissions, the complainants have filed written arguments, allotment letters, [?] account and photocopies of the deposit receipts.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर उपस्थिति:-- डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य शिकायत संख्या का पत्रावली पर उपलब्ध | आवंटन की NCRI44/07/9736/2022 संजीव साहनी NCR44/07/96264/2022 प्रवीन कुमार चौहान कब्जा दिये जाने की तिथि 42 माह +3 माह अनुग्रह अवधि अर्थात नवम्बर 207 34.08.2049 NCRI44/07/96009/2022 सुमन राठी 42 माह + 3 माह अनुग्रह अवधि अर्थात नवम्बर 207 ch NCR44/07/95955/2022 आशीष नरूला 42 माह + 3 माह अनुग्रह अवधि अर्थात नवम्बर 207 NCRI44/07/96720/2022 जनमाजया सिंह 42 माह + 3 माह अनुग्रह अवधि अर्थात नवम्बर 2047 NCR44/07/96870/2022 वस रामचंदानी NCRI44/07/96922/2022 एस के गागरू 34.08.2049 42 माह + 3 माह अनुग्रह अवधि अर्थात अक्दूबर _20॥7 NCRI44/07/97 43/2022 + सीमा साहनी 42 माह + 3 माह अनुग्रह अवधि अर्थात अक्टूबर _2047 एटीएस रिएलटी प्राएलि0 शिकायतकर्ता संजीव साहनी के साथ 07 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें एक ही परियोजना ATS ALLURE से सम्बन्धित है। अत: एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- NeR44/07/9736/2022 संजीव साहनी की पत्रावली अग्रणी वाद रहेगा | प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE में उक्त तालिका में अंकित यूनिट बुक कराई गई, जिसके सापेक्ष तालिका में अंकित धनराशि विपक्षी को भुगतान किया गया।
शिकायतकर्तागण का कहना है कि विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण कर तालिका में अंकित तिथि तक यूनिट का कब्जा दिया जाना था परन्तु अभी तक नहीं दिया गया, जिस कारण शिकायतकर्तागण द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 3i के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत दर्ज करायी गयी है। शिकायतकर्तागण द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित बहस, आवंटन पत्र, Rede aie एकाउंट व जमा धनराशि रसीदें की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए यह अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाया है कि विपक्षी ने अनुबंधात्मक दायित्व (Contractual Obligation) का उल्लंघन किया है जिस कारण इसका निस्तारण किये जाने का क्षेत्राधिकार सिविल कोर्ट का है। इस प्रकार वाद को निरस्त किया जाए। शिकायतकर्ता द्वारा लगाये गये आरोप का निस्तारण करने का क्षेत्राधिकार प्राधिकरण को नहीं है, जिसके समर्थन में हरियाणा अपीलीय न्यायालय ashy द्वारा अपील संख्या 6/2048 समीर महावर बनाम एमजी हाउसिंग प्रा0लि0 में पारित निर्णय का संदर्भ अंकित किया है। वर्तमान प्रकरण शिकायतकर्ता ने गलत तथ्यों पर विपक्षी को परेशान किये जाने हेतु वाद दायर किया है। शिकायतकर्ता समय से धनराशि भी भुगतान नहीं किया है। शिकायतकर्ता ने प्राधिकरण के भिन्न-भिन्न पीठों में वाद दायर किया जो निरस्त किया जा चुका है। विपक्षी शिकायतकर्ता को समय अवधि के अन्दर यूनिट का कब्जा दिये जाने के लिए बचनबद्ध था परन्तु फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना में निर्माण कार्य बाधित हुआ है। यह कहना गलत है कि विपक्षी की ओर से विलम्ब किया गया है बल्कि शिकायतकर्ता की ओर से समय से धनराशि भुगतान नहीं किया गया है। यह भी 2 OOOO
उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया जा चुका है परन्तु शिकायतकर्ता के न आने पर कई अनुस्मारक पत्र प्रेषित किया गया परन्तु शिकातकर्ता कब्जा लेने नहीं आया। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में ऑफर ऑफ पजेशन, अनुस्मारक पत्र, स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट एवं अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 की छायाप्रति दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता की ओर से लिखित बहस प्रस्तुत किया गया जिसमें प्रतिवादपत्र का प्रत्येक प्रस्तर का खण्डन करते हुऐ यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये जाते हैं :- 4. क्या विपक्षी की परियोजना विलम्बित है? 2. क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु den पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के परिशीलन से विदित है कि अग्रणी शिकायतकर्ता व विपक्षी के मध्य दिनांक 05.02.2044 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार अग्रणी शिकायतकर्ता को नवम्बर 20:7 F यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था तथा शेष शिकायतकर्तागण को उक्त तालिका में अंकित तिथि तक यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्तागण को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। इससे स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना विलम्बित रही है। तद्नुसार वाद बिन्दु संख्या 4 निर्णीत की जाती है। निस्तारण बिन्दु संख्या--2 बिन्दु संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी?
अग्रणी शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्तागण द्वारा भुगतान की गई तालिका में अंकित धनराशि पर विपक्षी की ओर से कोई आपत्ति नहीं की गई है। उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 05.02.2044 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ। आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा नवम्बर 20॥7 में प्राप्त होना था। विपक्षी का कहना है कि परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है। विपक्षी का यह भी कथन है कि शिकायतकर्ता ने भिन्न भिन्न Wet में वाद दायर किया है जो निरस्त हो चुका है परन्तु विपक्षी ने इस सम्बंध में पीठ द्वारा पारित आदेश की प्रति दाखिल नहीं की गई है। वहीं दूसरी ओर विपक्षी का यह भी तर्क है कि विपक्षी को ओ.सी प्राप्त हो चुका है। शिकायतकर्ता को कब्जा देने के लिए तैयार है। शिकायतकर्ता को धनराशि भुगतान करके कब्जा लिये जाने हेतु कई पत्र व अनुस्मारक पत्र भेजा गया परन्तु शिकायतकर्ता ने न तो अवशेष धनराशि भुगतान किया और न ही कब्जा प्राप्त करने आया। पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन पत्र के अनुसार अग्रणी शिकायतकर्ता को नवम्बर 2047 तक यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था तथा अन्य var शेष शिकायतकर्तागण को तालिका में अंकित तिथि तक कब्जा प्राप्त होना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अनुसार यह भी स्पष्ट है कि परियोजना पूर्ण है और विपक्षी को अधिभोग प्रमाण पत्र भी प्राप्त हो चुका है जो पत्रावली पर उपलब्ध है। विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 5 वर्षों से अधिक का विलम्ब
किया गया है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील do 6649-50 ,/ 208 "ures लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on. April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल Raced सबअर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि —
"Section 8(4)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the 5 — OO promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.0.208 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के wea 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें were o.2(ii) ¥ प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" 6 —_— Oa यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में. भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I9feeret की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(29)(0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है।
इसके अतिरिक्त फोर्स मैज्योर पीरिएड के सम्बंध समस्त सुसंगत तथ्यों पर विचारोपरान्त उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनांक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है जिसमें विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदनुसार बिन्दु संख्या-2 rena किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश . विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण को आवंटित यूनिट का अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर 30 सितम्बर 2023 तक ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प Yow प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2. विपक्षी, अग्रणी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.42.2047 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि Go 33,76,280/-.पर ४८77॥२+] प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत 7 — अ्कछ.
रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में आवंटन पत्र/अनुबन्ध के अनुरूप उक्त तालिका में अंकित धनराशि पर ब्याज की गणना की जायेगी। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा 2(०७)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया eek के व 2 न (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण जाये।