Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Sanjay Kalra and Bharat Bhushan v. Mahaluxmi Infrahome Pvt Ltd
Complaint No. NCR144/07/96578/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- Not recorded
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- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the complainant)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Gemini 3.8 Flash, Antigravity), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
E-Court U.P. Real Estate Regulatory Authority Regional Office, H-469, Gamma-2, Greater Noida, Gautam Buddh Nagar-204308. Hearing Bench-01 [e-0] (Formerly Bench--0-A) Mr. Sanjay R. Bhoosreddy, Hon'ble Chairman Complaint Number: ॥२८२]44/07/96578/2022 Sanjay Kalra and Bharat Bhushan Versus Mahalaxmi Infrahome Pvt. Ltd. Order under Section-38, 40 and 63 The complainant's complaint was presented for final arguments through video conferencing on date 44--04-2026. On call, proxy Advocate Mr. Puneet Jain appeared on behalf of learned Advocate Mr. Manendra Kumar for the applicant / complainant, and learned Advocate Ms. Aashu Chaudhary appeared on behalf of the respondent. Thereupon, hearing the arguments of the learned advocates of both parties in detail, the Bench reserved the file for orders on date 44--04-2026 itself. The primary objective of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 2046 is that the interests of consumers in the real estate sector be protected and disputes be resolved expeditiously. To fulfill this objective, obligations and powers have been conferred on the Authority under the RERA Act. The functions of the Authority are mentioned in Section-34(8), Real Estate (Regulation and Development) Act, 20i6. Section-34(8) contains the following provision:- "#34(8) - to ensure compliance of its regulations or orders or directions made in exercise of its powers under this Act;"
According to the provision of Section-38, Real Estate (Regulation and Development) Act, 2046, the Authority has been given the power that if the obligations cast upon the promoter are violated, the Authority may impose penalty or interest under this Act and the rules and regulations made thereunder. Section-38, RERA Act is as follows:- Page | of 6 E-Court "38. (I) The Authority shall have powers to impose penalty or interest, in regard to any contravention of obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents, under this Act or the rules and the regulations made thereunder. (2) The Authority shall be guided by the principles of natural justice and, subject to the other provisions of this Act and the rules made thereunder, the Authority shall have powers to regulate its own procedure. (3) Where an issue is raised relating to agreement, action, omission, practice or procedure that— (a) has an appreciable prevention, restriction or distortion of competition in connection with the development of a real estate project; or (b) has effect of market power of monopoly situation being abused for affecting interest of allottees adversely, then the Authority, may suo motu, make reference in respect of such issue to the Competition Commission of India." Section-40 of the RERA Act is as follows:-
E-Court उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, एच-469, गामा-2, ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर-204308. सुनवाई e-0 (पूर्व में पीठ--0-ए) श्री संजय आर. भूसरेड्डी, माननीय अध्यक्ष शिकायत संख्या: ॥२८२]44/07/96578/2022 संजय कालरा एवं भरत भूषण बनाम महालक्ष्मी इन्फ्राहोम प्रा. लि. आदेश अन्तर्गत धारा-38, 40 एवं 63 om शिकायतकर्ता का परिवाद अंतिम बहस हेतु वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दिनांक 44--04-2026 को प्रस्तुत किया war) पुकार पर प्रार्थी / शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री मनेन्द्र कुमार के प्रॉक्सी अधिवक्ता श्री पुनीत जैन उपस्थित हुए तथा विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री आशु चौधरी उपस्थित हुईं। इस पर पीठ द्वारा उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के तर्को को विस्तार से सुनते हुए, पत्रावली आदेश हेतु दिनांक 44--04-2026 को ही सुरक्षित की गयी। भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 का मुख्य उद्देश्य यह है कि भू-सम्पदा सेक्टर में उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण किया जाए तथा विवादों का शीघ्र निस्तारण किया जाए। इस उददेश्य की पूर्ति हेतु प्राधिकरण को रेरा अधिनियम के अन्तर्गत दायित्व तथा शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं। धारा-34(8), भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20i6 4 प्राधिकरण के कृत्यों का उल्लेख किया गया है। धारा-34(8) में निम्नलिखित प्राविधान हैः- #34(8) - to ensure compliance of its regulations or orders or directions made in exercise of its powers under this Act;"
धारा-38, भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 के प्राविधान के अनुसार प्राधिकरण को यह अधिकार दिया गया है कि प्रोमोटर द्वारा उस पर डाली गयी बाध्यताओं का उल्लंघन किया जाता है, तो प्राधिकरण इस अधिनियम और उसके अधीन Page | of 6 E-Court = गए नियमों एवं विनियमों के अधीन पैनालटी या ब्याज अधिसेषित कर सकता है। धारा-38, रेरा अधिनियम निम्नवत् हैः- "38. (I) The Authority shall have powers to impose penalty or interest, in regard to any contravention of obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents, under this Act or the rules and the regulations made thereunder. (2) The Authority shall be guided by the principles of natural justice and, subject to the other provisions of this Act and the rules made thereunder, the Authority shall have powers to regulate its own procedure. (3) Where an issue is raised relating to agreement, action, omission, practice or procedure that— (a) has an appreciable prevention, restriction or distortion of competition in connection with the development of a real estate project; or (b) has effect of market power of monopoly situation being abused for affecting interest of allottees adversely, then the Authority, may suo motu, make reference in respect of such issue to the Competition Commission of India." रेरा अधिनियम की धारा-40 निम्नवत् है:-
40. (7) If a promoter or an allottee or a real estate agent, as the case may be, fails to pay any interest or penalty or compensation imposed on him, by the adjudicating officer or the Regulatory Authority or the Appellate Auth ority, as the case may be, under this Act or the rules and regulations made thereunder, it shall be recoverable from such promoter or allottee or real estate agent, in such manner as may be prescribed as an arrears of land revenue. (2) If any adjudicating officer or the Regulatory Authority or the Appellate Tribunal, as the case may be, issues any order or directs any person to do = act, or refrain from doing any act, which it is empowered to do under this Act or the rules or regulations made thereunder, then in case of failure by any person to comply with such order or direction, the same shall be enforced, in such manner as may be prescribed. धारा-63, भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20i6 F प्राधिकरण को यह अधिकार दिया गया है कि यदि प्रोमोटर प्राधिकरण के आदेश का अनुपालन करने में असमर्थ रहता है, तो प्राधिकरण प्रोमोटर के विरूद्ध प्रोमोटर की भू-सम्पदा परियोजना की अनुमानित लागत का 05 प्रतिशत तक rect लगा सकता है। धारा-63 निम्नवत है:- Page 2 of 6 E-Court
= If any promoter, who fails to comply with, or contravenes any of the orders or directions of the Authority, he shall be liable to a penalty for every day during which such default continues, which may cumulatively extend up to five per cent., of the estimated cost of the real estate project as determined by the Authority.” यहाँ यह उल्लेखनीय है कि धारा-40, भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 206 के अध्याय-5 के अन्तर्गत आता है, जो कि भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण से सम्बन्धित है तथा धारा-63, भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 के अध्याय-8 के अन्तर्गत आता है, जोकि अपराध, शास्तियाँ और न्यायनिर्णयन से सम्बन्धित है| उपरोक्त प्राविधानों से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम के अन्तर्गत प्राधिकरण को यह अधिकार दिया गया है कि प्राधिकरण प्रोमोटर द्वारा आदेशों का अनुपालन न करने पर धारा-40 के अन्तर्गत अपने आदेशों का क्रियान्वयन कराए तथा धारा-63 के अन्तर्गत प्रोमोटर पर अर्थदण्ड लगाए। प्राधिकरण दोनों कार्यवाही एक साथ कर सकता है। प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा रेरा पोर्टल के माध्यम से आदेश क्रियान्वयन कराये जाने हेतु आवेदन किया गया, जिस पर प्राधिकरण द्वारा विपक्षी को नोटिस जारी करते हुए दिनांक 45-06-2023 तक पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 06-03-2023 का अनुपालन कर, अनुपालन GRA प्रस्तुत करने हेतु निर्देश दिये गये, परन्तु विपक्षी द्वारा अनुपालन आख्या उपलब्ध नहीं करायी गयी।
प्राधिकरण द्वारा कारण दर्शाओ नोटिस, दिनांक 20-06-2023 को जारी करते हुए विपक्षी को निर्देशित किया गया है कि वह दिनांक 05--07-2023 तक उक्त आदेश का अनुपालन कर, अनुपालन आख्था प्रस्तुत करने हेतु निर्देश दिये गये, परन्तु विपक्षी द्वारा कोई अनुपालन आख्या दाखिल नहीं किया गया है। प्राधिकरण द्वारा धारा-63 के अन्तर्गत नोटिस जारी की गयी, जिसके क्रम में पीठ द्वारा सुनवाई, दिनांक 22-09-2023, दिनांक 24-44-2023, दिनांक o4—0:—2024, दिनांक. 40-05-2024,. दिनांक. 04-08-2024,. दिनांक. 27-09-2024, दिनांक 08-04-2025, दिनांक 24-03-2025,._ दिनांक. 28-05-2025, दिनांक 04-08-2025, दिनांक 42-44-2025 एवं दिनांक 44-0:-2026 को की गयी। प्रकरण में welt / शिकायतकर्ता द्वारा अपना लिखित जवाब, दिनांक 48-03-2025 तथा दिनांक 26-42-2025 को भौतिक रूप से एवं दनांक 27-42-2025 को पोर्टल पर लिखित जवाब तिथि रहित अपलोड एवं दाखिल करते हुए, विपक्षी द्वारा प्रस्तुत अनुपालन aren में किये गये समस्त तथ्यों / अभिकथनों का प्रार्थी // शिकायतकर्ता द्वारा पूर्ण रूप से खण्डन किया गया है और कहा गया है कि विपक्षी कम्पनी द्वारा प्रार्थी / शिकायतकर्ता के पक्ष में नो-ड्यूज सर्टिफिकेट, दिनांक 42--03-2024 को जारी करते हुए यह सहमति Page 3 of 6 E-Court
दी गयी कि प्रार्थी / शिकायतकर्ता द्वारा सम्पूर्ण एवं अंतिम भुगतान कर दिया गया है और प्रार्थी/ शिकायतकर्ता पर कोई धनराशि अवशेष नहीं है। त्रिपक्षीय सब-लीज़ डीड निष्पादित होने के बाद ही weit / शिकायतकर्ता को कब्जा उपलब्ध कराया जायेगा। विपक्षी कम्पनी द्वारा नो-ड्यूज़ सर्टिफिकेट, दिनांक 42-03-2024 को जारी किये जाने के उपरान्त, त्रिपक्षीय सब-लीज डीड, दिनांक 07-09-2024 को निष्पादित करायी गयी है, परन्तु विपक्षी कम्पनी द्वारा प्रार्थी, शिकायतकर्ता को अभी तक प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। विपक्षी कम्पनी द्वारा ई-मेल, दिनांक 23-03--2022 के माध्यम से रखरखाव शुल्क की माँग की गयी, जिसके क्रम में प्रार्थी / शिकायतकर्ता लेनदेन (Transaction), दिनांक 23-04-2022 के माध्यम से 02 वर्ष के अग्रिम रखरखाव शुल्क सहित सभी धनराशि का भुगतान कर दिया गया, जबकि प्रार्थी / शिकायतकर्ता, प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त होने के बाद ही रखरखाव शुल्क का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा लगातार अवैध माँग की जा रही है। विपक्षी कम्पनी द्वारा ई-मेल, दिनांक 07-05-2024 के माध्यम से सूचित किया गया कि अतिरिक्त रखरखाव शुल्क का भुगतान किया जाना आवश्यक है, जबकि प्रार्थी / शिकायतकर्ता द्वारा निर्धारित धनराशि का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। प्रार्थी / शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों // अभिकथनों का उल्लेख कर, पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 06-03-2023 के पूर्ण अनुपालन में प्रश्नगत यूनिट का विधिक भौतिक कब्जा एवं भौतिक कब्जा दिये जाने की तिथि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने तथा विपक्षी कम्पनी के विरूद्ध धारा-63 के अन्तर्गत विधिनुसार अग्रिम कार्यवाई किये जाने का अनुरोध किया गया है।
प्रार्थी / शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में नो-ड्यूज सर्टिफिकेट, दिनांक 42-03--2024 की प्रति, त्रिपक्षीय सब-लीज Sts, दिनांक 07-09-2024 की प्रति, लेनदेन (Transaction), दिनांक 23-04-2022 का प्रमाणीय साक्ष्य, ई-मेल, दिनांक 07-05-2024 की प्रति दाखिल की गयी है। मैंने उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के cat को विस्तार से सुना तथा अभिलेख पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य एवं सामग्री का सम्यूक परिशीलन किया। प्रश्नगत शिकायत के सम्बन्ध में पीठ द्वारा area के अन्तर्गत दिनाक 06—03—2023 को निम्न आदेश पारित किये गये:- 244. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता की यूनिट की HITL/ HICT पत्र के अनुसार समस्त छुक्धिओं को पूर्ण कराकर कब्जा दिनांक 37-09--2029 तक H/C सहित देना सुनिश्चित करें और देय स्टास्प Yow INT कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें/ Page 4 of 6 विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 77--07-2022 से पुनः वैद्यानिक कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वार जगा धनराशि पर विलम्ब ब्याज के रुप FMCLR+ WT ब्याज अदा करना YI AT Be | ब्याज की यह TART आंतिम थुयतान की देय धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराधि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी/ कोविड-79 को कारण फोर्स tor पीरियड को दृष्टियत wad हुए दिनांक 25-03-2020 से दिनांक 25-09-2020 तक प्ररियोजना में हुए era eg ब्याज की गणना नहीं की जायेगी/ साथ ही ale शिकायतकर्ता का alg अतिदेय (Over Dues) & तो उस्र पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा।
3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि eer अधिनियम 2076 की धारा 2(८०)6) के अनुसार यदि रेश लागू होने के बाद His ब्याज दर anc} के डिफॉल्ट से ग्रोमोटर द्वारा लिया जाता & तो उसी दर से ब्याज ग्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को fear जायेगा/ अतः विलम्बित भुगतान पर थिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा/ यदि इससे अधिक दर से ale धनराशि रेरा लागू होने के ब्राद आवंटी से fora हेतु ली गयी है. तो विलस्ब्रित अवधि eg ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी / 4. विपक्षी को यह भरी आदेशित किया जाता है कि वह थिकायतकर्ता पर सभी MAT आवंटन पत्र//अनुबन्ध के अनुरुष ग्राप्त करने का अधिकारी है। 5. इस आदेश का उललघन Yara (विनियमन तथा विकास) अधिनियम 2076 की धारा-69 तथा अन्य छुसयत ग्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा/ आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये/.. उपर्युक्त पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 06-03-2023 के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि पीठ द्वारा विपक्षी कम्पनी को दिनांक 3:-03-2023 तक प्रार्थी / शिकायतकर्ता की प्रश्नगत यूनिट की समस्त सुविधाओं को अनुबन्ध / आवंटन-पत्र के अनुसार पूर्ण कराकर ओ.सी. / सी.सी. सहित कब्जा देते हुए, रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने तथा देय विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करने हेतु आदेशित किया गया था।
प्रकरण में विपक्षी कम्पनी द्वारा उपर्युक्त आदेश के प्रस्तर-04 के अनुपालन में प्रार्थी/ शिकायतकर्ता के पक्ष में vena यूनिट के सम्बन्ध में त्रिपक्षीय सब-लीज डीड / रजिस्ट्री, दिनांक 07-09-2024 को निष्पादित एवं हस्ताक्षरित करायी जा चुकी है, परन्तु विपक्षी कम्पनी द्वारा पोर्टल पर अपलोडेड एवं दाखिल लिखित अनुपालन आख्या, दिनांक 02--04-2024 के साथ ऐसा कोई साक्ष्य / प्रमाण रेरा कम्प्लेन्ट पेज पर अपलोड एवं प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि पीठ द्वारा धारा-34, के Page 5 of 6 i 4 E-Court = दिनांक 06-03-2023 को आदेश पारित किये जाने के उपरान्त, विपक्षी कम्पनी द्वारा उक्त आदेश के अनुपालन में प्रार्थी / शिकायतकर्ता के पक्ष में कोई पुनः वैधानिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित किया गया हो और विपक्षी कम्पनी द्वारा वर्तमान समय में प्रार्थी,/ शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का विधिक भौतिक कब्जा देते हुए, अंतिम worse सैटेल किये जा चुके हैं। अतः उपर्युक्त समस्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों के आलोक में यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा अभी तक पीठ द्वारा पारित आदेश, दिनांक 06-03-2023 का पूर्णता अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया गया है। चूंकि रेरा नियमावली, 20i6 के नियम-24 सपठित सिविल प्रक्रिया संहिता के aree—2i में प्राधिकरण के आदेशों एवं निर्देशों को क्रियान्वित करने की रीति दी हुई है।
अतः उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं समस्त परिस्थितियों के दृष्टिगत पत्रावली नियम-24 सपठित सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश-24 में निहित शक्तियों के अधीन पीठ द्वारा धारा-3 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 06-03-2023 के प्रस्तर-04 के अनुसार प्रश्नगत यूनिट के विधिक भौतिक कब्जे की कार्यवाही हेतु मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष सुनवाई के लिए, दिनांक 09-06-2026 को संदर्भित की जाती है। साथ ही सचिव, उ.प्र. रेरा प्रकरण में आदेश, दिनांक 06-03-2023 के प्रस्तर-02 के अनुसार दिनांक 28-05-2026 से पूर्व विपक्षी द्वारा कब्जा देने में हुए विलम्ब के आधार पर, दिनांक 44-07-2022 से पुनः वैधानिक कब्जा ऑफर पत्र जारी किये जाने की तिथि तक की अवधि के लिए विलम्ब ब्याज की धनराशि की वसूली हेतु, वसूली प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु नियमानुसार कार्यवाही कर, पत्रावली को सुनवाई की तिथि से पूर्व मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। यदि मा. न्यायनिर्णायक अधिकारी नियम-24 की कार्यवाही के दौरान यह पाते हैं कि विपक्षी / प्रोमोटर द्वारा आदेश अन्तर्गत aii, दिनांक 06-03-2023 का समयबद्ध रूप से अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है, तो ऐसी दशा में मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी प्रकरण को रेरा अधिनियम की धारा-63 की कार्यवाही किये जाने हेतु पीठ को वापस सन्दर्भित कर सकते हैं। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक: 43--04-2026. (संजय ark. भूसरेड्डी) अध्यक्ष, रेरा | Page 6 of 6