Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Mohammad Abid v. Yuvraj Infra Venture Private Limited
Complaint No. NCR144/07/121184/2024
- Decision date
- 2026-03-14
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
ad उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। सुनवाई पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) आदेश अन्तर्गत धारा-34 सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारीः- श्री टी. dees, सदस्य शिकायत संख्या | ता । ः | यूनिट संख्या | कूल मूल्य. | जमा घनराशि | पिटारा44/0509967/2024 [| वी A-lll, | 8,03,590/— | 8,69,8 /- Tower No. I NCRI44/07/I284/2024 | कानूनी उत्तराधिकारी B-407, | 27,40,050/— | 28,49,009 /- मोहम्मद आबिद Tower No. 2 बनाम tad युवराज इंफ्रा dex प्राइवेट लिमिटेड शिकायतकर्ता साधना देवी के साथ 04 अन्य शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्नगत शिकायतें योजित की गयी हैं। इन दोनों शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह दोनों शिकायतें एक ही परियोजना BEETLE ORCHID से सम्बन्धित हैं। अतः एक ही निर्णय से प्रश्नगत शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- NCRI44/05/9967/2024, साधना देवी अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्नमत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किये गये हैं।
संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना BEETLE ORCHID के टॉवर- में दिनांक 30.40.2042 को यूनिट Wer-A-ll बुक करायी गयी थी। यूनिट का कुल मूल्य 8,03,590 /— रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 8,69,8l ,/- रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के प्रस्तर-09 के अनुसार विपक्षी द्वारा vat यूनिट का कब्जा अनुग्रह अवधि सहित दिनांक 48.06.2049 तक उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु कब्जा उपलब्ध कराये जाने में 60 माह से अधिक का विलम्ब होने के बावजदू भी विपक्षी द्वारा अभी Page तक यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है और न ही विपक्षी द्वारा अभी तक सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त किया गया है, जबकि उनके द्वारा var यूनिट के सापेक्ष 00% से अधिक धनराशि का भुगतान किया जा चुका है, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत विलम्बित अवधि के ब्याज सहित प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा एवं रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में बुकिंग फॉर्म दिनांक 30.0.2042, फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांकित 48.42.2045, खाता विवरण, विपक्षी को भुगतान की गयी धनराशि की रसीदें, मांग पत्र दिनांकित 34.04.2024, यूनिट WeaA-lll के सम्बन्ध में प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांक 03.05.2024 एवं निरस्तीकरण पत्र दिनांक 23.05.2024, रेरा प्राधिकरण की तकनीकी टीम द्वारा किये गये परियोजना के स्थलीय निरीक्षण की आख्या दिनांक 46.04.2023, यूनिट की यथास्थिति बनाये रखे जाने सम्बन्धी प्रार्थना पत्र दिनांक 49.05.2024, प्रत्युत्त आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी की ओर से लिखित उत्तर प्रस्तुत करते हुए यह कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना BEETLE ORCHID के टॉवर-] के ॥४ फ्लोर पर बुकिंग फॉर्म दिनांक 09.44.20i3 के माध्यम से यूनिट Wen—Aa-il बुक करायी गयी थी, जिसका कुल बिक्री मूल्य 9,48,45:/— रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 8,69,8ii/— रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है। उक्त यूनिट के सापेक्ष उमयपक्षों के मध्य दिनांक 48.42.2045 को फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादित किया गया, जिसके प्रस्तर-09 के अनुसार 6 माह की aque अवधि सहित शिकायतकर्ता को दिनांक 48.06.209 तक उक्त यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। विपक्षी द्वारा यह भी प्रस्तुत किया गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने में अप्रत्याशित घटनाएँ अर्थात मा. एन.जी.टी तथा पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण द्वारा लगाये गये प्रतिबंध एवं मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के कारण परियोजना को पूर्ण किये जाने में विलम्ब हुआ, जो विपक्षी के नियंत्रण से बाहर थी, जिसके लिए विपक्षी उत्तरदायी नहीं है। इसलिए ot मैज्योर घटनाओं के कारण विपक्षी द्वारा परियोजना को पूर्ण किये जाने में 758 दिनों का विलम्ब हुआ, जिस कारण 758 दिन की गणना न की जाए और शिकायतकर्ता 758 दिनों के विलम्ब हेतु क्षतिपूर्ति // ब्याज पाने का अधिकारी नहीं है। वर्तमान में विपक्षी द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया. गया है और परियोजना के ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त करने हेतु सक्षम विकास प्राधिकरण के समक्ष दिनांक 02.02.2024 को आवेदन किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 34.04.2024 को परियोजना की स्थिति के सम्बन्ध में सूचना प्रदान की गयी, परन्तु Page 2 oy है
शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने में डिफॉल्ट किया गया है। विपक्षी द्वारा sat यूनिट के सापेक्ष शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु विभिन्न दिनांक 34.07.2024, 04.04.2024, 30.04.2024 को मांग पत्र प्रेषित किये जाने के बावजूद भी शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, जिसके उपरान्त विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांक 02. 05.2024 प्रेषित किया गया, जिसके बावजूद भी शिकायतकर्ता अपनी देय धनराशि का भुगतान करने में विफल रहा, जिस कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को उक्त यूनिट के सम्बन्ध में दिनांक 23.05.2024 एवं 42.06.2024 को यूनिट निरस्तीकरण पत्र प्रेषित कर यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया। उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा उभयपक्षों के मध्य निष्पादित फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांक 8.2.205 के अनुसार अर्नेस्ट मनी की कटौती करने पश्चात्, शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी समस्त धनराशि वापस किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित बहस दाखिल करते हुए कहा गया है कि उपरोकक्तानुसार शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा-2(6) के अन्तर्गत आवंटी की श्रेणी में नहीं आते हैं।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित उत्तर, लिखित बहस, फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांक 78.42.205, Gre प्लान, मा. एन.जी.टी. द्वारा पारित आदेशों की प्रतियाँ, मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश, रेरा कार्यालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 06.06.2020, विभिन्न अनुस्मारक पत्र, परियोजना की स्थिति के सम्बन्ध में शिकायतकर्ता को प्रेषित सूचना पत्र दिनांक 34.04.2024, परियोजना के ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त करने हेतु सक्षम विकास प्राधिकरण के समक्ष दिनांक 02.02.2024 को किये गये आवेदन, सक्षम विकास प्राधिकरण से प्राप्त परियोजना का ओ.सी. दिनांक 44.40.2025, प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 02.05.2024, यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 23.05.2024 एवं 42.06.2024 आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में प्रत्युत्तर/ लिखित बहस दाखिल करते हुए कहा गया है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना BEETLE ORCHID के टॉवर-॥ के i फ्लोर पर बुकिंग फॉर्म दिनांक 30.40.2042 के माध्यम से यूनिट WeN-A-lll बुक करायी गयी थी, जिसका कुल बिक्री मूल्य 8,03,590/— रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 8,69,8Il/— रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है। vat यूनिट के सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक i8.42.20i5 को फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादित किया गया, जिसके प्रस्तर-09 के अनुसार 6 माह की अनुग्रह अवधि सहित Page 3 | शिकायतकर्ता
कायतकर्ता को दिनांक 78.06.20i9 तक sad यूनिट का कब्जा प्रदान किया | जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा var यूनिट का कब्जा प्रदान किये जाने में 69 माह से अधिक का विलम्ब किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा vat यूनिट के सापेक्ष 00% से अधिक अर्थात 38,69,8::/- रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि का भुगतान किये जाने में किसी भी प्रकार की चूक नहीं की गयी है, बल्कि विपक्षी ही यूनिट का कब्जा सौंपने में विफल रहा है और आज तक विपक्षी द्वारा परियोजना का ओ.सी./ सी.सी. प्राप्त नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा दुर्भावनापूर्ण इरादे से | दिनांक 34.04.2024 को अवैध मांग पत्र जारी किया गया, जिसमें 7,44,666 /— रुपये की धनराशि की मांग की गयी, जबकि जारी की गयी मांग का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा एकपक्षीय रूप से अवशेष देय धनराशि की संशोधित गणना की गयी, जिसमें यूनिट का क्षेत्रफल मनमाने ढंग से 380 वर्गफुट से बढ़ाकर 480 वर्गफुट कर दिया गया, जबकि इस सम्बन्ध में शिकायतकर्ता से कोई पूर्व सहमति प्राप्त नहीं की गयी। उक्त यूनिट के सापेक्ष 490% से अधिक धनराशि प्राप्त होने के बावजूद भी विपक्षी द्वारा उक्त यूनिट के सम्बन्ध में दिनांक 03.05.2024 को प्री-निरस्तीकरण पत्र जारी किया। शिकायतकर्ता द्वारा सभी शर्तों का अनुपालन किया गया है और फ्लैट क्रेता अनुबन्ध के अन्तर्गत WS प्लान का अनुपालन करते हुए, बिना किसी चूक के अपनी देय धनराशि का भुगतान किया गया है और वर्तमान शिकायत योजित करने के ठीक पांच दिन बाद, विपक्षी द्वारा दिनांक 23.05.2024 को यूनिट निरस्तीकरण पत्र जारी कर दिया गया, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा 400% भुगतान. किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा उक्त पत्र का विधिवत जवाब देते हुए कहा गया कि निरस्तीकरण पत्र मान्य नहीं है क्योंकि प्रकरण मा. प्राधिकरण के समक्ष विचाराधीन है। उ.प्र. RI की तकनीकी टीम द्वारा किये गये परियोजना के wee निरीक्षण ‘smear के अनुसार परियोजना का केवल 40-45% ही निर्माण कार्य पूर्ण किया गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विपक्षी द्वारा संपूर्ण धनराशि प्राप्त करने के बावजूद भी परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर कब्जा सौंपने में विफल रहा है। इसके अतिरिक्त यह भी कहा गया है कि विपक्षी द्वारा आज तक सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी./सी.सी. प्राप्त नहीं किया गया है और विपक्षी द्वारा दिनांक 23.05.2024, 42.06.2024 के पत्रों के माध्यम से यूनिट को अवैध रूप से निरस्त कर दिया गया था, जिसके पश्चात् शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 79.05.2024 को प्राधिकरण के समक्ष वर्तमान शिकायत योजित कर परियोजना के ओ.सी./सी.सी. सहित प्रश्नगत यूनिट का वैधानिक कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने व विपक्षी द्वारा दिनांक 34.04.2024 को
7,44,666 //-रुपये की धनराशि हेतु जारी किये गये अवैध मांग पत्र को निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किया गया है :- 4. aa शिकायतकर्ता द्वारा we प्लान के अनुसार अपनी देय धनराशि का भुगतान किया गया है अथवा नहीं और क्या विपक्षी द्वारा किये गये यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है ? 2. क्या शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या-04 निस्तारण बिन्दु संख्या-04, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लान के अनुसार अपनी देय धनराशि का भुगतान किया गया है अथवा नहीं और कया विपक्षी द्वारा किये गये यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है ? यह वाद बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है।
शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना BEETLE ORCHID के clav-i के rt फ्लोर पर बुकिंग फॉर्म दिनांक 30.0.2042 के माध्यम से यूनिट We-A-l बुक करायी गयी थी, जिसका कुल बिक्री मूल्य 78,03,590/— रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 8,69,8/— रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है। उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 8.42.20i5 को फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादित किया गया, जिसके प्रस्तर-09 के अनुसार 6 माह की अनुग्रह अवधि सहित शिकायतकर्ता को दिनांक 48.06.2049 तक उक्त यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा sar यूनिट का कब्जा प्रदान किये जाने में 69 माह से अधिक का विलम्ब किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा vet यूनिट के सापेक्ष 00% से अधिक अर्थात 8,69,8:/— रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त यह भी कहा गया है कि विपक्षी द्वारा आज तक सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त नहीं किया गया है और विपक्षी द्वारा दिनांक 23.05.2024, 42.06.2024 के पत्रों के माध्यम से यूनिट को अवैध रूप से निरस्त कर दिया गया, जिसके पश्चात् शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 49.05.2024 को प्राधिकरण के समक्ष वर्तमान शिकायत योजित कर परियोजना के ओ.सी./सी.सी. सहित प्रश्नगत यूनिट का वैधानिक कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने व विपक्षी द्वारा Page 5 दिनांक 34.0:.2024 को 7,44,666 /-रुपये की धनराशि हेतु जारी किये गये अवैध मांग पत्र को निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी द्वारा लिखित जवाब दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना BEETLE ORCHID के टॉवर-] के i फ्लोर पर बुकिंग फॉर्म दिनांक 09.4.20i3 के माध्यम से यूनिट WeN-A-lll बुक करायी गयी थी, जिसका कुल बिक्री मूल्य i9,48,45:/- रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 9,48,45./— रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है। उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 48.42.2045 को फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादित किया गया, जिसके प्रस्तर-09 के अनुसार 6 माह की अनुग्रह अवधि सहित शिकायतकर्ता को दिनांक 48.06.2049 तक उक्त यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु अप्रत्याशित घटनाएँ अर्थात मा. एन.जी. टी तथा पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण द्वारा लगाये गये प्रतिबंध एवं मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के कारण परियोजना को पूर्ण किये जाने में विलम्ब हुआ, जो विपक्षी के नियंत्रण से बाहर थी, जिसके लिए विपक्षी उत्तरदायी नहीं है। इसलिए फौर्स मैज्योर घटनाओं के कारण विपक्षी द्वारा परियोजना को पूर्ण किये जाने में 758 दिनों का विलम्ब हुआ, जिस कारण 758 दिन की गणना न की जाए और शिकायतकर्ता 758 दिनों के विलम्ब हेतु क्षतिपूर्ति / ब्याज पाने का अधिकारी नहीं है। वर्तमान में विपक्षी द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है और परियोजना के ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त करने हेतु सक्षम विकास प्राधिकरण के समक्ष आवेदन किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 3.07.2024 को परियोजना की स्थिति के सम्बन्ध में सूचना प्रदान की गयी, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने में डिफॉल्ट किया गया है। विपक्षी द्वारा उक्त यूनिट के सापेक्ष शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु विभिन्न दिनांक 34.04.2024, 04.04.2024, 30.04.2024 को मांग पत्र प्रेषित किये जाने के बावजूद भी शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, जिसके उपरान्त विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांक 02.05.2024 प्रेषित किया गया, जिसके बावजूद भी शिकायतकर्ता अपनी देय धनराशि का भुगतान करने में विफल रहा, जिस कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को उक्त यूनिट के सम्बन्ध में दिनांक 23.05.2024 एवं 42.06.2024 को यूनिट निरस्तीकरण पत्र प्रेषित कर यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया। उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा उभयपक्षों के मध्य निष्पादित फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांक 48.42.2045 के अनुसार अर्नेस्ट मनी की कटौती करने पश्चात्, शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी समस्त धनराशि वापस किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा अपने कथन के
22 Of प्र SCIEN py ge? Pere KANG Se समर्थन में लिखित बहस दाखिल करते हुए कहा गया है कि उपरोकतानुसार शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(0) के अन्तर्गत आवंटी की श्रेणी में नहीं आते हैं। भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय पट्टा के लिए करार) नियमावली, 208 की धारा-9.2 एवं धारा-9.3 निम्नलिखित उललेखित है :- "In case of Default by Promoter under the conditions listed above a non defaulting Allottee is entitled to the following: i. Stop making further payments to Promoter as demanded by the Promoter. If the Allottee stops making payments, the Promoter shall correct the situation by completing the construction milestones and only thereafter the Allottee be required to make the next payment without any interest; or ii. The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +496 unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:
Provided that where an Allottee does not intend to withdraw from the Project or terminate the Agreement, he shall be paid, by the Promoter, interest at the rate prescribed in the Rules, for every month of delay till the handing over of the possession of the [Apartment/Plot], which shall be paid by the Promoter to the Allottee within forty-five days of it becoming due." धारा--9.3 :— "The Allottee shall be considered under a condition of Default, on the occurrence of the following events: i. In case the Allottee fails to make payments for 2 (two) - consecutive demands made by the Promoter as per the Payment Plan annexed hereto, despite having been issued notice in that regard the Allottee shall be liable to pay interest to the promoter on the unpaid amount at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +7% unless provided Page 7 a otherwise under the Rules. The Promoter must not be in | default to take this benefit;
ii. In case of Default by Allottee under the condition listed above continues for a period beyond 3 (three) consecutive months after notice from the Promoter in this regard, the Promoter may cancel the allotment’ of _ the [Apartment/Plot] in favour of the Allottee and refund the money paid to him by the Allottee by deducting the booking amount and the interest liabilities and_ this Agreement shall thereupon stand terminated. The Promoter must not be in default to take this benefit; Provided that the Promoter shall intimate the Allottee about such termination at least thirty days prior to such termination."
अनुबन्ध / आवंटन पत्र के नियम एवं शर्तों के अनुसार यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का भुगतान we प्लान के अनुसार किया जाना था, जिसमें जिसमें प्रथम किश्त 4,40,429 //- रुपये की धनराशि का भुगतान बुकिंग पर, द्वितीय किश्त बुकिंग के 45 दिन के भीतर ,40420/— रुपये की धनराशि, तृतीय किश्त sere की खुदाई के समय ,40,429/- रुपये की धनराशि, चतुर्थ किश्त ग्राउण्ड फ्लोर ete के समय 7,40,429/—- रुपये की धनराशि, पंचम किश्त द्वितीय फ्लोर wa के समय 740429/— रुपये की धनराशि, छठवीं किश्त drad फ्लोर wld के समय 2,20,289,//- रुपये की धनराशि, सातवीं किश्त आठवें फ्लोर Wl के समय 2,20,289,//- रुपये की धनराशि, आठवीं किश्त axed फ्लोर id के समय 2,20,289,//- रुपये की धनराशि, नौवीं किश्त deed फ्लोर wld के समय 2,20,289/— रुपये की धनराशि, दसवीं किश्त ईंट का कार्य पूर्ण होने के समय ,50,075/— रुपये की धनराशि, ग्यारहवीं किश्त कब्जा ऑफर किये जाने के समय 70,274/- रुपये की धनराशि अदा की जानी थी। उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता द्वारा werd यूनिट के कुल बिक्री मूल्य 8,03,590/— रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया जाना था, जिसमें से शिकायतकर्ता द्वारा अब तक 8,69,8i/— रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया है तथा उक्त भुगतान को विपक्षी द्वारा अपने लिखित जवाब में भी स्वीकार किया गया है। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन से विदित है कि प्रश्नगत प्रकरण में यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 8,03,590,/- रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा आज तक 8,69,8/- रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया जा चुका है, जोकि लगभग 400 प्रतिशत से अधिक है, जिसे Page 8|
विपक्षी द्वारा अपने लिखित जवाब में भी स्वीकार किया गया है तथा उभयपफक्षों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध,/आवंटन पत्र दिनांकित 8.42.2045 के प्रस्तर-09 के अनुसार विपक्षी द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर उक्त यूनिट का कब्जा अनुग्रह अवधि सहित दिनांक 78.06.20I9 तक उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की मांग पर अपनी संपूर्ण देय धनराशि का भुगतान समयानुसार किया गया है, और यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 23.05.2024 एवं १2.06.2024 को भेजे गये हैं, जोकि अनुबन्धानुसार यूनिट का कब्जा दिये जाने की समयावधि के 5 वर्ष बाद भेजे गये हैं। ऐसी स्थिति में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को 7,44,666,/-रुपये की धनराशि हेतु प्रेषित मांग पत्र दिनांक 32.07.2024 तथा यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 23.05.2024 एवं 42.06.2024 खारिज किये जाते हैं।
यदि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को समय से देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, तो यह विपक्षी की जिम्मेदारी बनती है कि वह शिकायतकर्ता को समय-समय पर माँग पत्र भेजकर अवशेष धनराशि की माँग करते और शिकायतकर्ता द्वारा अवशेष देय धनराशि का भुगतान न किये जाने की स्थिति में पर्याप्त अवसर देकर उनकी यूनिट को निरस्त करते हुए उसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि ब्याज सहित उन्हें वापस कर देते, परन्तु विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की जमा धनराशि ब्याज सहित वापस नहीं की गयी | प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं अपनी यूनिट सरेन्डर / निरस्त नहीं करायी गयी है। वर्णित परिस्थिति में यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा किये गये शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया अवैधानिक ,/ अपूर्ण है। द्वितीय शिकायतकर्ता “कानूनी उत्तराधिकारी मोहम्मद आबिद” के प्रकरण में भी उपरोक्तानुसार समान तथ्य होने के कारण उक्त निर्णय से ही प्रश्नगत शिकायत का निस्तारण किया जा रहा है। रेरा अधिनियम की ois के अन्तर्गत पक्षकारों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के अनुसार परियोजना पूर्ण किये जाने में हुए विलम्ब की स्थिति में शिकायतकर्ता जमा धनराशि मय ब्याज प्राप्त कर सकता है अथवा यदि शिकायतकर्ता अपनी यूनिट का कब्जा लेने के इच्छुक हैं, तो वह अपनी अवशेष देय धनराशि (यदि कोई देय हो) का भुगतान कर कब्जा प्राप्त करें। तद्नुसार बिन्दु संख्या-04 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-02 निस्तारण बिन्दु संख्या-02, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के Page 9
अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना BEETLE ORCHID के टॉवर- के it फ्लोर पर बुकिंग फॉर्म दिनांक 30.40.2042 के माध्यम से यूनिट WeT-a-lll बुक करायी गयी थी, जिसका कुल बिक्री मूल्य 8,03,590/— रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 8,69,8i/— रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है। sad यूनिट के सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 78.:2.20i5 को फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादित किया गया, जिसके प्रस्तर-09 के अनुसार 6 माह की अनुग्रह अवधि सहित शिकायतकर्ता को दिनांक 48.06.2049 तक उक्त यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा sat यूनिट का कब्जा प्रदान किये जाने में 69 माह से अधिक का विलम्ब किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष विपक्षी द्वारा की जा रही अनुचित धनराशि की मांग को हटाये जाने एवं प्रश्नगत यूनिट को पुनर्स्थापित करते हुए विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा व रजिस्ट्री कराये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी द्वारा अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना BEETLE ORCHID के टॉवर- के ॥४ फ्लोर पर बुकिंग फॉर्म दिनांक 09.47.20i3 के माध्यम से यूनिट संख्या-#- I बुक करायी गयी थी, जिसका कुल बिक्री मूल्य 29,48,.45:/— रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 9,48,45|/- रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है। saa यूनिट के सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 48.42.2045 को फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादित किया गया, जिसके प्रस्तर-09 के अनुसार 6 माह की अनुग्रह अवधि सहित शिकायतकर्ता को दिनांक 48.06.2049 तक उक्त यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु अप्रत्याशित घटनाएँ अर्थात मा. एन.जी.टी तथा पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण द्वारा लगाये गये प्रतिबंध एवं मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के कारण परियोजना को पूर्ण किये जाने में विलम्ब हुआ, जो विपक्षी के नियंत्रण से बाहर थी, जिसके लिए विपक्षी उत्तरदायी नहीं है। इसलिए PRY मैज्योर घटनाओं के कारण विपक्षी द्वारा परियोजना को पूर्ण किये जाने में 758 दिनों का विलम्ब हुआ, जिस कारण 758 दिन की गणना न की जाए और शिकायतकर्ता 758 दिनों के विलम्ब हेतु क्षतिपूर्ति / ब्याज पाने का अधिकारी नहीं है। वर्तमान में विपक्षी द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है और परियोजना के ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त करने हेतु सक्षम विकास प्राधिकरण के समक्ष आवेदन किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 34.04.2024 को परियोजना की स्थिति के सम्बन्ध में सूचना प्रदान की गयी, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय
धनराशि का भुगतान करने में डिफॉल्ट किया गया है। विपक्षी द्वारा उक्त यूनिट के सापेक्ष शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु विभिन्न दिनांक 34.04.2024, 04.04.2024, 30.04.2024 को मांग पत्र प्रेषित किये जाने के बावजूद भी शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, जिसके उपरान्त विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांक 02.05.2024 प्रेषित किया गया, जिसके बावजूद भी शिकायतकर्ता अपनी देय धनराशि का भुगतान करने में विफल रहा, जिस कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को उक्त यूनिट के सम्बन्ध में दिनांक 23.05.2024 एवं 42.06.2024 को यूनिट निरस्तीकरण पत्र प्रेषित कर यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया। उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा उभयपक्षों के मध्य निष्पादित फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांक 78.2.20I5 के अनुसार अर्नेस्ट मनी की कटौती करने पश्चात्, शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी समस्त धनराशि वापस किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित बहस दाखिल करते हुए कहा गया है कि उपरोकक्तानुसार शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(0) के अन्तर्गत आवंटी की श्रेणी में नहीं आते हैं। RI एक्ट की धारा 48 (4) A प्राविधान है कि :- Section व8 (l) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or
(b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the ES Page ii handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की aet—(4)(b) में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि प्रोमोटर का यह दायित्व होगा कि वह परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त कर, उसे आवंटी को उपलब्ध करायें। उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय,/पट्टा के लिए करार/अनुबन्ध) नियमावली, 2048 के प्रस्तर-7.2 में कब्जा ऑफर किये जाने के सम्बन्ध में यह उललेखित है कि परियोजना का ओ.सी./सी.सी. प्राप्त होने के उपरान्त ही प्रमोटर, शिकायतकर्ता (आवंटी) को लिखित में यूनिट का कब्जा ऑफर करेंगे। पत्रावली पर अग्रणी शिकायतकर्ता (साधना देवी) द्वारा फ्लैट आवंटन /अनुबन्ध पत्र दिनांकित 48.:2.205 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जो उभयपक्षों के मध्य निष्पादित है, जिसके प्रस्तर-09 के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा आवंटन /अनुबन्ध पत्र निष्पादित किये जाने की तिथि से 36 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर शिकायतकर्ता को उनकी यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था, ऐसे में उपरोक््तानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 7.06.20:9 तक यूनिट का कब्जा पाने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा परियोजना को अनुबन्धानुसार पूर्ण नहीं किया गया है, ऐसी दशा में अग्रणी शिकायतकर्ता (साधना देवी) को दिनांक 48.06.2049 से ओ.सी./ सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।
द्वितीय प्रकरण में पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि महबूब आलम द्वारा विपक्षी की उक्त परियोजना में दिनांक 43.03.2043 को यूनिट संख्या-8-407 gH करायी गयी थी, जिसके सम्बन्ध में उभयपक्षों के मध्य दिनांक 43.03.2043 कों स्वीकृति पत्र हस्ताक्षरित किया गया है, परन्तु महबूब आलम OT tert होने के कारण स्पेशल पॉवर ऑफ अटोर्नी के माध्यम से “मोहम्मद आबिद” को यूनिट संख्या-8-407 का उत्तराधिकारी बनाया गया है। शिकायतकर्ता "मोहम्मद आबिद” के प्रकरण में बुक करायी गयी यूनिट संख्या-8-407 के सम्बन्ध में पत्रावली पर उपलब्ध Wre प्लान के अनुसार यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 27,40,050/— रुपये है, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा 28,49,009 //-रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया है, जिसकी पुष्टि विपक्षी द्वारा अपने लिखित उत्तर के माध्यम से की गयी है। विपक्षी द्वारा अपने लिखित उत्तर में यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 36,74,782,/- रुपये अंकित किया गया है, जबकि यूनिट We—B-407 के सम्बन्ध उभयपक्षों के मध्य हस्ताक्षरित Gre प्लान के अनुसार यूनिट का कुल मूल्य 27,40,050/— रुपये है। ऐसे में यूनिट का कूल बिक्री मूल्य 27,40,050/— रुपये माना जाना न्यायोचित है और उक्त यूनिट के सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 28,49,009 ,/ -रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया है, जिसे विपक्षी द्वारा अपने लिखित उत्तर में स्वीकार किया गया है, जिससे यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता द्वारा उक्त यूनिट के सापेक्ष विपक्षी को i00% से अधिक धनराशि का भुगतान किया जा चुका है।
ऐसी दशा में सर्वप्रथम उभयपक्षों के मध्य रेरा के प्रावधानों के अनुसार अनुबन्ध निष्पादित कराया जाना अनिवार्य है। इस सम्बन्ध में रेरा अधिनियम, 206 की धारा-43 में स्पष्ट रूप से प्राविधानित है कि :- 3. No deposit or advance to be taken by Promoter without first entering into agreement for sale.- (|) A promoter shall not accept a sum more than ten per cent of the cost of the apartment, plot, or building as the case may be, as an advance payment or an application fee, from a person without first entering into a written agreement for sale with such person and register the said agreement for sale, under any law for the time being in force. (2) The agreement for sale referred to in sub-section (I) shall be in such form as may be prescribed and shall specify the particulars of development of the project including the construction of building and apartments, along with specifications and internal development works and external development works, the dates and the manner by which payments towards the cost of the apartment, plot or building, as the case may be, are to be made by the allottees and the date on which the possession of the apartment, plot or building is to be handed over, the rates of interest payable by the promoter to the allottee and the a Ro ET ०-८ -<3-4:55:>अक४ >>. allottee to the promoter in case of default, and such other particulars, as may be prescribed.
उपरोक्तानुसार से यह स्पष्ट है कि प्रोमोटर, यथास्थिति, andar, भू-खण्ड या भवन की लागत के १0 प्रतिशत से अधिक राशि अग्रिम संदाय अथवा आवेदन फीस के रूप में किसी व्यक्ति, उस व्यक्ति के साथ लिखित करार किये बिना, स्वीकार नहीं करेगा और उक्त विक्रय करार को तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन पंजीकृत करेगा। ऐसे में यह विपक्षी का दायित्व है कि वह यदि यूनिट की कुल कीमत का to प्रतिशत से ज्यादा की धनराशि लेता है, तो निश्चित रूप से अनुबन्ध निष्पादित करेगा और यदि नहीं कराता है, तो रेरा अधिनियम के अन्तर्गत दंडनींय होगा। पत्रावली पर दाखिल अभिलेखों से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा रेश अधिनियम की धारा-43 का उल्लंघन किया गया है, यह विपक्षी का उत्तरदायित्व था कि वह ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता से 0 प्रतिशत से अधिक की धनराशि प्राप्त नहीं करते। अतः यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता (मोहम्मद आबिद) से यूनिट के सम्बन्ध में ।00% से अधिक धनराशि प्राप्त की गयी है, जिसके क्रम में विपक्षी द्वारा अनुबन्ध पत्र का निष्पादन नहीं किया गया है, जोकि रेरा अधिनियम की धारा-43 का उल्लंघन है। पत्रावली पर शिकायतकर्ता (मोहम्मद आबिद) द्वारा अपने कथन के समर्थन में उभयपक्षों के मध्य हस्ताक्षरित व निष्पादित स्वीकृति पत्र दिनांक 43.03.2043 की छायाप्रति दाखिल. की गयी है और उभयपक्षों के मध्य अनुबन्ध हस्ताक्षरित व निष्पादित नहीं किया गया है, जिससे कब्जा दिये जाने की समयावधि निर्धारित नहीं है। इस सम्बंध में मा. उच्चतम न्यायालय के सिविल अपील संख्या 3533-3534 / 2047 मैसर्स फार्च्यून इंफ्रास्ट्रक्चर्स एवं अन्य बनाम ट्रेवर डेलिमा एवं अन्य के प्रस्तर 5 में स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है कि-:
|5. Moreover, a person cannot be made to wait indefinitely for the possession of the flats allotted to them and they are entitled to seek the refund of the amount paid by them, along with compensation. Although we are aware of the fact that when there was no delivery period stipulated in the agreement, a reasonable time has to be taken into consideration. In the facts and circumstances of this case, a time period of 3 years would have been reasonable for completion of the contract i.e., the possession was required to be given by last quarter of 204. Further there is no dispute as to the fact that until now there is no redevelopment of the property. Hence, in view of the above discussion, which draw us to an irresistible conclusion that there is deficiency of service on the part of the appellants and accordingly the issue is answered.
उपरोक्त मा. उच्चतम ae के ऑब्जर्वेशन एवं विधि व्यवस्था के अनुसार फ्लैट के कब्जे हेतु किसी व्यक्ति को अनिश्चित समय तक प्रतीक्षा नहीं करा सकता, जहाँ अनुबन्ध में कब्जे की तिथि नहीं दी गयी है वहाँ तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए 3 वर्ष का समयावधि इस कार्य को पूर्ण कराये जाने हेतु उचित समय माना है। प्रस्तुत प्रकरण में उभयपक्षों के मध्य दिनांक 43.03.203 को स्वीकृति पत्र हस्ताक्षरित व निष्पादित किया गया है, जिससे कब्जा दिये जाने की गणना करना उचित माना जाएगा। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए इस प्रकरण में भी 3 वर्ष में शिकायतकर्ता को उनकी यूनिट का कब्जा दिया जाना उचित समयावधि था। ऐसे में उपरोक्तानुसार कब्जे की तिथि 2.03.206 होती है। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता (मोहम्मद आबिद) को दिनांक 43.03.2046 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील संख्या-6649-50 / 2048 “सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल“ में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." Page 5 उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्राललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8(l)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्रावधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। रेरा एक्ट की धारा-2(29) में प्राविधान है कि :- (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation.—F or the purpose of this clause—
(i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पदट्टा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर-9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर-9.2(9) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"'
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना naira प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में facia है, तो विपक्षी भी McLr+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है, जिसे माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा Re याचिका संख्या- सीः 9420 / 2020, “Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & Ors.” में भी उचित एवं विधिपूर्ण माना गया है। ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय “पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर ucir+) प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से ] प्रतिशत ज्यादा है, उचित एवं सही है। इसके अतिरिक्त दिनांक i7.:0.20i8 को उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी Page 7 — द्वारा मॉडल Wits के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख | किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
"7,] Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ.प्र. रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी | इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 | से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-02 निस्तारित किया जाता है।
उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं :- आदेश 4. faveft को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर अग्रणी शिकायतकर्ता (साधना देवी) की यूनिट को पुनर्स्थापित करते हुए, आवंटन /अनुबन्ध पत्र के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर, ओ.सी. / सी.सी. सहित प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा देना सुनिश्चित करें और शिकायतकर्ता से देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर, शिकायतकर्ता के पक्ष में नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित He | विपक्षी, अग्रणी शिकायतकर्ता (साधना देवी) को दिनांक 48.06.2049 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने की तिथि अथवा विधिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर ४८,२+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 30 दिनों के अन्दर द्वितीय शिकायतकर्ता (मोहम्मद आबिद) के प्रकरण में उनके द्वारा बुक करायी गयी यूनिट संख्या- B-407 के सम्बन्ध में उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 /8--3-48-65 fafaer/is के दिनांक 47.0.208 को जारी किये गये “Wire टू सेल” के प्रारूप पर अनुबन्ध निष्पादित कराना सुनिश्चित करें।
विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 60 दिनों क॑ अन्दर द्वितीय शिकायतकर्ता (मोहम्मद आबिद) की यूनिट को पुनर्स्थापित करते हुए, निष्पादित आवंटन /अनुबन्ध पत्र के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर, ओ.सी. / सी.सी. सहित प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा देना सुनिश्चित करें और शिकायतकर्ता से देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर, शिकायतकर्ता के पक्ष में नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें | विपक्षी, द्वितीय शिकायतकर्ता (मोहम्मद आबिद) को दिनांक 43.03.206 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने की तिथि अथवा विधिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+I प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। alfas—i9 @ दृष्टिगत दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रमोटर द्वारा शिकायतकर्तागण को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्तागण से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा-2(2४)6) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ अतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से Page 9 | कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी।
8... विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण को प्रश्नगत यूनिट्स का भौतिक कब्जा प्रदान करते समय सभी अन्य शुल्क आवंटन» अनुबन्ध पत्र के अनुरूप ही अधिरोपित करेंगे। 9. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावली पर रखी जाए एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की द्वितीय मामले में भी उपरोक्तानुसार गणना की जाएगी। 40. इस आदेश का seca भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20i6 की धारा-38, 40(2) एवं 63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 44. शिकायतकर्तागण को यह निर्देशित किया जाता है कि यदि विपक्षी द्वारा उपरोक्त अंकित समयावधि के भीतर उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण "रेरा पोर्टल” के माध्यम से आदेश के क्रियान्वयन हेतु अनुरोध अपलोड कर, उसकी भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए | Tage पत्रावलियाँ दाखिल-दफ्तर हो। ९१ वेंकटेश Yb (सदस्य) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण | Page 20