Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Pawan Malhan v. Wave One Private Limited
Complaint No. NCR144/07/119336/2024
- Decision date
- 2026-05-27
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 20:6 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित : Slo दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या a यूनिट न0 | जमा धनराशि Go ie wr | अनुबंधानुसार | वांछित ष सं० सेल की तिथि | कब्जा दिये जाने की तिथि ]. | NCRI44/07/I9336/2024 | पवन Heelt | SCO/I0 | रु0 4,65,0,06,/ | 2.07.20i5 | 36 माह यूनिट का तथा 06 कब्जा व माह अनुग्रह | विलम्बित अवधि के | अवधि का साथ ब्याज दिलाये जनवरी जाने के लिए 2049 अनुरोध किया गया है। बनाम मैसर्स वेव वन प्रा.लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के free ac का. कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु ue Rare zed. at Ta है। शिकायतकर्ता पवन मल्हान के प्रकरण में विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना WOPL-WONE में यूनिट संख्या sco/i0 पूर्व में .आवंटी_ BEE GEE CREATIONS PVT itp को आवंटित की गयी थी जिसके सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 24.07.2045 को अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ। तत्पश्चात् पूर्व आवंटी BEE GEE CREATIONS PVT LTD ERT vad आवंटित यूनिट Wear sco/io अन्य आवंटी श्री हितिक Ace को दिनांक 28.09.2047 को greece /स्थानान्तारित की गयी। संलग्नक इन्डोरस्मेंट / WIAA पत्र पर पूर्व BEE GEE CREATIONS PVT LTD व अन्य आवंटी श्री हितिक मल्हान के हस्ताक्षर है जो एनेक्चर-4 के रूप में पत्रावली पर उपलब्ध है। इसके पश्चात पूर्व आवंटी श्री हितिक मल्हान द्वारा दिनांक 04.06.20i8 को वर्तमान शिकायतकर्ता पवन मल्हान को प्रश्नगत यूनिट स्थानान्तारित की गयी जिस पर पूर्व आवंटी श्री हितिक मल्हान व वर्तमान आवंटी श्री पवन मल्हान के हस्ताक्षर है।
संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना WOPL-WONE में यूनिट We sco/io बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि Go 4,65,40,046,/- का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा लिखित कथन दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि प्रश्नगत यूनिट प्रारम्भ में 55६ GEE CREATIONS PVT LTD को आवंटित हुयी थी जिसके सम्बन्ध में दिनांक 24.07.2045 को अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ। आवंटित यूनिट की कीमत bo 5,58,22,694 / थी जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा चरणबद्ध रूप से विपक्षी को धनराशि Go 4,65,0,0:6 / का भुगतान किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा अनुबंध के क्लाज 5.4 के अनुसार यूनिट का कब्जा 24.04.2049 में दिया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा मार्च 2024 में परियोजना का निरीक्षण किया गया तो यह पाया गया कि विपक्षी की परियोजना अभी पूर्ण नहीं है। विपक्षी की परियोजना 05 वर्ष से अधिक विलम्बित है।“विपक्षी द्वारा दिनांक 20.03.2023 को अवैधानिक रूप से ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया. गया जबकि विपक्षी की परियोजना न तो पूर्ण है और न ही विपक्षी को ओ.सी/सी.सी प्राप्त है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी द्वारा. प्रेषित अवैधानिक मांग पत्र को निरस्त किये जाने, यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में लिखित कथन, अनुबंध पत्र, ऑफर ऑफ पजेशन, पेमेंट डिमांड नोटिस व रसीदों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी S| विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि [संख्या (रु0) ‘ विपक्षी द्वारा जारी कस्टमर स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट 48.40.2049 रु0 4,65,0,0:6 /
विपक्षी की ओर से प्रस्तुत लिखित आपत्ति में यह उल्लिखित किया गया है कि उत्तर प्रदेश राज्य में रेरा अधिनियम पूर्णता लागू होने की तिथि 04.05.2047 है जिस कारण सभी ऑन गोईंग परियोजनाओं को रेरा अधिनियम के अन्तर्गत पंजीकृत कराये जाने के लिए 3.07.20i7 तक समय दिया गया। विपक्षी द्वारा उल्लिखित 2 —™ कक
किया गया है कि रेरा अधिनियम के प्राविधान भविष्यलक्षी (Prospective) है, जिसके पूर्व प्राविधान 04.05.2047 को लागू हुए है, जिस कारण अधिनियम के प्राविधान पूर्व में विकसित परियोजना पर प्रभावी नहीं है। इसके समर्थन में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सीआईटी बनाम वाटिका टाउनशिप्स प्रा.लि. तथा स्टेट ऑफ sey बी बनाम एस.सी.बोस तथा एक्सप्रेस न्यूज पेपर प्रा.लि. बनाम भारत संघ में पारित आदेशों का संदर्भ प्रस्तुत किया गया है। विपक्षी द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा नीलकमल रियटलर्स wader orf. बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया व अन्य का उल्लेख किया गया है जिसमें माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा कहा गया है कि रेरा अधिनियम भूतलक्षी (Retrospective) प्रकृति का है। RT अधिनियम की धारा-4 (2)())(0) का संदर्भ देते हुए उल्लिखित किया गया है कि रेरा अधिनियम की उक्त धारा विपक्षी को परियोजना की पूर्णता तिथि व कब्जा उपलब्ध कराये जाने की तिथि परिवर्तित करने के लिए बाध्य करती है। रेरा लागू होने के उपरांत परियोजना पूर्ण करने की तिथि 30.42.2024 है। विपक्षी की.परियोजना रेरा के अन्तर्गत पंजीकृत की श्रेणी में आती है जो वेव *वन्त.>नामतः पंजीकृत है. तथा पंजीकरण संख्या यूपीरेरापीआरजे 3444 है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि माननीय एनजीटी न्यायालय द्वारा वर्ष 2047 से वर्ष 2020 तक दिल्ली एनसीआर में बढ़े वायु प्रदूषण के नियत्रंण हेतु निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगाया गया है जिस कारण परियोजना में निर्माण कार्य 47 माह तक बंद रहा है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि प्रश्नगत यूनिट BEE GEE CREATIONS PVT.LTD को आवंटित की गयी थी बाद में दिनांक 07.06.20:8 को यूनिट पवन मल्हान को स्थानान्तारित की गयी है। विपक्षी द्वारा दिनांक 20.03.2023 को ओ.सी के साथ ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया गया था। विपक्षी की परियोजना पूर्ण है तथा विपक्षी को दिनांक 46.05.2024 को सम्बन्धित प्राधिकरण से ओ.सी प्राप्त हो चुका है। अतः विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अवशेष देय धनराशि का भुगतान करके यूनिट का कब्जा लिये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी द्वारा लिखित जवाब के समर्थन में ऑफर ऑफर ऑफ पजेशन, कम्पलीशन सर्टिफिकेट व यूनिट WRT पत्र की छाया प्रतियां दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रतिउत्तर दाखिल किया गया जिसमें दाखिल लिखित कथन का पुनवित्ति करते हुए विपक्षी द्वारा दाखिल लिखित जवाब के प्रत्येक प्रस्तर का खण्डन करते हुए यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्षों के तर्कों को सुना गया। उभयपक्षो के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये गये है। 4. क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं ? तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 2. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 3. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या-4 :- प्रश्न eT se तथ्य पर विरचित है कि क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते है तथा कया पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व ogee निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745--6749 /202 “मैसर्स न्यूटेक प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स wo fio बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :-
"54. From the scheme of the Act 20I6, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on-going projects and future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 20I6." a ——— 4
उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आर्ब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका पंजीकरण संख्या- एशराग्र&शर२73444 है। अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईंग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तद्नुसार प्रश्न Wea निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या-2 प्रश्न संख्या-2 इसे .आशय-*का विरचित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने के कारण विलम्बित हुई? यह प्रश्न विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित fanaa है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। ः विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति में यह उल्लेख किया गया है कि दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण होने के कारण एन.जी.टी के आदेश व कोविड-49 महामारी के कारण परियोजना में 47 माह निर्माण कार्य बंद था।
फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में यूपी रेरा द्वारा जारी एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि :- ” प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर एग्रीमेंट में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना जाएगा।” 5 माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 / 4985, “M.C. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04-44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 3029 / 4985 में पारित आदेश दिनांक 09-42-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “in the affidavit dated 05.2.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
"2. That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQ| category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could:be in place of.construction activities in as much as no construction should be permitted during night.time (6.00 pm to 6.00 am). The ban:imposed could'be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more, "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.”
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक o4-tt-209 से दिनांक 44-02--2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक 09-42-2049 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04-44-209 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 दिन(66+2) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44~-02-2020 तक साँय 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि vat अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न््यायोचित नहीं होगा। अतः यह 6 — निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त wrfas—i9 महामारी के सम्बंध में Goto wr अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
उपरोक्त तथ्यों व माननीय Vea Mae के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी .कोविड--49 'के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तदनुसार .प्रश्न संख्या-2 Peake किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या-3 प्रश्न Ts इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन पत्र के अवलोकन से यह विदित है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 2.07.20i5 को आवंटित यूनिट के सम्बंध में अनुबंध पत्र निष्पादित किया गया। विपक्षी द्वारा अनुबंधानुसार यूनिट 36 माह तथा 06 माह अर्थात जनवरी 20:: में कब्जा दिया जाना था जो अभी तक वर्तमान शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। पत्रावली के अवलोकन से यह भी विदित है कि विपक्षी को नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 46.05.2024 को जारी कम्पलीशन सर्टिफिकेट प्राप्त हो चुका है। विपक्षी द्वारा दिनांक 20.03.2023 को शिकायतकर्ता के पक्ष में कब्जा ऑफर पत्र जारी किया गया है जो पत्रावली पर उपलब्ध है। यहां यह स्पष्ट किया जाता है 7 ——_=_ कि विपक्षी द्वारा दिनांक 20.03.2023 को जारी कब्जा ऑफर पत्र GIT द्वारा जारी कार्यालय आदेश दिनांकित 29.05.2024 के अनुसार फिट आउट फार पजेशन जारी किये जाने का कोई प्राविधान नहीं है जिस कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को जारी किया गया फिट आउट फार पजेशन दिनांकि 20.03.2023 वैधानिक नहीं है। रेरा अधिनियम की धारा-48() में यह प्राविधानित है कि :-
"Section 8 () “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building, (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed". इस प्रकार क्रेता owe अधिकार है fae we एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो&वह«अपनी&जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस मांग सकते है अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें। प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता--द्वॉरा..-कब्जा..एवं..विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
उपरोक्त से यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा जनवरी 209 में प्राप्त होना था जो अभी तक कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है तथा विपक्षी को मई 2024 में कम्पलीशन सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है। इस प्रकार विपक्षी की परियोजना करीब 05 वर्ष से अधिक विलम्बित है परन्तु शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है जिस कारण शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज यूपी रेरा अधिनियम की oni—ie 4 वर्णित प्राविधानों के अनुसार दिलाया जाना उचित होगा। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील Wo 6649-50 / 2048 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- a= Se 8 "the period of Interest should close on April 20I6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in
taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्राललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section | 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for’any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice. in this, behalf including compensation. If theallottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over’ Of the posséssion,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment» but»has»not. received»possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " aa: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व dar के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप fas
तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 7.:0.20i8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली \ 208 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा = विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर g2(ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ॥४८,२+प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी McLR+i प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)() में भी यही ब्याज की-परिभांषा दी गयी है।
अब प्रश्न यह उत्पन्न होता-है कि शिकायत्रकर्ता*किस तिथि से ब्याज पाने का अधिकारी है। पत्रावली पर उपलब्ध अनुबंध पत्र के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा मूल आवंटी BEE GEE CREATIONS PVT LTD को प्रश्नगत आवंटित की गयी थी जिसके सम्बन्ध में दिनांक 2.07.20i5 को मूल आवंटी BEE GEE CREATIONS PVT LTD व विपक्षी के मध्य अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ। तत्पश्चात् मूल आवंटी BEE GEE CREATIONS PVT LTD gl दिनांक 28.09.2047 को vat आवंटित यूनिट श्री हितिक मल्हान के va में इन्डोरस्मेंट /wrmika की गयी। इसके उपरांत श्री हितिक मल्हान द्वारा दिनांक 0.06.20i8 को प्रश्नगत यूनिट वर्तमान शिकायतकर्ता को स्थानान्तारित की गयी। यहां यह स्पष्ट किया जाता है कि वर्तमान प्रकरण में अनुबंध दिनांकित 24.07.2045 के अनुसार आवंटी को कब्जा दिये जाने की तिथि अनुबंध की तिथि से 36 माह तथा 06 माह अनुगह अवधि अर्थात जनवरी 2049 थी। वर्तमान प्रकरण में कब्जा दिये जाने की तिथि से पूर्व ही मूल आवंटी द्वारा अपने सभी अधिकार व दायित्व नये आवंटी को एन्डोरस »स्थानान्तारित कर दिये गये है जिस कारण से प्रश्नगत यूनिट का कब्जा दिये जाने की तिथि के —_—_—— i0
उपरांत से ही शिकायतकर्ता विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-3 Pena किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश \. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र /अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। 2. विपक्षी शिकायतकर्ता दिनांक 04.02.2049 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि BO 4,65,0,0i6/ (र० चार करोड पैसठ लाख दस हजार सोलह) पर MCLR+H प्रतिशत्न. ब्याज अदा करना. सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम yr a जाने#वाली:धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को -बापस- की<जायेंगी-।-निस्तारण--प्रश्न संख्या 2 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 43029,//4985 के अनुसार ) 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा।
3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा 2(2०)|() के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी mMclR+. प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय 42 SS होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 4. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 5. विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन करा सकेगें। 6. आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। (डा०दीपक स्वरूप WRT) सदस्य उ.प्र. भू>सम्पदा-विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर