Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Kamlesh Khurana v. Wave One Private Limited
Complaint No. NCR144/07/111190/2023
- Decision date
- 2026-03-28
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की esi के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित : डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या का यूनिट न0 | जमा धनराशि रु० ec or | अनुबंधानुसार | वांछित ष॒] सं० सेल की तिथि | कब्जा दिये जाने की al मी तिथि f - | NCRI44/07/I90/2023 | कमलेश F-22/5 | रु० 67.5,395,// | 22.07.2044 | 42 माह यूनिटका | खुराना व तथा 06 कब्जा व मैसर्स दक्ष माह अनुग्रह | विलम्बित इण्डिया अवधि के | अवधि का साथ जुलाई | ब्याज दिलाये 2048 जाने के लिए अनुरोध किया 4 L गयाहै। | बनाम मैसर्स वेव वन प्रा.लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध यूनिट का, कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु aera. sie. at गयी हैं
संक्षेप में शिकायतकत्नैह्तिका कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना WOPL-WONE में यूनिट...संख्या...सिल्वर: 7-22/5 बुक... करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि wo 67,5,395,/- का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा लिखित कथन दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता व सह आवंटी द्वारा दिनांक 78.07.204 को विपक्षी की परियोजना में यूनिट संख्या एफ-22,/5 बुक करायी गयी थी। आवंटित यूनिट की कुल कीमत रु0 68,46,096 / थी और आवंटित यूनिट के सम्बन्ध में दिनांक 22.07. 20I4 को अनुबंध ua निष्पादित हुआ। इसके उपरांत विपक्षी द्वारा दिनांक 22.07. 2024 को Addedum निष्पादित किया गया जिसके अनुसार रु0 53,960,/ का मासिक भुगतान बुकिंग धनराशि Bo 64,75,294 / भुगतान किये जाने पर था। विपक्षी द्वारा दिनांक 22.07.2024 को धनराशि रु० 32,45,395 /“ का भुगतान किये जाने हेतु मांग पत्र जारी किया गया जिसे शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 44.08.2044 को भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष रु० 67,45,395 / का भुगतान किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा 42 माह न ; ————— _#
ती 06 माह अनुग्रह अवधि के साथ यूनिट का कब्जा दिया जाना था। विपक्षी की परियोजना बुकिंग की तिथि से 08 वर्ष 09 माह विलम्बित है। विपक्षी द्वारा दिनांक 30.04.2023 को ऑफर ऑफ पजेशन लेटर जारी किया गया। विपक्षी द्वारा दिनांक 24.2.2022 तक मासिक एश्योर्ड इनकम भुगतान किया गया है। विपक्षी ओ.सी / सी. सी प्राप्त करने में असफल रहा है तथा विपक्षी निर्धारित अवधि में यूनिट का कब्जा देने में असफल रहा है। इस सम्बन्ध में शिकायतकर्ता द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 358:-3590 इम्पीरिया स्ट्रक्चर लिमिटेड बनाम अनिल पटानी, सिविल अपील संख्या 3207-3208 ,/ 2049 मार्बेल ओमेगा बिल्डर प्रा. लि. बनाम श्री हरी गोखले में पारित आदेश का उल्लेख किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा, विलम्बित अवधि का ब्याज, एश्योर्ड इनकम दिनांक 04.04.2023 से भौतिक कब्जा की तिथि तक, विपक्षी पर गलत तथ्यों के लिए रु0 2,00,000/, निर्धारित समय पर यूनिट का कब्जा न दिये जाने के कारण क्षतिपूर्ति रु० ,08,25,774,“, मानसिक उत्पीडन हेतु रु० 2,00,000,/ व विधिक खर्च रु0 50,000 / दिलाये जाने का eter fear गया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में लिखित कथन, आवंटन पत्र, Addedum, डिमांड नोटिस व*रसीदों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। विपक्षी . को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- क्रम | विवरण | दिनांक भुगतान की गई धनराशि [संख्या (रु0) विपक्षी द्वारा जारी रसीद संख्या 0883 46.07.2044 रु0. 35,00,000/ रसीद संख्या 4054 08.08.204 FO 32,45,395 / कुल योग : %0 _67,45,395 /
विपक्षी की ओर से प्रस्तुत लिखित आपत्ति में यह उल्लिखित किया गया है कि उत्तर प्रदेश राज्य में रेरा अधिनियम पूर्णता लागू होने की तिथि 04.05.20:7 है जिस कारण सभी ऑन गोईंग परियोजनाओं को रेरा अधिनियम के अन्तर्गत पंजीकृत कराये जाने के लिए 34.07.20॥7 तक समय दिया गया। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि रेरा अधिनियम के प्राविधान भविष्यलक्षी (Prospective) है, जिसके पूर्व प्राविधान 04.05.2047 को लागू हुए है, जिस कारण अधिनियम के प्राविधान पूर्व में विकसित परियोजना पर प्रभावी नहीं है। इसके समर्थन में माननीय उच्चतम अजय ्आआ- 2
न्यायालय द्वारा सीआईटी बनाम वाटिका टाउनशिप्स wife. तथा स्टेट ऑफ डब्ल्यू बी बनाम एस.सी.बोस तथा एक्सप्रेस न्यूज पेपर प्रा.लि. बनाम भारत संघ में पारित आदेशों का संदर्भ प्रस्तुत किया गया है। विपक्षी द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा नीलकमल रियटलर्स सबर्बबन प्रा.लि. बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया व अन्य का उल्लेख किया गया है जिसमें माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा कहा गया है कि रेरा अधिनियम भूतलक्षी (Retrospective) प्रकृति का है। tr अधिनियम की धारा-4 (2)0)(०) का संदर्भ देते हुए उल्लिखित किया गया है कि रेरा अधिनियम की उक्त धारा विपक्षी को परियोजना की पूर्णता तिथि व कब्जा उपलब्ध कराये जाने की तिथि परिवर्तित करने के लिए बाध्य करती है। रेरा लागू होने के उपरांत परियोजना पूर्ण करने की तिथि 30.42.202 है। विपक्षी की परियोजना रेरा के अन्तर्गत पंजीकृत की श्रेणी में आती है जो वेव वन नामतः पंजीकृत है तथा पंजीकरण संख्या यूपीरेरापीआरजे 3444 है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को यूनिट संख्या एफ 22/5, वेव वन नोएडा सैक्टर ia में आवंटित की गई थी। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष“रु० 67,45,395 / का. भुगतान किया गया है। माननीय एनजीटी न्यायालय: द्वारा वर्ष 208 से वर्ष 2020 तक दिल्ली एनसीआर में बढ़े वायु प्रदूषण के नियत्रंण हेतु निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगाया गया है जिस कारण परियोजना में निर्माण कार्य 47 माह तक बंद रहा है। इसके उपरांत कोविड-49 महामारी के कारण भारत सरकार द्वारा लगाये गये देशव्यापी लॉक डाउन के कारण भारी वित्त का नुकसान करना पड़ा | विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ पजेश्न 30.04.2023 को भेजा जा चुका है। विपक्षी ने यह भी उल्लिखित किया है कि उन्हें परियोजना के सापेक्ष वांछित अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त होने के उपरांत विपक्षी को दिनांक 46.05.2024 को ओ.सी भी प्राप्त हो चुका है। अतः विपक्षी द्वारा वर्तमान शिकायत अर्थदण्ड के साथ निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी द्वारा लिखित जवाब के समर्थन में ऑफर ऑफर ऑफ पजेशन, मांग पत्र, आवंटन पत्र, वांछित अनापत्ति प्रमाण पत्र व कम्पलीशन सर्टिफिकेट की प्रतियां दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रतिउत्तर दाखिल किया गया जिसमें विपक्षी द्वारा दाखिल लिखित जवाब के प्रत्येक प्रस्तर का खण्डन करते हुए यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज, एश्योर्ड इनकम व क्षतिपूति दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्षों के. तर्कों को सुना गया। उभयपक्षो के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये गये है। 4. FR आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं ? तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 2. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 3. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न Wea :- प्रश्न Wega तथ्य पर विरचित है कि क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के: दायरें में नहीं आते है तथा gar पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबच्ध निष्पादित 'किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745--6749 /202 “मैसर्स =a प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स oo लि0 बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :-
"54. From the scheme of the Act 206, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on-going projects and future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 206."
उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आर्ब्जवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका पंजीकरण संख्या- UPRERAPRI3444 है। अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईंग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। TEAR प्रश्न Bea निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या-2 Te संख्या-2 इस आशयै«का विरचित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने के कारण विलम्बित हुई? यह प्रश्न विपक्षी के अभिकथनों पर विरंचित किया« गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति में यह उल्लेख किया गया है कि दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण होने के कारण एन.जी.टी के आदेश व कोविड-49 महामारी के कारण परियोजना में 47 माह निर्माण कार्य बंद था।
फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में यूपी रेरा द्वारा जारी एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि :- ” प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर एग्रीमेंट में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना जाएगा।” 5 ———o (=) () aa wee माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 /7985, ‘M.C. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04-44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029 // 4985 में पारित आदेश दिनांक 09-42-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “In the affidavit dated 05.42.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
"७१2. That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last years(208) 8 days*in the month of December were in severe AQI category: Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could'be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non- compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.” माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक o4-::-20:9 से दिनांक 44-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक 09-42-209 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04-44-2049 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 aR
सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न््यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त कोविड-49 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) @ प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2026 तक, परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंदियों-कों नहीं दिया जाएगा-और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज ATT Ie उपरोक्त तथ्यों व माननीय. उच्चतम. न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी aifs—i9 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या-3 प्रश्न संख्या-3 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी?
पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन पत्र के अवलोकन से यह विदित है कि अग्रणी शिकायतकर्ता व विपक्षी के मध्य दिनांक 22.07.2074 को आवंटित यूनिट के सम्बंध में आवंटन पत्र निष्पादित gar) विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अनुबंधानुसार यूनिट 42 माह तथा 06 माह अर्थात जुलाई 208 में कब्जा दिया जाना था जो अभी तक शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। पत्रावली के अवलोकन से यह भी विदित है कि विपक्षी को नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 46.05.2024 को जारी कम्पलीशन सर्टिफिकेट प्राप्त हो चुका है। विपक्षी द्वारा दिनांक 09.05.2023 (पंजीकृत डाक की तिथि) को शिकायतकर्ता के पक्ष में कब्जा ऑफर पत्र जारी किया गया है जो पत्रावली पर उपलब्ध है। यहां यह स्पष्ट किया जाता है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 09.05.2023 को जारी कब्जा ऑफर पत्र GUT द्वारा जारी कार्यालय आदेश दिनांकित 29.05.2024 के अनुसार फिट आउट फार पजेशन जारी किये जाने का कोई प्राविधान नहीं है जिस कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को जारी किया गया फिट आउट फार पजेशन दिनांकि 09.05.2023 वैधानिक नहीं है। ऐसी स्थिति में रेश अधिनियम की धारा-48(॥) में यह प्राविधानित है कि :- "Section 8 () “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building, (a)in accordance with the terms of*the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date:specified therein;,or : (b) due to discontinuance of his business as a
developer on account of suspension or revocation of the registration.under this Act or for any other reason,...he shall. be liable..on..demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed". इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस मांग सकते है अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें। प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। — 8
उपरोक्त से यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा जुलाई 20॥8 में प्राप्त होना था जो अभी तक कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है तथा विपक्षी को मई 2024 में कम्पलीशन सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है। इस प्रकार विपक्षी की परियोजना करीब 06 वर्ष से अधिक विलम्बित है परन्तु शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है जिस कारण शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज यूपी रेरा अधिनियम की ott में वर्णित प्राविधानों के अनुसार दिलाया जाना उचित होगा। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील tio 6649-50 / 2048 "gree लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है Ae "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 46) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant,—Builder had obtained the Completion Certificate as [ate as April 20I6. The Respondent, Purchaser could not have any further grievance after April, 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to'be allowed to reap the benefits of her own
delay in taking:possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार SM /सीं.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स asada प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section I 8(I)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of Suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The 9 —_———_— obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. "
अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि vou रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा vad धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय ,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर o2(ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The®Allottee shall have the Option’of terminating the Agreement in which case the Promoter’shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any»head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bankvof India+l%unless’provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है।
उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ४८,२+प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी McLR+H प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2०)() में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों एवं न्याय नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-3 fae किया जाता है। —_ Ss i0 शिकायतकर्ता द्वारा जो क्षतिपूर्ति (Compensation) दिलाये जाने सम्बंधी याचना की गयी है। इस सम्बंध में क्षतिपूर्ति (Compensation) के प्रकरण पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार रेश अधिनियम की धारा 77d अन्तर्गत न्यायानिर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) को है। अतः पीठ द्वारा 'इस सम्बंध में आदेश पारित नहीं किया जा सकता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश . विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से अनुबंधानुसार अवशेष धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र,अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी/सी.सी सहित यूनिट का कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं।
2. विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.08.268«से ओ.सी / सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो“भी बाद. में- हो aa शिकायंतकर्ता द्वारा जमा धनराशि BO 67,45,395 /. (छडसठ लाख HE हजार तीन सौ पन्चानबे ) पर शिकायतकर्ता को ४८,९१५ प्रतिशत. ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 2 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 3029,/4985 के अनुसार ) 68 दिन तथा दिनांक 25.03. 2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 206 की धारा 2(००)()के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के oN डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान il. — SSS
पर शिकायतकर्तागण द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का Sood भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा wait} आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। —__Lrn-=> (=) “Sao 3.2026 (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ.प्र#भू- सम्पदा .विनियामक प्राधिकरण. “गौतमबुद्धनगर कटे