Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Najmul Hasan Khan v. Wave One Private Limited
Complaint No. NCR144/07/110803/2023
- Decision date
- 2026-03-17
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पीठ-3 ८(नियार iS पारित आदेश उपस्थित : Slo दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या रन यूनिट न० | जमा धनराशि रु० | एग्रीमेंट फार | अनुबंधानुसार | वांछित ष io सेल की तिथि | कब्जा दिये जाने की तिथि ; « | NCRI44/07/0803/2023 | नजमुल हसन | GOLD [| GO 60,77,58/ | 20.40.20i2 | 42 माह यूनिट का खान F-6/02 तथा 06 कब्जा व माह अनुग्रह | विलम्बित अवधि & | अवधि का साथ अर्थात | ब्याज दिलाये अक्टूबर जाने के लिए 2046 अनुरोध किया गया है। बनाम मैसर्स वेव वन प्रा.लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह शिकायत संस्थित की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना WOPL-WONE में यूनिट संख्या सिल्वर Gold F-602 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि wo 60,77,584,//- का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत पृष्ठ पर उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी यूनिट का कब्जा देने में असफल रहा है। विपक्षी द्वारा दिनांक 48.04. 2023 को पत्र प्रेषित कर अतिरिक्त धनराशि की मांग की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 27.06.2023 को विपक्षी को अतिरिक्त धनराशि gerd जाने व विलम्बित ब्याज हेतु लीगल नोटिस प्रेषित किया गया परन्तु विपक्षी द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में आवेदन फार्म, आवंटन पत्र व रसीदों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई घनराशि संख्या (रु0) ] विपक्षी द्वारा जारी रसीद संख्या 0274 22.09.2042 SO 2,54,770 / रसीद संख्या 0632 29.42.2042 BO 6,27,385 / रसीद संख्या 0473 24.44.2042 रु०0 3,43,693 / रसीद संख्या 4059 «.. 08.03.2043 WO 3,43,695 / रसीद संख्या 0360 30.05.2043 BO 3,47,454/ रसीद संख्या 4022 47.09.2043 BO 3,43,574 / रसीद संख्या 2529 34.03.2044 रु0 3,436 / रसीद संख्या 4724 07.04.2044 BO 3,5,573 / रसीद संख्या 2530 34.03.2044 रु0 3,56/ रसीद संख्या 2226 05.03.2044 रु०0. 50,000/ रसीद संख्या 2230 05.03.2044 %O 50,000/ रसीद संख्या 2228 05.03.2044 रु0० ,00,000 / रसीद संख्या 223: 05.03,2044 रु0 4,45,574 / रसीद संख्या 2534 34.03.2044 BO 3,043 / रसीद संख्या 067 30.04.2044 BO 3,939/ रसीद संख्या 0807 08.07.2044 BO 3,043/ रसीद संख्या 0297 06.40.2044 BO 3,42,48 / बैंक स्टेटमेंट 06.08.2044 BO 3,2,448/ बैंक Rete 30.09.2044 BO 3,2,448/ रसीद संख्या 4742 34.03.2045 BO 3,043/ रसीद संख्या 4443 34.03.2045 BO 3,043/ रसीद संख्या 744 34.03.2045 BO 3,043/ रसीद संख्या 0830 40.02.205 BO 3,42,48 / रसीद संख्या 744 34.03.2045 BO 3,043/ रसीद संख्या 0278 28.03.2048 रु0 50,000 / रसीद संख्या 0272 30.03.2048 रु0 2,00,000/ रसीद Wer 00:3 08.04.2048 BO 54,247 / रसीद संख्या 0074 09.04.2048 BO 48,257 / बैंक स्टेटमेंट 23.07.2024 %O 50,000 / बैंक स्टेटमेंट 25.07.2024 WO 2,68,940 / कुल योग : रु० 60,77,58! /
विपक्षी की ओर से प्रस्तुत लिखित आपत्ति में यह उल्लिखित किया गया है कि उत्तर प्रदेश राज्य में रेरा अधिनियम पूर्णता लागू होने की तिथि 04.05.2047 है जिस कारण सभी ऑन गोईंग परियोजनाओं को रेरा अधिनियम के अन्तर्गत पंजीकृत कराये जाने के लिए 34.07.20i7 तक समय दिया गया। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि रेरा अधिनियम के प्राविधान भविष्यलक्षी (Prospective) है, जिसके पूर्व प्राविधान 04.05.2047 को लागू हुए है, जिस कारण अधिनियम के प्राविधान पूर्व में विकसित परियोजना पर प्रभावी नहीं है। इसके समर्थन में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सीआईटी बनाम वाटिका टाउनशिप्स प्रा.लि. तथा स्टेट ऑफ डब्ल्यू बी बनाम एस.सी.बोस तथा एक्सप्रेस न्यूज पेपर ure. बनाम भारत संघ में पारित आदेशों का संदर्भ प्रस्तुत किया गया है। विपक्षी द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय
द्वारा नीलकमल Raced सबर्बबन प्रा.लि. बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया व अन्य का उल्लेख किया गया है जिसमें माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा कहा गया है कि रेरा अधिनियम भूतलक्षी (Retrospective) Weft का है। रेशा अधिनियम की धारा-4 (2)0)(०) का संदर्भ देते हुए उल्लिखित किया गया है कि रेरा अधिनियम की उक्त धारा विपक्षी को परियोजना की पूर्णता तिथि व कब्जा उपलब्ध कराये जाने की तिथि परिवर्तित करने के लिए बाध्य करती है। रेरा लागू होने के उपरांत परियोजना पूर्ण करने की तिथि 30.42.2024 है। विपक्षी की परियोजना रेरा के अन्तर्गत पंजीकृत की श्रेणी में आती है जो वेव वन नामतः पंजीकृत है तथा पंजीकरण संख्या यूपीरेरापीआरजे 3444 है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को यूनिट संख्या एफ 76/02, da वन नोएडा सेक्टर i8 में आवंटित की गई थी माननीय एनजीटी न्यायालय द्वारा वर्ष 2047 से वर्ष 2020 तक दिल्ली एनसीआर में बढ़े वायु प्रदूषण के नियत्रंण हेतु निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लगाया गया है जिस कारण परियोजना में निर्माण कार्य 47 माह तक बंद रहा है। इसके उपरांत alfas-i9 महामारी के कारण भारत सरकार द्वारा लगाये गये देशव्यापी लॉक डाउन के कारण भारी वित्त का नुकसान करना पड़ा | विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ पजेश्न 48.04.2023 को भेजा जा चुका है। विपक्षी को दिनांक 46.05.2024 को अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की शिकायत अर्थदण्ड के साथ निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपफक्षों के तर्को को सुना गया। उभयपक्षो के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये गये है।
4. FAT WW आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं ? तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 2. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 3. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? 3 a (=) 55%) | HME) si) se \ia निस्तारण प्रश्न संख्या-4 :- प्रश्न संख्या-4 इस तथ्य पर विरचित है कि क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते है तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745-6749 /202 “मैसर्स न्यूटेक प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स wo fo बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :- "54. From the scheme of the Act 20I6, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on-going projects and 2
future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 206." उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आर्ब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा yeaa परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका पंजीकरण संख्या- UPRERAPRI3Z444 है। अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईंग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तद्नुसार प्रश्न We निस्तारित किया जाता है। es 4 निस्तारण प्रश्न संख्या-2 प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर gece होने के कारण विलम्बित हुई? यह प्रश्न विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति में यह उल्लेख किया गया है कि दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण होने के कारण एन.जी.टी के आदेश व aifas—i9 महामारी के कारण परियोजना में 47 माह निर्माण कार्य बंद था।
फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि :- / प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर एग्रीमेंट में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना जाएगा |" माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 / 4985, “M.C. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04-44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029,//4985 में पारित आदेश दिनांक o9—2-20:9 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “in the affidavit dated 05.2.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
/१2, That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, 5 —_ Ss last year (2048) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non- compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.”
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक o4-7:-20:9 से दिनांक 44-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक 09-42-20॥9 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक o4—7:-20:9 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 दिन(66+2) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02-2020 तक a 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न््यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त wifrs—i9 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु 6 in” ail कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन क॑ अतिरिक्त विपक्षी aifts—i9 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या-3 प्रश्न संख्या-3 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन पत्र के अवलोकन से यह विदित है कि अग्रणी शिकायतकर्ता व विपक्षी के मध्य दिनांक 20.0.2042 को आवंटित यूनिट के सम्बंध में एग्रीमेंट फॉर सेल निष्पादित हुआ। एग्रीमेंट फॉर सेल के अनुसार शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा 42 माह तथा 06 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात अक्टूबर 20i6 FH प्राप्त होना था जो अभी तक शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी ने एनजीटी के आदेश व कोविड-49 महामारी के कारण परियोजना विलम्बित होने के सम्बंध में लिखित आपत्ति में तर्क अंकित किया है। विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि विपक्षी को परियोजना के अधिभोग प्रमाणपत्र प्राप्त हो चुके है और विपक्षी द्वारा दिनांक 8.04.2023 को शिकायतकर्ता के पक्ष में कब्जा ऑफर पत्र जारी किया जा चुका है। ऐसी स्थिति में रेश अधिनियम की at—ia(i) में यह प्राविधानित है कि :- "Section 8 () “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building, (a)in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or
(b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may 7 —_—s be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed". इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस मांग सकते है अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें। प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील Wo 6649-50 ,/2048 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः-
"the period of Interest should close on April 20I6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20I6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20I6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्राललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8(I)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid 8 OS
by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह we है कि vow रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा vat धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +I% unless provided otherwise
under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 93(i) 4 निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ध८ा,२+[प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी McLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2०)() में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। तदूनुसार प्रश्न संख्या-3 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश \, विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से अनुबंधानुसार अवशेष धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी/सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं।
2. विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.4.2046 से 30.04.20:7 तक अनुबंधानुसार विलम्ब ब्याज देय होगा। उसके उपरांत दिनांक 04.05.2047 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि wo 60,77,587/ पर शिकायतकर्ता को MCLR+I प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 2 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 73029/985 के अनुसार ) 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। 3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा 2(20)0)के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्तागण द्वारा भी McLR+I प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय — ae 0 होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का Goods भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा।
विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता Rr प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा wary | आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। “Gea. ewe (डा०दीपक स्वरूप WRT) सदस्य उ.प्र.भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर ६