Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Monika Parashar v. La Residentia Developers Private Limited
Complaint No. NCR144/07/110579/2023
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2026-04-25
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 1 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority Regional Office, [?]69, Gamma-2, Greater Noida, Gautam Buddh Nagar-204308. Hearing [?] (formerly Bench-04-A) Judgment and Order under Section 34 read with Section 37 Presiding Officer: Shri Sanjay R. Bhusareddy, Hon'ble Chairman Complaint No.: NCR44/07/10579/2023 Monica Parashar and Lt. Col. (Retd.) Santosh Kalia Versus La Residentia Developers Pvt. Ltd. Unit No. 7T3-004 booked in the opposite party's project "La Residentia", Gautam Buddh Nagar. Judgment The complainant's complaint was presented through video conference for final arguments on 3-40-2025. When called, learned advocate Shri Atul Kumar Singh appeared for the complainant, and on behalf of the opposite party learned advocate Shri Punit Jain appeared as proxy advocate for learned advocate Shri [?] Kumar. After the bench heard the learned advocates of both parties in detail, the file was reserved for orders on 33-40-2025 itself. In the original application, the complainant has sought, as relief, possession of the unit in question together with interest for the delayed period, and the complaint has been filed against the opposite party under Section 34 of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 2046.
In brief, the complainant states that on 20-08-2040 [remaining words of the OCR text unreadable] was booked, whose total price is Rs. 30,47,625/-, and the complainant has paid Rs. 35,28,7I0/-. The complainant also says that the project, as promised by the opposite party/promoter, is delayed by more than s2 months, because the opposite party was to complete the project by 23-08-2043 including a grace period of 06 months. In discharge of their duties, the complainant has paid more than 400 per cent against the unit in question. Despite this, according to the latest report of the site inspection, the pace of work is very slow, no electrical work has yet started, and neither the lift nor the fire-fighting system has begun to be constructed. The complainant is deprived of the benefit of their investment, because the opposite party/promoter has stopped work on the project in question. On these grounds the complainant, stating various facts and allegations relating to the original complaint, has requested that possession of the unit in question and interest for the delayed period be awarded.
E-Court उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, Va—t69, गामा-2, ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर-204308. सुनवाई te—or (पूर्व में पीठ-04-ए) निर्णय एवं आदेश अन्तर्गत धारा-34 सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारी: श्री संजय आर. भूसरेड्डी, मा. अध्यक्ष शिकायत संख्या: NCRI44/07/I0579/2023 मोनिका पराशर एवं लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) संतोष कालिया बनाम ला रेसीडेन्सिया डेवलपर्स प्रा. लि. A विपक्षी की परियोजना "La Residentia® गौतमबुद्धनगर में यूनिट संख्या: 7T3-004 बुक निर्णय शिकायतकर्ता का परिवाद अन्तिम बहस हेतु वीडियो aire के माध्यम से दिनांक 3-40-2025 को प्रस्तुत किया गया। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री अतुल कुमार सिंह उपस्थित हुए तथा विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री are कुमार के प्रॉक्सी अधिवक्ता श्री पुनीत जैन उपस्थित हुए। इस पर पीठ द्वारा उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के cat को विस्तार से सुनने के उपरान्त, पत्रावली आदेश हेतु दिनांक 33-40-2025 को ही सुरक्षित की गयी। प्रस्तुत मूल प्रार्थना-पत्र में शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने के अनुतोष की प्रार्थना के साथ विपक्षी के विरूद्ध भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत शिकायत योजित की गई है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा दिनांक 20-08-2040 को
गयी थी, जिसकी कुल कीमत रू.30,47,625,/- है और शिकायतकर्ता द्वारा 35,28,7I0/— की धनराशि का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी / प्रमोटर द्वारा किये गये वादे से प्रश्नगत परियोजना s2 माह से अधिक विलम्बित है, क्योंकि विपक्षी द्वारा 06 माह ta पीरियड सहित दिनांक 23--08-2043 तक प्रश्नगत परियोजना को पूर्ण किया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कर्तव्यों का निवर्हन करते हुए, प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष 400 प्रतिशत से अधिक Page | of 4 7 E-Court का भुगतान किया जा चुका है। इसके बावजूद स्थलीय निरीक्षण की अद्यतन रिपोर्ट के अनुसार कार्य की गति बहुत धीमी है और अभी तक बिजली का कोई कार्य प्रारम्भ नहीं | हुआ है तथा न ही लिफ्ट या आग बुझाने वाले सिस्टम का निर्माण कार्य प्रारम्भ हुआ है। शिकायतकर्ता, अपने निवेश का लाभ उठाने से वंचित है, क्योंकि विपक्षी / प्रमोटर द्वारा gerd परियोजना का कार्य रोक दिया गया है। इन आधारों पर शिकायतकर्ता द्वारा मूल शिकायत के सम्बन्ध में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख करते हुए, प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता की ओर से विपक्षी द्वारा प्रस्तुत आपत्ति-पत्र पर अपना प्रत्युत्तर, दिनांक 47-09-2024 एवं दिनांक 22-03-2025 दाखिल करते हुए, मूल शिकायत में किये गये तथ्यों एवं अभिकथनों की पुनरावृत्ति की गयी है और कहा गया है कि प्रश्नगत यूनिट के सम्बन्ध में पक्षकारों के मध्य निष्पादित एवं हस्ताक्षरित बी.बी.ए.,/ अनुबन्ध-पत्र, दिनांक 23-02-2044 B WA-i9(a) के अनुसार विपक्षी द्वारा gerd यूनिट का कब्जा, vat अनुबन्ध के निष्पादन की तिथि से 30 + 06 माह ग्रेस पीरियड अर्थात् दिनांक 23-02-2044 तक दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष 400 प्रतिशत से धनराशि प्राप्त किये जाने बावजूद भी 426 माह से अधिक का विलम्ब किया गया है और अभी तक प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। विपक्षी द्वारा परियोजना स्थल को निर्माण के प्रारम्भ होने के दौरान ही पूर्णता छोड़ (Abandoned एवं रोक दिया गया और विपक्षी की ओर से निर्माण की दिशा में आगे कोई कार्य नहीं किया जा रहा है तथा निकट भविष्य में gerd यूनिट का कब्जा मिलने की कोई सम्भावना नहीं है। शिकायतकर्ता द्वारा RT अधिनियम, 2046 की धारा-496) का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उनके द्वारा अपने कर्तव्यों का विधिवत् पालन किया गया है। विपक्षी द्वारा रेश अधिनियम, 20:6 की धारा-47 का उल्लंघन किया गया है, क्योंकि विपक्षी प्रमोटर, सक्षम प्राधिकरण से आवश्यक दस्तावेज / प्रमाण-पत्र यथा ओ.सी./सी.सी. एवं एन.ओ.सी. प्राप्त करने में विफल रहा है, जो कि विधिविरूद्ध है। विपक्षी द्वारा दाखिल आपत्ति-पत्र में अंकित समस्त तथ्यों एवं अभिकथनों का शिकायतकर्ता द्वारा पूर्ण रूप से खण्डन करते हुए, अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख कर, मूल शिकायत में अंकित याचित अनुतोष को दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में एलॉटमेन्ट कम फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट, दिनांक 23-02-2044 की प्रति, जमा धनराशि की रसीदें, स्थलीय निरीक्षण आख्या, आदि अभिलेखों छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। इस पर विपक्षी द्वारा पोर्टल पर दिनांक 47-09--2024 एवं दिनांक 40-07-2025 को तथा भौतिक रूप से दिनांक 03-06-2025 को अपना आपत्ति-पत्र तिथि रहित अपलोड एवं दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता के अनुरोध पर वर्ष, 2047 में gem यूनिट निरस्त की जा चुकी है। शिकायतकर्ता से प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष Page 2 of l4 E-Court
रे रू.27,76,588 /- की धनराशि प्राप्त हुई थी। शिकायतकर्ता को यह ज्ञात होते हुए भी कि आवंटन निरस्त होने के बाद, प्रश्नगत यूनिट किसी तृतीय पक्ष को विक्रय कर दी गयी है, फिर भी शिकायतकर्ता द्वारा दुर्भावनापूर्ण ढंग से प्रश्नगत शिकायत योजित की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष देय धनराशि का भुगतान समय से नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना को नियमानुसार रेरा में पंजीकृत कराया गया है। विपक्षी water द्वारा सक्षम प्राधिकरण एवं उनके मध्य प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में विभिन्न तिथियों पर हुए पत्राचार एवं घटनाओं /» परिस्थितियों का विस्तार से स्पष्ट वर्णन / उल्लेख करते हुए कहा गया है कि नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में रियल एस्टेट कम्पनियों के सामने जो संकट »परिस्थितियाँ हैं, उसके लिए सक्षम प्राधिकरण पूर्णता जिम्मेदार है। सक्षम प्राधिकरण द्वारा गलत रूप से की जा रही माँगों का भी सामना करना पड़ रहा है, जिसमें विपक्षी / प्रमोटर से अतिरिक्त भुगतान की माँग की जा रही है। परियोजना विभिन्न न्यायालय के आदेशों के कारण विलम्बित हुई। दिनांक 9-07-2044 से दिनांक 24-08-20:5 तक निर्माण कार्य बन्द रहा। इस अवधि में मा. सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष किसानों द्वारा कई रिट याचिकायें योजित की गयी। मार्च, 20i3 के बाद निर्माण कार्य धीमी गति से शुरू हुआ। अन्ततः दिनांक 44-05-205 को मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भूमि अधिग्रहण को Re याचिका संख्या: 4506 // 2045 “सावित्री देवी बनाम उ.प्र. सरकार एवं आदि” में स्वीकृति दी गयी। मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 23-07-20:9 को 632 यूनिटों को आम्रपाली ग्रुप को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। विपक्षी कम्पनी ने Re याचिका संख्या: 940 ,/2047 “बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य” में एक हस्तक्षेप आवेदन दायर किया, जिसमें मा. सर्वोच्च न्यायालय ने कम्पनी ला रेजिडेन्सिया को दिनांक 44-40-2049 के आदेश के माध्यम से किसी भी सम्पत्ति के हस्तांतरण से रोक fear उपर्युक्त समस्याओं के अतिरिक्त विपक्षी / प्रमोटर को वर्ष, 20i5 से वर्ष 2023 तक निर्माण कार्यों पर एन.जी.टी. के प्रतिबन्ध, कोविड-49 महामारी आदि से सम्बन्धित समस्याओं का भी सामना करना पड़ा। बी.बी.ए. /अनुबन्ध के अनुसार ऐसी अप्रत्याशित परिस्थितियों को स्पष्ट रूप से “फोर्स मैज्योर” के रूप में माना गया है, क्योंकि उपर्युक्त परिस्थितियाँ विपक्षी के नियंत्रण के बाहर थीं। विपक्षी द्वारा फोर्स मैज्योर के मद में कुल-758 दिनों की अवधियों के सम्बन्ध में सारणी उल्लेख किया गया है।
विपक्षी का यह भी कहना है कि शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना "La Residentia" के टॉवर-ग-3 में फ्लैट संख्या: 004 बुक कराया गया था। प्रश्नगत की कुल कीमत रू.30,47,625,/- थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा कुल .27,76,588 ,//- की धनराशि का भुगतान किया गया है। उभय पक्षों के मध्य निष्पादित एवं हस्ताक्षरित एलॉटमेन्ट कम फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट, दिनांक 23-02--2044 के अनुसार विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का कब्जा, दिनांक 23-02-2044 तक दिया जाना था, परन्तु विभिन्न फोर्स मैज्योर परिस्थितियों के कारण निर्माण कार्य समय पर पूर्ण नहीं हो सका Page 3 of 4 E-Court विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का विस्तार से उल्लेख किया गया है और इन आधारों पर विपक्षी द्वारा vere शिकायत को खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लेजर अकाउन्ट की प्रति दाखिल की गयी है। मैंने उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के cof को विस्तार से सुना तथा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य एवं अभिलेखों का सम्यूक परिशीलन किया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दुओं पर विचार किया:- 4. क्या Force Majeure Events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलम्बित हुई? यदि हाँ तो प्रभाव? 2... कया शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी? निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 बिन्दु संख्या: 0५, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या Force Majeure Events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलम्बित हुई है? यदि हाँ तो प्रभाव? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है।
प्रकरण में विपक्षी द्वारा सक्षम प्राधिकरण एवं उनके मध्य प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में विभिन्न तिथियों पर हुए पत्राचार एवं घटनाओं / परिस्थितियों का विस्तार से स्पष्ट वर्णन / उल्लेख करते हुए कहा गया है कि नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में रियल एस्टेट कम्पनियों के सामने जो संकट »परिस्थितियाँ हैं, उसके लिए सक्षम प्राधिकरण पूर्णता जिम्मेदार है। सक्षम प्राधिकरण द्वारा अवैध रूप की जा रही माँगों का भी सामना करना पड़ रहा है, जिसमें विपक्षी / प्रमोटर से अतिरिक्त भुगतान की माँग की जा रही है। परियोजना विभिन्न न्यायालय के आदेशों के कारण विलम्बित हुई | दिनांक 9-07-204 से दिनांक 24-08-20:5 तक निर्माण कार्य बन्द रहा। इस अवधि में मा. सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष किसानों द्वारा कई Re याचिकायें योजित की गयी। मार्च, 2043 के बाद निर्माण कार्य धीमी गति से शुरू हुआ। अन्ततः दिनांक t4-05-20:5 को मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भूमि अधिग्रहण को Re याचिका संख्या: 4506 / 2045 “सावित्री देवी बनाम उ.प्र. सरकार एवं आदि” में स्वीकृति दी गयी। मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 23-07-2049 को 632 यूनिटों को आम्रपाली ग्रुप को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। विपक्षी कम्पनी ने Re याचिका संख्या: 940,/2047 “बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य” में एक हस्तक्षेप आवेदन दायर किया, जिसमें मा. सर्वोच्च न्यायालय ने कम्पनी ला रेजिडेन्सिया a दिनांक Page 4 of 4 E-Court
44-40-209 के आदेश के माध्यम से किसी भी सम्पत्ति के हस्तांतरण से रोक दिया उपर्युक्त समस्याओं के अतिरिक्त विपक्षी / प्रमोटर को वर्ष, 205 से वर्ष 2023 तक निर्माण कार्यों पर एन.जी.टी. के प्रतिबन्ध, eras—i9 महामारी आदि से सम्बन्धित समस्याओं का भी सामना करना पड़ा। बी.बी.ए. / अनुबन्ध के अनुसार ऐसी अप्रत्याशित परिस्थितियों को स्पष्ट रूप से “फोर्स मैज्योर” के रूप में माना गया है, क्योंकि उपर्युक्त परिस्थितियाँ विपक्षी के नियंत्रण के बाहर थीं। विपक्षी द्वारा फोर्स मैज्योर के मद में कुल-758 दिनों की अवधियों के सम्बन्ध में सारणी उल्लेख किया गया है। मा. सर्वोच्च न्यायालय /एन.जी.टी. द्वारा दिए गये स्थगनादेश सम्बन्धी अपने दावे तथा उपर्युक्त समस्त तथ्यों एवं अभिकथनों के समर्थन में विपक्षी द्वारा कोई प्रमाणीय साक्ष्य / अभिलेख प्रस्तुत नहीं किये गये हैं। अतः उपर्युक्त आधार ग्राह्य नहीं है। मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 / 4985, “४.८. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04-44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये हैः- “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.”
इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029 ,// 4985 में पारित आदेश दिनांक 09-2-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “In the affidavit dated 05.72,2079, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under: - #42, That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (2076) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Page 5 of l4 E-Court = Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.”
पर्यावर्णय आधार पर मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक 04-7:-20:9 से दिनांक = तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें | मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश, दिनांक o9-i2-20i9 4 पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक o4—it-20:9 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 दिन (6652) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02-2020 तक साँय 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न््यायोचित नहीं होगा। इसलिए यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनों अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है। अतः इस अवधि में कुल-35 दिन + 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित लिए ब्याज की गणना नहीं oh इसके अतिरिक्त समस्त सुसंगत तथ्यों पर विचारोपरान्त उ.प्र. रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक o6—06—2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु, दिनाक 25-03-2020 से 06 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25-09-2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्ट्स के कारण मानी जायेगी। aa: उपर्युक्त के दृष्टिगत दिनांक 25-03-2020 से दिनांक 25-09-2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदनुसार बिन्दु संख्या: 04 Pena किया जाता है।
निस्तारण बिन्दु संख्या: 02 बिन्दु संख्या: 02, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को gent यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि et तो ब्याज की दर क्या होगी? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है? प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा अवगत कराया गया है कि विपक्षी /प्रमोटर द्वारा किये गये वादे से प्रश्नगत परियोजना 442 माह से अधिक विलम्बित है, क्योंकि विपक्षी द्वारा 06 माह ग्रेस पीरियड सहित दिनांक 23-08-2043 तक प्रश्नगत परियोजना को Page 6 of l4 E-Court पूर्ण किया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कर्तव्यों का निवर्हन करते हुए, प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष 400 प्रतिशत से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। इसके बावजूद स्थलीय निरीक्षण की अद्यतन रिपोर्ट के अनुसार कार्य की गति बहुत धीमी है और अभी तक बिजली का कोई कार्य प्रारम्भ नहीं हुआ है तथा न ही लिफ्ट या आग बुझाने वाले सिस्टम का निर्माण कार्य प्रारम्भ हुआ है। शिकायतकर्ता, अपने निवेश का लाभ उठाने से वंचित है, क्योंकि विपक्षी / प्रमोटर द्वारा प्रश्नगत परियोजना का कार्य रोक दिया गया है इन आधारों पर शिकायतकर्ता द्वारा मूल शिकायत के सम्बन्ध में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख करते हुए, प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता की ओर से विपक्षी द्वारा प्रस्तुत आपत्ति-पत्र पर अपना प्रत्युत्तर, दिनांक 47-09-2024 एवं दिनांक 22-03-2025 दाखिल करते हुए, मूल शिकायत में किये गये तथ्यों एवं अभिकथनों की पुनरावृत्ति की गयी है और कहा गया है कि प्रश्नगत यूनिट के सम्बन्ध में पक्षकारों के मध्य निष्पादित एवं हस्ताक्षरित बी.बी.ए. / अनुबन्ध-पत्र, दिनांक 23-02-2044 के Wae-4%a) के अनुसार विपक्षी द्वारा yea यूनिट का कब्जा, उक्त अनुबन्ध के निष्पादन की तिथि से 30 + 06 माह ग्रेस पीरियड अर्थात् दिनांक 23-02-2044 तक दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष 400 प्रतिशत से धनराशि प्राप्त किये जाने बावजूद भी 426 माह से अधिक का विलम्ब किया गया है और अभी तक प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। विपक्षी द्वारा परियोजना स्थल को निर्माण के प्रारम्भ होने के दौरान ही पूर्णता छोड़ (Abandoned एवं रोक दिया गया और विपक्षी की ओर से निर्माण की दिशा में आगे कोई कार्य नहीं किया जा रहा है तथा निकट भविष्य में प्रश्नगत यूनिट का कब्जा मिलने की कोई सम्भावना नहीं है। शिकायतकर्ता द्वारा रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-49() का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उनके द्वारा अपने कर्तव्यों का विधिवत् पालन किया गया है। विपक्षी द्वारा ter अधिनियम, 2046 की धारा-47 का उल्लंघन किया गया है, क्योंकि विपक्षी /प्रमोटर, सक्षम प्राधिकरण से आवश्यक दस्तावेज / प्रमाण-पत्र यथा ओ.सी. /सी.सी. एवं एन.ओ.सी. प्राप्त करने में विफल रहा है, जो कि विधिविरूद्ध है। विपक्षी द्वारा दाखिल आपत्ति-पत्र में अंकित समस्त तथ्यों एवं अभिकथनों का शिकायतकर्ता द्वारा पूर्ण रूप से खण्डन करते हुए, अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख कर, मूल शिकायत में याचित अनुतोष को दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी द्वारा पोर्टल पर दिनांक 47-09-2024 एवं दिनांक 40-07-2025 को तथा भौतिक रूप से दिनांक 03-06-2025 को अपना आपत्ति-पत्र तिथि रहित अपलोड एवं दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता के अनुरोध पर वर्ष, 2077 में mem यूनिट निरस्त की जा चुकी है। शिकायतकर्ता से प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष कुल रू.27,76,588 //- की धनराशि प्राप्त हुई थी। शिकायतकर्ता को यह ज्ञात होते हुए Page 7 of 4 E-Court 3 कि आवंटन निरस्त होने के बाद, प्रश्नगत यूनिट किसी तृतीय पक्ष को विक्रय कर दी गयी है, फिर भी शिकायतकर्ता द्वारा दुर्भावनापूर्ण ढंग से प्रश्नगत शिकायत योजित की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष देय धनराशि का भुगतान समय से नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना को नियमानुसार रेरा में पंजीकृत कराया गया है। विपक्षी का यह भी कहना है कि शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना "La Residentia" के टॉवर-7-3 में फ्लैट संख्या: 004 बुक कराया गया था। प्रश्नगत यूनिट की कुल कीमत रू.30,47,625,/- थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा कुल रू.27,76,588 // - की धनराशि का भुगतान किया गया है। उभय पक्षों के मध्य निष्पादित व हस्ताक्षरित एलॉटमेन्ट कम फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट, दिनांक 23-02-2044 के अनुसार विपक्षी द्वारा usta यूनिट का कब्जा, दिनांक 23-02-2044 तक दिया जाना था, परन्तु विभिन्न फोर्स मैज्योर परिस्थितियों के कारण निर्माण कार्य समय पर पूर्ण नहीं हो सका। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का विस्तार से उल्लेख किया गया है और इन आधारों पर विपक्षी द्वारा vera शिकायत को खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है।
भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2006 की धारा-48() में प्राविधान है किः- "Section 46. Return of Amount and Compensation- (2) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building: - (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed." इस प्रकार आवंटी को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नही मिलता है, तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा एवं विलम्बित Page 8 of 4 E-Court
& का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा पत्रावली पर दाखिल एलॉटमेन्ट कम फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट, दिनांक 23-02-2044 के Wee-i9a) के अनुसार विपक्षी द्वारा अनुबन्ध निष्पादित किये जाने की तिथि से 30 माह + 06 माह ग्रेस पीरियड अर्थात् दिनांक 23-02--2044 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किये जाने का दायित्व था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक प्रश्नगत यूनिट का कब्जा नहीं दिया गया है। प्रकरण में विपक्षी द्वारा अपने आपत्ति-पत्र में कहा गया है कि शिकायतकर्ता के अनुरोध पर वर्ष, 20:7 4 प्रश्नगनत यूनिट निरस्त की जा चुकी है। शिकायतकर्ता को यह ज्ञात होते हुए भी कि आवंटन निरस्त होने के बाद, प्रश्नगत यूनिट किसी तृतीय पक्ष को विक्रय कर दी गयी है, फिर भी शिकायतकर्ता द्वारा दुर्भावनापूर्ण ढंग से प्रश्नगत शिकायत योजित की गयी है। परन्तु विपक्षी द्वारा प्रश्नगत प्रकरण अपने उपर्युक्त कथन के समर्थन में ऐसा कोई साक्ष्य / प्रमाण रेरा कम्प्लेन्ट पेज पर अपलोड एवं दाखिल नहीं किया गया है, जिससे यह विदित हो सके कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान करते हुए, प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त करने हेतु नियम एवं विधिनुसार कोई मॉग-पत्र अथवा अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये हों, जिनके अनुपालन में शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान कर, रजिस्ट्री व कब्जे की कार्यवाही न करते हुए, wend यूनिट की बुकिंग निरस्त करने का कोई लिखित अनुरोध यूनिट सरेन्डर किया गया हो।
इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा ऐसा भी साक्ष्य / प्रमाण रेरा कम्प्लेन्ट पेज पर अपलोड एवं दाखिल नहीं किया गया है, जिससे यह विदित हो सके कि वर्तमान समय में विपक्षी द्वारा प्रश्गगत यूनिट की बुकिंग को अंतिम रूप से निरस्त करते हुए, तृतीय पक्ष के पक्ष में उ.प्र, शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना 4740 /8—3—8-65 विविध // 46, दिनांक 47-40-2048 के प्रारूप पर wht फॉर सेल, बी.बी.ए. निष्पादित, हस्ताक्षरित एवं पंजीकृत कराते हुए, vera यूनिट के सापेक्ष किसी तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित करने के पश्चात् प्रश्नगत यूनिट के सम्बन्ध में रजिस्ट्री व कब्जे की कार्यवाही पूर्ण की जा चुकी हो, तदोपरान्त शिकायतकर्ता की जमा धनराशि मय ब्याज वापस की जा चुकी हो, जिसे वर्तमान में शिकायतकर्ता द्वारा स्वीकार कर लिया गया हो। अतः उपर्युक्त तथ्यों से यह स्पष्ट है कि विपक्षी कम्पनी द्वारा gh अनुरूप विधि का अनुपालन न किये जाने के कारण, शिकायतकर्ता द्वारा होकर, प्रश्नगत मूल शिकायत योजित की गयी है। अतः समस्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों के आलोक में यह उचित होगा कि शिकायतकर्ता को विपक्षी कम्पनी से प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा एवं विलम्बित अवधि के ब्याज सहित रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने का अनुतोष दिलाया जाये। Page 9 of 4 PYG d E-Court = सम्बन्ध में सिविल अपील संख्या: 6649-50 / 2048, “M/s. Supertech Ltd. Versus Rajni Goyal” में मा. उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:-
"the period of Interest should close on April 2076 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 2046, The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 2076 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपर्युक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि के लिए शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी है। अतः समस्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों के आलोक में शिकायतकर्ता को विपक्षी से दिनांक 23-02-2074 में 68 दिन (निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 के अनुसार) जोड़ने के उपरान्त, अर्थात् दिनांक 03-05-20:4 से विधिक ओ.सी.सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा ओ.सी.,/ सी.सी. सहित विधिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना उचित होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, मा. बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “Neelkamal Realtors Suburban 77. Ltd. Versus Union of India & Ors.” में अभिनिर्धारित किया गया है किः-
"Section 78(7)(0 lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. The interest is merely compensation for use of money." अतः उपर्युक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर एवं आवंटी के बीच किये गये अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल Page 0 of 4 E-Court धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि wares Et sad धनराशि का उपभोग किया गया है।
यहाँ पर यह भी उल्लेखनीय है कि उभय पक्षों के मध्य आवंटित यूनिट के सम्बन्ध में एलॉटमेन्ट कम फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट, दिनांक 23-02-20 को हतस्ताक्षरित एवं निष्पादित हुए हैं, जिससे यह विदित है कि उभयपक्षों को उक्त बी.बी.ए. / अनुबन्ध में उल्लिखित शर्तें स्वीकार हैं। उक्त बी.बी.ए./अनुबन्ध के WRR-9%¢) के अनुसार परियोजना के विलम्ब की अवधि में रू.05,/- प्रतिवर्ग फुट प्रतिमाह की दर से विलम्ब ब्याज दिये जाने का प्राविधान है, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता भी विलम्ब ब्याज की धनराशि पाने के अधिकारी है। रेरा के प्राविधानों के अनुसार जिस दर से विपक्षी द्वारा धनराशि प्राप्त की गयी है, उसी दर से धनराशि देने का प्राविधान है। भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20I6 की aii, दिनांक 0:-05-207 को अधिसूचित हुई, जिसके सम्बन्ध में उ.प्र, आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-2 की अधिसूचना, दिनांक 03-05-20:7 से उ.प्र. में रेगुलेटरी अथॉरिटी के रूप मे कार्य करने की स्वीकृति राज्यपाल, महोदय ने दिनांक 04-05-2047 से प्रदान की अर्थात् दिनांक 04-05-2047 से भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 के प्राविधान लागू हुए। इस अधिनियम का प्रवर्तन प्रोस्पेक्टिव है। अतः प्रश्नगत शिकायतकर्ता में दिनांक 0i-05-20:7 4 पूर्व की अवधि के लिए विलम्ब ब्याज की गणना बी.बी.ए. / अनुबन्ध के प्राविधानों के अन्तर्गत की जायेगी और दिनांक 04-05-2047 से आगे की अवधि के लिए विलम्ब ब्याज की गणना अधिनियम के प्राविधानों के अधीन की जायेगी।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 के अधीन दिनांक 42-40-2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली, 20:8 अधिसूचित की गयी हैं, जिसमें देय ब्याज दर भारतीय स्टेट बैंक द्वारा निर्धारित #८7#+7 प्रतिशत निर्धारित की गयी है, जिसे मा. उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा Re याचिका संख्या: सीः 9420,// 2020, “Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & Ors.” में भी उचित व विधिपूर्ण माना गया है। ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 20:8 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर ॥८४/१+/ प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज से werd ज्यादा है, उचित एवं सही है। तदनुसार बिन्दु संख्या: 02 निस्तारित किया जाता है। इसके अतिरिक्त विपक्षी / प्रमोटर को जो धनराशि शिकायतकर्ता को अदा की जानी है, उसमें से आयकर अधिनियम का आधार लेकर टी.डी.एस. की कटौती नहीं कर सकता Page I! of 4 E-Court = क्योंकि vat धनराशि को डिक्रिटल (Wecreal) धनराशि के रूप में रेरा ERT शिकायतकर्ता के हक में प्रदान किया गया है। इस सम्बन्ध में मा. उच्च न्यायालय, हिमाचल प्रदेश द्वारा सीआरई टी. बनाम हिमाचल प्रदेश आवास विकास परिषद्ध 20 SCC OnLine HP 5204 के मामले में निम्नवत् आदेश पारित किये गये:- “The following interesting questions arise for decision in the present case:
2. Whether, on the facts and in the circumstances of the case, the hon'ble Tribunal was right in holding that the interest paid or credited by the Housing Board to its allottees (payees) was of capital nature and thus not subject to deduction of tax at source when as per law it is the recipient (payee) who can decide if a particular receipt (interest in this case) is of revenue or capital in nature 27 9. While taking this view we are relying upon the judgment of the apex court in Bikram Singh v. Land Acquisition Collector (7997) 224 ITR 557 (SC). In the case before the apex court, the question was whether the interest paid to the persons whose land had been compulsorily acquired under sections 28 and 347 of the Land Acquisition Act was a revenue receipt or a capital receipt. The apex court held that though it was termed as interest on delayed payment, it was actually a revenue receipt and, therefore, the provisions of section 7944 of the Income tax Act would have no application. It would be pertinent to mention that the National Consumer Disputes Redressal Commission in Revision Petition No. 2244 of 999 titled as Ghaziabad Development Authority v. Dr. N. K.Gupta (2002) 258 ITR 337 (NCDRC) under similar situation held that when the State Commission directed payment of interest to the allottees for delayed completion of flats the same did not fall within the purview of section 7944 of the Income-tax Act.
40, In the present case, the allottees had not given the money to the Board by way of deposit nor had the Board borrowed the amount from the allottees. The amount was paid under a self-financing scheme for construction of the flat and the interest was paid on account of damages suffered by the claimant for delay in completion of the flats. 4. In view of the above discussion, we answer both the questions in favour of the assessee and against the Revenue. The appeal is accordingly dismissed with no order as to costs.” इसी प्रकार मा. राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग द्वारा भी एस्टेट ऑफीसर ee गोहाली क्षेत्रीय विकास ग्राधिकरण व अन्य बनाम गौरव युटनेजा 2020 SCC OnLine NCDRC 278 के मामले में समान न्यायिक सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया है। उपर्युक्त वर्णित दोनों मामलों में प्रतिपादित न्यायिक सिद्धान्त को पुनः मा. उच्च न्यायालय, बम्बई द्वारा भी WAT राजकुमार WIS T अन्य बनाम स्टेट ऑफ महाराष्ट्र Page 2 of 4 = अन्य 2027 SCC OnLine Bom 2798 के मामले में दोहराया गया है। निर्णय के सुसंगत we निम्नवत् है:-
28. Coming to the admitted facts of the present case we hold that the amounts payable being in effect a refund of the amounts paid by the petitioners to Respondents 4 to 7, along with compensatory interest thereon, such a relationship does not spell out a debtor-creditor relationship nor is the payment made by Respondents 4 to 7 to the petitioners one in discharge of any pre-existing obligation, so as to attract Section 2(28-A) of the IT Act. We are in respectful agreement with the judgment of the Kerala High Court in Beacon Projects (P) Ltd. v. CIT [Beacon Projects (P) Ltd. v. CIT, 2075 SCC OnLine Ker 76597/ which takes the same view, in facts similar to those that we are dealing with in the present matter. 29. In view of the above, we hold that the compliance of Respondents 4 to 7 with the schedule of payments under the consent terms dated 4-3-2024 and our order dated 4-3-2027, is to be made without making any deduction of tax at source. Respondents 4 to 7 are directed to pay to the petitioners the balance sum of Rs 5,05,989 deducted from the 5th instalment which became due on 20-7-2027, in compliance with the consent terms, within a period of one week from today. उपर्युक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैः- आदेश
l. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता की यूनिट की समस्त सुविधाओं को एलॉटमेन्ट कम फ्लैट बायर एणग्रीमेन्ट /अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर ओ.सी. / सी.सी. सहित भौतिक कब्जा उपलब्ध कराते हुए, शिकायतकर्ता से देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर, शिकायतकर्ता के पक्ष में नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें। 2. विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 23-02-204 में 68 दिन (निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 के अनुसार) जोड़ने के उपरान्त, अर्थात् दिनांक o3-05-2004 से दिनांक 30-04-2047 तक रू.05/- प्रतिवर्ग we प्रतिमाह) की दर से एवं दिनांक 0i-05-20:7 से विधिक ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा ओ.सी. / सी.सी. सहित विधिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित किये जाने की तिथि, जो | भी बाद में हो तक की अवधि के लिए, शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज की धनराशि अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर अग्रणी शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। Page 3 of 4 E-Court = भर कोविड-49 के कारण “फोर्स मैज्योर” पीरियड के दृष्टिगत, दिनांक 25-03-2020 से दिनांक 25-09-2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज प्रोमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-2(७७)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी #27#-+7 प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा दिये जाते समय सभी चार्जेज/ धनराशि एलॉटमेन्ट कम फ्लैट ar एग्रीमेन्ट /अनुबन्ध में उल्लिखित सहमत पेमेन्ट प्लान/शर्तों के अनुसार ही प्राप्त करना सुनिश्चित करेंगे। विपक्षी आदेश अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के अन्दर आदेश का अनुपालन करना सुनिश्चित करें। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दण्डनीय होगा। शिकायतकर्ता को यह भी निर्देशित किया जाता है कि यदि 45 दिनों के अन्दर विपक्षी द्वारा उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता “wr पोर्टल” के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन कराये जाने हेतु अनुरोध अपलोड कर, भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेगें। पक्षकार अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। तदनुसार पत्रावली दाखिल-दफ्तर हो। दिनांक: 24--04--2026. (संजय टू अध्यक्ष,-उ.प्र. रेरा Page I4 04