Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Murari prasad v. M/s Uttam Steels & Associates
Complaint No. NCR144/07/0783/2019
- Decision date
- 2019-11-08
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-02, उपस्थिति : श्री बलविन्दर कुमार, सदस्य Ra) शिकायत संख्या : NCRI44/07/0783/209 मुरारी प्रसाद D-052, Assotech the nest Assotech, the nest-Crossing republik , Ghaziabad शिकायतकर्ता बनाम मैसर्स उत्तम स्टील एण्ड एसोसिएट्स कंसोर्टियम 5, Ansal Bhawan, 6 KG Marg, New Delhi-000 प्रस्तुत वाद शिकायतकर्ता द्वारा प्रतिवादी के विरूद्ध बुक की गयी यूनिट के सम्बन्ध में कब्जा मय विलम्बित अवधि का दण्ड ब्याज व प्रतिपूर्ति दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षिप्त में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रतिवादी की परियोजना Sushant Megapolis Fairway Zone-5 में यूनिट Wo-C-79 को बुक किया गया था, जिसके एवज में शिकायतकर्ता ने प्रतिवादी को रू. 8,68,896 /“-भुगतान किया था। दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षरित अनुबंध पत्र दिनांक 24.2.2009 के अनुसार यूनिट पर कब्जा 42 माह + 3 माह अनुग्रह अवधि अर्थात 24.09.2043 में उपलब्ध कराया जाना था, जो कि अभी तक प्राप्त नहीं कराया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया कि परियोजना में निर्माण कार्य पूर्ण करने में विलम्ब किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा बुक की गयी यूनिट के सम्बन्ध में कब्जा मय विलम्बित अवधि का दण्ड ब्याज व प्रतिपूर्ति दिलाये जाने की (Vee की गयी हैं। Murari prasad Vs. M/s Uttam Steels & Associates Consortium Page शिकायतकर्ता द्वारा वादपत्र के समर्थन में अनुबंध पत्र एवं जमा की गयी धनराशि की रसीदें, लिखित शिकायतपत्र आदि प्रपत्रों की छायाप्रति दाखिल किये गये। प्राधिकरण की ओर से प्रतिवादी को नोटिस जारी किये गये और जिसकी तामीला
प्रतिवादी पर सम्यक रूप से की गयी। पत्रावली अवलोकन से विदित है कि प्रतिवादी को प्रतिवाद पत्र दाखिल करने हेतु अवसर प्रदान किये गये, परन्तु प्रतिवादी द्वारा प्रतिवाद पत्र दाखिल नहीं किया गया। प्रतिवादी की ओर से उनके विद्वान अधिवक्ता उपस्थित हुए और यह कथन किया गया कि vad टावर का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है तथा सम्बन्धित प्राधिकरण से ओ.सी. प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा चुका है। शिकायतकर्ता को विधि wad कब्जा उपलब्ध कराये जाने हेतु समय चाहा गया है। अतः वाद को निस्तारित किये जाने की याचना की गयी है। दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत तर्कों को सुना तथा पत्रावली का अवलोकन किया। पत्रावली अवलोकन से विदित है कि शिकायतकर्ता को यूनिट पर कब्जा अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। चूंकि शिकायतकर्ता कब्जा प्राप्त करने का इच्छुक है। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को कब्जा मय विलम्बित अवधि का दण्ड ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस सम्बन्ध में रेशरा अधिनियम के अन्तर्गत यह उल्लेखित है कि:- रेरा अधिनियम की धारा 34 में रेरा के अन्य “फंग्शन्स” के साथ-साथ "to ensure compliance of the obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents under this Act and the rules and regulations made thereunder" का भी उल्लेख 2 |
इसी प्रकार धारा 32 4 रियल इस्टेट सेक्टर के विकास हेतु अथॉरिटी के उत्तरदायित्यों में निम्न भी सम्मिलित हैं :- “Section 32. The Authority shall in order to facilitate the growth and promotion of a healthy, transparent, efficient and competitive real estate sector make recommendations to the appropriate Government of the competent authority, as the case may be, on,— (a)protection of interest of the allottees, promoter and real estate (any other issue that the Authority may think mm ‘or 7१ promotion of the real estate sector.” LL. LE. Murari prasad Vs. M/s Uttam Steels & Associates Consortium Page 2 Vat wheat से यह स्पष्ट है कि “रियल एस्टेट सेक्टर” के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने के लिए इसके सभी ee होल्डर्स के हितों को समग्र रूप से देखते हुए समुचित निर्णय लेने का उत्तरदायित्व इस ऑथरिटी का है। एलोटीज़ द्वारा धनराशि वापस किए जाने व परियोजना में बने रहने वाले एलोटीज के हितों में wget के प्रसंग में “चित्रा शर्मा बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया” (744 //2047) के निर्णय में मा. सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय के प्रस्तर 40 में निम्न ऑबजरवेशन किया है :-
40. As we have stated earlier, an amount of Rs 750 crores is lying in deposit before this Court pursuant to the interim directions, on which interest has accrued. The home buyers have earnestly sought the issuance of interim directions to facilitate a pro-rata disbursement of this amount to those of the home buyers who seek a refund. "We are keenly conscious of the fact that the claim of the home buyers who seek a refund of monies deserves to be considered with empathy. Yet, having given our anxious consideration to the plea and on the balance, we are not inclined to accede to it for more than one reason. Firstly Secondly, the figures which have been made available presently, following the opening of the Web portal by the amicus curiae, indicate that 8% of the home buyers have sought a refund of their monies while 92% would evidently prefer possession of the homes which they have purchased. We cannot be unmindful of the interests of 92% of the home buyers many of whom would also have obtained loans to secure a home. They would have a legitimate grievance if the corpus of Rs 750 crores (together with accrued interest) is distributed to the home buyers who seek a refund."
मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उक्त प्रस्तरों में उद्धरत “ऑबजरवेशनस्” एवं रेरा. एक्ट की समग्र व्यवस्था को देखते हुए यह भी स्पष्ट है कि यदि विलम्ब के प्रत्येक मामले में धनराशि लौटाने का ही निर्णय लिया जाये तो निश्चय ही यह अधिनियम के “ऑबजेक्टिव” तथा “स्कीम” के अनुरूप न होगा। रिफण्ड का निर्णय लेते समय प्रत्येक मामले की “यूनीकनेस” प्रकरण के समस्त तथ्यों यथा “कन्सट्रक्शन” की स्थिति, कम्पलीशन की “टाईम लाईन”, प्रोमोटर्स के द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन के “कमिटमेन्ट” की स्थिति, अन्य “wa seed”, विशेष रूप से परियोजना के साथ बने रहने वाले “एलॉटीज” पर प्रभाव, “प्रस्तावित पज़ेशन डेट” के विषय में “कन्सेन्सस्” आदि पर विचार किया जाना न्यायहित में होगा। ऐसे में यह उचित होगा कि शिकायतकर्ता फ्लैट का कब्जा लेने पर विचार करें। वैसे भी शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना में निवेश फ्लैट के कब्जे हेतु किया गया है। निश्चय ही परियोजना में बने रहने की दशा में एलॉटीज़ को विलम्ब हेतु नियमानुसार ब्याज प्रोमोटर्स द्वारा देय होगा। चूंकि प्रतिवादी द्वारा एक निश्चित अवधि का समय देते हुए यह कथन किया गया कि शिकायतकर्ता को कब्जा प्राप्त करा दिया जायेगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को ee glk कि गयी यूनिट के LC AE Murari prasad Vs. M/s Uttam Steels & Associates Consortium Page 3 में विधि संवृत कब्जा मय विलम्बित अवधि का दण्ड ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील to 6649-50 / 2048 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने
" the period of Interest should close on April 20I6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी. मिलने एवं कब्जा दिये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक के दिनांक तक ही ब्याज पाने के अधिकारी होगें। जहां तक शिकायतकर्ता को मय ब्याज धनराशि वापस किये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल Raced सबथर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि —
Section 8(])(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to wep pot CL> unreasonable. -€} - _ Murari prasad Vs. M/s Uttam Steels & Associates Consortium Page 4 Sn — अतः Stet निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के wee 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9 (i) ¥ प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर oii) ¥ निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को 'टा।ए+ प्रतिशत की ब्याज दर पर धनराशि वापस दिलाये जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। आदेश 4. प्रतिवादी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को समस्त निर्माण कार्य पूर्ण करते हुए यूनिट संख्या- C-7I9 पर ओ.सी. प्रमाण पत्र सहित वैधानिक कब्जा,रजिस्ट्री का क्रियान्वयन आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 2 माह के अंत तक प्राप्त कराना सुनिश्चित करें। 2. साथ ही शिकायतकर्ता व प्रमोटर के बीच हुए हस्ताक्षरित अनुबंध पत्र के अनुसार विलम्बित अवधि के सम्बंध में कब्जा प्राप्त कराये जाने की
तिथि से 30.04.206 तक अनुबंध पत्र में उल्लेखित दण्ड,” 9०॥४॥७ के QTR तथा दिनांक 04.05.20I6 (Real Estate Regulation & Development, Act 20i6) के लागू होने की तिथि से MCLR +I % की दर से Occupation Certificate (0.0) प्राप्त करने की तिथि तक ee द्वारा दण्ड ब्याज अदा किया जाएगा। ब्याज/दण्ड Murari prasad Vs. M/s Uttam Steels & Associates Consortium CCE धनराशि को कब्जा दिये जाने के समय अंतिम देय धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार वापस की जायेगी । 3. यह भी स्पष्ट किया जाता है कि रेरा अधिनियम 2006 के धारा 2 (ai) के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है कि यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। ॥॒ 4. प्रतिपूर्ति (compensation) दिलाये जाने के सम्बंध में यह उल्लेखनीय है कि प्रतिपूर्ति (compensation) न््यायनिर्णायक अधिकारी (adjudicating officer) @ eater में है। अतः वादी प्रतिपूर्ति प्राप्ति हेतु न्यायनिर्णायक अधिकारी (adjudicating officer) के समक्ष वाद दायर कर सकता है। प्रतिवादी प्रमोटर द्वारा आदेश का अनुपालन न किये जाने पर शिकायतकर्ता / आवंटी को यह अधिकार होगा कि उ0 प्र0. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन करा सके। इस आदेश का उल्लघंन उ0प्र0/भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20i6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत . प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक: 24 -0.2049 (बलविन्दर कुमार) (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण
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