Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Saurabh Agarwal v. Jkg Construction Pvt Ltd
Complaint No. NCR144/07/0549/2019
- Decision date
- 2026-08-12
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 / 40 //63 सपठित नियम-24 7-शिकायत WT—NCR44/07/0549/209 सौरभ अग्रवाल बनाम जेकेजी कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड आदेश-पत्र दिनांक: 42.08.2026 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री प्रवीण कुमार उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री ज्योति शर्मा उपस्थित हुई। उभयपक्षों को सुना गया एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया। शिकायतकर्ता को यूनिट का समय से कब्जा न मिलने के कारण शिकायतकर्ता द्वारा माननीय रेरा पीठ में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें माननीय पीठ-03 द्वारा नियमानुसार सुनवाई के उपरान्त दिनांक 24.04.2020 को निम्नवत आदेश पारित किये गये हैं:- (क) प्रतिवादी को आदेशित किया जाता है कि प्रत्येक वादी को मार्च 2020 तक ओ.सी. /सी.सी के साथ यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें | (ख) प्रतिवादी, प्रत्येक वादी के बुकिंग तिथि से 3 वर्ष के उपरांत की तिथि से आवंटन पत्र में उललेखित विलम्बित अवधि का ब्याज दिनांक 30.04.2046 तक देय होगा। उसके उपरांत दिनांक 07.05.20i6 से ओ.सी/सी.सी प्राप्त होने की तिथि या ऑफर ऑफ पजेशन जो बाद में हो, तक MCLRH% वार्षिक ब्याज दर से प्रतिवादी द्वारा प्रत्येक ad को यान भुगतान किया जायेगा। यह ब्याज धनराशि अंतिम देय धनराशि में समोयोजित की जायेगी।
(ग) बादी द्वारा यदि कोई धनराशि का भुगतान करना शेष है तो रेरा अधिनियम की धारा 2७०)0) के अधीन उस विलम्बित अवधि का ब्याज प्रतिवादी प्राप्त करने का अधिकारी है परन्तु व्याज MCLRH% की दर से अधिक देय नहीं होगा। _— (घ) प्रतिवादी अनुबंध में निहित प्राविधानों के अनुसार बढ़े हुये एरिया के सम्बंध में पूर्ण विवरण वादीगण को उपलब्ध करायें तथा बढ़े हुये एरिया की धनराशि आवंटन के समय निर्धारित दर से ही धनराशि प्राप्त करें। आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं प्रत्येक वाद में पृथक-पृथक रूप से ब्याज गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लंघन उठप्र० भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 24.07.2020 का अनुपालन नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-38 /40,/63 के अन्तर्गत vat आदेश के क्रियान्वयन हेतु प्रार्थना-पत्र दाखिल किया war) उपरोक्त शिकायत में मा. पीठ-03 द्वारा दिनांक 20.0. 2024 को धारा-63 के अन्तर्गत निम्न आदेश पारित किया गया है कि:- 4. प्रतिवादी को यह आदेशित किया जाता है कि नवम्बर 2024 तक परिवादी को मूल इकाई का अधिपत्य अनुबंध में निहित मूलभूत सुविधाओं के साथ उपलब्ध कराना सुनिश्ति करें। । 2 प्रतिवादी किसान प्रतिकर, जीएसटी व बिजली कनेक्शन धनराशि सम्बन्धित विभाग को भुगतान किये जाने का रसीद परिवादी को साक्ष्य/ प्रमाण के साथ उपलब्ध कराकर ही समानुपातिक रूप से धनराशि प्राप्त कर सकता है परन्तु रख-रखाव शुल्क इकाई का अधिपत्य दिये जाने की तिथि लागू होगा।
3... परिवादी प्रतिवादी को विलम्ब से धनराशि भुगतान किये जाने की स्थिति में आदेश के wer संख्या ग के अनुसार परिवादी से धनराशि मय ब्याज प्राप्त करेगा। सचिव, रेरा को निर्देशित किया जाता है कि उक्त बिन्दुओं को दृष्टिगत रखते हुये परिवादी शिकायत के सम्बन्ध में विलम्बित अवधि का ब्याज आदेश के प्रस्तर ख के अनुसार धनराशि वसूली हेतु वसूली प्रमाण-पत्र जारी करना सुनिश्चित करें। चूंकि प्रतिवादी द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किया गया है, ऐसी स्थिति में पत्रावली को धारा 63 की अग्रिम कार्यवाही हेतु प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। ] तदोपरान्त अन्तर्गत धारा-38 /40,/63 के कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया जा सका और वसूली प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु आदेश पारित किया गया। तद्पश्चात श्रीमान सचिव, रेरा द्वारा पारित कार्यालय-आदेश दिनांक 6.05.2025 के अनुसार पत्रावली नियम-24 की कार्यवाही हेतु इस पीठ को संदर्भित की गई। इस पीठ द्वारा विपक्षी को बार-बार आदेशित किये जानें के बावजूद भी विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया जा सका और विपक्षी द्वारा अपने जवाब में यह कहा गया कि उसके पास ओ.सी./सी.सी. प्राप्त नहीं है तथा विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट को निरस्त कर दिया गया है और वह समस्त धनराशि शिकायतकर्ता को वापस कर चुका है।
इस पीठ द्वारा दिनांक 30.04.2026 को यह पाते हुए कि शिकायतकर्ता की यूनिट को पुनर्स्थापित करने या वैकल्पिक यूनिट का आदेश सम्बन्धित पीठ ही कर सकती है और क्योंकि विपक्षी के पास यूनिट /परियोजना का ओ.सी./सी.सी न होने के कारण यह पीठ शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा नहीं दिला सकती है और न ही यूनिट की रजिस्ट्री करा सकती है, इसलिए प्रश्नगत पत्रावली सम्बन्धित पीठ को शिकायतकर्ता की यूनिट को पुनर्स्थापित करने या वैकल्पिक यूनिट का आदेश पारित करने के सम्बन्ध में और ओ.सी. /सी.सी. के सम्बन्ध में, विपक्षी के विरुद्ध कार्यवाही के सम्बन्ध में सम्बन्धित पीठ को वापस भेजी गई, लेकिन सम्बन्धित पीठ द्वारा न तो निरस्त यूनिट की पुनर्स्थापित करने का आदेश पारित किया गया और न ही वैकल्पिक यूनिट के सम्बन्ध में कोई आदेश पारित किया गया और न ही ओ.सी./सी.सी. के सम्बन्ध में विपक्षी के विरुद्ध कोई कार्यवाही की गई और प्रश्नगत पत्रावली पुनः: इस पीठ को आदेश दिनांक 25.05.2026 के अनुसार यह Hd हुए वापस भेज दी गई कि snee—ai सिविल प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत कार्यवाही करते हुए शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा दिलाया जाये। शिकायतकर्ता की ओर से यूनिट ol |p करने हेतु प्रार्थना-पत्र पहले से ही प्रस्तुत किया जा चुका है। अतः माननीय रेरा पीठ-03 द्वारा पारित आदेश दिनांक 25.05.2026 का अनुपालन करते हुए आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत यूनिट al Ge कर, न्यायालय के कब्जे में लेना और प्रश्नगत प्रकरण में अग्रिम कार्यवाही करना उचित होगा। अत: शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल उक्त प्रार्थना-पत्र स्वीकार किया जाता है।
अतः ऐसी स्थिति में नियम-24 में दी गई व्यवस्था के अनुसार और नियम-24 की कार्यवाही के अन्तर्गत शिकायतकर्ता को कब्जा उपलब्ध कराये जाने हेतु आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत कार्यवाही करते हुए तथा कार्यालय आदेश संख्या-3839 /यूपी. रेरा / प्रशा. / 2025-26 दिनांक 28.08.2025 के अनुसार परियोजना-नारूठ Palm Court Phase- LH यूनिट WeT-p-i303 को इस न्यायालय द्वारा कुर्क किया जाता है तथा कार्यालय आदेश संख्या-42482 / यू.पी.रेरा / प्रशा. / 2024-25 दिनांक 24.08.2024 के अनुसार श्री रजत शर्मा, अवर अभियन्ता को Relax नियुक्त किया जाता है। अतः श्री रजत शर्मा, अवर अभियंता को निर्देशित किया जाता है कि वह यूनिट को कुर्क कर न्यायालय के कब्जे में लेकर अपनी आख्या is दिनों के अन्दर इस न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत कार्यवाही करते हुए es, स्वयं इस न्यायालय द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जा सके एवं आदेश दिनांक 24.04.2020 का अनुपालन कराया जा सके। श्री रजत शर्मा, stax अभियंता को यह भी निर्देशित किया जाता है कि ge जहाँ तक संभव हो यूनिट की कुर्की शिकायतकर्ता एवं उनके अधिकृत प्रतिनिधि / अधिवक्ता तथा विपक्षी के प्रतिनिधि,/अधिवक्ता की उपस्थिति में पूर्ण करेंगे और उभयपक्ष एवं उनके प्रतिनिधि को पहले से ही इस सम्बन्ध में अवर अभियंता द्वारा सूचित किया जाये। पत्रावली अग्रिम सुनवाई हेतु दिनांक 02.44.2026 को पेश हो। HR आर. पी. सिंह (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण