Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Rajesh Mohan v. Logix Infrastructure Pvt.ltd
Complaint No. NCR144/07/0441/2019
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2019-10-21
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar. Hearing Bench-0A Shri Rajeev Kumar, Chairman Sr. No. | Complaint No. | Complainants [Sr. ?] | NCR444 / 08 // 0452 / 2049 | Reena Agarwal [Sr. ?] | [?]44 / 08 / 0458 // 2049 | Arpit Agarwal Sr. 3 | NCR44 / 07 / 0248 / 20:9 | Ashish [?] Sr. 4 | NCR44 / 07 / 044 / 209 | Rajesh [?] Complainants Versus M/s Logix Infrastructures Pvt. Ltd. Along with complainant Reena Agarwal, 3 other complainants have filed a case against the opposite party. The facts of all these complaints are the same and the evidence is common. All these complaints relate to Blossom County, Phase-3. Therefore, they are being disposed of by a single order. Complaint No. [?] a44 / 08 / 0452 // 2049, Reena Agarwal, will be the lead case. The complainants have instituted this complaint against the opposite party seeking possession and interest for the delayed period, and to end unnecessary demands in the offer of possession. In some cases, compensation for mental agony and litigation expenses has also been sought. In brief, the complainant states that the complainant booked flat No. 005 in Tower-4 of the opposite party's project Blossom County, Phase-3, against which the complainant paid Rs. 56,74,30/- from time to time in instalments. The opposite party was to complete the flat and hand over possession by 06.09.20:2, but the opposite party has not yet handed over possession.
The complainant also states that the builder had promised to hand over possession within 8 months, which would be 09.0.2042, but possession has not been given till date. Unit No. N-005, whose flat area was 4875 sq. ft. and for which a private lawn was to be provided, has not yet been demarcated. Therefore, the complainant has requested possession and interest for the delayed period against the opposite party. In support of the statement, the complainant has filed copies of the brochure, receipts of the amounts deposited, the allotment letter, and a photocopy of the flat buyer agreement. The opposite party, filing its written reply, has stated that the complainant has filed this case by misusing the law. The finishing work of the project's tower is complete and an application for OC has already been made. The complainant booked unit No. 005 in Tower-4 of the project Blossom County, Phase-3; the allotment letter was issued on 40.04.2044 and the flat buyer agreement was executed on 06.07200:. The project was delayed due to force majeure events, which were beyond its control. In support of its statement, the opposite party has filed a photocopy of the application for the occupancy certificate dated 23. ot20t9. Heard both parties and perused the case file. On the basis of the pleadings of the parties, the following issues were framed: 4. Whether agreements made before RERA came into force do not fall within the ambit of RERA?
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। सुनवाई पीठ-0ए श्री राजीव कुमार, अध्यक्ष कम Wo शिकायत सं0 शिकायतकर्तागण एन.सी.आर444 / 08 // 0452 ,/ 2049 | रीना अग्रवाल wa ara 44 / 08 / 0458 // 2049 | अर्पित अग्रवाल 2 |_3 | एन.सी.आर44 / 07 / 0248 /20:9 | आशीष maps 4 | एन.सी.आर44 / 07 /044 /209 [राजेश eT | अभय ता इलाका शिकायतकर्तागण बनाम मैसर्स लॉजिक्स इन्फास्ट्रक्चर्स प्रा.लि. शिकायतकर्ता रीना अग्रवाल के साथ 3 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें Blossom County, Phase-3 से सम्बंधित है। अतः एक ही निर्णण से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत to We. a44 /08 / 0452 // 2049 रीना अग्रवाल अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्द कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने व ऑफर ऑफ पोज़ेशन में अनावश्यक माँगों को समाप्त करने हेतु संस्थित किया गया है। कुछ प्रकरणों में मानसिक पीड़ा व न्यायिक व्यय हेतु क्षतिपूर्ति भी माँगी गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना Blossom County, Phase-3 के टॉवर-४ में फ्लैट नं०-005 बुक किया गया, जिसके लिए शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 56,74,30/— रूपये का भुगतान किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 06.09.20:2 तक पूर्ण कर 4 2
कब्जा दिया जाना था, किन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक कब्जा नहीं दिया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि बिल्डर द्वारा 8 माह में कब्जा दिये जाने का वादा किया गया था, जिसकी तिथि 09.0.2042 होती है, किन्तु आज तक कब्जा नहीं दिया गया है। यूनिट संख्या-एन-005, जिसके फ्लैट का क्षेत्रफल 4875 वर्ग फुट था एवं निजी लॉन दिया जाना था, जो कि अभी तक रेखांकित नहीं की गयी है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्द कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में ब्रोशर, जमा धनराशि की रसीदें, आवंटन पत्र, फ्लैट केता अनुबन्ध की छायाप्रति दाखिल की गयी है। विपक्षी द्वारा प्रतिवादपत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विधि का दुरूपयोग करते हुए वाद योजित किया गया है। परियोजना के टॉवर की फिनिशिंग कार्य पूर्ण है और ओ.सी हेतु आवेदन किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना Blossom County, Phase-3 के टॉवर-४ में यूनिट नं०-005 बुक किया गया, जिसका आवंटन पत्र दिनांक 40.04.2044 को जारी किया गया और फ्लैट केता अनुबन्ध दिनांक 06.07200: को निष्पादित कराया गया था। परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस के कारण विलम्बित हुई, जो कि नियंत्रण में नहीं था। विपक्षी की ओर से अपने कथन के समर्थन में अधिभोग प्रमाण पत्र हेतु आवेदन दिनाक 23. ot20t9 की छायाप्रति दाखिल की गयी है। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचरित किये गये :- 4... क्या रेरा आने से पूर्व के ages रेरा के दायरे में नहीं आते है ? 2 an force majeure events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई यदि हां तो प्रभाव?
3. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज का दर क्या होगा ? 4. क्या विपक्षी द्वारा ऑफर ऑफ पोजेशन में अनुचित मांगे की जा रही है ? निस्तारण बिन्दु Ho 4 बिन्दु संख्या 4 इस तथ्य पर विचरित है क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं? इस सम्बंध में मुम्बई उच्च न्यायालय द्वारा Re याचिका संख्या- 2737 /20:7 नीलकमल रियलटर्स सबशर्बन प्राणलि0 एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि-- ०, The provisions of RERA, however, do not rewrite the clause of completion or handing over possession in agreement for sale. Section 4(2)(I)(C) enables the promoter to give fresh time line independent of the time period stipulated in the agreements for sale entered into between him and the allottees so that he is not visited with penal consequences laid down under RERA. In other words, by giving opportunity to the promoter to prescribe fresh time line under Section 4(2)(I)(C) he is not absolved of the liability under the agreement for sale.
उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा के प्राविधान के अनुसार अनुबन्ध में दिये गये पूर्णता एवं कब्जे देने के प्रस्तर का Acie नहीं किया जा सकता। धारा 4(2)0)(सी) के अन्तर्गत प्रोमोटर एक नई समय सीमा दे सकता है, जो कि अनुबन्ध पर निर्भर नहीं होगा और उक्त धारा रेरा में दिये गये प्राविधान के परिणाम स्वरूप केवल अर्थदंड से बचाया जा सकता है। अतः इससे अवधारित किया जाता है कि प्रोमोटर अनुबन्ध में दिये गये कब्जे की तिथि के लिए उत्तरदायी है। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते है। Tage बिन्दु संख्या 4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु do 2 बिन्दु सं? 2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या force majeure होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव? यह वाद बिन्दु भी विपक्षी के अभिकथनों के आधार पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि कुछ अप्रत्याशित घटनाओं (force majeure events) (जैसे दंगा, आंदोलन, हडताल, औद्योगिक विवाद, परियोजना पर सेवाओं एवं आपूर्ति का बाधित होना, सरकार का नीति परिवर्तन, न्यायिक wre आदेश, निर्णय व feat से कार्य बाधित होना, अनुज्ञप्ति व संस्तुतियों में होने वाला विलंब आदि) के कारण परियोजना विलंबित हुई, विपक्षी की ओर से न तो यह कथन किया गया कि किन फोर्स मैज्योर की बाबत उसकी परियोजना विलंबित हुई और न ही फोर्स मैज्योर की बाबत कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल किया गया है। इसके अतिरिक्त माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 / 207 विकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में अभिनिर्धारित किया
गया है:- 2 4l. On behalf of Amrapali group, learned senior counsel submitted that there were force majeure conditions in completing the projects. There were legal impediments in the completion of projects within the period given in the flat-buyers agreement during the period from 20I-5. The submission is baseless. It is apparent that the Full Bench of the High Court though held that the land acquisition was vitiated but still it was upheld. The High Court did not quash it for the reason that development has taken place. Higher compensation was ordered to be paid. That order was affirmed by this Court in 205 in Savitri Devi v. State of U.P. (20I5) 7 SCC 2l. There was no interim stay granted by the High Court on construction work, is made clear by the Noida and Greater Noida authorities. There was no room to entertain any doubt as to the fact whether for a particular village the acquisition had been quashed. There was no quashing of land acquisition and moreover, there was no stay. Only higher compensation was ordered to be paid. There was no force majeure condition or any legal impediment as such the period from 20 to 205 cannot be treated as a moratorium period vis-a-vis the dues of Noida and Greater Noida authorities. The submission made as to the farmers' agitation etc. is too vague and 30% of the projects have come up; whereas 70% have not yet come up, out of the projects in Noida and Greater Noida alone.
उपरोक्त अबज़रवेशन से यह स्पष्ट है कि af 2044 से वर्ष 2045 के मध्य निर्माण कार्य पर कोई wer आदेश नहीं थे, जो कि नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा दर्शित किया गया और इस आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2044 से वर्ष 20i5 के बीच कोई फोर्स मैज्योर कारण या विधिक रूप से रोक नहीं था। चूंकि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा भी यह स्पष्ट किया जा चुका है कि वर्ष 2044 से वर्ष 205 के बीच कोई फोर्स मैज्योर इवेन्ट नहीं था, ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। इसके अतिरिक्त इसी आदेश में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 // 2047 विकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य के निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं we 440 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature. उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें की युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्रकृतिक आपदा के 5 आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई और विपक्षी ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। तद्नुसार बिन्दु Bo 2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु to 3 बिन्दु wo 3 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्ब के लिए ब्याज दिलाया जा सकता है? यह वाद बिन्दु भी शिकायतकर्तागण के अभिकथनों के आधार पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है।
शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा अनुबंधित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है, जिस पर विपक्षी की ओर से कहा गया है कि परियोजना पूर्ण है और पूर्णता प्रमाण पत्र हेतु आवेदन किया जा चुका है। यह निर्विवादित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में फ्लैट बुक कराया था। इस तथ्य पर भी कोई विवाद नहीं है कि विपक्षी अनुबंधित अवधि में कब्जा प्रदान करने में असमर्थ रहा है। ऐसे में जबकि परियोजना पूर्ण है और सक्षम प्राधिकरण को ओ.सी हेतु आवेदन किया जा चुका है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी उल्लेखनीय है कि विपक्षी द्वारा अनुबन्ध में शिकायतकर्ता को अनुबन्ध निष्पादित करने से iste माह Gra पीरियड) में कब्जा दिया जाना था। फ्लैट बायर Ure दिनांक 06.07.2044 को निष्पादित किया गया है एवं अनुबन्ध के अनुसार विपक्षी को 06.07.2043 तक कब्जा देना था, किन्तु विपक्षी द्वारा आज तक कब्जा नही दिया गया है। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को अनुबन्धित अविध के पश्चात् से शिकायतकर्ता को ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा ऑफर किये जाने तक की अवधि पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल Raced सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- Section 48(॥)(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of es
an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
यह भी उल्लेखनीय है कि पक्षकारों के मध्य एक अनुबन्ध निष्पादित है, जो कि उभयपक्ष द्वारा हस्ताक्षरित है, जिससे यह अवधारित किया जा सकता है कि उभयपक्ष को sat अनुबन्ध की शर्ते स्वीकार हैं। अनुबन्ध के प्रस्तर 6.6 के अनुसार परियोजना के विलंब की अवधि में 5 रूपये प्रतिवर्ग फुट प्रतिमाह की दर से धनराशि का प्राविधान है, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता धनराशि पाने का अधिकारी है, रेरा के प्राविधानों के अनुसार जिस दर से विपक्षी द्वारा धनराशि प्राप्त की गयी है उसी दर से धनराशि देने का प्राविधान है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय मुम्बई द्वारा उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह भी अभिनिर्धारित किया गया है कि :- For the reasons already indicated, aforesaid decisions are not applicable to the facts of the present case. | have already indicated that the provisions of RERA are prospective in nature. The penalty under Sections 78, 38, 59, 60, 67, 63 and 64 is to be levied on account of contravention of provisions of RERA, prospectively and not retrospectively. YS अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्राविधानित दंड पूर्वव्यापी नही, बल्कि भविष्यलक्षी होना चाहिये। ऐसी दशा में रेरा के प्रभाव में (दिनाक 4.5.206) से पूर्व अनुबन्ध के अनुसार धनराशि भुगतान किया जाना चाहिये और रेरा के आने के बाद दिनांक 4.5.20i6 से रेरा के प्राविधानो के अनुसार विलंबित अवधि में जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है, जिस वाद में पक्षकारों के मध्य कोई अनुबन्ध निष्पादित नही है, वहां शिकायतकर्ता रेरा के प्राविधानों के अनुरूप जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी होगा।
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के WER 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9 (ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर oii) F निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLRH प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी MCLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है। जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बंध में सिविल अपील to 6649-50 / 2048 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- >
" the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant - Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20I6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के के अनुसार ओ.सी. मिलने या कब्जा ऑफर होने, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी. मिलने, कब्जा अथवा कब्जा ऑफर होने, जो भी बाद में हो के दिनांक तक ही ब्याज पाने के अधिकारी et) तद्नुसार बिन्दु सं०-3 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-4 विपक्षी द्वार ऑफर ऑफ पोजेशन में फ्लैट का सुपरएरिया i975 वर्ग फुट से 968 वर्ग फुट बढ़ाकर 2,57,838 /— रूपये फ्लैट के लिए अतिरिक्त धनराशि की मांग की जा रही है। इस सम्बंध में अनुबन्ध के WAR 6.t0 में स्पष्ट रूप से उल्लखित है कि-:
The parties agree and acknowledge that the superarea of the apartment is subject to variation and change to maximum extent of 5%,at the time of the delivery of possession of the apartment to the buyer ,and the charges in relation to the same will be payable/adjusted as specified hereinabove.no claim,demand,suit and/or litigation,shall be raised by the buyer in relation to such variation in the superarea and the buyer hereby waives all rights in relation to the same. उक्त अनुबन्ध पर पक्षकारों के हस्ताक्षर है जिससे विदित है कि उपरोक्त नियम एवं शर्तों को शिकायतकर्ता द्वारा स्वीकार्य किये गये है। उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता द्वारा सहमति दी गयी है कि अपार्टमेन्ट का सुपर एरिया अधिकतम 5 प्रतिशत तक सुपर एरिया बढ़ाया जा सकता है और उसकी ०) 9 धनराशि अनुबन्ध में विस्तृत रूप से दी गयी है जिसके अनुसार गणना की जायेगी। इस सम्बंध में विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि अनुबन्ध के समय सुपर एरिया के विभिन्न मदों का विवरण वर्तमान में उन्हीं मदों में परियोजना के परिवर्तित क्षेत्रफल व उस परिवर्तन का कारण बताते हुए एवं दोनों स्थितियों में शिकायतकर्ता के क्षेत्रफल की गणना का आधार स्पष्ट करने व उसे वेबसाइट पर डालने के बाद ही यह धनराशि देय होगा। इसके अतिरिक्त यह भी कहा गया कि इलैक्ट्रिसिटी फिटिंग, फायर फाईटिंग चार्जेज, आई.एफ.एम.एस, chor we, पी.एल.सी की मांग की जा रही है। इस सम्बन्ध में विपक्षी को स्पष्ट किया जाता है कि उक्त धनराशि अनुबन्ध के अनुसार साक्ष्य उपलब्ध कराने के उपरान्त देय होगी। आई.एफ.एम.एस चार्ज वास्तविक कब्जे की तिथि से लागू होगी। तद्नुसार बिन्दु संख्या-4 निस्तारित किया जाता है।
जहाँ तक मानसिक पीड़ा व न्यायिक व्यय हेतु क्षतिपूर्ति का प्रश्न है, तो रेरा अधिनियम की धारा-74 के अनुसार धारा-42,44,48 व ॥9 में क्षतिपूर्ति के आधार दिये गये है, जिनमें मानसिक पीड़ा व न्यायिक व्यय सम्मिलित नहीं है। अतः: क्षतिपूर्ति निर्धारण हेतु प्रकरण को एडज्यूडिकेटिंग ऑफिसर को सन्दर्भित करने का कोई औचित्य नहीं है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि शिकायतकर्तागण को आवंटन पत्र /अनुबन्ध /ब्रोशर के अनुसार फ्लैट की समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर 60 दिनों के अन्दर कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराये। 2. विपक्षी, अनुबन्धित अवधि के पश्चात् से दिनांक 30.4.206 तक 5/- रूपये प्रति वर्गफुट प्रतिमाह की दर से व दिनांक 04.05.2046 से ओ.सी. JEM. सहित कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक की अवधि के लिए शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से A 0 अधिक होने पर निमयानुसार वापस की जायेगी। अन्य शिकायतकर्तागण के मामलों में अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी। विपक्षी उपरोक्तानुसार संशोधित मांग पत्र जारी करना सुनिश्चित करें। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि रेरा अधिनियम 2046 के धारा 2 (zai) के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है कि रेरा लागू होने के बाद यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। ब्याज की दर MCLR+2 प्रतिशत होनी चाहिए।
इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस ओदश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। इस आदेश का Gets उ0प्र0भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक |#/70/2079 (राजीव कुमार) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण