Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Deepak Sharma v. La Residentia Developers Private Limited
Complaint No. NCR144/07/0350/2019
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2021-09-28
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-04 श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य कम to | शिकायत to शिकायतकर्ता का नाम 4 | एन.सी.आर44 / 07 / 0350 /20:9 | दीपक शर्मा 2 | एन.सी.आर।44 / 07 // 4096 / 2049 राजेश कुमार बनाम ला रेजीडेंसिया डेवलपर्स प्रा.लि. शिकायतकर्ता दीपक शर्मा के साथ राजेश कुमार के द्वारा यह शिकायतें विपक्षी के विरूद्ध योजित की गयी है। इन दोनों शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह दोनों शिकायतें ” La Residentia" से सम्बंधित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत wo एन.सी.आर।44 /07 // 0350 ,/ 2049 दीपक शर्मा अग्रणी वाद रहेगा | प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध समस्त जमा धनराशि ब्याज सहित दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है| संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता के द्वारा विपक्षी की परियोजना La Residentia 4 यूनिट संख्या- 738/203 बुक की गयी थी, जिसके लिए शिकायतकर्ता के द्वारा विपक्षी को समय-समय पर fait के आधार पर 25,43,240//- रुपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता के द्वारा कथन किया गया है कि उसके द्वारा 80 प्रतिशत रुपये का भुगतान किया जा चुका है। शिकायतकर्ता के द्वारा यह भी कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा परियोजना का कार्य दिनांक 2.04.204 तक पूर्ण किया जाना था, लेकिन अभी तक कब्जा नहीं मिला है और विपक्षी के द्वारा 5 वर्ष एवं 2 माह का विलम्ब किया गया है। जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 3i के अन्तर्गत विपक्षी के विरूद्द शिकायत दर्ज करायी गयी है। ee
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन मे आवंटन पत्र दिनांक 42.04.2044, भुगतान की रसीदें, ई-मेल, परियोजना से सम्बन्धित फोटोग्राफ्स, ट्राई पार्टी एग्रिमेन्ट आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। विपक्षी द्वारा प्रतिवाद-पत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि उसकी परियोजना La Residentia में शिकायतकर्ता के द्वारा यूनिट संख्या- T38/203 बुक की गयी थी। शिकायतकर्ता और विपक्षी के मध्य आवंटन पत्र दिनांक 42. 04.2044 को निष्पादित किया गया था, जिसके अनुसार 42 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि सहित कब्जा दिया जाना था। विपक्षी के द्वारा कथन किया गय है कि रेरा के अन्तर्गत परियोजना पंजीकृत है जिसकी पंजीकरण संख्या UPRERAPRJ9357 है। विपक्षी के द्वारा कथन किया गया है कि उसके द्वारा रेडी टू मूव एल्टरनेट यूनिट फेज-4 में दिसम्बर 2049 तक तथा फेज-2 में मार्च 2020 तक दी जा सकती है। विपक्षी के द्वारा प्रतिवाद पत्र में अंकित किया गया है कि परियोजना का कार्य पूर्णता की ओर है और शिकायतकर्ता को मूल यूनिट का कब्जा जून 2020 तक दे दिया जाएगा। विपक्षी के द्वारा अपने कथन के समर्थन में प्रतिवाद पत्र दाखिल किया गया है। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचरित किये गये :- 4. क्या शिकायतकर्ता की जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है ? 2 क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज का दर क्या होगी ? निस्तारण बिन्दु सं0 4 बिन्दु wert इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता की जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है? यह वाद बिन्दु भी शिकायतकर्ता के अभिकथनों के आधार पर विचारित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है।
शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा अनुबंधित अवधि में कब्जा नही दिया गया है, जिस कारण वह परियोजना के साथ नहीं रहना चाहता है और उसने जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने की मांग की wr है, जिस पर विपक्षी द्वारा कहा है कि शिकायतकर्ता को जून 2020 तक कब्जा दे दिया जाएगा। जहाँ तक Sat er रिफण्ड के अनुरोध का प्रश्न है, इस विषय में रेरा अधिनियम के प्राविधानों को समग्र रूप से पढ़ा जाना आवश्यक है ताकि सभी पक्षों के मत को दृष्टिगत रखते हुए एक संतुलित निर्णय लिया जा सकें। रेरा एक्ट की धारा 48 () में प्राविधान है कि — "Section 76 (I) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building, in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act:
Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed." इस प्रकार केता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस माँग सकते हैं अथवा मासिक दर से ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें । रेरा अधिनियम की धारा 34 में रेरा के अन्य “फंग्शन्स” के साथ-साथ " to ensure compliance of the obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents under this Act and the rules and regulations made thereunder " का भी उल्लेख 8 | इसी प्रकार धारा 32 में रियल sree सेक्टर के विकास हेतु अथॉरिटी के उत्तरदायित्यों में निम्न भी सम्मिलित हैं :-- “32. The Authority shall in order to facilitate the growth and promotion of a_ healthy, transparent, efficient and competitive real estate sector make recommendations to the appropriate Government of the competent authority, as the case may be, on,— (a)protection of interest of the allottees, promoter and real estate agent,....... (any other issue that the Authority may think necessary for the promotion of the real estate sector.” उक्त प्राविधानों से यह स्पष्ट है कि “रियल wee सेक्टर” के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने के लिए इसके सभी eH होल्डर्स के हितों को समग्र रूप से देखते हुए समुचित निर्णय लेने का उत्तरदायित्व इस ऑथरिटी का है।
इस कम में मा. मुम्बई उच्च न्यायालय द्वारा नीलकमल रियलटर्स सबअरबन प्रा.लि. बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया, जिसमें रेरा अधिनियम की वैद्यानिकता के सम्बंध में निर्णय दिया गया था, के प्रस्तर 424 में मा. उच्च न्यायालय द्वारा निम्न संवीक्षण किया :- +/24, The entire scheme of the RERA is required to be kept in mind. It is already submitted during the course of hearing that in many cases helpless allottees had approached Yr consumer forum, High Courts, Apex Court in a given fact situation of the case. The courts have been passing orders by moulding reliefs by granting interest, compensation to the allottees, and issuing directions for timely completion of project, transit accommodation during completion of project, so on and so forth. Under RERA now this function is assigned to the authority, tribunal. An appeal lies to the High Court. Under one umbrella, under one regulation and one law all the issues are tried to be resolved". 4 उक्त से स्पष्ट है कि सभी पक्षों को सुनने के बाद, यद्यपि समय से इकाई न मिलने की दशा में आवंटी का अपनी धनराशि ब्याज सहित मांगने का अधिकार है, तथापि vat वर्णित संवीक्षा को देखते हुए अथॉरिटी, प्रकरण के समस्त तथ्यों, के आधार पर ‘by moulding reliefs by granting interest, compensation _to_the _allottees, and issuing directions for timely completion of project, transit. accommodation during completion of project, so on and so forth’ के अनुरूप आदेश पारित किए जा सकते हैं |
एलोटीज़ द्वारा धनराशि वापस किए जाने व परियोजना में बने रहने वाले एलोटीज के हितों में सन्तुलन के प्रसंग में “चित्रा शर्मा बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया” (744 / 2047) के निर्णय में मा. सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय के we 40 में निम्न ऑबजरवेशन किया है :- "40. As we have stated earlier, an amount of Rs 750 crores is lying in deposit before this Court pursuant to the interim directions, on which interest has accrued. The home buyers have earnestly sought the issuance of interim directions to facilitate a pro-rata disbursement of this amount to those of the home buyers who seek a refund. "We are keenly conscious of the fact that the claim of the home buyers who seek a refund Yo an monies deserves to be considered with empathy. Yet, having given our anxious consideration to the plea and on the balance, we are not inclined to accede to it for more than one reason, Firstly ccc Secondly, the figures which have been made available presently, following the opening of the Web portal by the amicus curiae, indicate that 8% of the home buyers have sought a refund of their monies while 92% would evidently prefer possession of the homes which they have purchased. We cannot be unmindful of the interests of 92% of the home buyers many of whom would also have obtained loans to secure a home. They would have a legitimate grievance if the corpus of Rs 750 crores (together with accrued interest) is distributed to the home buyers who seek a refund."
मा. उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उक्त प्रस्तरों में vera “ऑबजरवेशनस्” एवं रेरा एक्ट की समग्र व्यवस्था को देखते हुए यह भी स्पष्ट है कि यदि विलम्ब के प्रत्येक मामले में धनराशि लौटाने का ही निर्णय लिया जाये तो निश्चय ही यह अधिनियम के “ऑबजेक्टिव” तथा “स्कीम” के अनुरूप न होगा। रिफण्ड का निर्णय लेते समय प्रत्येक मामले की “यूनीकनेस” प्रकरण के समस्त तथ्यों यथा “कन्सट्रक्शन” की स्थिति, कम्पलीशन की “टाईम लाईन”, प्रोमोटर्स के द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन के “कमिटमेन्ट” की स्थिति, अन्य “wa gest”, विशेष रूप से परियोजना के साथ बने रहने वाले ‘veda पर प्रभाव, “प्रस्तावित पजेशन डेट” के विषय में “कन्सेन्सस्” आदि पर विचार किया जाना न्यायहित में होगा। विपक्षी के द्वारा रेडी टू मूव एल्टरनेट यूनिट एवं मूल यूनिट का कब्जा जून 2020 तक दिये जाने की बात कही गई है तथा विपक्षी परियोजना को पूर्ण करने के लिए तत्पर है। ऐसी स्थिति में परियोजना के अन्य टॉवर्स के आवंटी भवन पूर्णता की प्रतीक्षा में है, उचित होगा शिकायतकर्ता भी अपने फ्लैट का कब्जा लें। उसके बाद फ्लैट के भविष्य में उपयोग के सम्बन्ध में वे निर्णय ले सकते है। वैसे भी शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना में ‘ea फ्लैट के कब्जे हेतु धनराशि का निवेश किया गया था, जिसका उपयोग परियोजना के निर्माण में किया गया है। निश्चय ही परियोजना में बने रहने की दशा में एलॉटीज़ को विलम्ब हेतु नियमानुसार ब्याज प्रोमोटर्स द्वारा देय होगा। निस्तारण बिन्दु सं०-4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु to 2
पत्रावली पर आवंटन दिनांक 42.04.2044 की प्रति दाखिल है। आवंटन पत्र के प्रस्तर 49 में 30 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ 42.04.2044 तक कब्जा दिये जाने का उल्लेख है। उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता दिनांक t2. 04.2074 तक कब्जा पाने का अधिकारी था। विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 42.04.2044 से ओ.सी »सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के "नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया" की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि — "Section 760/(0) lays down that if the pr+ omoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the eo
payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Sot के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स ext vad धनराशि का उपभोग किया गया है। यह भी उल्लेखनीय है कि पक्षकारों के मध्य एक अनुबन्ध निष्पादित है, जो कि उभयपफक्ष द्वारा हस्ताक्षरित है, जिससे यह अवधारित किया जा सकता है कि उभयपक्ष को उक्त अनुबन्ध की शर्तें स्वीकार हैं। आवंटन पत्र के प्रस्तर 9¢ में विलम्ब के लिए 5/- रुपये प्रति वर्ग फूट प्रतिमाह की दर से धनराशि दिये जाने का प्राविधान है। रेरा के प्राविधानों के अनुसार जिस दर से विपक्षी द्वारा धनराशि प्राप्त की गयी है उसी दर से धनराशि देने का प्राविधान है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय मुम्बई द्वारा उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह भी अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "For the reasons already indicated, aforesaid decisions are not applicable to the facts of the present case. I have already indicated that the provisions of RERA are prospective in nature. The penalty under Sections /6, 38, 59, 60, 67, 63 and 64 is to be levied on account of contravention of provisions of RERA, prospectively and not retrospectively."
अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्राविधानित दंड पूर्वव्यापी नहीं, बल्कि भविष्यलक्षी होना शा bi | ऐसी दशा में रेरा के प्रभाव में (दिनाक 04.05.2046) से पूर्व अनुबन्ध के अनुसार धनराशि भुगतान किया जाना चाहिये और रेरा के आने के बाद दिनांक 04.05.206 से रेरा के प्राविधानो के अनुसार विलंबित अवधि में जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है, जिस वाद में पक्षकारों के मध्य कोई अनुबन्ध निष्पादित नहीं है, वहां शिकायतकर्ता रेरा के प्राविधानों के अनुरूप जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.0.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,पटटा के लिए करार) नियमावली 2s अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2 (ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +/% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the
termination notice." यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.3 (i) a निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को McLRH प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी MciR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है। eR 0 जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बंध में सिविल अपील to 6649-50 /20i8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल" में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- " the period of Interest should close on April 2076 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent ~ Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206, The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 2076 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार शिकायतकर्ता ओ.सी. / सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि पर ब्याज पाने के अधिकारी होंगे। तद्नुसार बिन्दु सं०-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश
4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह ओ.सी. /सी.सी. सहित 30.06.2020 तक, यदि कोई देय धनराशि बकाया है, तो उसे प्राप्त कर कब्जा देना सुनिश्चित करें और नियमानुसार स्टाम्पशुल्क प्राप्त कर रजिस्ट्री कराना सुनिश्चित करें। 2... विपक्षी, शिकायतकर्तागण को ग्रेस पीरियड के साथ धनराशि का ब्याज रेरा आने के पूर्व अनुबन्ध के अनुसार देय होगा एवं रेरा आने के उपरान्त ae 4 "स्टेट बैंक ऑफ इंडिया" द्वारा निर्धारित McLR+i प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर पर देय होगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्तागण को वापस की जाये। विपक्षी अनुतोष संख्या 4 व 2 देने में असफल रहता है, तो दिनांक 30. 06.2020 के पश्चात् शिकायतकर्तागण द्वारा समस्त जमा धनराशि, जमा करने की तिथि से भुगतान की तिथि तक mMcLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से 45 दिनों में अदा करना सुनिश्चित करें। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि रेरा अधिनियम 20i6 के धारा 2 (za)(i) के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है कि यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस ओदश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी | इस आदेश का उल्लघंन उ0प्र/भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये |
यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेंगे | दिनांक&॥/०| / 202७ ९०००“ 2०१०" (कल्पना मिश्रा) (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण