Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Mithun Kumar Soni v. Floral Realcon Pvt Ltd
Complaint No. NCR144/07/0114/2019
- Decision date
- 2026-06-12
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 ,/“ 40 ,//63 सपठित नियम-24 20-शिकायत WAM:—NCR44/07/04/209 मिथुन कुमार सोनी बनाम फ्लोरल रियलकॉन प्राइवेट लिमिटेड एलटीडी आदेश-पत्र दिनांक: 2.06.2026 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो कॉन््फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री सुधीर माधुर उपस्थित हुए। विपक्षी अनुपस्थित। सुना गया एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया। प्रश्नगत शकायत में माननीय Gie-o द्वारा नियमानुसार सुनवाई के उपरान्त दिनांक 47.02.2020 को निम्नवत आदेश पारित किये गये हैं:- 4. प्रतिवादी को आदेशित किया जाता है कि परियोजना में निर्माण कार्य पूर्ण करते हुए सम्बन्धित प्राधिकरण से occupation certificate WI करके शिकायतकर्तागण को आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के अंत तक बुक की गई यूनिट का कब्जा (physical possession) देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराये।
2. प्रतिवादी को यह भी आदेशित किया जाता है कि शिकायतकर्ता व प्रमोटर के बीच हुये हस्ताक्षरित अनुबन्ध पत्र / Builders Buyers Agreement (BBA) के अनुसार विलम्बित अवधि / delayed period के सम्बंध में (क) ओ.सी/सी.सी प्राप्त होने अथवा इलैक्ट्रिकल सर्टिफिकेट, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट, ward सर्टिफिकेट, लिफ्ट इन्स्टालेशन सर्टिफिकेट सहित ओ.सी./सी.सी. के लिए आवेदन दिये जाने के तिथि के 8 दिन बाद अथवा (ख) कब्जा ऑफर किये जाने. जो भी बाद में हो तक की अवधि पर MCLRH प्रतिशत की दर से ब्याज अदा करना सुनिश्चित करे। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। साथ ही जिस अवधि में me शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट पर कब्जा ग्रहण किया गया है, उस अवधि में ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। 3, यह भी स्पष्ट किया जाता है कि रेरा अधिनियम 20I6 की धारा 2 («०)0) के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है कि यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। 4. प्रमोटर/प्रतिवादी के पास प्रश्नगत परियोजना के सम्बंध में Electrical Safety Certificate] Fire Certificate] Lift Installation Certificate & Structural Engineer Certifieate उपलब्ध है, तो ऐसी दशा में यूनिट के सम्बंध में शिकायतकर्ता के पक्ष में रजिस्ट्र्ड सेल डीड,//लीज डीड / सब लीज डीड का कियांवयन आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के अंत तक कराया जाना सुनिश्चित करे।
5. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस ओदश में प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। प्रतिवादी प्रमोटर द्वारा आदेश का अनुपालन न किये जाने पर शिकायतकर्ता / आवंटी को यह अधिकार: होगा कि उ०.्र०. WAIT विनियामक प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सके | इस आदेश का उल्लघंन उठ्प्र०्भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, ooi6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 47.02.2020 का अनुपालन नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-38/40,/63 के अन्तर्गत उक्त आदेश के क्रियान्वयन हेतु प्रार्थना-पत्र दाखिल किया गया। उपरोक्त शिकायत में मा. पीठ-02 द्वारा दिनांक 02.04. 2026 को धारा-63 के अन्तर्गत निम्न आदेश पारित किया गया है किः- अतः उपयुक्त वर्णित तथ्यों एवं समस्त परिस्थितियों के दृष्टिगत पत्रावली नियम 24 में निहित शक्तियों के अन्तर्गत यूनिट के भौतिक कब्जे की कार्यवाही हेतु मा. न्यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष सुनवाई हेतु, दिनांक 42.08.2026 को संदर्भित की जाती है। सचिव, उ.प्र. रेरा प्रकरण में आदेश, दिनांक 47.02.2020 B प्रस्तर-02 के अनुसार दिनांक 34.05.2026 से पूर्व विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के ब्याज की धनराशि हेतु वसूली प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु नियमानुसार कार्यवाही कर, पत्रावली को सुनवाई की तिथि से पूर्व मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
यदि मा. न्यायनिर्णायक अधिकारी नियम-24 की कार्यवाही के दौरान यह पाते हैं कि विपक्षी / प्रोमोटर द्वारा आदेश अन्तर्गत ARI-34, दिनांक 7.02.2020 का समयबद्ध रूप से अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है, तो ऐसी दशा में मा. न््यायनिर्णायक + अधिकारी प्रकरण को रेरा अधिनियम की धारा-63 की कार्यवाही किये जाने हेतु पीठ को वापस सन्दर्भित कर सकते हैं। अन्तर्गत धारा-38,/40,/63 की निष्पादन की कार्यवाही के दौरान माननीय सम्बन्धित रेरा पीठ द्वारा अपने आदेश का निष्पादन कराते हुए शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया जा सका और न ही शिकायतकर्ता के पक्ष में यूनिट की रजिस्ट्री कराई जा सकी। तदोपरान्त मा. पीठ-02 द्वारा पारित आदेश दिनांक 02.04.2026 के अनुसार पत्रावली नियम-24 की कार्यवाही हेतु इस पीठ को संदर्भित की गई। पत्रावली आज नियम-24 की सुनवाई हेतु इस पीठ के समक्ष प्रथम बार पेश हुई।
विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि वह माननीय रेरा पीठ के आदेश के अनुपालन में कब्जा प्रस्ताव-पत्र वैध ओ.सी./सी.सी. सहित बकाया देयों की मांग सहित (यदि कोई हो तो) शिकायतकर्ता को एक सप्ताह के अन्दर प्रेषित करना सुनिश्चित करें तथा रेरा पोर्टल पर भी अपलोड करना सुनिश्चित करें। शिकायतकर्ता द्वारा बकाया देयों के अदा करने पर विपक्षी शिकायतकर्ता को यूनिट का भौतिक कब्जा उपलब्ध कराते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में आवंटित यूनिट की रजिस्ट्री निष्पादित करना सुनिश्चित करें। शिकायतकर्ता को यदि कोई आपत्ति हो, तो वह अपनी आपत्ति दाखिल कर सकता। यदि विपक्षी द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता ares सिविल प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत प्रार्थना-पत्र दाखिल करें, ताकि शिकायतकर्ता को आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत कार्यवाही करते हुए कब्जा दिलाया जा सके और शिकायतकर्ता के पक्ष में यूनिट की रजिस्ट्री कराई जा सके। पत्रावली अग्रिम सुनवाई हेतु दिनांक 45.07.2026 को पेश हो। आर. पी. सिंह (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण