Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
RBC Financial Services Pvt Ltd v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/06/95971/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
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- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Bench-2 Order passed under Section 34 of the Real Estate (Regulation and Development) Act 2046 Present: Dr. Deepak Swaroop Saxena, Member | No. | Complaint No. | Complainant | Unit No. | Amount deposited as per receipt/evidence on file | Date of allotment | Possession date as per agreement | |---|---|---|---|---|---|---| | 1. | NCRI44/06/9597/2022 [?] | RBC Financial Services Pvt. Ltd. | 874 | Rs. 38,48,909 | 22.03.20i4 | 42 months + 3 months grace period, that is, December 2047 | | 2. | NCRI44/06/95092/2022 [?] | Vikramaditya Singh Pal | 42434.._ 80 [?] | Rs. 39,9,452 | 73.02.20I4 | 42 months + 3 months grace period, that is, November 20॥7 | Versus ATS Realty Pvt. Ltd. Complainant RBC Financial Services Pvt. Ltd., along with 04 other complainants, has filed this complaint against the respondent. The facts and evidence in all these complaints are the same. All these complaints relate to the same project, ATS ALLURE. Therefore they are being disposed of by a single order. The file of complaint no. NCRI44/06/9597/2022, RBC Financial Services Pvt. Ltd., shall be the lead case. The complainants have instituted this complaint against the respondent seeking possession of the unit and interest for the delayed period.
In brief, the lead complainant states that the unit mentioned in the table was booked in the project ATS ALLURE run by the respondent, and the amount mentioned in the table was paid to the respondent against it. The lead complainant says that the project is delayed by more than about 5 years. The respondent was to complete the project and hand over possession of the unit by the date mentioned in the table, but has not done so yet. In support of his statement, the complainant at serial no. 4 has filed the allotment letter and a [?] account showing Rs. 38,48,909 as payable to the respondent. The complainant at serial no. 2 has filed a statement of account showing Rs. 39,97,452 as paid to the respondent. Photocopies of receipts have also been filed.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-2 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थितिः- Slo दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम a संख्या जि पत्रावली पर उपलब्ध | आवंटन की | अनुबंधानुसार कब्जा xo रसीद /साक्ष्य के तिथि दिये जाने की तिथि अनुसार जमा धनराशि रु0 . | एलराबब/069597/2022 आर a a | 874 रु0 38,48,909 / 22.03.20i4 | 42 माह +3 माह फाइनेंशिएल अनुग्रह अवधि अर्थात सर्विसेस प्राणलि0 दिसम्बर 2047 2. | ज़लराबब/0695092022 विक्रमादित्य [ 42434.._ 80 39,9,452/ 73.02.20I4 | 42 माह +3 माह सिंह पाल अनुग्रह अवधि अर्थात नवम्बर 20॥7 बनाम एटीएस रिएलटी प्राएलि0 शिकायतकर्ता आर बी सी फाइनेंशिएल सर्विसेस प्रणलि0 के साथ 04 अन्य शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध परिवाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह सभी शिकायतें एक ही परियोजना ATS ALLURE से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत WA NCRI44/06/9597/2022 आर बी सी फाइनेंशिएल सर्विसेस प्र०णलि0 की पत्रावली अग्रणी वाद रहेगा। शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह परिवाद संस्थित किया गया है। संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE में vat तालिका में अंकित यूनिट बुक कराई गई, जिसके सापेक्ष तालिका में अंकित धनराशि विपक्षी को भुगतान किया गया।
अग्रणी शिकायतकर्ता का कहना है कि परियोजना करीब 5 वर्ष से अधिक विलम्ब है। विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण कर तालिका में अंकित तिथि तक यूनिट का कब्जा दिया जाना था परन्तु अभी तक नहीं दिया गया। शिकायतकर्ता क्रम संख्या 4 द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र, Ric site एकाउंट जिसमें विपक्षी को wo 38,48,909/ तथा शिकायतकर्ता क्रम संख्या 2 द्वारा प्रस्तुत स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट जिसमें विपक्षी को रु0 39,97,452 / भुगतान होना प्रदर्शित है तथा रसीदें की छाया प्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए यह अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाया है कि विपक्षी ने अनुबंधात्मक दायित्व (contractual Obligation) का उल्लंघन किया है जिस कारण इसका निस्तारण किये जाने का क्षेत्राधिकार सिविल कोर्ट का है। इस प्रकार वाद को निरस्त किया जाए। शिकायतकर्ता द्वारा लगाये गये आरोप का निस्तारण करने का क्षेत्राधिकार प्राधिकरण को नहीं है, जिसके समर्थन में हरियाणा अपीलीय न्यायालय चण्ड़ीगण द्वारा अपील Wes /208 समीर महावर बनाम एमजी हाउसिंग wofeo में पारित निर्णय का संदर्भ अंकित किया है। वर्तमान प्रकरण शिकायतकर्ता ने गलत तथ्यों पर विपक्षी को परेशान किये जाने हेतु वाद दायर किया है। शिकायतकर्ता ने समय से धनराशि का भुगतान नहीं किया है। शिकायतकर्ता ने प्राधिकरण के भिन्न-भिन्न पीठों में वाद दायर किया जो निरस्त किया जा चुके हैं। विपक्षी शिकायतकर्ता को समय अवधि के अन्दर यूनिट का कब्जा दिये जाने के लिए बचनबद्ध था परन्तु फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना में निर्माण कार्य बाधित हुआ है। विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या
43029 / 4985 एम.सी मेहता बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया पारित आदेश का संदर्भ अंकित किया गया है। यह कहना गलत है कि विपक्षी की ओर से विलम्ब किया गया है बल्कि शिकायतकर्ता की ओर से समय से धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। यह भी उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया जा चुका है परन्तु शिकायतकर्ता के न आने पर कई अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये परन्तु शिकातकर्ता कब्जा लेने नहीं आया। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में ऑफर ऑफ पजेशन, अनुस्मारक पत्र, स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट एवं अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 की छायाप्रति दाखिल की गयी है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 2. क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या-4 प्रश्न संख्या-4 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई? यह प्रश्न विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से लिखित जवाब में यह उल्लेख किया गया है कि एन.जी. टी, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश व कोविड-49 महामारी के कारण निर्माण कार्य बंद था। विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 43029,//4985 एम.सी मेहता बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया पारित आदेश का संदर्भ अंकित किया गया है। 3—— ey
उक्त के संदर्भ में यह उल्लेख करना आवश्यक है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940,/2047 “बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य“ के निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं WER 40 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- "Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature." उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्राकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में कोविड-49 महामारी के अतिरिक्त अन्य ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई है जिस कारण विपक्षी इस आधार पर लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। कोविड-49 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06. 2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनोक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदनुसार प्रश्न | We निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या-2 प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी?
अग्रणी शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के Sse 4 मध्य आवंटन पत्र दिनांक 22.03.2044 को निष्पादित हुआ। आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 माह तथा 3 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात दिसम्बर 2047 तक प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी का कहना है कि फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना विलम्बित हुई है। विपक्षी का यह भी कथन है कि शिकायतकर्ता ने भिन्न भिन्न पीठों में वाद दायर किया है जो निरस्त हो चुके हैं परन्तु विपक्षी द्वारा इस सम्बंध में पीठ द्वारा पारित आदेश की प्रति दाखिल नहीं की गई है। वहीं दूसरी ओर विपक्षी का यह भी तर्क है कि शिकायतकर्ता को ऑफर आफ पोजेशन दिनांक 44.04.2022 को जारी किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण की ओर से भुगतान की गई धनराशि पर कोई आपत्ति नहीं की गई है। पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन पत्र के अनुसार अग्रणी शिकायतकर्ता को दिसम्बर .2047 तक यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था तथा अन्य उक्त शेष शिकायतकर्तागण को तालिका में अंकित तिथि तक कब्जा प्राप्त होना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। पत्रावली पर उपलब्ध अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 से स्पष्ट है कि परियोजना पूर्ण है और विपक्षी ने दिनांक 44.04.2022 को ऑफर ऑफ पजेशन भी जारी कर दिया है।
इस प्रकार विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में लगभग 5 वर्ष का विलम्ब किया गया है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्तागण विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने के अधिकारी है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील wo 6649-50 ,/2048 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल''में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- 5 ~~ >>. "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to 6 — Ses withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, wife vated द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (fafa और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर o.2(ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home 7 Oo loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी wee 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+L fer की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLRt+H प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश
\. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण को आवंटित यूनिट aye के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर 34 दिसम्बर 2023 तक ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय wry शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2. विपक्षी, अग्रणी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.04.208 से ओ.सी/सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि BO 38,48,909/ पर MCLR+l प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25. 09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो 8 — oo उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। अन्य शिकायतकर्ता के प्रकरण में आवंटन पत्र/अनुबन्ध के अनुरूप vat तालिका में अंकित धनराशि रु0 39,97,452/— पर ब्याज की गणना की जायेगी। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा A(za)iG अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी '/टा7२+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी।
इस आदेश की एक प्रति सम्बन्धित पत्रावली पर रखी जाये। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 206 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। a लात (a 532: *पनीमीननमकल कम Q2O.\2°23 (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण