Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Vinay Dixit v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/06/95660/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- Not recorded
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Bench-2 Order passed under Section 34 of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 20:6 Present: Dr. Deepak Swaroop Saxena, Member | No. | Complaint No. | Complainant | Unit No. | Amount deposited as per receipt on file | Date of allotment | Date of possession | |---|---|---|---|---|---|---| | 1. | NCRI44/06/9533/2022 | Pushpa Sukhija | 5073 | Rs. 32,45,288 | 30.04.208 | 34.03.209 | | 2. | NCRI44/06/95339/2022 | Sunil Arora | 4084 | Rs. 33,97,357 | 02.04.20i4 | 42 months + 3 months grace period, that is, January 2048 | | 3. | NCRI44/06/95309/2022 [?] | Sameer [?] | 03492 | Rs. 29,28,427 | 43.0i.20I5 | 42 months + 3 months grace period, that is, October 2048 | | 4. | NCRI44/06/95660/2022 | Vinay Dixit | 5052 | Rs. 24,89,944 | poze [?] | 34.03.209 | | 5. | NCRI44/06/95204/2022 | Shivang Goy | 5054 | Rs. 3,94,773 | 73.02.20i4 | 42 months + 3 months grace period, that is, November 2047 | Versus ATS Realty Pvt. Ltd. Complainant Pushpa Sukhija, along with 04 other complainants, has filed this complaint against the respondent. The facts and evidence in all these complaints are the same. All these complaints relate to the same project, ATS ALLURE. Therefore they are being disposed of by a single order. The file of Pushpa Sukhija, complaint no. NoRi44/06/9533/2022, shall be the lead case.
The complainants have filed this complaint against the respondent seeking possession of the unit and interest for the delayed period. In brief, the lead complainant states that the units mentioned in the table were booked in the project ATS ALLURE run by the respondent, and the amounts mentioned in the table were paid to the respondent against them. The complainants state that the respondent was to complete the project and hand over possession of the unit by the date mentioned in the table, but this has not been done yet. For this reason the complainants have prayed for possession of the unit and interest for the delayed period. In support of the lead complainant's statement, the allotment letter and a statement of account dated 02.06.2023 have been filed, which show the amount paid of Rs. 32,45,288. In support of the complaint, the remaining complainants have filed photocopies of their allotment letters and [?] account statements in which the amount paid is recorded.
somo भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-2 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 20:6 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थितिः- डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या जले यूनिट न0 | पत्रावली पर उपलब्ध | आवंटन की | कब्जा दिये जाने की xio रसीद के अनुसार तिथि तिथि जमा धनराशि रु0 . | NCRI44/06/9533/2022 पुष्पा सुखीजा | 5073 रु0 32,45,288 / 30.04.208 34.03.209 2. | NCRI44/06/95339/2022 | सुनील अरोडा. 4084 | 0 33,97,357 / 02.04.20i4 | 42 माह +3 माह अनुग्रह अवधि अर्थात जनवरी 2048 3, फलरा44/06/95309/2022 समीर से 03492 रु0 29,28,427 / 43.0i.20I5 | 42 माह + 3 माह अनुग्रह अवधि अर्थात अक्टूबर 2048 4- | NCRI44/06/95660/2022 विनय दीक्षित 5052 GO 24,89,944 / poze 34.03.209 5 | NCRI44/06/95204/2022 शिवांग गोय 5054 रु0 3,94,773/ 73.02.20i4 | 42 माह + 3 माह अनुग्रह अवधि अर्थात नवम्बर 2047 Is if बनाम एटीएस रिएलटी प्राएलि0 शिकायतकर्ता पुष्पा सुखीजा के साथ 04 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह सभी शिकायतें एक ही परियोजना ATS ALLURE से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- NoRi44/06/9533/2022 FT सुखीजा की पत्रावली अग्रणी वाद रहेगा। शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज fear जाने हेतु यह परिवाद संस्थित किया गया है। संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE 4 vad तालिका में अंकित यूनिट बुक कराई गई,
जिसके सापेक्ष तालिका में अंकित धनराशि विपक्षी को भुगतान किया गया। SS शिकायतकर्तागण का कहना है कि विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण कर तालिका में अंकित तिथि तक यूनिट का कब्जा दिया जाना था परन्तु अभी तक नहीं दिया गया, जिस कारण शिकायतकर्तागण द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने की याचना की गई है। अग्रणी शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र, eect ऑफ एकाउंट दिनांक 02.06.2023 में भुगतान की गई धनराशि रु0 32,45,288 प्रदर्शित है व शेष शिकायतकर्तागण द्वारा परिवाद के समर्थन में आवंटन पत्र, Rete aie एकाउंट प्रस्तुत की गई जिसमें भुगतान की गई धनराशि अंकित है, की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए यह अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाया है कि विपक्षी ने अनुबंधात्मक दायित्व (contractual Obligation) का उल्लंघन किया है जिस कारण इसका निस्तारण किये जाने का क्षेत्राधिकार सिविल कोर्ट का है। इस प्रकार वाद को निरस्त किया जाए। शिकायतकर्ता द्वारा लगाये गये आरोप का निस्तारण करने का क्षेत्राधिकार प्राधिकरण को नहीं है, जिसके समर्थन में हरियाणा अपीलीय न्यायालय चण्ड़ीगण द्वारा अपील संख्या6 / 208 समीर महावर बनाम एमजी हाउसिंग प्रा0लि0 में पारित निर्णय का संदर्भ अंकित किया है। वर्तमान परिवाद शिकायतकर्ता ने गलत तथ्यों पर विपक्षी को परेशान किये जाने हेतु दायर किया है। शिकायतकर्ता समय से धनराशि भी भुगतान नहीं किया है। शिकायतकर्ता ने प्राधिकरण के भिन्न-भिन्न पीठों में वाद दायर किया जो निरस्त किया जा चुके हैं। विपक्षी शिकायतकर्ता को समय अवधि के अन्दर यूनिट का कब्जा दिये जाने के लिए बचनबद्ध था परन्तु फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना में निर्माण कार्य बाधित हुआ है। यह कहना गलत है कि विपक्षी की ओर से विलम्ब किया गया है बल्कि शिकायतकर्ता की ओर से समय से धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। यह भी उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया जा चुका है परन्तु शिकायतकर्ता के न आने पर कई अनुस्मारक पत्र प्रेषित किया गया परन्तु शिकातकर्ता कब्जा लेने नहीं आया। 2 आज अब विपक्षी द्वारा अपनी आपत्ति के समर्थन में ऑफर ऑफ पजेशन, अनुस्मारक पत्र, स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट एवं अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 की छायाप्रति दाखिल की गयी है।
उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न प्रश्न विचरित किये जाते हैं :- 4. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 2. क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या-4 यह प्रश्न इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई? यह प्रश्न विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से लिखित जवाब में यह veers किया गया है कि एन.जी. टी, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश व कोविड-49 महामारी के कारण निर्माण कार्य बंद था। उक्त के संदर्भ में यह उल्लेख करना आवश्यक है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940,/ 2047 “बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य“ के निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं we 440 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- "Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature." उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्राकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में कोविड-49 महामारी के अतिरिक्त अन्य ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई है जिस कारण विपक्षी इस आधार पर लाभ पाने 3 —_———_ a
का अधिकारी नहीं है। कोविड-49 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनांक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। AGAR प्रश्न संख्या- निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या-2 प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? अग्रणी शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य आवंटन पत्र दिनांक 30.04.2048 को निष्पादित हुआ। आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा 34.03.2049 तक प्राप्त होना था। विपक्षी का कहना है कि परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है। विपक्षी का यह भी कथन है कि शिकायतकर्ता ने भिन्न भिन्न पीठों में वाद दायर किया है जो निरस्त हो चुका है परन्तु विपक्षी ने इस सम्बंध में पीठ द्वारा पारित आदेश की प्रति दाखिल नहीं की गई है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण की ओर से भुगतान की गई धनराशि पर कोई आपत्ति नहीं की गई है। पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन पत्र के अनुसार अग्रणी शिकायतकर्ता को
दिनांक 34.03.2049 तक यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था तथा अन्य उक्त शेष शिकायतकर्तागण को तालिका में अंकित तिथि तक कब्जा प्राप्त होना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अनुसार यह भी स्पष्ट है कि परियोजना पूर्ण है और विपक्षी को अधिभोग 4 ला जल. प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 को प्राप्त हो चुका है जो पत्रावली पर उपलब्ध है। तत्पश्चात विपक्षी ने अग्रणी शिकायतकर्ता को ऑफर आफ पोजेशन दिनांक 44.04. 2022 को जारी भी किया जा चुका है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 4 वर्षों से अधिक का विलम्ब किया गया है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकयतकर्तागण यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने के अधिकारी है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील to 6649--50,/2048 "'सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 40) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The
Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- ee 5 "Section 8(I)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed
over to him is not unreasonable. " अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि vou रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.0.208 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,पटटा विलेख के प्रारूप के wea 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of १०६४0 परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(8) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में ada हेतु प्राविधानित है कि:- ''The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal 6 a कछ- Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I fara की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(29)()में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश . विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण को आवंटित यूनिट का कब्जा अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर 34 दिसम्बर 2023 तक ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2. विपक्षी, अग्रणी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.04.209 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि Go 32,45,288 /.पर ॥४८7२+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय 7 ला _चछ>
न होगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में आवंटन पत्र/अनुबन्ध के अनुरूप उक्त तालिका में अंकित कब्जा दिये जाने की तिथि के उपरांत से प्रत्येक शिकायतकर्ता के सम्मुख अंकित धनराशि पर ब्याज की गणना की जायेगी। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा 2(2४)(0)के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। (a Voy wS2b (डा०दीपक स्वरूप WAR) सदस्य उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण