Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Ramesh Kumar v. M/s Uttam Steels & Associates
Complaint No. NCR144/06/95600/2022
- Decision date
- 2026-04-17
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर - पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित - डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या | | यूनिट | जमा धनराशि रु० | face अप अनुबंधानुसार | वांछित अनुतोष सं०0 न0 यूनिट कब्जा दिये एलॉटीज जाने की अरेन्जमेंट तिथि की तिथि |! . | NCRI44/06/95600/2022 | रमेश कुमार | 38-047 | GO 69,44,857/ | 48.40.2042 | 42 माह यूनिट का रजनी कब्जा व व रजनी दिन ane ग्रह | विलम्बित अवधि Pe | का ब्याज के अवधि दिलाये जाने का साथ अर्थात अनुरोध किया जुलाई गया है। 2046 बनाम मैसर्स उत्तम Kies एण्ड एसोशिएट्स (कंसोर्टियम) et शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह शिकायत संस्थित की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना BUILTUPS ZONE | में यूनिट संख्या ३७-047 बुक कराई गई थी जिसके एवज में शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि wo 69,44,857 ,“का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में बिल्ट अप यूनिट एलॉटीज sorte, प्रतिउत्तर व जमा की गयी धनराशि की रसीद की छाया प्रतियां दाखिल की गई है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण
निम्नवत् हैः- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु0) 4 विपक्षी द्वारा जारी रसीद संख्या 23872 48.40.202 रु0 60,000/ रसीद संख्या 23873 48.0.2042 रु0 2,90,000/ रसीद संख्या 25552 44.2.202 रु0 3,56,450 / रसीद संख्या 26928 49.04.2043 रु0 3,56,450/ रसीद संख्या 27202 28.04.2043 “780 6,450 / रसीद संख्या 28747 20.03.2043 रु0 4,6,220/ रसीद संख्या 30240 29.05.2043 रु0 3,30,000/ रसीद संख्या 30242 - — |29,05.2043 wO 2,466 / रसीद संख्या 30502 49.06.2043 BO 23,352/ रसीद संख्या 34329 34.07.2043 BO 3,53,500 / रसीद संख्या 20734 4703.2044 रु0 5,00,000 / रसीद संख्या 43097 34.40.2044 BO 2,49,969 / रसीद संख्या 42742 40.40.2044 रु0 2,00,000 / रसीद संख्या 47663 + |07.09.2045 रु0 30,00,000 / रसीद संख्या 4956 46.04.2046 रु0 8,00,000/ कुल योग : रु0० 69,44,857 /
विपक्षी द्वावा लिखित आपत्ति दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी कम्पनी रेरा अधिनियम की धारा 3 के अन्तर्गत पंजीकृत है। विपक्षी का मुख्य कार्य परियोजना में gas यूनिट का विकास कार्य करने. का है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी से पैसा लेने के लिए दबाव बनाकर प्रयास किया जा रहा है। विपक्षी द्वारा स्वीकृत प्लान के अनुसार परियोजना में विकास कार्य किया जा रहा है। विपक्षी द्वारा परियोजना में वर्ष 2007 में कार्य प्रारम्भ किया गया परन्तु वर्ष 2002 में क्षेत्रीय किसान व आसामाजिक तत्वों द्वारा विकास कार्य में अवरूद्द उत्पन्न किया गया। इसकी सूचना प्रशासन को समय समय पर दिया गया। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि नोटबंदी, किसान आन्दोलन, माननीय उच्च न्यायालय, एनजीटी के आदेश व कोविड-49 महामारी के कारण परियोजना विलम्बित हुई जो विपक्षी के नियत्रंण से बाहर था। विकासकर्ता उक्त कारणों से समय से विकास कार्य नहीं कर सका। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि परियोजना में विकास कार्य पूर्ण न होने के कारण कुछ आवंटियों को उनकी इच्छा के अनुसार अन्य परियोजना में वैकल्पिक यूनिट के लिए शिफ्ट की गयी है। शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट की कुल कीमत रु0. 7,50,886 / है. जिसके एवज में शिकायतकर्ता ने wo 69,40,560,/ का भुगतान किया गया है। विपक्षी ने शिकायतकर्ता को दिसम्बर 2024 तक यूनिट का कब्जा दिये जाने का उल्लेख किया है। अतः विपक्षी ने शिकायतकर्ता को अवशेष देय धनराशि का भुगतान करके दिसम्बर 2024 तक कब्जा लिये जाने के लिए निर्देशित किये जाने तथा वर्तमान प्रकरण को निरस्त किये जाने का अनुरोध किया है।
शिकायतकर्ता द्वारा प्रतिउत्तर दाखिल करते हुए विपक्षी द्वारा दाखिल लिखित जवाब के प्रत्येक WAR का खण्डन करते हुए यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। पीठ-3 में कार्यरत् लॉ-रिसर्चर की आदेश पत्र पर अंकित आख्या दिनांक 45.04.2026 के अनुसार रेरा पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्तमान शिकायत से सम्बन्धित परियोजना रेरा पोर्टल पर उत्तम स्टील्स एवं एशोसियटस (कंसोर्टियम) के नाम पर पंजीकृत है। वर्तमान परियोजना का निर्माण कार्य भी उत्तम स्टील्स एंड एसोशिएटस (कंसोर्टियम) द्वारा किया जा रहा है इसके अतिरिक्त अंसल हाई-टेक टाउनशिप्स लिमिटेड भी कंसोर्टियम का हिस्सा है तथा अंसल हाई-टेक टाउनशिप्स लिमिटेड के विरूद्ध एनसीएलटी में कार्यवाही विचाराधीन होने की कोई जानकारी रेरा पोर्टल पर .उपलब्ध नहीं है। उक्त के अतिरिक्त विपक्षी द्वारा दाखिल लिखित जवाब में भी एनसीएलटी में होने का कोई तर्क नहीं उठाया गया है। ह उभयपक्षों के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये गये :- 4. क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं ? तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 2. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 3. क्या शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न We :- प्रश्न Hea इस तथ्य पर विरचित है कि क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते है तथा कया पक्षकारों के मध्य
रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745-6749 ,// 2024 “मैसर्स न्यूटेक प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स प्रा0 लि0 बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :- ॥54 From the scheme of the Act 206, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on- going projects and future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 20] 6."
उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह we है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित्ष रूप से Rr अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय: क़े आर्ब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा प्रश्ननगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका पंजीकरण संख्या- UPRERAPRIS77I है। अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईंग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तद्नुसार प्रश्न Wea निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने के कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से लिखित जवाब में यह उल्लेख किया गया है कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश, एन.जी.टी के आदेश, नोट बंदी व oifas—t9 महामारी के कारण निर्माण कार्य बाधित रहा। फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि :-
/ प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर Gite में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना जाएगा।” माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 / 4985, “M.C. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04-44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal ‘Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 3029/4985 में पारित आदेश दिनांक 09-2-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “in the affidavit dated 05.2.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
"2. That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.”
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक 04-:-20I9 से दिनांक 44-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक 09-2-20॥9 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04-7:-20:9 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 दिन(66+2) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02-2020 तक Ua 06 बजे से सुबह ०6 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न््यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना -उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 feat 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने क कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त कोविड-49 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया GAT | |
उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी wifas—t9 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 Frente किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 3-: प्रश्न संख्या-3 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? 6 ss शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य अनुबंध पत्र दिनांक 48.40.2042 को निष्पादित हुआ जिसके अनुसार शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा 42 माह तथा oo दिन मे अर्थात जुलाई 20:6 4 प्राप्त होना था परन्तु अभी तक.शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी का कहना है कि फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना विलम्बित हुई है। विपक्षी द्वारा लिखित आपत्ति 4 शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा दिसम्बर 2024 में उल्लेख किया गया है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अनुसार यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता को अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा जुलाई 20i6 4 प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी द्वारा लिखित आपत्ति में शिकायतकर्ता को दिसम्बर 2024 में कब्जा उपलब्ध कराये जाने का उल्लेख किया गया परन्तु यह समय अवधि भी बीत चुकी है और अभी तक शिकायतकर्ता को कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। इससे स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना अभी पूर्ण नहीं है और न ही विपक्षी की ओर से परियोजना पूर्ण होने के सम्बन्ध में ओ.सी / AM की प्रति उपलब्ध करायी गयी है।
उपरोक्त से स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना 09 वर्ष से अधिक विलम्बित है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील to 6649-50 /20:8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयंल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20I6. The Respondent - Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought 7 —————— not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking a " possession. उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी.//सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8(I)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20I6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(0) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal 8 ————ee Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ४८,२+प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी '४टा/२+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(००)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-3 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश ह l. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी/सी.सी सहित यूनिट का कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं।
विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.08.2046 से दिनांक 30.04.2047 तक अनुबंधानुसार ब्याज भुगतान करेगा उसके उपरांत दिनांक 04.05.2047 से ओ.सी / सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि Go 69,44,857/ (रु0 उन्हत्तर लाख चौवालिस हजार आठ सौ सत्तावन) पर McLRH प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 2 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक 9 SS परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का. ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा 2(za)(i) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा AMCLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। | इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा।
विपक्षी द्वार यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। _ स्(+-++>> ——$——— लि, कक + oa ०२-४०: (डा०दीपक स्वरूप ) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण | गौतमबुद्धनगर 0