Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Ankita Sukhija v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/06/95330/2022
- Decision date
- 2026-07-16
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 ,/“ 40 ,/63 सपठित नियम-24 9-शिकायत GIT:—NCR44/06/95330/2022 अंकिता सुखीजा बनाम एटीएस रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड आदेश-पत्र दिनांक: 46.07.2026 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो amit के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री उत्कर्ष शुभम उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री मानेन्द्र कुमार उपस्थित हुए। उभयपक्षों को सुना गया एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा अपनी आपत्ति /जवाब दिनांकित 08.07.2026 दाखिल किया गया है, जिसमें आपत्ति की गई कि विपक्षी द्वारा होल्डिंग चार्ज, मेन्टेनेन्स चार्ज एवं विलम्ब ब्याज की मांग की जा रही है और यह कथन किया गया कि विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है, इसलिए विपक्षी कोई होल्डिंग चार्ज, मेन्टेनेन्स चार्ज एवं विलम्ब ब्याज पाने के अधिकारी नहीं है। विपक्षी द्वारा माननीय रेरा पीठ द्वारा पारित आदेश 24.02.2023 के अनुपालन में आज तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया और न ही शिकायतकर्ता के पक्ष में यूनिट की रजिस्ट्री कराई गई है। अतः ऐसी स्थिति में उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय पट्टा के लिए करार) नियमावली-2048 के नियम-9.2 के अनुसार शिकायतकर्ता, विपक्षी को कोई होल्डिंग चार्ज अदा करने के लिए बाध्य नहीं है। क्योंकि शिकायतकर्ता को अभी तक यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है, इसलिए शिकायतकर्ता पिछला कोई मेन््टेनेन्स विपक्षी को अदा करने के लिए बाध्य नहीं है।
जहाँ तक विलम्ब ब्याज का प्रश्न है, तो माननीय रेरा पीठ-0ए द्वारा पारित आदेश दिनांक 24.02.2023 के अनुसार यदि शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि अदा करने में विलम्ब किया गया है, तो ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता, विपक्षी को विलम्ब ब्याज अदा करने के लिए उत्तरदायी होगा। — विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि वह उपरोकतानुसार नया मांग-पत्र बनाकर शिकायतकर्ता को 45 दिनों के अन्दर प्रेषित करना सुनिश्चित करें। तद्पश्चात शिकायतकर्ता एक माह के अन्दर बकाया धनराशि विपक्षी को अदा करना सुनिश्चित करें | तदनुसार विपक्षी, शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में यूनिट की रजिस्ट्री कराना सुनिश्चित करें। यदि विपक्षी द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत कार्यवाही करते हुए स्वयं इस न्यायालय द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा दिलाया जायेगा और शिकायतकर्ता के पक्ष में यूनिट की रजिस्ट्री कराई जायेगी |पत्रावली अग्रिम सुनवाई हेतु दिनांक 46.40.2026 को पेश हो। आर. पी. सिंह (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण