Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Harpreet Singh v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/06/95313/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
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- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar Status-Disposed
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर सुनवाई पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 206 की धारा-38/40,/63 के अन्तर्गत आदेश शिकायत संख्या : Vara 44 / 06 /9533 / 2022 हरप्रीत सिंह बनाम ए.टी.एस. रियलटी प्रा.लि. प्रश्नगत प्रकरण में पत्रावली आदेशार्थ सुरक्षित की गई थी। कार्यालय seat दिनांक 40.07.2024 के अनुसार वर्तमान प्रकरण में धारा-8 अथवा स्वामहि फण्ड डिस्बर्समेंट अथवा एनसीएलटी से सम्बन्धित कोई प्रपत्र किसी पक्षकार द्वारा रेरा पोर्टल पर या पत्रावली पर उपलब्ध नहीं कराया गया है। पत्रावली के परिशीलन से यह विदित है कि पीठ द्वारा रेश अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत प्रकरण में दिनांक 24.02.2023 को निम्नवत् आदेश पारित किये गये:-- 4... विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि आदेश अपलोड होने की तिथि से 60 दिन में शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट का कब्जा अनुबन्धानुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण करते हुए ओ.सी. /सी.सी. के साथ कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2... विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 02.:2.20i7 से ओ.सी./सी.सी प्राप्त होने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक एवं द्वितीय वेव अप्रैल 202 से जून 2024 तक अर्थात दोनो वेव मिलाकर कुल 09 माह SS 4
परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में आवंटन पत्र,/अनुबंध के अनुरूप उपरोक््तानुसार पृथक-पृथक रूप से विलम्ब ब्याज की गणना की जायेगी । 3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम 2046 के धारा 2(2०)() के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 4... इस आदेश का उल्लंघन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दण्डनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। आदेश की एक-एक प्रति उक्त सम्बन्धित पत्रावली पर रखी जाए। 5. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का क्रियान्वयन करा सकेगें |
विपक्षी ने पीठ द्वारा रैश अधिनियम की onsi के अन्तर्गत पारित आदेश दिनांक 24.02.2023 का अनुपालन नहीं किया जिस कारण शिकायतकर्ता ने प्रश्नगत प्रकरण में आदेश कियान्वयन कराये जाने हेतु प्रार्थना पत्र दिनांक 06.06.2023 को दिया, जिस पर रेरा उप-सचिव द्वारा दिनांक 44.06.2023 को नोटिस जारी करते हुए विपक्षी को दिनांक 30.06.2023 तक उक्त आदेश का अनुपालन कर, अनुपालन आख्था प्रस्तुत करें, परन्तु विपक्षी द्वारा अनुपालन आख्था प्रस्तुत नहीं की गयी | तत्पश्चात् उप-सचिव द्वारा कारण दर्शाओ नोटिस दिनांक 06.07.2023 को जारी करते हुए विपक्षी को निर्देशित किया गया है कि वह दिनांक 25.07.2023 तक उक्त ——F- 2 आदेश का अनुपालन कर, अनुपालन आख्या स्पष्टीकरण के साथ प्रस्तुत करें, परन्तु विपक्षी की ओर से अनुपालन आख्था प्रस्तुत नहीं की गयी। प्राधिकरण द्वारा धारा-38 /40,/63 के अन्तर्गत नोटिस जारी होने के उपरांत पीठ द्वारा दिनांक 44.02.2024 एवं 22.05.2024 को सुनवाई की गयी।
विपक्षी द्वारा अनुपालन आख्या में उल्लिखित किया गया है कि मूल आदेश दिनांक 24.02.2023 के अनुसार विपक्षी को सक्षम प्राधिकरण से अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त कर शिकायतकर्ता को कब्जा तथा दिनांक 34.08.2049 से विलम्बित अवधि के ब्याज की गणना कर विलम्बित अवधि का ब्याज शिकायतकर्ता को भुगतान किये जाने अथवा विलम्बित अवधि के ब्याज की धनराशि ऑफर ऑफ पजेशन के समय अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित किये जाने का था। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि उनके द्वारा सक्षम प्राधिकरण से अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 3.03.2022 को प्राप्त किया जा चुका है जिसके उपरांत उनके द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 44.04.2022 को कब्जा ऑफर किया गया। शिकायतकर्ता स्वयं यूनिट के सापेक्ष बकाया धनराशि का भुगतान कर कब्जा लेने नहीं आ रहे है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को बकाया धनराशि का भुगतान कर यूनिट का कब्जा लिये जाने के लिए निर्देशित करने तथा धारा-63 के अन्तर्गत अर्थदण्ड अधिरोपित न किये जाने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता द्वारा लिखित बहस दाखिल की गयी है जिसमें उल्लिखित किया गया है कि Ge अनुबंध के WAR 7.2 के अनुसार कब्जा 28.40.20i8 तक उपलब्ध कराया जाना था। विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराये जाने में 264 दिन का विलम्ब किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा धारा-63 के अन्तर्गत विलम्बित अवधि के ब्याज हेतु वसूली प्रमाण पत्र जारी किये जाने का अनुरोध किया गया है । उपरोक्त से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य पत्रावली पर प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो कि विपक्षी ने पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 24. 02.2023 का निर्धारित अवधि में अनुपालन कर दिया हो। en 3
भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20:6 का मुख्य उद्देश्य यह है कि भू-सम्पदा सेक्टर में उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण किया जाए तथा विवादों का शीघ्र निस्तारण किया जाए। इस उददेश्य की पूर्ति हेतु प्राधिकरण को रेरा अधिनियम के अन्तर्गत दायित्व तथा शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं। धारा-34(8) भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20:6 4 प्राधिकरण के कृत्यों का उल्लेख किया गया है। धारा-34(8) में निम्नलिखित प्राविधान है:- "34(g). to ensure compliance of its regulations or orders or directions made in exercise of its powers under this Act;" धारा-38 भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 के प्राविधान के अनुसार प्राधिकरण को यह अधिकार दिया गया है कि प्रमोटर द्वारा उस पर डाली गयी बाध्यताओं का उल्लंघन किया जाता है, तो प्राधिकरण इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों एवं विनियमों के अधीन dared या ब्याज अधिरोपित कर सकता है| धारा-38 रेरा अधिनियम निम्नवत है:- "38. (२) The Authority shall have powers to impose penalty or interest, in regard to any contravention of obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents, under this Act or the rules and the regulations made thereunder. (2) The Authority shall be guided by the principles of natural Justice and, subject to the other provisions of this Act and the rules made thereunder, the Authority shall have powers to regulate its own procedure. (3) Where an ‘issue is raised relating to agreement, action, omission, practice or procedure that—
(a) has an appreciable prevention, restriction or distortion of competition in connection with the development of a real estate project; or (b) has effect of market power of monopoly situation being abused for affecting interest of allottees adversely, then the Authority, may suo motu, make reference in respect of such issue to the Competition Commission of India." रेरा अधिनियम की धारा-40 निम्नवत है:-- 40. (7) If a promoter or an allottee or a real estate agent, as the case may be, fails to pay any interest or penalty or compensation imposed on him, by the adjudicating officer or the Regulatory Authority or the Appellate A uthority, as the case may be, under this Act or the rules and 4 Ss regualtions made thereunder, it shall be recoverable from such promoter or allottee or real estate agent, in such manner as may be prescribed as an arrears of land revenue, : (2) If any adjudicating officer or the Regulatory Authority or the Appellate Tribunal, as the case may be, issues any order or directs any person to do any act, or refrain from doing any act, which it is empowered to do under this Act or the rules or regulations made thereunder, then in case of failure by any person to comply with such order or direction, the same shall be enforced, in such manner as may be prescribed.
धारा-63 भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 में प्राधिकरण को यह अधिकार दिया गया है कि अगर प्रमोटर प्राधिकरण के आदेश का अनुपालन करने में असमर्थ रहता है, तो प्राधिकरण प्रोमोटर के विरूद्ध प्रमोटर की भू-सम्पदा परियोजना की अनुमानित लागत का 5 प्रतिशत तक पैनाल्टी लगा सकता है। धारा-63 निम्नवत है:-- “63. If any promoter, who fails to comply with, or contravenes any of the orders or directions of the Authority, he shall be liable to a penalty for every day during which such default continues, which may cumulatively extend up to five per cent., of the estimated cost of the real estate project as determined by the Authority.” यहाँ यह उल्लेखनीय है कि धारा-40 भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 206 के अध्याय-5 के अन्तर्गत आता है, जो कि भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण से सम्बन्धित है तथा धारा-63 भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 206 के अध्याय-8 के अन्तर्गत आता है जोकि अपराध, शास्तियाँ और न्यायनिर्णयन से सम्बन्धित है। उपरोक्त प्राविधानों से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम के अन्तर्गत प्राधिकरण को यह अधिकार दिया गया है कि प्राधिकरण प्रमोटर द्वारा आदेशों का अनुपालन न करने पर धारा-40 के अन्तर्गत अपने आदेशों का कियान्वयन कराए तथा धारा-63 के अन्तर्गत प्रमोटर पर अर्थदण्ड लगाए। प्राधिकरण दोनों कार्यवाही एक साथ कर सकता है। उपरोक्त विश्लेषण व तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी ने पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 24.02.2023 के क्रम संख्या “4 व 2” का अनुपालन नहीं किया है। ae
अतः सचिव रेरा को निर्देशित किया जाता है कि भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-38 /40/63 के अन्तर्गत पीठ द्वारा दिनांक 24.02. 2023 को धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश के क्रम संख्या “2” के अनुसार जमा धनराशि पर विलम्बित अवधि का ब्याज हेतु वसूली प्रमाण पत्र जारी करना सुनिश्चित करें। विपक्षी द्वारा आदेश का अनुपालन न किये जाने के कारण भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 20.6 की धारा-63 के अन्तर्गत यथोचित अर्थदण्ड अधिरोपित किये जाने हेतु पत्रावली प्राधिकरण के समक्ष पेश की जाए। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। YS. 07-2824 (Slo दीपक स्वरूप WRIT) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर