Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Prithipal Singh Sikka v. Ats Homes Private Limited
Complaint No. NCR144/06/76574/2021
- Decision date
- 2026-02-25
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar Status-Disposed
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 /40/63 सपठित नियम-24 3-शिकायत WeIT—NCRI44/06/76574/202 पृथीपाल सिंह सिक्का बनाम एटीएस होम्स प्राइवेट लिमिटेड आदेश-पत्र दिनांक: 24.02.2026 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री प्रांजल मिश्रा उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री मानेन्द्र कुमार उपस्थित हुए एवं विपक्षी / कम्पनी के डायरेक्टर श्री रमेश कुमार उपस्थित हुए। पक्षकारों को सुना गया एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा बताया गया कि आज तक विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही रजिस्ट्री निष्पादित कराई गई है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में बुक की गई यूनिट का कब्जा उपलब्ध न कराये जाने एवं रजिस्ट्री न कराये जाने के कारण शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं रजिस्ट्री हेतु अपनी शिकायत योजित की गई, जिसमें माननीय पीठ-02 द्वारा नियमानुसार सुनवाई के उपरान्त दिनांक 44.02.2022 को निम्नवत आदेश पारित किये गये हैं:- विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता के यूनिट की समस्त Chest को आवंटन पत्र/अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 30.06.2022 तक tee PRT हेतु चारों प्रमाण-पत्र अथवा ओ.सी.//सी. सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और 2g ACT शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें।
विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 04.07.2020 से ओ.सी /सी.सी प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो, की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+H प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि देय मं धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जाये। अन्य शिकायतकर्ता के प्रकरण में अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी। alfas—t9 की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु देश में हुए लॉकडाउन एवं फोर्स मैज्योर को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जाएगी। 3. विपक्षी का निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम 206 के धारा 2(8)0) के अन्तर्गत ब्याज को परिभाषित किया गया है कि रेरा लागू होने के बाद यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित ब्याज दर ध८टा,२+ प्रतिशत है। 4. विपक्षी उपरोक्तानुसार कब्जा ऑफर पत्र जारी करना सुनिश्चित करे। 5. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस ओदश में प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी | इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा।
विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 44.02.2022 का अनुपालन नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-38,/40,/63 के अन्तर्गत vat आदेश के क्रियान्वयन हेतु प्रार्थना-पत्र दाखिल किया गया। उपरोक्त शिकायत में मा. पीठ-0॥ द्वारा दिनांक t0.0. 2023 को धारा-63 के अन्तर्गत निम्न आदेश पारित किया गया है कि:- अतः समस्त तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए सचिव, रेरा को निर्देशित किया जाता है कि प्रश्नगत प्रकरण में पीठ द्वारा पूर्व में धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश दिनांक 44.02.2022 के प्रस्तर संख्या-2 के अनुसार विलम्बित अवधि के ब्याज का वसूली प्रमाण पत्र जारी करना सुनिश्चित करें। विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 44.02.2022 का अनुपालन न किये जाने के कारण रेरा अधिनियम, 20i6 की धारा 63 के अन्तर्गत यथोचित अर्थदण्ड अधिरोपित किये जाने हेतु जी प्राधिकरण के समक्ष पेश की जाए। तदोपरान्त अन्तर्गत धारा-38/40,/63 के कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता को ¢ का कब्जा उपलब्ध न कराये जाने एवं रजिस्ट्री निष्पादित न कराये जाने के कारण Sei महोदय, रेरा द्वारा पारित कार्यालय आदेश दिनांक 34.07.2024 के अनुसार पत्रावली नियम-24 की कार्यवाही हेतु इस पीठ को संदर्भित की गई। विपक्षी द्वारा अपना जवाब दाखिल किया गया है और उसमें यह कहा गया है कि उसको ओ.सी. /सी.सी प्राप्त नहीं है और वह शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं करा सकता है। -
इस पीठ द्वारा विपक्षी को बार-बार आदेशित किये जाने के बावजूद भी ओ.सी. >सी.सी. सहित शिकायतकर्ता को कब्जा प्रस्ताव-पत्र नहीं भेजा गया है और न ही शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया गया और न ही यूनिट की रजिस्ट्री कराई गई है। यूनिट तैयार नहीं है और परियोजना का ओ.सी. “सीसी. भी प्राप्त नहीं है, जैसा कि विपक्षी के डायरेक्टर द्वारा आज सुनवाई के दौरान कहा गया है। कार्यालय आदेश पत्रांक संख्या-3839 / यू पी. रेरा / प्रशा. / 2025-26 दिनांक 28.08. 2025 के अनुसार यूनिट /इकाई ol gp कर, रिसीवर नियुक्त कर, कब्जा दिलाये जाने हेतु अधिकृत किया गया है, लेकिन नियम-24 की कार्यवाही के अन्तर्गत आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुसार यूनिट को कुर्क कर शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा नहीं दिलाया जा सकता है, क्योंकि यूनिट, परियोजना तैयार नहीं है और विपक्षी के पास ओ.सी./सी.सी. भी प्राप्त नहीं है। विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 44.02.2022 का अनुपालन न करने के कारण विपक्षी पर धारा-63 के अन्तर्गत अर्थदण्ड / पेनल्टी अधिरोपित करने हेतु दिनांक 43.06.2025 को प्राधिकरण को लिखते हुए आदेश की प्रति श्रीमान सचिव, रेरा को प्रेषित की जा चुकी है।
अतः क्योंकि विपक्षी के पास उक्त परियोजना / यूनिट का ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त नहीं है और बिना ate सी.सी. के शिकायतकर्ता को वैधानिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया जा सकता है और रजिस्ट्री नहीं कराई जा सकती है और अब ऐसी स्थिति में विपक्षी के पास ओ.सी./सी.सी. न होने के कारण शिकायतकर्ता को वैधानिक कब्जा नहीं दिलाया जा सकता है। आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अन्तर्गत विपक्षी / डायरेक्टर को सिविल कारागार में निरुद्ध कर आदेश »डिक्री का निष्पादन कराये जाने का प्रावधान है, लेकिन इस सम्बन्ध में उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा सिविल अरेस्ट हेतु कोई अधिकारी /» कर्मचारी / bailiff नियुक्त नहीं है, इसलिए विपक्षी को गिरफ्तार कर सिविल कारागार में भेजे जाने का आदेश भी पारित नहीं किया जा सकता है। अतः ऐसी स्थिति में इस पीठ द्वारा आदेश का निष्पादन कराया जाना संभव नहीं हो पा रहा है। अतः पत्रावली सम्बन्धित पीठ को वापस भेजी जाये। सम्बन्धित पीठ यदि चाहे, तो नियम-24 के प्रावधानों के अन्तर्गत अपने आदेश के यन हेतु पत्रावली प्रधान दीवानी न्यायालय को संदर्भित कर सकती है, ताकि १३) #डायरेक्टर को सिविल कारागार में निरुद्ध कराकर आदेश दिनांक 44.02.2022 का AM कराया जा सके। सम्बन्धित पीठ यदि ओ.सी./सी.सी. के सम्बन्ध में विपक्षी के Reo दण्डात्मक कार्यवाही कर, ओ.सी./सी.सी. उपलब्ध करा देती है, तो सम्बन्धित पीठ पुनः यदि पत्रावली इस पीठ को नियम-24 के अन्तर्गत सन्दर्भित करती है, तो ऐसी दशा में इस पीठ द्वारा नियम-24 के अन्तर्गत कार्यवाही करते हुए कार्यालय आदेश पत्रांक संख्या-8839 / यूपी... रेरा / प्रशा. / 2025-26. दिनांक. 28.08.2028 के अनुसार के
oat / आवंटी को कब्जा उपलब्ध कराये जाने एवं रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने श दिनांक 74.02.2022 के अनुपालन हेतु अग्रिम कार्यवाही की जा सकेगी। अतः पत्रावली नियमानुसार सम्बन्धित पीठ को वापस भेजी जाये। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। ee आर. पी. सिंह (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण