Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Mrs Tajinder Kaur v. PATEL ADVANCE JV Registered Office
Complaint No. NCR144/06/76228/2021
- Decision date
- 2026-03-09
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar Status-Disposed
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 / 40 //“63 सपठित नियम-24 42-Rrprad GeAT:—NCR44/06/76228/202 श्रीमती तजिंदर कौर बनाम पटेल एडवांस जेवी आदेश-पत्र दिनांक: 09.03.2026 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री विनीत कुमार उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री मानेन्द्र कुमार उपस्थित हुए। उभयपक्षों को सुना गया एवं दाखिल जवाब का अवलोकन किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा बताया गया कि आज तक विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही रजिस्ट्री निष्पादित कराई गई है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में बुक की गई यूनिट का कब्जा उपलब्ध न कराये जाने एवं रजिस्ट्री न कराये जाने के कारण शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं रजिस्ट्री हेतु अपनी शिकायत योजित की गई, जिसमें माननीय पीठ-03 द्वारा नियमानुसार सुनवाई के उपरान्त दिनांक 06.04.2022 को निम्नवत आदेश पारित किये गये हैं:- (क) प्रतिवादी परिवादीगण को आवंटित मूल इकाई का अधिपत्य ओ. सी/सी.सी के साथ दिसम्बर 2022 तक उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
प्रतिवादी विलम्बित अवधि के सम्बंध में ब्याज दिनांक 27.03.20:4 से 30.04.2046 अनुबंध / आवंटन पत्र में अंकित ब्याज दर देय होगा तत्पश्चात् दिनांक 04.05.2046 ओ.सी /सी.सी प्राप्त होने या ऑफर ऑफ पोजेशन जो बाद में हो की तिथि तक Sr % की दर से प्रमोटर द्वारा दण्ड ANT / penal interest परिवादनी को भुगतान किया जाएगा। प्रतिवादी द्वारा ब्याज/दण्ड की इस धनराशि को अधिपत्य दिये जाने के समय अंतिम देय धनराशि में समायोजित करते हुये अवशेष बची धनराशि प्रतिवादी द्वारा परिवादनी को भुगतान की जाएगी। F न्यायनिर्णायक अधिकारी a “\ Sa. गौतमदुद्धगगर (ग) परिवादीगण द्वारा यदि कोई धनराशि का भुगतान करना शेष है. तो परिवादनी बकाया धनराशि प्रतिवादी को भुगतान करें। परिवादनी द्वारा जो धनराशि विलम्ब से भुगतान की गयी है तो उस स्थिति में रेरा अधिनियम की धारा 2 Gavi) के अधीन प्रतिवादी विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है परन्तु परिवादनी द्वारा ब्याज MCLR+H% की दर से अधिक देय नहीं होगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरण में आवंटन / अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी। (a) कोविड-49 की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु देश में हुये लॉकडाउन को दृष्टिगत रखते हुये दिनांक 24.03.2020 से दिनांक 30.09. 2020 तक परिवादनी की ओर से समय से भुगतान न किये जाने तथा प्रतिवादी द्वारा परियोजना पूर्ण करने में किये गये विलम्ब के सम्बंध में विलम्ब ब्याज की गणना उक्त अवधि में नहीं की जाएगी। (ड) प्रतिवादी द्वारा परिवादीगण को दिसम्बर 2022 तक इकाई का अधिपत्य न दिये जाने की स्थिति में परिवादनी जमा धनराशि वापसी हेतु रेरा के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने हेतु स्वतंत्र होगा।
इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित Remi के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी | इस आदेश का उल्लंघन उठप्र० भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 06.04.2022 का अनुपालन नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-38,/40,/63 के अन्तर्गत var आदेश के क्रियान्वयन हेतु प्रार्थना-पत्र दाखिल किया गया। उपरोक्त शिकायत में मा. पीठ-02 (पूर्व पीठ-4) द्वारा दिनांक 23.04.2025 को धारा-63 के अन्तर्गत निम्न आदेश पारित किया गया है कि:- अतः उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं समस्त परिस्थितियों के दृष्टिगत पत्रावली नियम 24 में निहित शक्तियों के अन्तर्गत यूनिट के भौतिक कब्जे की कार्यवाही हेतु मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष सुनवाई हेतु, दिनांक 25.04.2025 को संदर्भित की जाती है। सचिव, उ.प्र. रेरा प्रकरण में आदेश, दिनांक 06.04.2022 के प्रस्तर-ख के अनुसार सुनवाई की तिथि दिनांक 25.04.2025 से पूर्व विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के ब्याज करी धनराशि हेतु वसूली प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु नियमानुसार कार्यवाही कर, पत्रावली ese कं सुनवाई की तिथि से पूर्व मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित
यदि मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी नियम 24 की कार्यवाही के दौरान यह पाते हैं कि विपक्षी / प्रोमोटर द्वारा आदेश अन्तर्गत धारा-34. दिनांक 06.04.2022 का समयबद्ध रूप से अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है. तो ऐसी दशा में मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी प्रकरण को रेरा अधिनियम की धारा-63 की कार्यवाही किये जाने हेतु पीठ को वापस सन्दर्भित कर सकते हैं। e- तदोपरान्त अन्तर्गत धारा-38,/40,/63 के कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता को यूनिट का अधिपत्य ओसी. /सी.सी के साथ उपलब्ध न कराने के कारण मा. पीठ-02 (पूर्व पीठ-॥) द्वारा पारित आदेश दिनांक 23.04.2025 के अनुसार पत्रावली नियम-24 की कार्यवाही हेतु इस पीठ को संदर्भित की गई। इस पीठ द्वारा विपक्षी को बार-बार आदेशित किये जाने के बावजूद भी ओ.सी. JOM. सहित शिकायतकर्ता को कब्जा प्रस्ताव-पत्र नहीं भेजा गया है और न ही शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया गया और न ही यूनिट की रजिस्ट्री कराई गई है। यूनिट तैयार नहीं है और परियोजना का ओ.सी./सी.सी. भी प्राप्त नहीं है, जैसा कि विपक्षी द्वारा आज सुनवाई के दौरान कहा गया है। विपक्षी द्वारा माननीय रेरा पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 06.04.2022 का अनुपालन न करने के कारण विपक्षी के विरुद्ध धारा-63 के अन्तर्गत अर्थदण्ड / पेनल्टी अधिरोपित करने हेतु आदेश दिनांक 03.42.2025 पारित करते हुए प्राधिकरण को लिखा गया और आदेश की प्रति श्रीमान सचिव, रेरा को प्रेषित की गई, लेकिन उसके बावजूद भी विपक्षी द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई।
आदेश दिनांक 03.:0.2025 के अनुपालन में रेरा तकनीकी टीम द्वारा उक्त परियोजना का निरीक्षण कर अपनी तकनीकी आख्या दिनांकित 29.4.2025 दाखिल की गई कि शिकायतकर्ता की यूनिट तैयार नहीं और टावर संख्या-ई4 का निर्माण कार्य तथा विकास कार्य बन्द है और उक्त परियोजना का मानचित्र की वैधता भी समाप्त हो चुकी है। ऐसी स्थिति में कार्यालय आदेश पत्रांक संख्या-3839 / यूपी. रेरा / प्रशा. / 2025-26 दिनांक 28.08.2025 के अनुसार यूनिट इकाई को कुर्क कर, रिसीवर नियुक्त कर, कब्जा दिलाये जाने हेतु अधिकृत किया गया है, लेकिन नियम-24 की कार्यवाही के अन्तर्गत आदेश-2॥ सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुसार यूनिट को कुर्क कर शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा नहीं दिलाया जा सकता है, क्योंकि यूनिट/परियोजना तैयार नहीं है और विपक्षी के पास ओ.सी. / सी.सी. भी प्राप्त नहीं है। अतः क्योंकि विपक्षी के पास उक्त परियोजना / यूनिट का ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त नहीं है और बिना ओ.सी. / सी.सी. के शिकायतकर्ता को वैधानिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया जा सकता है और रजिस्ट्री नहीं कराई जा सकती है और अब ऐसी स्थिति में विपक्षी के me ओसी. / सी.सी. न होने के कारण शिकायतकर्ता को वैधानिक कब्जा नहीं दिलाया जा है। आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अन्तर्गत विपक्षी को सिविल ‘seri में निरुद्ध कर आदेश डिक्री का निष्पादन कराये जाने का प्रावधान है, लेकिन इस सम्बन्ध में उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा सिविल अरेस्ट हेतु कोई अधिकारी » कर्मचारी / ७४॥# नियुक्त नहीं है, इसलिए विपक्षी को गिरफ्तार कर सिविल कारागार में भेजे जाने का आदेश भी पारित नहीं किया जा सकता है। अतः ऐसी =,
स्थिति में इस पीठ द्वारा आदेश दिनांक 06.04.2022 का निष्पादन कराया जाना संभव नहीं हो पा रहा है। अतः पत्रावली सम्बन्धित पीठ को वापस भेजी जाये। सम्बन्धित पीठ यदि चाहे, तो नियम-24 के प्रावधानों के अन्तर्गत अपने आदेश के क्रियान्वयन हेतु पत्रावली प्रधान दीवानी न्यायालय को संदर्भित कर सकती है, ताकि विपक्षी »डायरेक्टर को सिविल कारागार में निरुद्ध कराकर आदेश का क्रियान्वयन कराया जा सके। सम्बन्धित पीठ यदि ओ.सी./सी.सी. के सम्बन्ध में विपक्षी के विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही कर, ओ.सी. / सी.सी. उपलब्ध करा देती है, तो सम्बन्धित पीठ पुनः यदि पत्रावली 2 aN पीठ को नियम-24 के अन्तर्गत सन्दर्भित करती है, तो ऐसी दशा में इस पीठ द्वारा me EI 7-24 के अन्तर्गत कार्यवाही करते हुए कार्यालय आदेश vaio संख्या-8839 / यू पी. SY / yen. / 2025-26 दिनांक 28.08.2025 के अनुसार शिकायतकर्ता /आवंटी को कब्जा rar जाने एवं आदेश दिनांक 06.04.2022 के अनुपालन हेतु अग्रिम कार्यवाही की जा सकेगी | अतः पत्रावली नियमानुसार सम्बन्धित पीठ को वापस भेजी जाये। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। —~S Ose Sete == el, ( आर. पी. सिंह — (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण